इस आयोजन की सबसे अलग बात यह है कि यहां सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि किन्नर समाज की पारंपरिक रिश्तेदारी परंपरा भी पूरी विधि-विधान से निभाई जाती है। किसी को मां तो किसी को बेटी, किसी को भाई तो किसी को बहन रिश्ते उसी तरह तय होते हैं जैसे किसी परिवार में रस्मों के साथ होते हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश के कानपुर में इन दिनों माहौल बिल्कुल बदला-बदला सा है। उत्तर परेश का औद्योगिक शहर कानपुर उत्सव और परंपरा के अनोखे रंग में नजर आ रहा है। कानपुर दक्षिण के अर्रा इलाके में चल रहे अखिल भारतीय मंगल मूर्ति किन्नर कार्यक्रम ने न सिर्फ शहर, बल्कि दूर-दराज तक लोगों का ध्यान खींच लिया है। इस आयोजन में कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक से हजारों की संख्या में किन्नर समाज के लोग पहुंचे हैं, जिससे पूरा क्षेत्र किसी बड़े धार्मिक मेले जैसा जीवंत हो उठा है। रंग-बिरंगे परिधान, पारंपरिक श्रृंगार और भजन-कीर्तन की गूंज के बीच आयोजन स्थल का दृश्य मानो शादी-ब्याह के भव्य समारोह की तरह दिखाई दे रहा है।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में चल रहे इस आयोजन को लेकर काजल किन्नर बताती हैं कि कार्यक्रम करीब 15 दिनों तक जारी रहेगा, जिसमें 14 दिनों तक भव्य गंगा यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा शहर के अलग-अलग इलाकों से होकर गुजरेगी और इसमें 6 से 7 हजार लोगों की भागीदारी की संभावना जताई जा रही है। भजन-कीर्तन, पूजा-पाठ और मंगल प्रार्थनाओं के साथ निकलने वाली इस यात्रा का स्वागत भी खास अंदाज में हो रहा है कहीं फूलों की बारिश, तो कहीं हाथ जोड़कर सम्मान और आशीर्वाद लेने की कतारें दिख रही हैं। इस आयोजन की सबसे अलग बात यह है कि यहां सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि किन्नर समाज की पारंपरिक रिश्तेदारी परंपरा भी पूरी विधि-विधान से निभाई जाती है। किसी को मां तो किसी को बेटी, किसी को भाई तो किसी को बहन रिश्ते उसी तरह तय होते हैं जैसे किसी परिवार में रस्मों के साथ होते हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में हो रहा यह आयोजन किन्नर समाज के लिए सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक पहचान का भी बड़ा मंच बन गया है।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में चल रहे इस आयोजन की खास बात यह है कि यहां आस्था की परंपराएं सिर्फ समाज तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि देश की सुख-शांति और अमन-चैन के लिए भी सामूहिक प्रार्थनाएं की जा रही हैं। आयोजकों का कहना है कि हालिया घटनाओं को देखते हुए पीड़ितों की आत्मिक शांति के लिए विशेष पूजा-अर्चना और मंगल कामनाओं का क्रम तय किया गया है। किन्नर समाज का मानना है कि एकजुट होकर की गई प्रार्थना समाज में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संदेश देती है।
जानकारी के मुताबिक यह आयोजन हर वर्ष होता है, लेकिन आयोजन स्थल हर बार बदलता है। पिछली बार कार्यक्रम राजस्थान में हुआ था और इस बार उत्तर प्रदेश के कानपुर को इसकी मेजबानी मिली है। आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम में सहभागिता के लिए समाज के भीतर तय मानकों का पालन किया जा रहा है। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस-प्रशासन भी सक्रिय है और आयोजन स्थल के आसपास निगरानी बढ़ाई गई है। आयोजन स्थल पर हर तरफ रंग-बिरंगे परिधान, पारंपरिक श्रृंगार और भारी आभूषणों की चमक दिखाई दे रही है। पूरा दृश्य किसी शाही उत्सव जैसा लग रहा है। आयोजकों के अनुसार यह कार्यक्रम उनकी कुलदेवी को समर्पित है, जिसमें देवी-देवताओं की पूजा के जरिए भारतवर्ष की मंगल कामना की जाती है। UP News