नए साल में इन 10 मेगा प्रोजेक्ट्स से उत्तर प्रदेश में आएगा बड़ा बदलाव

ये योजनाएं न सिर्फ कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ाएंगी, बल्कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को भी नई मजबूती देंगी। आइए जानते हैं वे 10 प्रमुख परियोजनाएं, जो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल देंगी।

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यूपी में बनने वाली विभिन्न परियोजनाएं
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar01 Jan 2026 03:40 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश विकास की तेज रफ्तार पर आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2026 राज्य के लिए बेहद अहम साबित होने वाला है, क्योंकि इस दौरान कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्ट, ऊर्जा, खेल और टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रोजेक्ट पूरे होने वाले हैं। ये योजनाएं न सिर्फ कनेक्टिविटी और रोजगार बढ़ाएंगी, बल्कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को भी नई मजबूती देंगी। आइए जानते हैं वे 10 प्रमुख परियोजनाएं, जो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल देंगी।

1. यमुना सिटी में इंटरनेशनल फिल्म सिटी

यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र के सेक्टर-21 में प्रस्तावित इंटरनेशनल फिल्म सिटी का पहला चरण 2026 में रफ्तार पकड़ेगा। लगभग 1000 एकड़ में विकसित होने वाली इस परियोजना के अंतर्गत शुरुआती दौर में 230 एकड़ भूमि पर निर्माण शुरू किया जाएगा। यह फिल्म सिटी आधुनिक स्टूडियो, पोस्ट-प्रोडक्शन सुविधाओं और व्यावसायिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र बनेगी, जिससे एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को नया ठिकाना मिलेगा।

2. जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानों की शुरुआत

नोएडा के पास बन रहा जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लगभग तैयार हो चुका है। यहां यात्री सुविधाओं और तकनीकी व्यवस्थाओं का सफल परीक्षण किया जा चुका है। एयरड्रोम लाइसेंस मिलते ही 2026 की शुरुआत में यहां से उड़ान सेवाएं शुरू होने की उम्मीद है। यह एयरपोर्ट उत्तर भारत की हवाई कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा।

3. नोएडा में पहली सेमीकंडक्टर यूनिट

उत्तर प्रदेश टेक्नोलॉजी सेक्टर में एक बड़ी छलांग लगाने जा रहा है। नोएडा में प्रदेश की पहली सेमीकंडक्टर निर्माण इकाई स्थापित की जाएगी। इस प्रोजेक्ट में करीब 3700 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। यहां इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले चिप्स का निर्माण होगा, जिससे स्थानीय उद्योग और रोजगार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

4. गंगा एक्सप्रेसवे का शुभारंभ

मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाला लगभग 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे अपने अंतिम चरण में है। साइनेज और सुरक्षा से जुड़ा काम पूरा होते ही 2026 में इसका उद्घाटन किया जा सकता है। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच यात्रा समय घटकर करीब 8 घंटे रह जाएगा।

5. वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम

काशी में बन रहा अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम 2026 टी-20 विश्व कप से पहले तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। लगभग 452 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह स्टेडियम भगवान शिव की थीम पर आधारित वास्तुकला के लिए जाना जाएगा। दर्शक दीर्घा और फ्लडलाइट्स को भी खास डिजाइन में विकसित किया जा रहा है।

6. बुंदेलखंड बनेगा सौर ऊर्जा का केंद्र

बुंदेलखंड क्षेत्र को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। झांसी, ललितपुर और चित्रकूट में तीन विशाल सोलर पार्क विकसित किए जा रहे हैं। इनके पूरा होने के बाद यह इलाका न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि प्रदेश को भी बिजली आपूर्ति में अहम भूमिका निभाएगा।

7. उत्तर भारत की पहली फिनटेक सिटी

यमुना सिटी में उत्तर भारत की पहली फिनटेक सिटी विकसित की जा रही है। यह परियोजना गुजरात की जीआईएफटी सिटी की तर्ज पर तैयार होगी। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और आने वाले समय में यह क्षेत्र डिजिटल फाइनेंस और टेक्नोलॉजी का बड़ा हब बनेगा।

