उत्तर प्रदेश सरकार ने इस फैसले को लागू करते हुए प्रदेश के प्रत्येक गाँव में आबादी का सर्वे करके घरौनी देने का काम चल रहा है। मंगलवार को घरौनी कानून को विधानसभा ने भी पास कर दिया है। विधानसभा से पास होने के बाद अब उत्तर प्रदेश में घरौनी कानून विधिवत रूप से लागू हो जाएगा।

UP News : उत्तर प्रदेश सरकार का एक बड़ा फैसला अब कानून बन गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के बड़े फैसले पर उत्तर प्रदेश की विधानसभा ने अपनी मोहर लगा दी है। उत्तर प्रदेश की विधानसभा ने मंगलवार को आबादी विधेयक-2025 को पास कर दिया है। उत्तर प्रदेश आबादी विधेयक-2025 को घरौनी कानून का नाम दिया गया है। उत्तर प्रदेश का यह घरौनी कानून प्रदेश के सभी गाँवों पर लागू होगा। उत्तर प्रदेश के घरौनी कानून से प्रदेश के करोड़ों ग्रामीणों को बड़ा लाभ मिलेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने एक साल पहले यह फैसला किया था कि प्रदेश के गाँवों की आबादी के पक्के दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे। उत्तर प्रदेश सरकार ने यह भी तय किया था कि जिस प्रकार खेती की जमीन के लिए खसरा खतौनी होती है तथा शहरी जमीन के लिए आवंटन-पत्र होता है उसी प्रकार गाँवों में स्थापित ग्रामीणों के घरों के दस्तावेज के रूप में घरौनी (सरकारी रिकार्ड पर दर्ज विवरण) उपलब्ध कराई जाएगी। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस फैसले को लागू करते हुए प्रदेश के प्रत्येक गाँव में आबादी का सर्वे करके घरौनी देने का काम चल रहा है। मंगलवार को घरौनी कानून को विधानसभा ने भी पास कर दिया है। विधानसभा से पास होने के बाद अब उत्तर प्रदेश में घरौनी कानून विधिवत रूप से लागू हो जाएगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने घरौनी कानून के फायदे गिनवाए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि घरौनी कानून के द्वारा प्रदेश के करोड़ों ग्रामीणों का बड़ा भला होने वाला है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में आबादी की भूमि की खरीद, बिक्री और नामांतरण जैसी प्रक्रियाओं को आसान बनाने और मालिकाना हक को सुरक्षित करने के लिए यह कानून महत्वपूर्ण है। अब घरौनी को ही आधिकारिक दस्तावेज माना जाएगा। विरासत, विक्रय या अन्य कारणों से घरौनी में नाम बदलने और सुधार की प्रक्रिया आसान हो गई। इतना ही नहीं, घरौनी में किसी गलती के सुधार, मोबाइल नंबर और पते को अपेडट करने का प्रावधान भी किया गया है। इसमें भारत सरकार की स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन तकनीक से तैयार किए गए ग्रामीण आबादी क्षेत्रों के स्वामित्व अभिलेखों को कानूनी मान्यता देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने यह कदम बढ़ाया है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस कानून के लागू होने से घरौनी अभिलेखों का संरक्षण समय-समय पर नया रिकॉर्ड दर्ज करना और कानूनी रूप से जरूरी प्रबंधन किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि स्वामित्व योजना का उद्देश्य गांवों में सही सर्वे कर लोगों की आवासीय संपत्ति के पक्के कागजात तैयार करना है। इससे ग्रामीण अपनी जमीन और मकान के आधार पर बैंक से लोन और अन्य आर्थिक सुविधाएं ले सकेंगे। इस योजना से भूमि के सही रिकॉर्ड, संपत्ति कर तय करने, जीआईएस नक्शे बनाने और ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं को बेहतर ढंग से तैयार करने में मदद मिलेगी।
उत्तर प्रदेश में घरौनी कानून लागू हो जाने से गाँवों के प्रोपर्टी विवाद बेहद कम हो जाएंगे। घरौनी कानून में में प्रावधान किया गया है कि ग्रामीण आबादी का अभिलेख की घरौनी कहलाएगा, जिसमें स्वामी का नाम-पता, भूखंड का ब्योरा, क्षेत्रफल, रेखाचित्र और स्थानिक जानकारी दर्ज होगी। किसी ग्राम और की सभी घरोनियों का संकलन घरौनी रजिस्टर होगा और एक के अलग आबादी मानचित्र भी तैयार किया जाएगा। सर्वे और अब अभिलेख तैयार करने के लिए सर्वेक्षण व अभिलेख अधिकारियों और अधिसूचना जारी करने की स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है। मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि इस विधेयक के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति विवादों में कमी, अभिलेखों में पारदर्शिता, बेहतर कराधान व्यवस्था और योजनाबद्ध विकास को मजबूती मिलेगी। यह कानून ग्रामीण आबादी क्षेत्रों के लिए ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला कदम साबित होगा। मंत्री ने बताया कि घरौनी बनने के बाद संशोधन के नियम स्पष्ट किए गए।
घरौनी कानून की जानकारी देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन तथा संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस योजना को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच एमओयू एमओयू हो चुका है। प्रदेश के करीब 1,10,344 गांवों को पोजना के अंतर्गत अधिसूचित किया गया। इनमें से गैर-आबाद गांवों को छोडक़र 90,573 गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। 9 मई, 2025 तक करीब एक करोड़ छह लाख से अधिक परौनियां तैयार की गई हैं। इनमें से एक करोड़ एक लाख से अधिक परौनियों का वितरण ग्रामीणों को किया जा चुका है। UP News