UPI पेमेंट अब बन गया सुपर ईजी, Kiwi App के जरिए करें स्मार्ट शॉपिंग

UPI: भारत में UPI अब और भी स्मार्ट हो गया है। अब आप UPI पेमेंट सीधे क्रेडिट कार्ड से कर सकते हैं और कैशबैक, रिवॉर्ड पॉइंट्स और EMI की सुविधा पा सकते हैं। Kiwi App के जरिए RuPay क्रेडिट कार्ड को UPI से जोड़ना बेहद आसान है।

UPI
UPI अब और भी स्मार्ट
locationभारत
userअसमीना
calendar17 Jan 2026 10:49 AM
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भारत में डिजिटल पेमेंट की दुनिया तेजी से बदल रही है। पहले लोग नकद या चेक के जरिए लेन-देन करते थे फिर आया डेबिट और क्रेडिट कार्ड का जमाना और अब UPI ने लेन-देन को और आसान बना दिया है। महज QR कोड स्कैन करके सेकंड्स में पेमेंट करना अब आम बात हो गई है लेकिन UPI में अब एक नया बदलाव आया है। अब आप अपने UPI पेमेंट में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि आपके बैंक खाते में पैसे न होने पर भी आप आसानी से खरीदारी कर सकते हैं। साथ ही, इस प्रक्रिया में कुछ बैंक और प्लेटफॉर्म्स आपको कैशबैक, रिवॉर्ड पॉइंट्स और EMI विकल्प भी देते हैं।

UPI और क्रेडिट कार्ड का नया तरीका

UPI पेमेंट पहले सिर्फ बैंक खाते से सीधे कटौती करता था। इसका मतलब था कि खाते में पर्याप्त राशि न होने पर पेमेंट रद्द हो जाता। अब क्रेडिट कार्ड को UPI से जोड़ने से यह समस्या हल हो गई है। इससे बड़े खर्चों को EMI में बदलना आसान हो जाता है और छोटी खरीदारी के लिए भी आपको हर बार बैंक बैलेंस चेक करने की जरूरत नहीं पड़ती।

कैशबैक और रिवॉर्ड पॉइंट्स

कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और बैंक अब UPI + क्रेडिट पेमेंट पर कैशबैक और रिवॉर्ड पॉइंट्स भी देते हैं। इसका फायदा यह है कि आप रोजमर्रा की खरीदारी में कुछ पैसे बचा सकते हैं। ये रिवॉर्ड पॉइंट्स या कैशबैक सीधे आपके बैंक खाते में जमा हो जाते हैं और कभी भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

EMI विकल्प और बड़े खर्चों के लिए आसान तरीका

UPI + क्रेडिट पेमेंट बड़े खर्चों के लिए भी मददगार है। आप इसे EMI में बदल सकते हैं, जिससे एक साथ बड़ी रकम न कटे और जेब पर बोझ कम हो। यह तरीका डिजिटल इंडिया में सुविधाजनक और सुरक्षित लेन-देन का एक नया तरीका बन रहा है।

डिजिटल इंडिया में क्रेडिट-स्मार्ट होना

जैसे-जैसे ज्यादा लोग UPI + क्रेडिट का इस्तेमाल कर रहे हैं, भारत में पैसे खर्च करने और संभालने का तरीका बदल रहा है। यह तरीका न सिर्फ पेमेंट को तेज बनाता है बल्कि लोगों को क्रेडिट-स्मार्ट और financially aware भी बनाता है। इस तरह, UPI + क्रेडिट पेमेंट डिजिटल इंडिया की स्मार्ट और आसान शॉपिंग का एक हिस्सा बन चुका है।

डिस्क्लेमर: चेतना मंच इसकी सत्यता या गुणवत्ता की गारंटी नहीं देता। आर्टिकल में व्यक्त विचार/सुझाव विशेषज्ञों और संबंधित ब्रांड की जिम्मेदारी हैं।

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रिलायंस के ये सेगमेंट दे रहे सबसे ज्यादा प्रॉफिट, देखें पूरी लिस्ट

मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने तीसरी तिमाही के नतीजे जारी किए। इस तिमाही में कंपनी ने 18,645 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया जबकि रेवेन्यू 2.69 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ा। जियो और O2C बिजनेस का शानदार प्रदर्शन मुख्य वजह रहा।

Mukesh Ambani
मुकेश अंबानी
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userअसमीना
calendar17 Jan 2026 09:22 AM
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मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर–दिसंबर) के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस तिमाही में कंपनी ने 18,645 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है। यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले करीब 0.56% ज्यादा है। भले ही मुनाफे में बढ़ोतरी मामूली रही हो लेकिन कंपनी की कुल कमाई में अच्छी तेजी देखने को मिली है।

रिलायंस का कुल रेवेन्यू

तीसरी तिमाही में रिलायंस का कुल रेवेन्यू 11% बढ़कर 2.69 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। अगर सितंबर तिमाही से तुलना करें तो मुनाफा करीब 3% बढ़ा है जबकि रेवेन्यू में 4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कंपनी का कहना है कि इस ग्रोथ में जियो और ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) बिजनेस का बड़ा योगदान रहा है।

