सपा ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, एसआईआर के दौरान अनियमितताएं की

सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। सपा का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान अनियमितताएं की जा रही हैं।

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अखिलेश यादव
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar13 Jan 2026 02:42 PM
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यूपी न्यूज  चुनाव आयोग  सपा  कार्यप्रणाली  एसआईआर  अनियमितताएं  मतदाता सूची

UP News : उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची (रकबा/रिवीजन) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। सपा का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान अनियमितताएं की जा रही हैं।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर संदेह जताया 

दरअसल, यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी की एक रैली के दौरान एक भाजपा विधायक के बयान का हवाला देते हुए सपा ने दावा किया कि एक ही सप्ताह में 18 हजार से अधिक वोट जोड़े गए हैं। इस बयान को लेकर सपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर संदेह जताया और एसआईआर प्रक्रिया में बेईमानी का आरोप लगाया। सपा के आरोपों पर चुनाव आयोग ने भी एक्स के माध्यम से जवाब दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की आशंका की आवश्यकता नहीं है। आयोग के अनुसार, संबंधित विधानसभा क्षेत्र में एक सप्ताह के भीतर मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए केवल 14,707 फॉर्म-6 ही प्राप्त हुए हैं। इतना ही नहीं, 6 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के प्रकाशन के बाद से अब तक उस विधानसभा में एक भी नया वोट दर्ज नहीं किया गया है।

चुनाव आयोग अपने बचाव में तथ्यों के साथ सामने आया

चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति के बयान मात्र के आधार पर बिना तथ्यात्मक जांच किए आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना अनुचित है। आयोग ने दोहराया कि पूरी प्रक्रिया नियमों और पारदर्शिता के तहत संचालित की जा रही है। फिलहाल, मतदाता सूची को लेकर उठा यह विवाद प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ लेता नजर आ रहा है, जहां एक ओर विपक्ष सवाल उठा रहा है तो वहीं चुनाव आयोग अपने बचाव में तथ्यों के साथ सामने आया है।


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ताजमहल में उर्स को लेकर बढ़ा विवाद, हिंदू महासभा ने एएसआई से की रोक लगाने की मांग

सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में एएसआई स्वयं यह स्वीकार कर चुका है कि मुगलकाल या ब्रिटिश शासन के समय ऐसा कोई लिखित आदेश उपलब्ध नहीं है, जिसके आधार पर ताजमहल में नमाज, उर्स या अन्य धार्मिक अनुष्ठानों की अनुमति दी जा सके।

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उत्तर प्रदेश स्थित ताजमहल
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar13 Jan 2026 01:53 PM
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UP News : आगरा स्थित ताजमहल परिसर में 15 से 17 जनवरी के बीच प्रस्तावित उर्स आयोजन को लेकर विवाद तेज हो गया है। अखिल भारत हिंदू महासभा ने इस आयोजन पर आपत्ति जताते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा और इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि ताजमहल जैसे संरक्षित स्मारक में किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि की अनुमति के लिए कोई वैधानिक या ऐतिहासिक दस्तावेज मौजूद नहीं है। हिंदू महासभा की जिलाध्यक्ष मीरा राठौर के नेतृत्व में कार्यकतार्ओं ने ताजमहल के निकट प्रदर्शन किया। ज्ञापन में दावा किया गया कि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में एएसआई स्वयं यह स्वीकार कर चुका है कि मुगलकाल या ब्रिटिश शासन के समय ऐसा कोई लिखित आदेश उपलब्ध नहीं है, जिसके आधार पर ताजमहल में नमाज, उर्स या अन्य धार्मिक अनुष्ठानों की अनुमति दी जा सके।

पोस्टर और नारों से बिगड़ा माहौल

प्रदर्शन के दौरान संगठन के सदस्यों ने ताजमहल को तेजोमहालय बताते हुए पोस्टर लगाए, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। महासभा का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल स्थानीय लोगों को शुक्रवार की नमाज की सीमित अनुमति दी है, न कि चादरपोशी, कव्वाली या उर्स जैसे आयोजनों की। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि ताजमहल परिसर में ऐसे कार्यक्रम हुए तो वे इसका कड़ा विरोध करेंगे। इस पूरे मामले को लेकर आगरा की अदालत में पहले से ही एक याचिका (वाद संख्या 63/2024) विचाराधीन है, जिसमें उर्स आयोजन पर रोक लगाने की मांग की गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी 2026 को निर्धारित है।

