कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे : अब सिर्फ रफ्तार नहीं, सबसे आधुनिक एक्सप्रेसवे बनेगा

इस एक्सप्रेसवे पर लगाए गए अत्याधुनिक सेंसर और एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे हर गतिविधि पर नजर रखेंगे। ये कैमरे यह समझने में सक्षम होंगे कि कोई वाहन अचानक रुका है, टकराया है या पलट गया है। ट्रैफिक की सामान्य धीमी गति और दुर्घटना के बीच का अंतर भी यह सिस्टम खुद पहचान लेगा।

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कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar17 Jan 2026 06:17 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश का कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे राज्य का सबसे छोटा लेकिन सबसे आधुनिक एक्सप्रेसवे बनने जा रहा है। यह सड़क न केवल यात्रा का समय घटाएगी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक के जरिए यात्रियों की सुरक्षा को भी नई ऊंचाई पर ले जाएगी। इस एक्सप्रेसवे पर किसी भी दुर्घटना की जानकारी अब इंसानों के कॉल पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि स्मार्ट सिस्टम खुद ही खतरे को पहचान कर मदद पहुंचाएगा।

एआई तकनीक से होगी दुर्घटनाओं की पहचान

इस एक्सप्रेसवे पर लगाए गए अत्याधुनिक सेंसर और एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे हर गतिविधि पर नजर रखेंगे। ये कैमरे यह समझने में सक्षम होंगे कि कोई वाहन अचानक रुका है, टकराया है या पलट गया है। ट्रैफिक की सामान्य धीमी गति और दुर्घटना के बीच का अंतर भी यह सिस्टम खुद पहचान लेगा। मशीन लर्निंग के माध्यम से यह तकनीक समय के साथ और अधिक सटीक होती चली जाएगी।

बिना कॉल के पहुंचेगी मदद

जैसे ही किसी असामान्य घटना का पता चलेगा, सिस्टम अपने आप उस स्थान की जानकारी के साथ एनएचएआई के कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देगा। इसके लिए किसी व्यक्ति को फोन करने की जरूरत नहीं होगी। इस तेज प्रक्रिया से आपातकालीन सेवाओं को तुरंत सक्रिय किया जा सकेगा। कंट्रोल रूम को अलर्ट मिलते ही एंबुलेंस और हाईवे पेट्रोलिंग वाहन मौके के लिए रवाना हो जाएंगे। इससे घायलों को दुर्घटना के बाद के सबसे महत्वपूर्ण समय, यानी गोल्डन आवर, में इलाज मिल सकेगा। यह व्यवस्था जान बचाने में बेहद अहम साबित होगी।

24 घंटे स्मार्ट निगरानी

नेशनल हाईवे अथॉरिटी आॅफ इंडिया ने इस एक्सप्रेसवे पर एंट्री ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को आॅटोमैटिक एक्सीडेंट डिटेक्शन सिस्टम से जोड़ा है। इसके तहत दिन-रात एआई और कैमरों की मदद से पूरी सड़क की निगरानी की जाएगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति पर तुरंत कार्रवाई संभव हो सकेगी।

अत्याधुनिक कंट्रोल रूम

उन्नाव और लखनऊ की सीमा के पास एक हाईटेक एटीएमएस कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां से पूरे 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे की निगरानी होगी। यह सिक्स लेन एक्सप्रेसवे पूरी तरह एक्सेस कंट्रोल्ड है, जिसमें न तो कोई चौराहा है और न ही कोई कट। इसमें तीन इंटरचेंज और सीमित एंट्री-एग्जिट गेट बनाए गए हैं।

कम समय में लंबा सफर

सड़क को बेहद समतल बनाने के लिए जीपीएस आधारित मशीन गाइडेंस और लेजर ग्रेडिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके कारण ड्राइविंग के दौरान तेज रफ्तार का अहसास कम होगा। औसतन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से यह सफर, जो पहले दो से तीन घंटे में पूरा होता था, अब लगभग 30 मिनट में संभव हो सकेगा।

आधुनिक सुविधाएं और मजबूत ढांचा

एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की सुविधा के लिए दो रेस्ट एरिया, दो फ्लाईओवर, एक रेलवे ओवरब्रिज, चार बड़े पुल और 25 छोटे पुल बनाए गए हैं। इसके अलावा लगभग 1.47 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में आरएस वॉल का निर्माण किया गया है, जिससे सड़क की मजबूती और सुरक्षा और बढ़ गई है। स्मार्ट कैमरे और सेंसर आधारित सिस्टम पूरे मार्ग को सुरक्षित बनाए रखते हैं। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे आधुनिक तकनीक और बेहतर योजना का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह एक्सप्रेसवे साबित करता है कि नई सड़कों का मकसद सिर्फ दूरी कम करना नहीं, बल्कि हर सफर को सुरक्षित बनाना भी है। तेज, सुरक्षित और स्मार्ट यह एक्सप्रेसवे आने वाले समय में सड़क परिवहन की नई पहचान बनेगा।

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पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा प्लान, शुरू होगा विशेष अभियान