8. सोनभद्र में अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल पावर यूनिट

सोनभद्र के ओबरा क्षेत्र में 800 मेगावाट क्षमता की दो अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल थर्मल यूनिट स्थापित की जा रही हैं। कोयला आधारित यह परियोजना राज्य की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में मदद करेगी और इसके 2026 के अंत तक उत्पादन शुरू करने की संभावना है।

9. लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे

लखनऊ और कानपुर के बीच बन रहा एक्सप्रेसवे फरवरी 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके चालू होने से दोनों शहरों के बीच सफर महज 40 मिनट में पूरा किया जा सकेगा, जो फिलहाल 2 से 3 घंटे तक का होता है। इससे व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को बड़ा लाभ मिलेगा।

10. लखनऊ को अक सिटी बनाने की पहल

राज्य सरकार लखनऊ को देश की पहली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। नादरगंज क्षेत्र में एक आधुनिक टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिसमें निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। 2026 में इस प्रोजेक्ट को और गति मिलने की उम्मीद है।

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अयोध्या से प्रयागराज माघ मेले जाना हुआ आसान, रोडवेज चलाएगा सीधी बसें

माघ मेले के दौरान दोनों तरफ लगातार बस संचालन होगा, यानी सुविधा शटल जैसी रहेगी और यात्रियों की चिंता कम होगी। खास तौर पर मुख्य स्नान पर्वों और पीक-डेज में बसों की फ्रीक्वेंसी बढ़ाकर भीड़ को संभालने की तैयारी है, ताकि उत्तर प्रदेश की यह आस्था-यात्रा सुरक्षित, सुगम और समयबद्ध बनी रहे।

अयोध्या से प्रयागराज संगम तक सीधी चलेंगी बसें
अयोध्या से प्रयागराज संगम तक सीधी चलेंगी बसें
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar01 Jan 2026 02:29 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में माघ मेले को लेकर यात्रियों की भीड़ हर साल नए रिकॉर्ड बनाती है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज संगम में गंगा स्नान के लिए उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए यूपी रोडवेज (अयोध्या डिपो) ने इस बार पहले ही ट्रैवल मैनेजमेंट का मास्टर प्लान तैयार कर मैदान में उतार दिया है। रोडवेज के मुताबिक अयोध्या–प्रयागराज रूट पर 270 बसें लगाई जा रही हैं, ताकि रामनगरी से संगम नगरी तक का सफर श्रद्धालुओं के लिए आसान बने। माघ मेले के दौरान दोनों तरफ लगातार बस संचालन होगा, यानी सुविधा शटल जैसी रहेगी और यात्रियों की चिंता कम होगी। खास तौर पर मुख्य स्नान पर्वों और पीक-डेज में बसों की फ्रीक्वेंसी बढ़ाकर भीड़ को संभालने की तैयारी है, ताकि उत्तर प्रदेश की यह आस्था-यात्रा सुरक्षित, सुगम और समयबद्ध बनी रहे।

पूर्वांचल के यात्रियों के लिए भी राहत

यह सुविधा केवल अयोध्या तक सीमित नहीं रहने वाली। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल से माघ मेले की ओर बढ़ने वाले श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही को देखते हुए सुल्तानपुर, अंबेडकर नगर समेत आसपास के जिलों से भी रोडवेज बसों का संचालन किया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि यात्रियों को अपने ही जिले से सीधे प्रयागराज के लिए कनेक्शन मिल सकेगा और अयोध्या बस अड्डे पर एक साथ उमड़ने वाली भीड़ का दबाव भी कम होगा। वहीं यूपी रोडवेज ने भीड़ के अनुमान को देखते हुए प्लान को फ्लेक्सिबल रखा है । जरूरत पड़ने पर रिजर्व फ्लीट को भी सड़क पर उतारने की तैयारी है, ताकि पीक-आवर्स में भी आवागमन रुके नहीं और उत्तर प्रदेश की इस आस्था-यात्रा में किसी श्रद्धालु को घंटों कतार में खड़ा न रहना पड़े।

