Saturday, 25 May 2024

आयुर्वेद चिकित्सा में फैलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज का निदान पूरी तरह संभव

Panchkarma News : आजकल जीवन शैली में बदलाव तनाव, असंतुलित खान पान आदि के कारण महिलाओं को फैलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज…

आयुर्वेद चिकित्सा में फैलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज का निदान पूरी तरह संभव

Panchkarma News : आजकल जीवन शैली में बदलाव तनाव, असंतुलित खान पान आदि के कारण महिलाओं को फैलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज की समस्या बढ़ रही है। जिससे गर्भधारण कंसीव करने में समस्या पैदा होती है। और नतीजा तमाम दंपति आजकल आईवीएफ की तरफ बढ़ रहे हैं। लेकिन अगर किसी महिला को गर्भधारण की समस्या या फिर फैलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज की समस्या है तो उसे घबराने या डरने की बिलकुल जरूरत नहीं। क्योंकि आयुर्वेद में गर्भधारण संबंधी तमाम समस्याओं और फैलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज की समस्या का निदान है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के जीवा संस्थान के संस्थापक आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर प्रताप चौहान का कहना है कि बच्चा प्लान करने के समय गर्भधारण की समस्या वाले मरीजों को आईवीएफ की तरफ बढ़ने से पहले आयुर्वेद चिकित्सा का सहारा जरूर लेना चाहिए। क्योंकि आयुर्वेद चिकित्सा नहीं बल्कि स्वस्थ जीवन शैली का मूल मंत्र है। डॉ प्रताप चौहान ने कहा, अगर मरीज फेलोपियां ट्यूब ब्लॉक की वजह से गर्भधारण नहीं कर पा रही तो फैलोपियन ट्यूब की ब्लॉकेज का निदान आयुर्वेद की पंचकर्म चिकित्सा और स्वस्थ जीवन शैली में संभव है।

फैलोपियन ट्यूब क्यों हो जाती है ब्लॉकेज 

प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर प्रताप चौहान का कहना है कि फेलोपियन ट्यूब ब्लॉक के कई कारण हो सकते हैं लेकिन आयुर्वेद में हम किसी भी बीमारी का मूल कारण मरीज की प्रकृति को जानकर करते हैं।

शरीर में तीन प्रकार के दोष होते हैं वात पित्त कफ

दरअसल मनुष्य का शरीर में तीन तरह की प्रकृति होती है वात पित्त का अगर हमारे जीवन शैलियों खान-पांच संतुलन गड़बड़ा जाता है और कोई भी प्रकृति कम या ज्यादा हो जाती है तो उसे हम बात पित्त कफ दोष कहते हैं। डॉ प्रताप चौहान ने बताया जब मरीज में वात पित्त का किसी एक की भी अधिकता या कमी हो जाती है तो वही दोष मरीज के फेलोपियन ट्यूब को भी अवरुद्ध कर सकता है। और हम मरीज के प्रकृति को जानकर फिर उसका आयुर्वेद चिकित्सा से निदान करते हैं।

पंचकर्म चिकित्सा से संभव है फैलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज का निदान

डॉ प्रताप चौहान ने बताया कि आयुर्वेद अपने आप में एक समूचा विज्ञान है और सबसे पुरानी चिकित्सापद्धति है। हमारी प्राचीन ग्रंथों में आयुर्वेद को स्वास्थ्य जीवन की कुंजी कहा गया है। यह चिकित्सा नहीं बल्कि स्वस्थ और सुखी जीवन का मूल मंत्र है। और आयुर्वेद में हम प्राकृतिक जड़ी बूटियां द्वारा ही किसी की प्रकृति जानकर वात पित्त कफ का संतुलन बनाते हैं और बीमारी को समूल समाप्त करते हैं। और आयुर्वेद में शोध प्रक्रिया भी  की जाती है जिसे हम पांच कर्म कहते हैं। पंचकर्म शरीर की पूरी तरह से शोधन प्रक्रिया के लिए किया जाता है। जिस तरह से गाड़ी की सर्विस की जाती है और गाड़ी स्मूथ चलने लगती है। ठीक उसी तरह से पंचकर्म से शरीर रूपी गाड़ी को स्वस्थ सुंदर और स्मूथ बनाने का निदान है।

