क्रेडिट कार्ड बेचने से पहले 10 बार सोचेगा बैंक, RBI का नया आदेश
RBI: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों की मिस-सेलिंग और एक क्लिक सहमति की प्रक्रिया पर सख्ती करते हुए नए नियम प्रस्तावित किए हैं। अब बैंक ग्राहकों को लोन, क्रेडिट कार्ड या इंश्योरेंस बेचते समय हर प्रोडक्ट के लिए अलग और स्पष्ट मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों की मिस-सेलिंग और डिजिटल एक क्लिक सहमति पर सख्ती करते हुए नए नियम प्रस्तावित किए हैं। अगर आप बैंक से लोन लेते समय बिना आपकी सहमति के क्रेडिट कार्ड, इंश्योरेंस या अन्य प्रोडक्ट्स पा रहे थे तो यह खबर आपके लिए है। RBI का मानना है कि ऐसे तरीके ग्राहक के हित में नहीं हैं। अब हर प्रोडक्ट के लिए अलग से साफ और स्पष्ट मंजूरी लेना जरूरी होगा। इन नए नियमों से बैंकिंग सेल्स की पूरी रणनीति बदलने वाली है और ग्राहकों को सही जानकारी मिलने में मदद मिलेगी।
बैंकों की मिस-सेलिंग पर रोक
अक्सर देखा गया है कि ग्राहक बैंक जाकर लोन या खाता खुलवाता है और उसे बिना पूरी जानकारी के इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड या क्रेडिट कार्ड थमा दिया जाता है। डिजिटल फॉर्म में एक ही I Agree बटन दबाने से कई प्रोडक्ट्स स्वचालित रूप से जुड़ जाते थे। RBI ने इसे ग्राहक हितों के खिलाफ माना और नए नियमों में यह साफ किया कि अब हर प्रोडक्ट के लिए अलग मंजूरी जरूरी होगी।
ग्राहक की प्रोफाइल के अनुसार बिक्री
नए नियमों के अनुसार बैंक को यह जांचना होगा कि जो प्रोडक्ट वह बेच रहा है वह ग्राहक की आय, जरूरत और प्रोफाइल के अनुसार है या नहीं। उदाहरण के लिए, अगर किसी ग्राहक की आय सीमित है और उसे जटिल निवेश योजना दी जाती है तो इसे गलत बिक्री माना जाएगा। इसके अलावा, बैंक को यह स्पष्ट करना होगा कि प्रोडक्ट उनकी खुद की सर्विस है या किसी तीसरे पक्ष की। इससे ग्राहकों को सही और पारदर्शी जानकारी मिलेगी।
एक क्लिक से मंजूरी का दौर खत्म
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अब पहले से टिक किए गए बॉक्स या एक साथ कई शर्तों को स्वीकार करने का तरीका बंद हो जाएगा। हर प्रोडक्ट के लिए अलग-अलग सहमति लेना जरूरी होगा। ग्राहक को स्पष्ट बताया जाएगा कि वह किस प्रोडक्ट के लिए हां कह रहा है और बैंक को इसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा। यह कदम छुपे हुए एग्रीमेंट और उलझे हुए कंसेंट सिस्टम पर रोक लगाएगा।
डार्क पैटर्न पर सख्ती
RBI ने डिजिटल तरीकों को भी निशाना बनाया है जिन्हें डार्क पैटर्न कहा जाता है। ये ऐसे तरीके हैं जो ग्राहक को भ्रमित करते हैं जैसे पहले से टिक किए बॉक्स, दबाव बनाना या आज आखिरी मौका दिखाना। अब बैंकों को अपने ऐप और वेबसाइट की नियमित जांच करनी होगी और ऐसे भ्रामक फीचर्स हटाने होंगे। इससे डिजिटल बैंकिंग अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी।
एजेंट की जिम्मेदारी भी बैंक पर
अक्सर बैंक शाखाओं में मौजूद एजेंट असली बैंक कर्मचारी नहीं होते लेकिन ग्राहक उन्हें कर्मचारी मान लेते हैं। नए नियमों के तहत बैंक को ऐसे थर्ड पार्टी एजेंटों की सूची सार्वजनिक करनी होगी उनकी ट्रेनिंग की जिम्मेदारी बैंक की होगी और एजेंट को स्पष्ट करना होगा कि वह स्थायी बैंक कर्मचारी नहीं है। इसके अलावा, कॉल करने का समय सीमित होगा जिससे अनचाहे कॉल और दबाव वाली बिक्री में कमी आएगी।
गलत बिक्री पर कार्रवाई
अगर किसी बैंक ने प्रोडक्ट गलत तरीके से बेचा या पूरी जानकारी नहीं दी तो ग्राहक को पैसा लौटाना होगा। यदि ग्राहक को आर्थिक नुकसान हुआ है, तो उसकी भरपाई भी करनी पड़ेगी। हर बिक्री के 30 दिनों में ग्राहक से फीडबैक लिया जाएगा और हर छह महीने में पूरी रिपोर्ट तैयार करनी होगी। यह नियम बैंक की जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे।
नियम कब से लागू होंगे?
