उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को वर्तमान समय के प्रमुख रामभक्तों में क्यों गिना जा रहा है ? क्या अयोध्या का भव्य दीपोत्सव, रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा और चित्रकूट की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देने के प्रयास उनकी रामभक्ति की सबसे बड़ी मिसाल हैं ?

UP News : उत्तर प्रदेश में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या की पूरी दुनिया में खूब चर्चा हो रही है। अयोध्या नगरी में उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन ‘‘दीपोत्सव’’ शुरू हो चुका है । अयोध्या में एक साथ 30 लाख दीपक जल उठे है। इन दीपको के जलते ही अयोध्या का नाम एक बार फिर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो गया है। उत्तर प्रदेश में आयोजित होने वाला वर्तमान ‘‘दीपोत्सव’’ इस श्रृंखला का 10वां आयोजन है। इस दौरान तमाम राजनीतिक विश्लेषक तथा धर्माचार्य दावा कर रहे हैं कि लगातार राम भक्ति की अलख जगाने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वर्तमान समय के सबसे बड़े राम भक्त साबित हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में ही नहीं पूरे देश में इन दिनों भगवान राम के नाम पर इतने बड़े आयोजन करने वाला कोई दूसरा राम भक्त नजर नहीं आ रहा है। हम यहां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राम भक्ति का पूरा लेखा-जोखा धर्माचार्यों की दृष्टि से प्रस्तुत कर रहे हैं।
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रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे।
रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥
22 जनवरी 2024 को जब उत्तर प्रदेश में स्थापित अयोध्या धाम के भव्य मंदिर में प्रभु रामलला के बाल विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा हो रही थी, तब इस पावन श्लोक के साथ करोड़ों सनातनी मानस के कंठ से फूट रहे भावों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वर दे रहे थे। एक संन्यासी का मुख्यमंत्री बनना और फिर अपने आराध्य के 500 वर्षों के वनवास को समाप्त कर उनके भव्य प्राकट्य का सारथी बनना, इतिहास में विरले ही देखने को मिलता है। समकालीन भारत में योगी आदित्यनाथ महज एक प्रशासनिक मुखिया नहीं, बल्कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के सबसे बड़े और अनन्य भक्त के रूप में स्थापित हो चुके हैं, जिन्होंने अपने कर्मों से 'रामकाज' को राष्ट्रकाज में बदल दिया है।
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योगी आदित्यनाथ के व्यक्तित्व को यदि गहराई से देखा जाए, तो उसमें प्रभु श्री राम के जीवन दर्शन की एक अनुपम झलक दिखाई देती है। भगवान राम का जीवन दो छोरों का संतुलन है - एक तरफ वनवास काल में उनकी पूर्ण विरक्ति, तपस्या और सन्यास का भाव है, तो दूसरी तरफ अयोध्या लौटकर प्रजावत्सल राजा और न्यायप्रिय राजकुमार के रूप में उनका वैभवशाली राजधर्म है। ठीक इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जीवन भी इस समन्वय का जीवंत उदाहरण है। अपने वैयक्तिक जीवन में वे एक निस्पृह संन्यासी हैं, जो गोरखनाथ पीठ की कठोर तपस्या और साधना से उपजे हैं। उनका खान-पान अत्यंत सात्विक और परिमित है, उनका रहन-सहन किसी भी प्रकार के आडंबर से दूर पूर्णतः त्यागमय वे निजी जीवन में सन्यास धर्म की मर्यादाओं का अक्षरसः पालन करते हैं। परंतु, जैसे ही वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की आसंदी पर बैठते हैं, वे अपनी इस व्यक्तिगत विरक्ति को लोक-कल्याण के आवरण में बदल देते हैं। सत्ता के शीर्ष पर रहकर भी वे लिप्त नहीं हैं; उनका हर निर्णय राजधर्म के प्रति पूर्ण निष्ठा और जनता के प्रति न्याय को समर्पित होता है। एक त्यागी संन्यासी का ऐसा कुशल प्रशासक बन जाना, राम के वनवासी और राजा वाले स्वरूप के समन्वय की आधुनिक अनुकृति ही है।