पंचकर्म के दौरान जीवन शैली में किया जाता है बदलाव

पंचकर्म के दौरान हम व्यक्ति की प्रकृति के अनुरूप उसके खान-पांच जीवन शैली में बदलाव करते हैं। और कफ के दोष को दूर करने के लिए उनका शोध करते हैं। पंचकर्म में नेति से लेकर, शिरोधारा तक मसाज से लेकर खानपान और आसन तक तमाम प्रक्रिया से गुजरा जाता है। जिसमें शरीर के विभिन्न अंगों का साधन, इंद्रियों की सफाई के लिए योग, प्राणायाम, शोध के लिए नेति, पानी और मिट्टी की चिकित्सा अरोमा चिकित्सा, आहार का नियम, मसाज,एक लंबी प्रक्रिया है। और इस प्रक्रिया से गुजर कर शरीर का एक-एक अंग मन और मस्तिष्क की सफाई होती है। और उसको आराम दिया जाता है। और इस प्रक्रिया से वात पित्त का को संतुलित करके शरीर को स्वस्थ बनाया जाता है।

आयुर्वेद में खानपान और जीवन शैली को दिया जाता है विशेष महत्व

डॉ प्रताप चौहान का कहना है आयुर्वेद में खानपान और जीवन शैली का विशेष महत्व है क्योंकि हम जो खाते हैं जो सोचते हैं, जैसा सोते हैं, जैसे विचार बनाते हैं, उसी के अनुरूप हमारा स्वास्थ्य निर्भर करता है। शरीर की संपूर्ण प्रक्रिया खानपान रहन-सहन और जीवन शैली पर निर्भर करती है। और यह हम पर निर्भर करता है कि हम अच्छे खान-पांच जीवन शैली और संतुलित आचार्य व्यवहार से अपने जीवन को स्वस्थ सुंदर बना सकते हैं।

किसी भी मुश्किल बीमारी में आयुर्वेदाचार्य की सलाह है जरूरी

डॉ प्रताप चौहान कहते हैं लेकिन किसी भी बीमारी में आयुर्वेदाचार्य की सलाह लेना आवश्यक है क्योंकि आप अपनी प्रकृति को जचने के लिए अगर सक्षम नहीं है तो फिर उसका निदान भी नहीं कर पाएंगे। लेकिन आयुर्वेदाचार्य वात पित्त कफ के लक्षण और खान-पान के जरिए बीमारी की मूल में जाता है और उसी के अनुरूप जीवन शैली में बदलाव के लिए सुझाव देता है और जड़ी बूटियां का इस्तेमाल करके उसकी चिकित्सा की जाती है। डॉ प्रताप चौहान कहते हैं आजकल सोशल मीडिया का जमाना है और लोग अपना इलाज सोशल मीडिया पर पढ़कर कुछ भी उल्टा सीधा करते रहते हैं। नतीजा समस्या बढ़ती रहती है इसलिए हम सुझाव देते हैं की आपको कुछ समस्या है तो आप अपनी प्रकृति के जांच के लिए विशेष आज आयुर्वेदाचार्य से जरूर सलाह मशवरा करना चाहिए। ताकि किसी भी बीमारी का इलाज समय पर किया जा सके और वह ला इलाज होने की स्थिति तक अपनी जड़ न पकड़ ले।

