इक्कीस: एक शोक-स्मृति, न कि युद्ध जीतने की कहानी

कुछ फिल्में तालियाँ बटोरती हैं, कुछ नारे लगवाती हैं, और कुछ ऐसी भी होती हैं जो दर्शक को चुप करा देती हैं। इक्कीस तीसरी श्रेणी की फिल्म है। यह वह अनुभव है, जिसके बाद आप थिएटर से बाहर निकलते समय बोलना नहीं चाहते, क्योंकि गले में भावनाओं का भार होता है, शब्दों का नहीं।

The story beyond twenty-one acts of bravery
इक्कीस वीरता से आगे की कहानी (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar02 Jan 2026 11:26 AM
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यह फिल्म 21 साल की उम्र में परमवीर चक्र पाने वाले कैप्टन अरुण खेतरपाल की वीरगाथा नहीं, बल्कि उनकी अनुपस्थिति की कथा है—उस खालीपन की, जो पीछे रह जाता है। फिल्म दो समय-रेखाओं में आगे बढ़ती है, एक ओर 1971 का भारत-पाक युद्ध, जहाँ युवा टैंक कमांडर अरुण खेतरपाल (अगस्त्य नंदा) मोर्चे पर डटे हैं, और दूसरी ओर, कारगिल युद्ध के बाद का दौर, जहाँ उनके पिता ब्रिगेडियर एम.एल. खेतरपाल (धर्मेंद्र) पाकिस्तान जाते हैं—एक कॉलेज रियूनियन के बहाने, लेकिन असल में अतीत से सामना करने।

कहानी का मूल—युद्ध के शोर से परे एक स्मृति

इक्कीस में पाकिस्तान यात्रा के दौरान ब्रिगेडियर एम.एल. खेतरपाल का सामना पाकिस्तान के अधिकारी ब्रिगेडियर नसीर (जयदीप अहलावत) से होता है। यह मुलाक़ात धीरे-धीरे एक ऐसे सच की ओर बढ़ती है, जिसे कोई ज़ोर से कहना नहीं चाहता। फिल्म का असली असर इसी टकराव में छुपा है—युद्ध के बाद की चुप्पी में। इस दौर में सभी सवालों का जवाब नहीं मिलता, लेकिन कहानी का सत्य यही है कि शौर्य और युद्ध के बाद जो बचता है, वह सिर्फ एक गहरी चुप्प है।

निर्देशन: सूक्ष्मता की ताक़त, लेकिन असमान गति

निर्देशक श्रीराम राघवन इस फिल्म में अपने सिग्नेचर सस्पेंस से हटकर एक संयमित और गंभीर भाषा चुनते हैं। कई दृश्य बेहद असरदार हैं, जैसे टैंक के पेरिस्कोप से झांकता चेहरा, जो एक पल के लिए इतिहास को जीवित कर देता है। हालांकि, फिल्म की संरचना पूरी तरह संतुलित नहीं है। शुरुआती हिस्से में फ्लैशबैक का प्रवाह थोड़ा बिखरा हुआ लगता है और प्रशिक्षण के दृश्य अपेक्षित भावनात्मक गहराई नहीं बना पाते। लेकिन जैसे ही फिल्म अपने दूसरे हिस्से में प्रवेश करती है, उसका स्वर बदल जाता है—और यहीं से इक्कीस सच में पकड़ बनाती है।

अभिनय: धर्मेंद्र और जयदीप अहलावत की अदृश्य जंग

फिल्म की आत्मा दो कलाकारों में बसती है—धर्मेंद्र और जयदीप अहलावत। धर्मेंद्र का अभिनय किसी संवाद पर निर्भर नहीं है; उनकी आंखों की नमी, आवाज़ की थरथराहट और मौन ही सब कुछ कह देता है। यह उनके करियर की सबसे संवेदनशील प्रस्तुतियों में से एक है।

जयदीप अहलावत एक ऐसे पाकिस्तानी अधिकारी के रूप में सामने आते हैं, जो दुश्मन होते हुए भी शौर्य का सम्मान करना जानता है। दोनों के बीच के दृश्य—खासकर अंतिम हिस्से में—फिल्म को साधारण युद्ध कथा से ऊपर उठा देते हैं। अगस्त्य नंदा शारीरिक रूप से भूमिका के अनुरूप हैं और उनकी गंभीरता विश्वसनीय लगती है, लेकिन भावनात्मक स्तर पर उनका अभिनय सीमित रह जाता है। शहादत के भीतर चल रही उथल-पुथल को वे पूरी तरह व्यक्त नहीं कर पाते। सिमर भाटिया, अपने पहले ही प्रयास में, संयमित और सहज लगती हैं। उनका किरदार शोर नहीं मचाता, लेकिन अपनी मौजूदगी दर्ज कराता है।