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योगी आदित्यनाथ की राम भक्ति केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं है। उन्होंने प्रभु राम की लीलाभूमि अयोध्या और उनकी तपोभूमि चित्रकूट, दोनों को आधुनिक तकनीक और प्राचीन दिव्यता के अनूठे संगम से वैश्विक पटल पर चमका दिया है। यह उनका भगीरथ प्रयास ही है जिसने इतिहास के पन्नों से त्रेतायुग के वैभव को वर्तमान धरातल पर जीवंत कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की परिकल्पना से शुरू हुआ अयोध्या का दीपोत्सव आज एक वैश्विक महोत्सव बन चुका है। सरयू तट के 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक दीपों की अद्भुत जगमगाहट के साथ हर वर्ष नया कीर्तिमान स्थापित करना और भव्य सरयू महाआरती का आयोजन उनकी अगाध श्रद्धा को दर्शाता है। आसमान में गूंजती रामकथा 2,100 स्वदेशी ड्रोन तकनीक को भक्ति का माध्यम बनाते हुए अयोध्या के आकाश में 2,100 स्वदेशी ड्रोन का भव्य शो आयोजित किया गया। आकाश में तैरते इन ड्रोनों ने भगवान राम के जन्म, रावण वध, पुष्पक विमान और भव्य राम दरबार के 15 अलग-अलग प्रसंगों को जीवंत कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। चित्रकूट में भक्ति की अविरल धारा और आधुनिक शो: प्रभु राम के 14 वर्षों के वनवास के साक्षी चित्रकूट धाम को भी योगी आदित्यनाथ ने उपेक्षा के अंधकार से बाहर निकाला है। मंदाकिनी नदी के रामघाट पर लाखों दीपों के प्रज्वलन (दीपदान), भव्य गंगा आरती और लेजर लाइट शो के साथ-साथ अब चित्रकूट के आकाश को भी 500 भव्य ड्रोन शो की दिव्य रोशनी से आलोकित किया जा रहा है।
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामकथा को वैश्विक स्तर पर जोड़ने के लिए एक विराट सांस्कृतिक मंच तैयार किया है। दीपोत्सव के दौरान केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के विभिन्न देशों के कलाकार (जैसे कंबोडिया, थाईलैंड, त्रिनिदाद और टोबैगो आदि) अयोध्या और चित्रकूट की पावन धरती पर आकर रामलीला और रामकथा की प्रस्तुतियां दे रहे हैं। इसके साथ ही, भारत के विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृतियों का एक अद्भुत 'महाकुंभ' यहाँ देखने को मिल रहा है। इस भव्य सांस्कृतिक मंच पर जहाँ कर्नाटक का 'डोल्लू कुनिथा', राजस्थान का 'घूमर' और बिहार का 'झिझिया' रंग बिखेर रहे हैं, वहीं बुंदेलखंड की धरती का गौरव भी पूरी जीवंतता के साथ धड़क रहा है। बुंदेली कलाकारों द्वारा लाठियों की खनक के साथ प्रस्तुत किया जाने वाला शौर्य का प्रतीक 'दीवारी नृत्य' और बुंदेलखंड की सांस्कृतिक पहचान का मुकुटमणि 'राई नृत्य' इस उत्सव की आभा को कई गुना बढ़ा देते हैं। मृदंग की थाप पर थिरकते कलाकारों का यह संगम और भगवान राम की यह सर्वसमावेशी सांस्कृतिक चेतना पूरी तरह से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ही विजन का परिणाम है।
संध्या की पहली लालिमा सरयू के जल में घुल रही है। अयोध्या की राम की पैड़ी से लेकर नदी के घाटों तक दीपों की पंक्तियाँ सज चुकी हैं। देखते ही देखते लाखों दीप एक साथ प्रज्वलित होते हैं और उनकी स्वर्णिम आभा सरयू की लहरों पर थिरकने लगती है। मंदिरों के शिखर प्रकाश से नहा उठते हैं। कहीं शंखनाद है, कहीं घंटियों की गूँज, कहीं रामलीला के मंच पर सजीव होते रामायण के प्रसंग और कहीं जय श्रीराम के उद्घोष से गूँजती गलियाँ। ऐसा लगता है मानो त्रेतायुग की स्मृतियाँ समय की सीमाएँ लाँघकर फिर अयोध्या में उतर आई हों। दीपों की यह ज्योति केवल घरों और घाटों को नहीं, लोगों के मन में बसी रामकथा को भी आलोकित कर रही है। अयोध्या का दीपोत्सव अब केवल दीप जलाने का आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, लोकपरंपरा और रामकथा के विराट उत्सव का रूप ले चुका है। इस आयोजन को भव्य सांस्कृतिक पहचान देने और रामनगरी की परंपराओं को जन-जन तक पहुँचाने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विशेष रुचि और रामभक्ति की प्रेरणा स्पष्ट दिखाई देती है। दीपों की जगमगाहट के साथ रामलीलाएँ, सांस्कृतिक झाँकियाँ, विभिन्न क्षेत्रों की लोककलाएँ, शोभायात्राएँ और सरयू की आरती—सब मिलकर अयोध्या को एक ऐसे सांस्कृतिक मंच में बदल देते हैं, जहाँ आस्था और परंपरा एक साथ जीवंत हो उठती हैं। इन तमाम करणों से यह निष्कर्ष निकलता है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्री राम के आदर्शों, मान्यताओं और मूल्यों को अपने जीवन में उतार लिया है और उन आदर्शों और मूल्यों का अक्षरशः पालन करते हैं निजी जीवन में सन्यास धर्म का पालन करते हुए और मुख्यमंत्री के रूप में राजधर्म का पालन करते हुए ➤ ऐसा तो राम का सबसे बड़ा भक्त ही कर सकता है।
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