 फेलोपियन ट्यूब की ब्लॉकेज से क्या होता है और उसके लक्षण क्या हैं

डॉक्टर प्रताप चौहान कहते हैं फेलोपियन ट्यूब की प्रेगनेंसी धारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका होती है और अगर वह ब्लॉक हो जाती है अवरोध हो जाती है तो उसमें प्रेगनेंसी के शुक्राणु यानी अंडकोष पहले पीएम ट्यूब से गर्भाशय तक नहीं जा पाते या ठीक से पनप नहीं पाते। ऐसे में पंचकर्म चिकित्सा और आयुर्वेद समस्या के मूल कारण को जान कर चिकित्सा करता है और आयुर्वेद में इसका पूरी तरह से इलाज संभव है। किसी को भी गर्भधारण की समस्या होती है तो घबराने की बजाय उसे आयुर्वेद के विशेषज्ञ आयुर्वेदाचार्य से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

जीवा आयुर्वेद में सैकड़ों विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम है कार्यरत

डॉ प्रताप चौहान ने बताया जीवा आयुर्वेद में हमारे यहां हर इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम में है। और शरीर की तमाम बीमारियों के लिए जीवा आयुर्वेद विश्व स्तर पर सैकड़ों डॉक्टरों की टीम के साथ प्रमुखता से स्वस्थ जीवन शैली के लिए कार्य कर रहा है। डॉ प्रताप चौहान का कहना है कि हमें बीमारी को बढ़ाने की बचाए हमें तुरंत विशेषज्ञ आयुर्वेद से आयुर्वेदाचार्य से आवश्यक सलाह कर लेनी चाहिए ताकि समस्या का निदान सही समय पर हो सके। और हमें दरबदर डॉक्टरों की खाक ना छानी पड़े।

फैलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज के लक्षण

डॉ प्रताप चौहान के मुताबिक अगर गर्भधारण कंसीव करने में दिक्कत आ रही है। अंडा नहीं पनप रहा या ट्यूब में ही नप जाता है या अन्य किसी तरह की दिक्कत है। या पीरियड के समय गर्भाशय के निचले हिस्से में अधिक दर्द होता है ऐसे तमाम लक्षण से विशेषज्ञ पता लगाते हैं। कभी-कभी ट्यूब में या गर्भाशय में सूजन भी आ जाती है। विशेषज्ञ आयुर्वेदाचार्य पूछताछ और लक्षण के अनुसार ही चिकित्सा करते हैं।

स्वस्थ बच्चे के जन्म के लिए बेबी प्लान के समय लें जरूर आयुर्वेदाचार्य का सुझाव

बच्चे के स्वास्थ्य जनम के लिए अगर हम आयुर्वेद की सलाह लेते हैं तो वह सही खान-पान और जीवन शैली से मार्गदर्शन करते हैं ताकि बच्चा स्वस्थ पैदा हो। और अगर किसी तरह की समस्या है उसका भी खानपान जीवन शैली और चिकित्सा से निदान किया जा सके। जैसे फेलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज में हम उत्तर बस्ती का इलाज भी करते हैं।

आयुर्वेद बीमारी के मूल कारण को समाप्त करता है

यानी आयुर्वेद बीमारी के मूल कारण को समाप्त करता है। और शरीर त्वचा से लेकर नसों तक, पाचन से लेकर सुंदरता तक पूरी तरह से स्वस्थ बन जाता है। आयुर्वेद हमारे जीवन में स्फूर्ति भी लाता है और त्वचा का रंग सुंदर और चमकदार बनाता है। और जो खाया पिया शरीर को लगता है।

आयुर्वेद का मूल मंत्र है.. संतुलित खानपान और सही दिनचर्या

डॉ प्रताप चौहान कहते हैं संतुलित खानपान और सही दिनचर्या और जीवन शैली का पालन करें और स्वयं को स्वस्थ रखें। आयुर्वेद में स्वस्थ शरीर और और इस पूर्ति प्रदान करता है। जहां तक गर्भधारण की समस्या का निदान है वह आयुर्वेद में पंचकर्म और और सही जीवन शैली के जरिए पूरी तरह संभव है।

प्रस्तुति मीना कौशिक

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