प्रस्तावित योजना के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ एमओयू किए जाएंगे और उन्हें 10 से 15 ग्राम पंचायतें गोद दी जाएंगी, ताकि चिन्हित निर्धन परिवारों के सर्वांगीण विकास पर लगातार, संगठित और परिणाम-आधारित काम हो सके।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Jan 2026 04:32 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश सरकार गरीबी उन्मूलन के मोर्चे पर एक ठोस और व्यावहारिक पहल की तैयारी में है। सरकार प्रदेश को ‘जीरो पावर्टी’ के लक्ष्य की ओर ले जाने के लिए ऐसा अभियान शुरू करने जा रही है, जिसमें विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को सीधे गांवों की जमीनी जरूरतों से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित योजना के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ एमओयू किए जाएंगे और उन्हें 10 से 15 ग्राम पंचायतें गोद दी जाएंगी, ताकि चिन्हित निर्धन परिवारों के सर्वांगीण विकास पर लगातार, संगठित और परिणाम-आधारित काम हो सके। इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत होगी युवा भागीदारी एनएसएस, एनसीसी, एमएसडब्ल्यू समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्र वालंटियर बनकर गांवों में पहुंचेंगे और परिवारों को आजीविका, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार, उद्यमिता और सामाजिक सशक्तिकरण से जोड़ने की जिम्मेदारी संभालेंगे। अभियान की शुरुआत लखनऊ से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगी और सफल मॉडल सामने आने पर इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे उत्तर प्रदेश में लागू किया जाएगा।

निगरानी सिस्टम भी होगा मजबूत

प्रमुख सचिव (नियोजन) और जीरो पावर्टी अभियान के नोडल अधिकारी आलोक कुमार के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में चिन्हित गरीब परिवारों का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। यह सर्वे सिर्फ सूची तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवार की जरूरत, क्षमता और उपलब्ध अवसरों का आकलन कर उनके लिए आजीविका बढ़ाने, स्किल ट्रेनिंग दिलाने, रोजगार के रास्ते खोलने और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली ठोस, परिणाम-आधारित कार्ययोजना बनाई जाएगी। अभियान को जमीन पर असरदार बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में नोडल शिक्षक तैनात किए जाएंगे, जो कार्यक्रमों की निरंतर मॉनिटरिंग करेंगे और गांवों में चल रही गतिविधियों को दिशा व मार्गदर्शन देकर यह सुनिश्चित करेंगे कि योजनाओं का लाभ सही परिवारों तक पहुंचे और बदलाव साफ नजर आए।

युवाओं को मिलेगी आवेदन में सीधी मदद

उत्तर प्रदेश सरकार की रणनीति है कि जीरो पावर्टी परिवारों के लिए माइक्रो-प्लानिंग के जरिए मदद को टारगेटेड और परिणाम-आधारित बनाया जाए। यानी हर परिवार की आर्थिक स्थिति और जरूरतों के मुताबिक स्किलिंग, अप्रेंटिसशिप, प्लेसमेंट लिंकेंज और रोजगार के ठोस अवसर तय किए जाएंगे। साथ ही उत्तर प्रदेश के पात्र युवाओं को आवेदन प्रक्रिया में हर स्तर पर सहयोग मिलेगा, ताकि वे किसी भी सरकारी योजना के लाभ से कागजी उलझनों के कारण वंचित न रहें। सरकार नियमित मेंटोरिंग, प्रगति की ट्रैकिंग और फॉलो-अप पर भी खास जोर देगी, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सभी योग्य लाभार्थियों तक योजनाओं का 100 प्रतिशत कवरेज पहुंचे और परिवार सचमुच गरीबी के दायरे से बाहर निकल सकें।

डीएम स्तर पर होगा एमओयू

उत्तर प्रदेश सरकार इस अभियान को कागजी औपचारिकता में सिमटने नहीं देना चाहती, इसलिए जिला प्रशासन और शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत और जवाबदेह समन्वय तंत्र खड़ा किया जाएगा। योजना के तहत जिलाधिकारी स्तर पर एमओयू किए जाएंगे, ताकि जिम्मेदारियां तय हों और काम तय समयसीमा में जमीन पर उतर सके। इसके साथ ही हर तीन महीने त्रैमासिक समीक्षा बैठकें आयोजित कर प्रगति की वास्तविक रिपोर्ट ली जाएगी। इन बैठकों में लक्ष्य बनाम उपलब्धि का आकलन होगा और जहां कमी दिखेगी, वहां तुरंत सुधारात्मक कदम तय कर रणनीति को और प्रभावी बनाया जाएगा। UP News

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वाराणसी के मणिकर्णिका घाट मूर्तियों को तोड़ने के आरोप पर सीएम योगी ने दिया जवाब

इस विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी पहुंचे और उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट किया कि यह जानकारी भ्रामक और झूठी है।

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मणिकर्णिका घाट पर तोड़ी गई मूर्तियां
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar17 Jan 2026 04:12 PM
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UP News : वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्विकास कार्य के दौरान ऐतिहासिक चबूतरे और देवी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को नुकसान पहुंचने की तस्वीरें सामने आने के बाद शहर में विवाद उत्पन्न हो गया। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर प्राचीन संरचनाओं और मूर्तियों को तोड़ा जा रहा है।

सीएम योगी ने कहा-जानकारी भ्रामक और झूठी 

इस विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी पहुंचे और उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट किया कि यह जानकारी भ्रामक और झूठी है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर काशी की छवि को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं और टूटे हुए हिस्सों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करके भ्रम फैला रहे हैं। सीएम ने यह भी बताया कि कोई मंदिर या मूर्तियाँ नष्ट नहीं हुई हैं और निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उन्हें पुन: स्थापित किया जाएगा।

शहर के लिए 55,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी

वाराणसी के मेयर, स्थानीय विधायक और काशी विद्वत परिषद ने भी लोगों से अपील की कि वह अफवाहों पर ध्यान न दें। सीएम योगी ने कहा कि पिछले 11 से 11.5 वर्षों में काशी के आध्यात्मिक और भौतिक विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस अवधि में शहर के लिए 55,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, और श्रद्धालुओं की संख्या में भी महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है। योगी ने आगे कहा कि काशी ने देश की अर्थव्यवस्था में लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया है और शहर को अब वैश्विक पहचान मिली है। उन्होंने विपक्ष पर भारत की सांस्कृतिक विरासत का अपमान करने का आरोप भी लगाया।

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