दिल्ली सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में ‘कार्बन क्रेडिट मोनेटाइजेशन फ्रेमवर्क’ को मंजूरी दे दी गई।

इस नई नीति के तहत दिल्ली सरकार अपने विभिन्न ग्रीन प्रोजेक्ट्स से होने वाली कार्बन उत्सर्जन में कमी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्बन बाजार में बेचकर अतिरिक्त राजस्व जुटाएगी।
बता दें कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार जलवायु परिवर्तन के खिलाफ पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। कार्बन क्रेडिट नीति के लागू होने से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सरकार को एक नया और स्थायी राजस्व स्रोत भी प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि इस नीति से होने वाली आय राज्य के समेकित कोष (Consolidated Fund of the State) में जमा की जाएगी और इसका उपयोग जनकल्याणकारी योजनाओं एवं विकास कार्यों में किया जाएगा।
बता दें कि मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस पहल के माध्यम से दिल्ली सरकार भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में नेतृत्व करेगी। साथ ही, यह नीति स्थायी विकास के लिए नए वित्तीय अवसर भी खोलेगी। दिल्ली देश का ऐसा प्रमुख राज्य बनकर उभरेगा जो कार्बन मार्केट का प्रभावी ढंग से लाभ उठाएगा।
दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग के अनुसार, यह फ्रेमवर्क विभिन्न विभागों द्वारा चलाई जा रही उन योजनाओं को कवर करेगा जिनसे कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। इनमें प्रमुख रूप से इलेक्ट्रिक बसों का संचालन, बड़े पैमाने पर पौधारोपण, सौर ऊर्जा को बढ़ावा और कचरा प्रबंधन और वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट शामिल हैं। इन सभी पहलों से होने वाली प्रदूषण में कमी को वैज्ञानिक पद्धति से मापा जाएगा, फिर उन्हें कार्बन क्रेडिट के रूप में रजिस्टर कर बाजार में बेचा जाएगा।
इस नीति की सबसे बड़ी खासियत इसका रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल है। पर्यावरण विभाग पारदर्शी RFP प्रक्रिया के तहत एक विशेषज्ञ एजेंसी का चयन करेगा। यही एजेंसी कार्बन क्रेडिट की पहचान, दस्तावेजीकरण, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार रजिस्ट्रेशन और मार्केट में बिक्री की पूरी प्रक्रिया संभालेगी। इस पर सरकार को कोई अग्रिम खर्च नहीं करना होगा। होने वाली कमाई का एक हिस्सा एजेंसी को मिलेगा, जबकि अधिकांश राशि सीधे सरकार के खाते में जाएगी।
कार्बन क्रेडिट की बिक्री से प्राप्त पूरी राशि सीधे दिल्ली सरकार के संचित कोष में जमा की जाएगी और इसे सरकारी वित्तीय खातों में दर्शाया जाएगा। इस धनराशि का उपयोग राजधानी में पर्यावरण सुधार और विकास कार्यों को और गति देने के लिए किया जाएगा।