संगीत और तकनीकी पक्ष

तनुज टिकू और केतन सोढ़ा का बैकग्राउंड स्कोर भावनाओं को बिना दबाव बनाए उभारता है। युद्ध दृश्य वास्तविक लगते हैं—बिना अनावश्यक नाटकीयता के।

दृष्टिकोण: शोर नहीं, सम्मान

आज की अधिकतर युद्ध फिल्में जहां आक्रामक राष्ट्रवाद का रास्ता चुनती हैं, इक्कीस एक कठिन लेकिन ईमानदार विकल्प अपनाती है। यह फिल्म यह स्वीकार करती है कि युद्ध में सम्मान हो सकता है, भले ही सीमाएं अलग हों। यह विचार हर दर्शक को सहज नहीं लगेगा और शायद फिल्म भी इस असहजता को जानती है—इसीलिए अंत में एक स्पष्ट संदेश देती है, ताकि भावनाओं को गलत दिशा न मिले।

निष्कर्ष: यह जीत नहीं, एक स्मरण है

इक्कीस तब सबसे प्रभावशाली होती है जब वह खुद को “युद्ध फिल्म” साबित करने की कोशिश छोड़ देती है। यह फिल्म हमें यह नहीं बताती कि हम कितने शक्तिशाली हैं, बल्कि यह याद दिलाती है कि हमारी आज़ादी की कीमत कितनी भारी रही है। यह फिल्म गर्व नहीं भरती—यह खाली कर देती है। और वही खालीपन, जो लंबे समय तक भीतर बना रहता है, इक्कीस की सबसे बड़ी सफलता है। यह सिनेमा नहीं, एक शोक-स्मृति है—उस बेटे के लिए, जो लौटकर नहीं आया। उस पिता के लिए, जो उस कमी के साथ जीता रहा। और उस देश के लिए, जो अपने नायकों को याद तो करता है, लेकिन अक्सर चुपचाप।

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‘धुरंधर’ की आंधी में दबी नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्में, बनेगी सबसे बड़ी हिंदी फिल्म!

Dhurandhar Box Office Collection: रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा गर्दा उड़ाया हुआ है कि कोई भी फिल्म इसके आगे टिक नहीं पा रही है। दिसंबर में रिलीज होने के बावजूद फिल्म ने 1 जनवरी को भी जबरदस्त कमाई की और कई बड़ी फिल्मों की सांस फूला दी।

dhurandhar
‘धुरंधर’ ने मचााया तहलका
locationभारत
userअसमीना
calendar02 Jan 2026 11:57 AM
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नए साल 2026 ने कदम रख दिया है लेकिन सिनेमाघरों में अब भी जिस फिल्म ने सबसे ज्यादा तहलका मचाया हुआ है वो है रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर’। पिछले साल दिसंबर में रिलीज होने के बावजूद Dhurandhar का क्रेज नए साल के पहले दिन भी जस का तस बना रहा। 1 जनवरी को नई फिल्म ‘इक्कीस’ के रिलीज होने के बाद भी ‘धुरंधर’ ने मजबूती बनाई रखी और इसी के साथ Dhurandhar ने साल के पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया।

Dhurandhar कर चुकी है 1100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई

‘धुरंधर’ ने पहले ही दुनियाभर में 1100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली है जबकि भारत में फिल्म का कलेक्शन 28 दिनों में 739 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। अब Dhurandhar का अगला लक्ष्य भारत में 800 करोड़ क्लब में शामिल होना है जिसके बाद यह 'पुष्पा 2' को पीछे छोड़ते हुए सबसे बड़ी हिंदी फिल्म बनने की ओर बढ़ जाएगी। हालांकि अभी इस आंकड़े तक पहुंचने में थोड़ा वक्त लगेगा लेकिन फिल्म ने जिस हिसाब से रफ्तार पकड़ी है उसे देखकर लगता है कि Dhurandhar जल्द ही की सबसे बड़ी हिंदी फिल्म बन जाएगी।