कंपनी की कमाई में सुधार

इस दौरान रिलायंस का EBITDA 6% बढ़कर 50,932 करोड़ रुपये हो गया। बेहतर ऑपरेशनल परफॉर्मेंस और मजबूत डिमांड की वजह से कंपनी की कमाई में सुधार देखने को मिला। हालांकि, खर्चों में भी इजाफा हुआ है। डेप्रिसिएशन 11% बढ़कर 14,622 करोड़ रुपये हो गया जबकि फाइनेंस कॉस्ट 7% बढ़कर 6,613 करोड़ रुपये रही। इसका एक बड़ा कारण 5G स्पेक्ट्रम से जुड़े एसेट्स का ऑपरेशनल होना बताया गया है। वहीं, टैक्स खर्च भी सालाना आधार पर 10% बढ़कर 7,530 करोड़ रुपये पहुंच गया।

भविष्य के क्षेत्रों में बड़े निवेश

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने कहा कि, कंपनी अब वैल्यू क्रिएशन के एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। उन्होंने बताया कि रिलायंस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई ऊर्जा जैसे भविष्य के क्षेत्रों में बड़े निवेश कर रही है। उनका मानना है कि ये तकनीकें आने वाले समय में भारत और दुनिया के लिए टिकाऊ समाधान देने में अहम भूमिका निभाएंगी। पूंजीगत खर्च की बात करें तो दिसंबर तिमाही में कंपनी का कैपेक्स 33,826 करोड़ रुपये रहा। यह निवेश मुख्य रूप से O2C, न्यू एनर्जी प्रोजेक्ट्स, जियो नेटवर्क और रिटेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर किया गया है।

फ्रेट रेट्स का असर

O2C सेगमेंट में रिलायंस का प्रदर्शन मजबूत रहा। इस कारोबार का रेवेन्यू 8% बढ़कर 1.69 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, EBITDA में 15% की बढ़ोतरी के साथ यह 16,507 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। बेहतर फ्यूल मार्जिन और डिमांड-सप्लाई की स्थिति ने इस सेगमेंट को फायदा पहुंचाया हालांकि डाउनस्ट्रीम केमिकल मार्जिन में कमजोरी और ज्यादा फ्रेट रेट्स का कुछ असर भी देखने को मिला।

बिजनेस में रही तेजी

जियो-बीपी के जरिए फ्यूल रिटेलिंग बिजनेस में भी तेजी रही। कंपनी ने अपने आउटलेट्स की संख्या सालाना आधार पर 14% बढ़ाकर 2,125 कर दी है। इससे हाई-स्पीड डीजल और पेट्रोल की बिक्री में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली।

जियो ने भी किया शानदार प्रदर्शन

डिजिटल और टेलीकॉम बिजनेस रिलायंस जियो ने भी शानदार प्रदर्शन किया। तीसरी तिमाही में जियो का नेट प्रॉफिट 11% बढ़कर 7,629 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 13% की बढ़त के साथ 43,683 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। मजबूत सब्सक्राइबर एडिशन, ARPU में सुधार और डिजिटल सेवाओं के विस्तार ने इस ग्रोथ को सपोर्ट किया।

5G सब्सक्राइबर की संख्या

तिमाही के दौरान जियो का ARPU बढ़कर 213.7 रुपये हो गया। दिसंबर तिमाही के अंत तक कंपनी का कुल ग्राहक आधार 51.5 करोड़ तक पहुंच गया जबकि 5G सब्सक्राइबर की संख्या 25.3 करोड़ हो गई है। अब जियो के कुल वायरलेस डेटा ट्रैफिक में 5G की हिस्सेदारी 53% हो चुकी है जो ग्राहकों की बढ़ती भागीदारी को दिखाता है।

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Startup India ने कर दिया कमाल, पहले नौकरी की लाइन अब बिजनेस की उड़ान

Startup India: पिछले 10 सालों में ‘स्टार्टअप इंडिया’ योजना ने भारत की आर्थिक तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। 2016 में जहां देश में सिर्फ 500 स्टार्टअप थे, वहीं 2025 तक इनकी संख्या 2 लाख से अधिक हो चुकी है। सरकारी फंडिंग, आसान नियमों और सीड फंड स्कीम ने युवाओं को नौकरी मांगने वाला नहीं बल्कि नौकरी देने...