संगम स्नान के बाद रामनगरी में दर्शन

माघ मेले में संगम स्नान के बाद श्रद्धालुओं की एक बड़ी धारा उत्तर प्रदेश की आस्था-राजधानी अयोध्या की ओर लौटती है। संगम से रामनगरी पहुंचकर लोग श्रीराम जन्मभूमि, हनुमानगढ़ी और प्रमुख मठ-मंदिरों में दर्शन-पूजन करते हैं। इसी संभावित भीड़ को देखते हुए अयोध्या शहर के भीतर भी एंट्री-एग्जिट और लोकल मूवमेंट के लिए रूट मैनेजमेंट को पहले से ज्यादा मजबूत किया गया है। यूपी रोडवेज का कहना है कि चारों दिशाओं से बस संचालन को व्यवस्थित तरीके से चलाकर जाम और अव्यवस्था को कम करने की कोशिश होगी। वहीं भीड़ नियंत्रण और बसों के ठहराव/टर्नअराउंड को आसान बनाने के लिए साकेत पेट्रोल पंप के पास अस्थायी बस स्टेशन भी तैयार किया गया है, ताकि मुख्य बस अड्डों पर दबाव घटे और संचालन तेज, सुचारू और यात्री-अनुकूल बना रहे।

रोडवेज अफसर का बयान

अयोध्या परिक्षेत्र के आरएम विमल रंजन के मुताबिक उत्तर प्रदेश में माघ मेले को लेकर हर साल श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहता है और इस बार भी तस्वीर कुछ अलग नहीं है। रोडवेज को अनुमान है कि बड़ी संख्या में यात्री अयोध्या से प्रयागराज संगम के लिए रवाना होंगे और स्नान के बाद रामनगरी लौटकर दर्शन-पूजन करेंगे। इसी संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए अयोध्या–प्रयागराज कॉरिडोर पर 270 बसें तैनात की गई हैं, जो अलग-अलग स्टेशनों/रूट्स से संचालित होंगी ताकि यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति और बसंत पंचमी के दौरान अयोध्या में होने वाले मेलों के चलते शहर में भी अतिरिक्त दबाव बनता है, इसलिए जरूरत के हिसाब से बस संचालन और फ्रीक्वेंसी बढ़ाने की भी तैयारी है।

यात्रियों के लिए अपील

यूपी रोडवेज ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान केवल निर्धारित बस स्टेशनों और अस्थायी बस स्टेशन का ही इस्तेमाल करें, ताकि भीड़ प्रबंधन और बस संचालन दोनों व्यवस्थित रह सकें। रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन द्वारा जारी रूट-गाइडलाइन और दिशा-निर्देशों का पालन करने से यात्रियों को अनावश्यक भटकाव, जाम और देरी से बचाया जा सकेगा।  UP News


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उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला: नक्शा पास कराने की भागदौड़ खत्म

ई व्यवस्था के तहत भू-स्वामी खुद ऑनलाइन आवेदन कर कुछ ही मिनटों में अपने मानचित्र की मंजूरी हासिल कर सकेंगे। इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से की गई है, जहां लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने नए बिल्डिंग बायलॉज के तहत फास्ट-ट्रैक सिस्टम फास्टपास लागू कर दिया है।

