क्यों बदला पीएमओ का पता? जानिए ‘सेवा तीर्थ’ की पूरी कहानी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मकर संक्रांति के अवसर पर 14 जनवरी 2026 को अपने नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट हो रहे है।

यह कदम सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत उठाया गया है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली को आधुनिक, एकीकृत और अधिक प्रभावी बनाना है। आज़ादी के बाद पहली बार प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) साउथ ब्लॉक से बाहर स्थानांतरित हुआ है।
1,189 करोड़ की लागत से बना आधुनिक परिसर
बता दें कि ‘सेवा तीर्थ’ परिसर का निर्माण 1,189 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। यह करीब 2,26,203 वर्ग फुट में फैला हुआ है और इसका निर्माण देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने किया है। यह पूरा परिसर औपनिवेशिक विरासत से बाहर निकलकर नए भारत की प्रशासनिक सोच को दर्शाता है।
तीन इमारतों का संगम है ‘सेवा तीर्थ’
बता दें कि ‘सेवा तीर्थ’ को तीन अलग-अलग लेकिन आपस में जुड़े भवनों में विकसित किया गया है सेवा तीर्थ-1: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), सेवा तीर्थ-2: कैबिनेट सचिवालय (सितंबर 2024 में ही शिफ्ट), सेवा तीर्थ-3: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) इन तीनों प्रमुख विभागों का एक ही परिसर में होना प्रशासनिक समन्वय, निर्णय प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेगा।
साउथ और नॉर्थ ब्लॉक बनेंगे म्यूजियम
बता दें कि PMO के शिफ्ट होते ही ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को सार्वजनिक संग्रहालय में बदला जाएगा। इसका नाम ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’ रखा गया है। इसके तकनीकी और डिजाइन विकास के लिए 19 दिसंबर 2024 को फ्रांस की एक म्यूजियम डेवलपमेंट एजेंसी के साथ समझौता किया गया है। यह संग्रहालय भारत की सभ्यता, शासन व्यवस्था और विकास यात्रा को आम जनता के सामने प्रस्तुत होगा।
औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति का विजन
‘सेवा तीर्थ’ में पीएमओ का स्थानांतरण प्रधानमंत्री मोदी के उस विजन का हिस्सा है, जिसके तहत औपनिवेशिक प्रतीकों और मानसिकता से मुक्ति पर जोर दिया जा रहा है। इससे पहले राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ किया गया था। इसी क्षेत्र में प्रधानमंत्री का नया आवास ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव पार्ट-2’ भी निर्माणाधीन है।
आधुनिकता और कार्यकुशलता पर फोकस
सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत कॉमन सेंट्रल सचिवालय (CCS) का निर्माण भी किया जा रहा है, ताकि दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में फैले मंत्रालयों को एक ही जगह लाया जा सके। हाल ही में शुरू हुआ ‘कर्तव्य भवन’ इसका उदाहरण है। ‘सेवा तीर्थ’ इस पूरी योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जो सेवा और कर्तव्य की थीम पर आधारित है।
यह कदम सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत उठाया गया है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली को आधुनिक, एकीकृत और अधिक प्रभावी बनाना है। आज़ादी के बाद पहली बार प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) साउथ ब्लॉक से बाहर स्थानांतरित हुआ है।
1,189 करोड़ की लागत से बना आधुनिक परिसर
बता दें कि ‘सेवा तीर्थ’ परिसर का निर्माण 1,189 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। यह करीब 2,26,203 वर्ग फुट में फैला हुआ है और इसका निर्माण देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने किया है। यह पूरा परिसर औपनिवेशिक विरासत से बाहर निकलकर नए भारत की प्रशासनिक सोच को दर्शाता है।
तीन इमारतों का संगम है ‘सेवा तीर्थ’
बता दें कि ‘सेवा तीर्थ’ को तीन अलग-अलग लेकिन आपस में जुड़े भवनों में विकसित किया गया है सेवा तीर्थ-1: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), सेवा तीर्थ-2: कैबिनेट सचिवालय (सितंबर 2024 में ही शिफ्ट), सेवा तीर्थ-3: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) इन तीनों प्रमुख विभागों का एक ही परिसर में होना प्रशासनिक समन्वय, निर्णय प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेगा।
साउथ और नॉर्थ ब्लॉक बनेंगे म्यूजियम
बता दें कि PMO के शिफ्ट होते ही ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को सार्वजनिक संग्रहालय में बदला जाएगा। इसका नाम ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’ रखा गया है। इसके तकनीकी और डिजाइन विकास के लिए 19 दिसंबर 2024 को फ्रांस की एक म्यूजियम डेवलपमेंट एजेंसी के साथ समझौता किया गया है। यह संग्रहालय भारत की सभ्यता, शासन व्यवस्था और विकास यात्रा को आम जनता के सामने प्रस्तुत होगा।
औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति का विजन
‘सेवा तीर्थ’ में पीएमओ का स्थानांतरण प्रधानमंत्री मोदी के उस विजन का हिस्सा है, जिसके तहत औपनिवेशिक प्रतीकों और मानसिकता से मुक्ति पर जोर दिया जा रहा है। इससे पहले राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ किया गया था। इसी क्षेत्र में प्रधानमंत्री का नया आवास ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव पार्ट-2’ भी निर्माणाधीन है।
आधुनिकता और कार्यकुशलता पर फोकस
सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत कॉमन सेंट्रल सचिवालय (CCS) का निर्माण भी किया जा रहा है, ताकि दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में फैले मंत्रालयों को एक ही जगह लाया जा सके। हाल ही में शुरू हुआ ‘कर्तव्य भवन’ इसका उदाहरण है। ‘सेवा तीर्थ’ इस पूरी योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जो सेवा और कर्तव्य की थीम पर आधारित है।