यह अभी ड्राफ्ट गाइडलाइंस हैं। 4 मार्च 2026 तक सुझाव दिए जा सकते हैं और अंतिम नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे। बैंकों को इससे पहले अपनी नीतियां, डिजिटल सिस्टम और एजेंट व्यवस्था में जरूरी बदलाव करने होंगे।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों की मिस-सेलिंग और डिजिटल एक क्लिक सहमति पर सख्ती करते हुए नए नियम प्रस्तावित किए हैं। अगर आप बैंक से लोन लेते समय बिना आपकी सहमति के क्रेडिट कार्ड, इंश्योरेंस या अन्य प्रोडक्ट्स पा रहे थे तो यह खबर आपके लिए है। RBI का मानना है कि ऐसे तरीके ग्राहक के हित में नहीं हैं। अब हर प्रोडक्ट के लिए अलग से साफ और स्पष्ट मंजूरी लेना जरूरी होगा। इन नए नियमों से बैंकिंग सेल्स की पूरी रणनीति बदलने वाली है और ग्राहकों को सही जानकारी मिलने में मदद मिलेगी।
बैंकों की मिस-सेलिंग पर रोक
अक्सर देखा गया है कि ग्राहक बैंक जाकर लोन या खाता खुलवाता है और उसे बिना पूरी जानकारी के इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड या क्रेडिट कार्ड थमा दिया जाता है। डिजिटल फॉर्म में एक ही I Agree बटन दबाने से कई प्रोडक्ट्स स्वचालित रूप से जुड़ जाते थे। RBI ने इसे ग्राहक हितों के खिलाफ माना और नए नियमों में यह साफ किया कि अब हर प्रोडक्ट के लिए अलग मंजूरी जरूरी होगी।
ग्राहक की प्रोफाइल के अनुसार बिक्री
नए नियमों के अनुसार बैंक को यह जांचना होगा कि जो प्रोडक्ट वह बेच रहा है वह ग्राहक की आय, जरूरत और प्रोफाइल के अनुसार है या नहीं। उदाहरण के लिए, अगर किसी ग्राहक की आय सीमित है और उसे जटिल निवेश योजना दी जाती है तो इसे गलत बिक्री माना जाएगा। इसके अलावा, बैंक को यह स्पष्ट करना होगा कि प्रोडक्ट उनकी खुद की सर्विस है या किसी तीसरे पक्ष की। इससे ग्राहकों को सही और पारदर्शी जानकारी मिलेगी।
एक क्लिक से मंजूरी का दौर खत्म
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अब पहले से टिक किए गए बॉक्स या एक साथ कई शर्तों को स्वीकार करने का तरीका बंद हो जाएगा। हर प्रोडक्ट के लिए अलग-अलग सहमति लेना जरूरी होगा। ग्राहक को स्पष्ट बताया जाएगा कि वह किस प्रोडक्ट के लिए हां कह रहा है और बैंक को इसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा। यह कदम छुपे हुए एग्रीमेंट और उलझे हुए कंसेंट सिस्टम पर रोक लगाएगा।
डार्क पैटर्न पर सख्ती
RBI ने डिजिटल तरीकों को भी निशाना बनाया है जिन्हें डार्क पैटर्न कहा जाता है। ये ऐसे तरीके हैं जो ग्राहक को भ्रमित करते हैं जैसे पहले से टिक किए बॉक्स, दबाव बनाना या आज आखिरी मौका दिखाना। अब बैंकों को अपने ऐप और वेबसाइट की नियमित जांच करनी होगी और ऐसे भ्रामक फीचर्स हटाने होंगे। इससे डिजिटल बैंकिंग अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी।
एजेंट की जिम्मेदारी भी बैंक पर
अक्सर बैंक शाखाओं में मौजूद एजेंट असली बैंक कर्मचारी नहीं होते लेकिन ग्राहक उन्हें कर्मचारी मान लेते हैं। नए नियमों के तहत बैंक को ऐसे थर्ड पार्टी एजेंटों की सूची सार्वजनिक करनी होगी उनकी ट्रेनिंग की जिम्मेदारी बैंक की होगी और एजेंट को स्पष्ट करना होगा कि वह स्थायी बैंक कर्मचारी नहीं है। इसके अलावा, कॉल करने का समय सीमित होगा जिससे अनचाहे कॉल और दबाव वाली बिक्री में कमी आएगी।
गलत बिक्री पर कार्रवाई
अगर किसी बैंक ने प्रोडक्ट गलत तरीके से बेचा या पूरी जानकारी नहीं दी तो ग्राहक को पैसा लौटाना होगा। यदि ग्राहक को आर्थिक नुकसान हुआ है, तो उसकी भरपाई भी करनी पड़ेगी। हर बिक्री के 30 दिनों में ग्राहक से फीडबैक लिया जाएगा और हर छह महीने में पूरी रिपोर्ट तैयार करनी होगी। यह नियम बैंक की जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे।
नियम कब से लागू होंगे?
यह अभी ड्राफ्ट गाइडलाइंस हैं। 4 मार्च 2026 तक सुझाव दिए जा सकते हैं और अंतिम नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे। बैंकों को इससे पहले अपनी नीतियां, डिजिटल सिस्टम और एजेंट व्यवस्था में जरूरी बदलाव करने होंगे।












