मुनव्वर राना : उर्दू अदब का सबसे बड़ा नाम, पढ़िए टॉप 5 शायरी

उनकी भाषा की पकड़ और भावों की सच्चाई का ही असर था कि उनकी रचनाएँ उर्दू तक सीमित नहीं रहीं ,उनका अनुवाद अन्य भाषाओं में भी हुआ और उन्होंने अलग-अलग पाठक वर्गों के बीच अपनी जगह बनाई।

मुनव्वर राना की 5 यादगार शायरी
मुनव्वर राना की 5 यादगार शायरी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar14 Jan 2026 02:07 PM
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Munawwar Rana : उत्तर प्रदेश की मिट्टी से निकले मुनव्वर राना (26 नवंबर 1952–14 जनवरी 2024) उर्दू अदब के ऐसे शायर और साहित्यकार थे, जिनकी शायरी ने आम इंसान की भावनाओं खासतौर पर माँ, घर और रिश्तों को बेहद सादगी के साथ गहरी ताकत दी। वे लंबे समय तक लखनऊ में रहे और वहीं से उनकी साहित्यिक पहचान देश-दुनिया तक फैली। उनके काव्य-संग्रह ‘शाहदाबा’ के लिए उन्हें वर्ष 2014 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो उनके रचनात्मक योगदान की बड़ी स्वीकृति मानी जाती है।

कलकत्ता की पढ़ाई ने दी शायरी को दिशा

मुनव्वर राना का पारिवारिक अनुभव भारत-पाकिस्तान बंटवारे की पीड़ा से भी जुड़ा रहा। उस दौर में उनके कई नजदीकी रिश्तेदार पाकिस्तान चले गए थे, लेकिन उनके पिता ने साम्प्रदायिक तनाव के बीच भी इसी देश में रहना अपना फ़र्ज़ समझा। राना की शुरुआती पढ़ाई कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुई, जिसने उनके व्यक्तित्व और लेखन को शुरुआती दिशा दी। राना ने सिर्फ ग़ज़लें ही नहीं लिखीं, बल्कि संस्मरणों के जरिए भी अपने समय और समाज के अनुभवों को दर्ज किया। उनकी भाषा की पकड़ और भावों की सच्चाई का ही असर था कि उनकी रचनाएँ उर्दू तक सीमित नहीं रहीं ,उनका अनुवाद अन्य भाषाओं में भी हुआ और उन्होंने अलग-अलग पाठक वर्गों के बीच अपनी जगह बनाई।

मुनव्वर राना टॉप 5 शायरी

1 - अब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करो,

तुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो। 

2 - चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है.

मैं ने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है। 

3 - इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है,

माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है। 

4 - लिपट जाता हूँ माँ से और मौसी मुस्कुराती है

मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूँ हिन्दी मुस्कुराती है

5 - इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए,

आप को चेहरे से भी बीमार होना चाहिए। 

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उत्तर प्रदेश के चार जिलों में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग-लॉजिस्टिक्स क्लस्टर को मंजूरी

इन चारों औद्योगिक क्लस्टरों के विकास पर कुल अनुमानित खर्च 274 करोड़ रुपये से अधिक होगा। सभी परियोजनाओं को ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मॉडल के तहत पूरा किया जाएगा। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद एजेंसी द्वारा पांच वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी निभाई जाएगी।

upeda
मैन्युफैक्चरिंग हब
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar14 Jan 2026 01:48 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने मेरठ, संभल, शाहजहांपुर और हरदोई जिलों में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) विकसित करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके साथ ही परियोजनाओं के निर्माण के लिए निजी कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं।

क्लस्टरों के विकास पर कुल अनुमानित खर्च 274 करोड़ रुपये से अधिक

इन चारों औद्योगिक क्लस्टरों के विकास पर कुल अनुमानित खर्च 274 करोड़ रुपये से अधिक होगा। सभी परियोजनाओं को ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मॉडल के तहत पूरा किया जाएगा। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद संबंधित एजेंसी द्वारा पांच वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी निभाई जाएगी। प्रस्तावित आईएमएलसी में उद्योगों और लॉजिस्टिक्स इकाइयों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा। इसमें चौड़ी आंतरिक सड़कें, आरसीसी ड्रेनेज सिस्टम, निर्बाध बिजली आपूर्ति, जलापूर्ति व्यवस्था, स्ट्रीट एवं हाई-मास्ट लाइटिंग, अग्निशमन सुविधाएं, ओवरहेड वाटर टैंक, बोरवेल, प्रवेश द्वार, चारदीवारी और दिशा-सूचक साइनज शामिल होंगे।