प्रशासन सतर्क, सुरक्षा बढ़ाई गई

उर्स आयोजन और पर्यटकों के लिए तीन दिनों तक प्रवेश नि:शुल्क किए जाने की चचार्ओं के बीच जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। ताजगंज क्षेत्र और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। खुफिया एजेंसियों को भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था संबंधी स्थिति से निपटा जा सके। एएसआई अधिकारियों ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए कहा है कि मामले की गंभीरता से समीक्षा की जाएगी। फिलहाल ताजमहल परिसर और उसके आसपास का वातावरण संवेदनशील बना हुआ है, और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

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उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की उम्मीद तेज, सीतारमण से मिले सुरेश खन्ना

राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जुड़े इन मुद्दों को संसद सत्र से पहले तैयार होने वाले प्री-बजट प्रस्तावों में विचार के लिए रख लिया गया है।

सुरेश खन्ना की दिल्ली में अहम बैठक
सुरेश खन्ना की दिल्ली में अहम बैठक
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Jan 2026 11:22 AM
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UP News : पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए राहत और उम्मीद से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मेरठ में एम्स (AIIMS) की स्थापना और हाईकोर्ट बेंच की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर केंद्र सरकार के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखा है। प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के दौरान आग्रह किया कि इन प्रस्तावों को आगामी केंद्रीय बजट में शामिल कर प्राथमिकता से विचार किया जाए। राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जुड़े इन मुद्दों को संसद सत्र से पहले तैयार होने वाले प्री-बजट प्रस्तावों में विचार के लिए रख लिया गया है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से केंद्र को भेजे गए प्रस्ताव में साफ कहा गया है कि बेहतर इलाज के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मरीजों को अक्सर दिल्ली का रुख करना पड़ता है। ऐसे में अगर मेरठ में एम्स की स्थापना होती है, तो इसका लाभ सिर्फ मेरठ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, बागपत समेत पूरे पश्चिमी यूपी को बड़ी स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी।

इलाज के लिए दिल्ली की मजबूरी खत्म करने की दिशा में कदम

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े मेडिकल संस्थानों की कमी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकार का कहना है कि अगर मेरठ जैसे प्रमुख शहर में एम्स की स्थापना होती है, तो पश्चिमी यूपी को विशेषज्ञ डॉक्टरों, सुपर-स्पेशियलिटी इलाज और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का मजबूत केंद्र मिलेगा। इससे मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली-दौड़ से राहत मिलेगी और उनका समय व खर्च दोनों बचेगा। वहीं, हाईकोर्ट बेंच के मुद्दे पर भी यूपी सरकार ने व्यावहारिक आधार सामने रखे हैं। प्रस्ताव में तर्क दिया गया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की दूरी के चलते पश्चिमी जिलों के वादी-अपीलकर्ताओं को न्याय के लिए लंबी यात्राएं करनी पड़ती हैं, जिससे पैसे के साथ-साथ कामकाज और संसाधनों का भी बड़ा नुकसान होता है। इसी वजह से मेरठ में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने या लखनऊ खंडपीठ के माध्यम से मेरठ सहित पश्चिमी यूपी को संबद्ध करने जैसे विकल्पों पर गंभीरता से फैसला लेने की मांग उठाई गई है।

अन्य परियोजनाओं पर भी सहयोग की अपेक्षा - डॉ. वाजपेयी

डॉ. वाजपेयी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्र से केवल स्वास्थ्य और न्याय के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि मेरठ और पश्चिमी यूपी से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं के लिए भी सहयोग मांगा है। उन्होंने कहा कि इस बार मेरठ से जुड़े प्रस्तावों को लेकर राज्य सरकार ने केंद्र से बजट में विचार का औपचारिक अनुरोध किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर है। राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनभावनाओं को केंद्र तक पहुंचाया गया है। उनके अनुसार, एम्स और हाईकोर्ट बेंच इस क्षेत्र की बुनियादी जरूरतें हैं और उम्मीद है कि आगामी बजट में इन पर सकारात्मक निर्णय सामने आएगा। UP News

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