उत्तर प्रदेश सरकार की नई डिजिटल सौगात
उत्तर प्रदेश सरकार की नई डिजिटल सौगात
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar01 Jan 2026 11:17 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश से जुड़ी यह खबर हर उत्तर प्रदेश वासी के लिए अति आवश्यक है। उत्तर प्रदेश से जुडी खर उत्तर प्रदेश सरकार ने दी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने नए साल 2026 के मौके पर उत्तर प्रदेश वासियों को बड़ा तौफा दिया है। नए साल 2026 पर उत्तर प्रदेश सरकार ने लोगों को बड़ी सुविधा देते हुए भवन मानचित्र (नक्शा) स्वीकृति की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और तेज बना दिया है। अब घर या दुकान का नक्शा पास कराने के लिए विकास प्राधिकरण के दफ्तरों के चक्कर लगाने की मजबूरी नहीं रहेगी। नई व्यवस्था के तहत भू-स्वामी खुद ऑनलाइन आवेदन कर कुछ ही मिनटों में अपने मानचित्र की मंजूरी हासिल कर सकेंगे। इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से की गई है, जहां लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने नए बिल्डिंग बायलॉज के तहत फास्ट-ट्रैक सिस्टम ‘फास्टपास’ लागू कर दिया है। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, ‘फास्टपास’ के जरिए 100 वर्गमीटर तक के आवासीय और 30 वर्गमीटर तक के व्यावसायिक भवनों के नक्शे अब स्वयं भू-स्वामी ऑनलाइन माध्यम से स्वीकृत करा सकेंगे

map.up.gov.in पर होगा आवेदन

उत्तर प्रदेश सरकार की इस नई डिजिटल व्यवस्था में आवेदकों को map.up.gov.in पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली रखा गया है, ताकि उत्तर प्रदेश के आम नागरिक बिना किसी बिचौलिये, बिना भागदौड़ और बिना अनावश्यक देरी के अपना नक्शा पास करा सकें। आवेदन की शुरुआत पोर्टल पर नाम और मोबाइल नंबर दर्ज कर रजिस्ट्रेशन से होगी। इसके बाद आवेदक अपना लॉगिन आईडी और पासवर्ड बनाकर सिस्टम में प्रवेश करेगा और वहीं से मानचित्र अपलोड कर सकेगा। इतना ही नहीं, पोर्टल पर ही स्वतः गणना के आधार पर देय शुल्क दिख जाएगा, जिसे आवेदक ऑनलाइन भुगतान कर तुरंत प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगा।

भू-स्वामी को देना होगा पूरा विवरण

उत्तर प्रदेश में फास्टपास के जरिए नक्शा स्वीकृत कराने से पहले भू-स्वामी को यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित भूखण्ड का लैंड यूज मास्टर प्लान के अनुरूप हो। यानी नियमों के खिलाफ जाकर अब कोई भी आवेदन आगे नहीं बढ़ पाएगा। आवेदन करते समय भू-स्वामी को पोर्टल पर कुछ जरूरी जानकारियां स्व-प्रमाणित (Self-Verified) करनी होंगी, ताकि मंजूरी की प्रक्रिया तेज भी रहे और पारदर्शी भी। इनमें भूखण्ड की सटीक लोकेशन, आसपास की सड़कों की लंबाई-चौड़ाई, प्रस्तावित भवन की ऊंचाई और कवर्ड एरिया, फ्रंट-साइड-रियर सेटबैक से जुड़ी जानकारी के साथ-साथ प्रवेश-निकास द्वार और पार्किंग व्यवस्था का पूरा ब्योरा शामिल होगा।

मिनटों में मिलेगा प्रमाणित नक्शा और सर्टिफिकेट

उत्तर प्रदेश में लागू इस नई डिजिटल व्यवस्था की खासियत यह है कि जैसे ही भू-स्वामी मानचित्र के साथ पूरा विवरण पोर्टल पर दर्ज करेगा, सिस्टम तय मानकों के आधार पर तुरंत सत्यापन शुरू कर देगा। अगर जानकारी और मानक सही पाए गए, तो कुछ ही मिनटों में नक्शा स्वीकृत हो जाएगा। मंजूरी मिलते ही आवेदक को पोर्टल पर ही ऑटो-जनरेटेड प्रमाणित मानचित्र और स्वीकृति प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट) उपलब्ध करा दिया जाएगा, जिसे डाउनलोड कर सीधे उपयोग किया जा सकेगा। UP News

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