‘धुरंधर’ ने की शानदार कमाई

नए साल के दिन कई सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में ‘इक्कीस’ की रिलीज के चलते ‘धुरंधर’ के शोज कम कर दिए गए थे लेकिन इसके बावजूद फिल्म ने जबरदस्त कमाई की। इससे साफ होता है कि ‘धुरंधर’ अब भी ऑडियंस की पहली पसंद बनी हुई है। छुट्टी और वीकेंड के दिनों में फिल्म का कलेक्शन फिर से उछाल मार रहा है जिससे इसकी मजबूती और साफ हो जाती है।

सिनेमाघरों में 29 दिनों से टिकी है ‘धुरंधर’

भारत में फिल्म 29 दिनों से लगातार सिनेमाघरों में टिकी हुई है और हर दिन नए रिकॉर्ड बना रही है। 28वें दिन ‘धुरंधर’ ने हिंदी में 15.75 करोड़ रुपये की कमाई की जो अब तक किसी भी हिंदी फिल्म की इस दिन की सबसे बड़ी कमाई है। इसी के साथ फिल्म ने 28वें दिन सबसे ज्यादा कलेक्शन करने वाली हिंदी फिल्म का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।

‘धुरंधर’ ने कई फिल्मों को चटाई धूल

इतना ही नहीं 28वें दिन की कमाई के मामले में ‘धुरंधर’ ने चार 1000 करोड़ क्लब में शामिल फिल्मों को भी पीछे छोड़ दिया है। पुष्पा 2, बाहुबली 2, जवान और KGF 2 जैसी मेगा ब्लॉकबस्टर फिल्में भी इस दिन ‘धुरंधर’ से कम कलेक्शन कर पाईं। नए साल के पहले दिन भी फिल्म ने डबल डिजिट में कमाई की जिससे यह लगातार 28 दिनों तक डबल डिजिट कलेक्शन करने वाली सबसे बड़ी हिंदी फिल्म बन गई है। यह रिकॉर्ड न तो जवान बना पाई और न ही पुष्पा 2। अगर फिल्म अगले कुछ दिनों तक इसी तरह कमाई करती रही तो एक और ऐतिहासिक रिकॉर्ड इसके नाम हो सकता है।

100 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस

Sacnilk की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘धुरंधर’ ने अपने चौथे हफ्ते में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का बिजनेस किया है। 22वें दिन से लेकर 28वें दिन तक फिल्म ने कुल 106 करोड़ रुपये की कमाई की जो किसी भी हिंदी फिल्म के लिए चौथे हफ्ते में बेहद बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली फिल्मों के भी छूटे पसीने

28वें दिन की कमाई के मामले में ‘धुरंधर’ ने 4 नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली फिल्म ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ को भी पीछे छोड़ दिया है। जहां ‘उरी’ ने 28वें दिन करीब 2 करोड़ रुपये की कमाई की थी वहीं ‘धुरंधर’ का कलेक्शन उससे कई गुना ज्यादा रहा। ‘उरी’ को बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट एक्टर, बेस्ट बैकग्राउंड म्यूजिक और बेस्ट साउंड डिजाइन के लिए नेशनल अवॉर्ड मिल चुके हैं फिर भी बॉक्स ऑफिस पर ‘धुरंधर’ ने उसे पीछे छोड़ दिया।

जनता में Dhurandhar का जबरदस्त क्रेज

फिल्म की इस जबरदस्त सफलता के बीच ‘धुरंधर’ के पार्ट 2 को लेकर भी जबरदस्त एक्साइटमेंट बना हुआ है। जिस तरह से ‘धुरंधर’ नए साल की शुरुआत में भी रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रही है उससे यह साफ हो गया है कि यह फिल्म सिर्फ एक सुपरहिट नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा के इतिहास की सबसे बड़ी फिल्मों में शामिल होने जा रही है। आने वाले दिनों में इसके और बड़े आंकड़े छूने की पूरी संभावना है।

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userअभिजीत यादव
calendar01 Jan 2026 11:09 AM
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Stranger Things Season 5 (Volume-3) : Hawkins नाम के छोटे-से अमेरिकी शहर से उठी रहस्य, डर और दोस्ती की यह दास्तान अब अपने सबसे बड़े और सबसे भावनात्मक मुकाम पर आकर ठहर गई है। Stranger Things Season 5 (Volume-3) के साथ नेटफ्लिक्स की इस आइकॉनिक सीरीज ने दर्शकों को एक ऐसी विदाई दी, जिसमें रोमांच भी है और दिल तोड़ देने वाला सन्नाटा भी। फिनाले ने वही सवाल हवा में टांग दिए, जिन पर फैंस की सांसें अटकी रहीं क्या Eleven की कहानी यहीं खत्म हो गई? क्या Steve Harrington आखिरी जंग से बच पाया? और Will Byers, जो कभी सबसे कमजोर कड़ी माना जाता था, क्या वही इस निर्णायक लड़ाई का असली गेम-चेंजर बनकर उभरा?