जिलेवार अनुमानित लागत

* संभल 97.32 करोड़ रुपये

* मेरठ 70.94 करोड़ रुपये

* हरदोई 69.25 करोड़ रुपये

* शाहजहांपुर 36.87 करोड़ रुपये

हरदोई जिले में विकसित होने वाले क्लस्टर के तहत 30 मीटर तक चौड़ी आंतरिक सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ लगभग 7 किलोमीटर लंबा जलापूर्ति नेटवर्क, तीन ओवरहेड टैंक और चार बोरवेल स्थापित किए जाएंगे। इस परियोजना से कृषि आधारित उद्योगों और लघु उद्यमों को बेहतर भंडारण, परिवहन और वितरण सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इन औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स क्लस्टरों के क्रियान्वयन से न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे, बल्कि क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला भी सुदृढ़ होगी। साथ ही, उत्तर प्रदेश को मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करने में यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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अनुज चौधरी के लिए संभल बना निर्णायक मोड़, कोर्ट के आदेश से बढ़ा दबाव

यह आदेश उस वक्त की घटना से जुड़ा है, जब अनुज चौधरी उत्तर प्रदेश के संभल में सीओ के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे। आरोपों की जड़ 24 नवंबर 2024 की वही घटना बताई जा रही है, जब शाही जामा मस्जिद इलाके में सर्वे के दौरान हालात बिगड़े और देखते ही देखते हिंसा भड़क उठी थी।

अनुज चौधरी
अनुज चौधरी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar14 Jan 2026 10:21 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश के संभल से जुड़ा एक पुराना लेकिन संवेदनशील मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में तैनात अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अनुज चौधरी के खिलाफ संभल की अदालत ने एफआईआर (FIR) दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश उस वक्त की घटना से जुड़ा है, जब अनुज चौधरी उत्तर प्रदेश के संभल में सीओ के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे। आरोपों की जड़ 24 नवंबर 2024 की वही घटना बताई जा रही है, जब शाही जामा मस्जिद इलाके में सर्वे के दौरान हालात बिगड़े और देखते ही देखते हिंसा भड़क उठी थी।

क्या है पूरा मामला?

उत्तर प्रदेश के संभल हिंसा प्रकरण में मामला तब अदालत तक पहुंचा, जब पीड़ित पक्ष ने याचिका दाखिल कर दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान आलम नाम के किशोर को गोली लगी। आलम के पिता यामीन का कहना है कि उनका बेटा जामा मस्जिद इलाके में खाद्य सामग्री/बिस्किट बेचने गया था और उसी दौरान कथित तौर पर पुलिस फायरिंग में घायल हो गया। सुनवाई के बाद अदालत ने अनुज चौधरी सहित अन्य पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दे दिए हैं। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश पुलिस ने साफ संकेत दिए हैं कि अदालत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। संभल के एसएसपी स्तर से यह भी कहा गया है कि फिलहाल एफआईआर दर्ज करने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के तहत कानूनी रणनीति अपनाई जाएगी।

जब संभल में बिगड़े थे हालात

उस दिन उत्तर प्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद इलाके में चल रहे सर्वे के दौरान देखते ही देखते भीड़ बढ़ती चली गई। माहौल कुछ ही देर में तनावपूर्ण हो गया और पथराव की घटनाओं की खबरें सामने आने लगीं। हालात बेकाबू होने पर स्थिति संभालने के लिए पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। इसी अफरा-तफरी के बीच गोली चलने/चलाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हुआ, जो अब अदालत के आदेश के बाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

कौन हैं अनुज चौधरी?