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स्टार्टअप इंडिया
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userअसमीना
calendar16 Jan 2026 02:18 PM
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भारत में पिछले 10 सालों में जो बदलाव आया है वह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं बल्कि सोच की क्रांति है। एक वक्त था जब युवा डिग्री लेकर नौकरी की तलाश में भटकते थे लेकिन आज वही युवा खुद दूसरों को रोजगार दे रहे हैं। इस ऐतिहासिक बदलाव के पीछे सबसे बड़ी भूमिका निभाई है सरकार की ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल ने जिसने भारत को नौकरी मांगने वाले देश से नौकरी देने वाला देश बनाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है।

500 से 2 लाख स्टार्टअप्स का सफर

साल 2016 में जब ‘स्टार्टअप इंडिया’ की शुरुआत हुई थी तब देश में केवल करीब 500 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स थे। संसाधनों की कमी, फंडिंग की मुश्किलें और सरकारी नियमों का बोझ नए बिजनेस के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा थे। लेकिन 2025 तक आते-आते यह संख्या 2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स तक पहुंच गई। यह आंकड़ा बताता है कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है।

छोटे शहरों तक पहुंची स्टार्टअप क्रांति

पहले यह माना जाता था कि स्टार्टअप सिर्फ बेंगलुरु, दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों तक ही सीमित रहते हैं लेकिन अब यह सोच पूरी तरह बदल चुकी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 50 प्रतिशत से ज्यादा स्टार्टअप्स टियर-2 और टियर-3 शहरों से उभर कर सामने आए हैं। इसका मतलब साफ है कि अब उद्यमिता सिर्फ महानगरों की जागीर नहीं रही बल्कि छोटे शहरों और कस्बों के युवा भी अपने आइडिया पर काम कर रहे हैं।

महिला उद्यमियों की मजबूत भागीदारी

‘स्टार्टअप इंडिया’ ने सिर्फ युवाओं को ही नहीं बल्कि महिलाओं को भी बिजनेस की दुनिया में आगे बढ़ने का मंच दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 45 प्रतिशत से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला डायरेक्टर है। यह आंकड़ा भारत में बदलती सामाजिक और आर्थिक सोच को दर्शाता है जहां महिलाएं भी नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।

सरकार बनी सबसे बड़ी एंजेल इन्वेस्टर

स्टार्टअप्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती हमेशा फंडिंग रही है। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने खुद निवेशक की भूमिका निभाई। 2021 में शुरू की गई ‘स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम’ के तहत 945 करोड़ रुपये का फंड तैयार किया गया जिसे देशभर के 219 इनक्यूबेटर्स के जरिए नए स्टार्टअप्स तक पहुंचाया जा रहा है। इससे युवाओं को अपने आइडिया को प्रोटोटाइप से लेकर मार्केट तक पहुंचाने में बड़ी मदद मिली।

प्राइवेट इन्वेस्टमेंट का रास्ता हुआ आसान

सरकार के 10,000 करोड़ रुपये के ‘फंड ऑफ फंड्स’, जिसे SIDBI मैनेज करता है, ने प्राइवेट निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इसका नतीजा यह हुआ कि पिछले 10 सालों में भारतीय स्टार्टअप्स को 150 बिलियन डॉलर से ज्यादा का प्राइवेट इन्वेस्टमेंट मिला। अब अगर किसी युवा के पास मजबूत आइडिया है तो पूंजी उसकी राह की सबसे बड़ी बाधा नहीं रही।

नियमों के जंजाल से मिली आजादी

स्टार्टअप्स को सबसे बड़ी राहत नियमों में ढील से मिली। सरकार ने 47,000 से ज्यादा कम्पलायंस खत्म किए और 4,458 कानूनी प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया। अब स्टार्टअप्स को 9 श्रम कानूनों और 3 पर्यावरण कानूनों में सेल्फ-सर्टिफिकेशन की सुविधा है जिससे बार-बार इंस्पेक्शन की जरूरत नहीं पड़ती। अगर कोई बिजनेस सफल नहीं हो पाता तो उसे बंद करने की प्रक्रिया भी आसान कर दी गई है जो अब 90 दिनों में पूरी हो सकती है।

सरकार बनी स्टार्टअप्स की बड़ी ग्राहक

सरकार ने सिर्फ नियम आसान नहीं किए बल्कि खुद स्टार्टअप्स की सबसे बड़ी ग्राहक भी बनी। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के जरिए स्टार्टअप्स ने अब तक 38,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया है। इससे डिफेंस, स्पेस, एग्री-टेक और टेक्नोलॉजी जैसे कठिन सेक्टर्स में भी नए स्टार्टअप्स को मौका मिला।

120 से ज्यादा यूनिकॉर्न और 21 लाख नौकरियां

आज भारत में 120 से ज्यादा यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स हैं जिनकी कुल वैल्यूएशन 350 बिलियन डॉलर से अधिक है। इन स्टार्टअप्स ने अब तक 21 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा की हैं। खास बात यह है कि 2025 में स्टार्टअप्स के बंद होने की दर पिछले पांच सालों में सबसे कम रही जो यह दिखाता है कि भारतीय स्टार्टअप्स अब स्थिर और टिकाऊ बिजनेस मॉडल पर काम कर रहे हैं।

2030 की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेंगे स्टार्टअप्स

विशेषज्ञों का मानना है कि 2030 तक भारत को 7.3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में स्टार्टअप्स की भूमिका सबसे अहम होगी। आज का भारत सिर्फ आइडिया पर काम नहीं कर रहा बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना रहा है।

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