फिनाले की पूरी जानकारी

Stranger Things 5 का फिनाले एपिसोड The Right Side Up नाम के साथ सामने आया और यही एपिसोड सीरीज की आख़िरी, सबसे भारी-भरकम कड़ी बन गया। इसे 31 दिसंबर 2025 को दुनियाभर में एक साथ रिलीज़ किया गया, जबकि भारत में दर्शकों ने इसे 1 जनवरी 2026 की सुबह 6:30 बजे स्ट्रीम होते देखा। करीब 2 घंटे 8 मिनट का यह रनटाइम किसी सिनेमाई क्लाइमैक्स जैसा है जहां हर सीन में सस्पेंस की परतें, इमोशन का वजन और आख़िरी लड़ाई की धड़कनें साफ महसूस होती हैं।

क्या Steve Harrington की मौत हो गई?

फिनाले से पहले सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की थी कि कहीं Steve Harrington इस बार बच न पाए,क्योंकि हर सीजन में सबसे बड़ा दांव अक्सर उसी जैसे किरदारों पर लगता रहा है। लेकिन मेकर्स ने आखिरी वक्त पर फैंस की धड़कनों को राहत में बदल दिया। Steve न सिर्फ जिंदा रहता है, बल्कि आख़िरी फ्रेम तक एक सॉलिड फाइटर की तरह खड़ा दिखाई देता है। उसके साथ Will, Mike, Dustin, Lucas और Max भी इस निर्णायक टकराव से बाहर निकल आते हैं। Steve की यह सर्वाइवल फिनाले के भारी माहौल में उम्मीद की एक चमक छोड़ जाती है ।

Eleven की कुर्बानी: क्या El सच में मर गई?

फिनाले की सबसे भारी और दिल चीर देने वाली परत Eleven और Kali (008) की कहानी में खुलती है। Vecna को खत्म करने और Upside Down को हमेशा के लिए मिटाने की कोशिश जब अपने चरम पर पहुंचती है, तभी एक गोली खेल पलट देती है और Kali की मौत इस लड़ाई को निजी, बेहद दर्दनाक बना देती है। इसी उथल-पुथल के बीच जैसे ही Upside Down ढहने लगता है, Eleven अचानक आंखों से ओझल हो जाती है।

क्या Eleven अब भी जिंदा है?

लेकिन कहानी का आख़िरी दरवाज़ा यहीं बंद नहीं होता। फिनाले के अंतिम मिनटों में Mike एक ऐसी थ्योरी रखता है, जो पूरे क्लाइमैक्स की तस्वीर बदल देती है। उसके मुताबिक Eleven और Kali (008) ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके एक भ्रम (illusion) रचाजिससे सबको यही लगा कि Eleven खत्म हो गई। इसी संकेत के साथ यह संभावना भी मजबूत होती है कि Eleven किसी अनजान, सुरक्षित ठिकाने पर छिपकर अब भी ज़िंदा हो सकती है। मेकर्स ने El की किस्मत को जानबूझकर ओपन एंडिंग पर छोड़ दिया है ताकि फैंस के लिए आखिरी फ्रेम के बाद भी एक उम्मीद जिंदा रहे, और Hawkins की कहानी पूरी तरह “खत्म” न लगे।

Will Byers क्यों बना फिनाले की सबसे बड़ी कड़ी?

सीजन-5 यह साफ कर देता है कि Will अब वही डरा-सहमा बच्चा नहीं रहा। Vecna ने उसे कमजोर समझकर चुना था, लेकिन Will की Upside Down के Hive Mind से जुड़ने की क्षमता कहानी का रुख बदल देती है। इशारा मिलता है कि अब सिर्फ Eleven ही नहीं, बल्कि Will भी खास शक्तियों वाला किरदार बन चुका है और यही वजह है कि Vecna की योजना अंततः नाकाम हो जाती है। Stranger Things Season 5 (Volume-3)

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