उत्तर प्रदेश पुलिस में अनुज चौधरी की पहचान एक ऐसे अधिकारी के तौर पर रही है, जिनकी चर्चा सिर्फ वर्दी तक सीमित नहीं रही। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के बधेड़ी गांव से ताल्लुक रखने वाले अनुज चौधरी का जन्म 5 अगस्त 1980 को बताया जाता है। खेल जगत से निकली उनकी पहचान तब और मजबूत हुई, जब उन्होंने 2004 एथेंस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और बाद में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हुए। खेल की इसी अनुशासनात्मक पृष्ठभूमि के साथ वे पुलिस सेवा में आए और समय के साथ इंस्पेक्टर से लेकर सीओ जैसी जिम्मेदार भूमिकाओं में रहे। हालिया पदोन्नति के बाद वे एडिशनल एसपी बने और फिलहाल उनकी तैनाती उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में है।

संभल क्यों बना करियर का टर्निंग पॉइंट?

उत्तर प्रदेश के संभल ने अनुज चौधरी को पहचान भी दी और अब उसी पहचान की सबसे कठिन परीक्षा भी ले रहा है। यहीं से उनकी सख्त अफसर वाली छवि मजबूत हुई, प्रशासनिक कार्रवाई और कड़े तेवरों ने उन्हें समर्थकों में लोकप्रिय बनाया। लेकिन यही दौर कुछ बयानों और विवादों के कारण आलोचना का कारण भी बना, जिससे विपक्ष और आलोचकों का निशाना उन पर लगातार बना रहा। अब अदालत के आदेश ने इसी संभल प्रकरण को फिर सामने ला दिया है, और अनुज चौधरी की भूमिका को लेकर सार्वजनिक बहस एक बार फिर तेज होती दिख रही है।

संभल पोस्टिंग में क्यों घिरे अनुज चौधरी?

संभल में तैनाती के दौरान अनुज चौधरी के कुछ बयान उत्तर प्रदेश की सियासत में लंबे समय तक चर्चा का केंद्र बने रहे। विपक्षी दलों और कुछ पूर्व अधिकारियों ने उन पर सेवा-नियमों की मर्यादा तोड़ने और अनावश्यक/अनुचित बयानबाजी के आरोप लगाए। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं ने सार्वजनिक मंचों से उनकी खेल-भूमिका, अनुशासन और “कड़क प्रशासन” वाली कार्यशैली की तारीफ करते हुए उन्हें मजबूत पुलिसिंग का प्रतीक बताया। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में राजनीति और प्रशासन के बीच खड़े इस नाम को लेकर राय हमेशा बंटी हुई नजर आती रही है।

सोशल मीडिया पर मजबूत मौजूदगी

अनुज चौधरी की पहचान आज के दौर के हाई-प्रोफाइल अफसरों जैसी भी है। सोशल मीडिया पर उनकी अच्छी-खासी फैन फॉलोइंग है, जहां वे वर्कआउट, दिनचर्या और धार्मिक स्थलों से जुड़े वीडियो साझा करते रहे हैं। यही वजह है कि उनसे जुड़ी हर घटना तेजी से वायरल भी होती है ।

रामपुर वाला विवाद भी रहा सुर्खियों में

उत्तर प्रदेश के रामपुर में 2023 के दौरान एक ऐसा दृश्य भी सामने आया था, जिसने अनुज चौधरी को अचानक सुर्खियों में ला खड़ा किया था। सपा नेता आजम खान के साथ उनकी बहस का वीडियो वायरल हुआ और देखते ही देखते यह राजनीतिक चर्चाओं का मुद्दा बन गया था। बताया जाता है कि आजम खान समर्थकों के साथ एक शिकायत दर्ज कराने पहुंचे थे, लेकिन मौके पर भीड़ बढ़ने लगी तो अनुज चौधरी ने स्थिति संभालते हुए कहा कि निर्धारित संख्या में ही लोग अंदर जाएंगे। इसी पर टकराव बढ़ा। वीडियो में कथित तौर पर बातचीत के दौरान “राजनीतिक एहसान” जैसी बात उठी, जिस पर अनुज चौधरी ने साफ कहा कि उनकी पहचान अर्जुन पुरस्कार जैसी उपलब्धियों से बनी है, किसी सिफारिश से नहीं। इस घटनाक्रम ने उनकी सख्त और बेबाक अफसर वाली छवि को और मजबूत कर दिया। UP News

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