नेफ्रोकेयर हेल्थ सर्विसेज IPO 10 दिसंबर से खुलने जा रहा है। बता दें, एशिया की सबसे बड़ी डायलिसिस चेन NephroPlus ब्रांड के तहत भारत और विदेशों में अपनी सेवाएं देती है। इस IPO के जरिए कंपनी ₹871 करोड़ जुटाएगी और नए डायलिसिस क्लिनिक खोलने, कर्ज चुकाने और कॉरपोरेट जरूरतों के लिए फंड का इस्तेमाल करेगी।

एशिया की सबसे बड़ी डायलिसिस सर्विस प्रोवाइडर कंपनी नेफ्रोकेयर हेल्थ सर्विसेज अपना पब्लिक इश्यू 10 दिसंबर से शुरू करने जा रही है। कंपनी, NephroPlus ब्रांड के तहत ऑपरेट करती है और इस IPO के जरिए कुल ₹871.05 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रख रही है। एंकर निवेशक 9 दिसंबर से बोली लगा सकते हैं वहीं इश्यू की क्लोजिंग 12 दिसंबर को होगी। इसके बाद अलॉटमेंट 15 दिसंबर को फाइनल किया जाएगा और शेयर 17 दिसंबर को BSE और NSE पर लिस्ट हो सकते हैं।
इस IPO का प्राइस बैंड ₹438 से ₹460 प्रति शेयर रखा गया है और लॉट साइज 32 शेयर का है। कुल 77 लाख नए शेयर जारी होंगे जो लगभग ₹353.40 करोड़ जुटाएंगे। इसके अलावा, प्रमोटर्स और मौजूदा शेयरहोल्डर्स के 1.13 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल रहेगा, जिसकी वैल्यू ₹517.64 करोड़ है।
नेफ्रोकेयर के प्रमोटर्स में विक्रम वुप्पला, बेसेमर वेंचर पार्टनर्स ट्रस्ट, एडोरस इनवेस्टमेंट होल्डिंग्स, हेल्थकेयर पेरेंट लिमिटेड और इनवेस्टकॉर्प ग्रोथ फंड शामिल हैं। वर्तमान में प्रमोटर्स के पास नेफ्रोप्लस में 78.9% हिस्सेदारी है जबकि बाकी 21.1% शेयर इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन और कुछ पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास हैं।
IPO से मिलने वाले पैसों का इस्तेमाल कंपनी नए डायलिसिस क्लिनिक खोलने, कर्ज चुकाने और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए करेगी। नेफ्रोकेयर ने 2010 में विक्रम वुप्पला और कमल डी. शाह द्वारा नेफ्रोप्लस ब्रांड के तहत शुरुआत की थी। कंपनी डायग्नोसिस से लेकर इलाज, हेमोडायलिसिस, होम और मोबाइल डायलिसिस तक हर तरह की डायलिसिस सेवाएं देती है।
30 सितंबर 2025 तक कंपनी के पास कुल 519 क्लिनिक थे जिनमें फिलीपींस, उज्बेकिस्तान और नेपाल में 51 इंटरनेशनल क्लिनिक शामिल हैं। भारत में नेफ्रोकेयर 21 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों के 288 शहरों में मौजूद है। IPO में 50% हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) के लिए, 35% हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15% हिस्सा नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व किया गया है।
वित्त वर्ष 2025 में नेफ्रोकेयर हेल्थ सर्विसेज का मुनाफा लगभग दोगुना होकर ₹67 करोड़ हो गया जबकि एक साल पहले यह ₹35.1 करोड़ था। रेवेन्यू 33.5% बढ़कर ₹755.8 करोड़ हो गया, जो वित्त वर्ष 2024 में ₹566.2 करोड़ था। अप्रैल-सितंबर 2025 के दौरान कंपनी ने ₹473.5 करोड़ का रेवेन्यू और ₹14.2 करोड़ का मुनाफा कमाया। ICICI सिक्योरिटीज, एंबिट, IIFL कैपिटल सर्विसेज और नोमुरा फाइनेंशियल एडवाइजरी एंड सिक्योरिटीज इस IPO के मर्चेंट बैंकर्स हैं। नेफ्रोकेयर हेल्थ सर्विसेज का IPO न सिर्फ निवेशकों के लिए एक बड़ा अवसर है, बल्कि यह भारतीय हेल्थकेयर सेक्टर में डायलिसिस के क्षेत्र में विस्तार का संकेत भी देता है। अगर आप हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश करना चाहते हैं तो यह IPO आपके लिए देखे जाने लायक है।
(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)