Copper Prices की तेजी के पीछे ये चार बड़े कारण हैं, जानकर रह जाएंगे हैरान
सोने और चांदी के बाद निवेशकों की नजर अब कॉपर पर टिक गई है। पिछले एक साल में कॉपर ने भी तेज रिटर्न दिखाए हैं। शेयर बाजार की सुस्ती के बीच यह कमोडिटी चर्चा में है। हालांकि, रिटेल निवेशकों के लिए सीधे और सुरक्षित विकल्प अभी सीमित हैं।

सोने और चांदी की रौनक के बीच अब निवेशकों की नजर कॉपर (तांबा) पर टिक गई है। पिछले एक साल में गोल्ड और सिल्वर ने रिकॉर्ड रिटर्न दिए हैं। शेयर बाजार की सुस्ती के दौरान निवेशकों का रुझान कमोडिटी में निवेश की ओर बढ़ा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कॉपर अगला बड़ा दांव बन सकता है और क्या इसमें रिटेल निवेशक भी शामिल हो सकते हैं।
गोल्ड-सिल्वर की रैली के बाद कॉपर की चर्चा
पिछले कुछ महीनों में गोल्ड और सिल्वर की तेज उछाल ने निवेशकों का ध्यान खींचा। ETF और म्यूचुअल फंड के जरिए इन धातुओं में निवेश में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। अब निवेशक अगली संभावित कमोडिटी की तलाश कर रहे हैं और इसी वजह से कॉपर चर्चा में आया है।
रिकॉर्ड स्तर पर कॉपर की कीमतें
लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) के आंकड़ों के अनुसार, कॉपर मार्च 2022 के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका के COMEX एक्सचेंज पर 6 जनवरी 2026 को कॉपर ने $6.069 प्रति पाउंड का नया रिकॉर्ड बनाया। पिछले एक साल में इसकी कीमत लगभग 60% बढ़ी है। भारत में भी कॉपर फ्यूचर्स ने पिछले साल लगभग 36% की तेजी दिखाई है।
तेजी के पीछे के कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक, कॉपर की कीमतों में तेजी के कई कारण हैं। जैसे- EV सेक्टर का विस्तार, डेटा सेंटर और इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ती मांग, डिफेंस सेक्टर में मजबूत जरूरत, कॉपर की सीमित सप्लाई । VT Markets के ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशंस लीड रॉस मैक्सवेल का कहना है कि “कॉपर की तेजी यह दिखाती है कि फिजिकल सप्लाई सीमित है जबकि इलेक्ट्रिफिकेशन से जुड़ी मांग लगातार बढ़ रही है। कमजोर डॉलर और नरम ब्याज दरों की उम्मीदों ने भी निवेशकों की रिस्क लेने की क्षमता बढ़ाई है।
रिटेल निवेशक कॉपर में कैसे निवेश कर सकते हैं?
भारत में फिलहाल कॉपर ETF या म्यूचुअल फंड उपलब्ध नहीं हैं। फिजिकल कॉपर बार या कॉइन में निवेश का कोई संगठित विकल्प भी नहीं है। रिटेल निवेशकों के लिए एकमात्र रास्ता कॉपर फ्यूचर्स हैं। यह ट्रेडिंग MCX पर होती है लेकिन ध्यान रहे फ्यूचर्स में एक्सपोजर बहुत बड़ा होता है। एक कॉन्ट्रैक्ट में 2.5 टन कॉपर शामिल होता है। मार्जिन देकर निवेश किया जा सकता है लेकिन कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण नुकसान भी तेज हो सकता है। इसलिए इसे केवल उन्हीं निवेशकों के लिए सुझाया जाता है जिन्हें कमोडिटी मार्केट और रिस्क मैनेजमेंट की अच्छी समझ हो।
सोने और चांदी की रौनक के बीच अब निवेशकों की नजर कॉपर (तांबा) पर टिक गई है। पिछले एक साल में गोल्ड और सिल्वर ने रिकॉर्ड रिटर्न दिए हैं। शेयर बाजार की सुस्ती के दौरान निवेशकों का रुझान कमोडिटी में निवेश की ओर बढ़ा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कॉपर अगला बड़ा दांव बन सकता है और क्या इसमें रिटेल निवेशक भी शामिल हो सकते हैं।
गोल्ड-सिल्वर की रैली के बाद कॉपर की चर्चा
पिछले कुछ महीनों में गोल्ड और सिल्वर की तेज उछाल ने निवेशकों का ध्यान खींचा। ETF और म्यूचुअल फंड के जरिए इन धातुओं में निवेश में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। अब निवेशक अगली संभावित कमोडिटी की तलाश कर रहे हैं और इसी वजह से कॉपर चर्चा में आया है।
रिकॉर्ड स्तर पर कॉपर की कीमतें
लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) के आंकड़ों के अनुसार, कॉपर मार्च 2022 के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका के COMEX एक्सचेंज पर 6 जनवरी 2026 को कॉपर ने $6.069 प्रति पाउंड का नया रिकॉर्ड बनाया। पिछले एक साल में इसकी कीमत लगभग 60% बढ़ी है। भारत में भी कॉपर फ्यूचर्स ने पिछले साल लगभग 36% की तेजी दिखाई है।
तेजी के पीछे के कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक, कॉपर की कीमतों में तेजी के कई कारण हैं। जैसे- EV सेक्टर का विस्तार, डेटा सेंटर और इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ती मांग, डिफेंस सेक्टर में मजबूत जरूरत, कॉपर की सीमित सप्लाई । VT Markets के ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशंस लीड रॉस मैक्सवेल का कहना है कि “कॉपर की तेजी यह दिखाती है कि फिजिकल सप्लाई सीमित है जबकि इलेक्ट्रिफिकेशन से जुड़ी मांग लगातार बढ़ रही है। कमजोर डॉलर और नरम ब्याज दरों की उम्मीदों ने भी निवेशकों की रिस्क लेने की क्षमता बढ़ाई है।
रिटेल निवेशक कॉपर में कैसे निवेश कर सकते हैं?
भारत में फिलहाल कॉपर ETF या म्यूचुअल फंड उपलब्ध नहीं हैं। फिजिकल कॉपर बार या कॉइन में निवेश का कोई संगठित विकल्प भी नहीं है। रिटेल निवेशकों के लिए एकमात्र रास्ता कॉपर फ्यूचर्स हैं। यह ट्रेडिंग MCX पर होती है लेकिन ध्यान रहे फ्यूचर्स में एक्सपोजर बहुत बड़ा होता है। एक कॉन्ट्रैक्ट में 2.5 टन कॉपर शामिल होता है। मार्जिन देकर निवेश किया जा सकता है लेकिन कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण नुकसान भी तेज हो सकता है। इसलिए इसे केवल उन्हीं निवेशकों के लिए सुझाया जाता है जिन्हें कमोडिटी मार्केट और रिस्क मैनेजमेंट की अच्छी समझ हो।












