भगत सिंह का दावा : भाषा भी बन सकती है क्रांति का बड़ा आधार

भारत को आजाद कराने में शहीद-ए-आजम भगत सिंह का बहुत बड़ा योगदान था। सरदार भगत सिंह के विषय में पूरी दुनिया बहुत कुछ जानती है। भगत सिंह के विषय में सब कुछ जानने का दावा करने वाले बड़े-बड़े जानकार भी उनके विषय में एक महत्वपूर्ण बात नहीं जानते।

शहीद-ए-आजम भगत सिंह
शहीद-ए-आजम भगत सिंह
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar23 Mar 2026 01:12 PM
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Bhagat Singh : भारत को आजाद कराने में शहीद-ए-आजम भगत सिंह का बहुत बड़ा योगदान था। सरदार भगत सिंह के विषय में पूरी दुनिया बहुत कुछ जानती है। भगत सिंह के  विषय में सब कुछ जानने का दावा करने वाले बड़े-बड़े जानकार भी उनके विषय में एक महत्वपूर्ण बात नहीं जानते। लोगों को यह नहीं पता कि भगत सिंह भाषा को लेकर बहुत ही सचेत तथा सतर्क रहते थे। भगत सिंह का स्पष्ट मत था कि हमारी भाषा में वह शक्ति मौजूद है जिसके द्वारा भाषा क्रांति का बड़ा आधार बन सकती है। 23 मार्च को सरदार भगत सिंह की पुण्यतिथि मनाई जाती है। सरदार भगत सिंह की पुण्यतिथि को ‘‘शहीद दिवस” के रूप में मनाया जाता है

सरदार भगत सिंह की पुण्यतिथि शहीद दिवस पर यह जानना जरूरी है

सरदार भगत सिंह की पुण्यतिथि पर यह जानना बेहद जरूरी है कि वें भाषा को कितना महत्व देते थे। आपको बता दें कि शहीद-ए-आजम भगत सिंह महान क्रांतिकारी, कुशल लेखक और विचारक भी थे, जिन्होंने अपनी कलम से जन-चेतना जगाने का काम किया। उन्होंने विभिन्न भाषाओं में लिखा, जिसमें हिंदी को भी विशेष महत्व दिया। भगत सिंह की मातृभाषा पंजाबी थी। वे पंजाबी, हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी और संस्कृत में पारंगत थे सभी भाषाओं में सही ढंग से लिख और पढ़ सकते थे। उनका पहला महत्त्वपूर्ण हिंदी निबंध संभवत: 'पंजाब में भाषा और लिपि की समस्या' था, जो उन्होंने मात्र 16-17 वर्ष की उम्र में लिखा। यह निबंध पंजाब हिंदी साहित्य सम्मेलन की प्रतियोगिता के लिए था, जिसमें उन्हें 50 रुपये का प्रथम पुरस्कार मिला। बाद में यह 28 फरवरी, 1933 को 'हिंदी संदेश' में प्रकाशित हुआ इस लेख में भगत सिंह ने पंजाब की भाषाई समस्या के विभिन्न पहलुओं का गहन विश्लेषण किया और भाषा को मजहबी रंग देने पर दुख जताया।

हिंदी भाषा संस्कार में मिली थी भगत सिंह को

भगत सिंह का जन्म 1907 में उस पंजाब में हुआ, जहां पंजाबी और उर्दू का बोलबाला था, लेकिन हिंदी भी प्रिंट मीडिया और हिंदू परिवारों में व्यापक थी। भगत सिंह का परिवार आर्य समाज से जुड़ा था-उनके दादा सरदार अर्जुन सिंह दयानंद सरस्वती के करीबी थे। कई सिख भी आर्य समाज से जुड़े रहे। इसलिए घर, स्कूल और कॉलेज में हिंदी सीखना स्वाभाविक था। दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज में इतिहास के प्रोफेसर डॉ. चंद्रपाल सिंह, जो 'भगत सिंह-रीविजिटेड' किताब के लेखक हैं, बताते हैं कि परिवार में हिंदी की परंपरा पहले से मजबूत थी। उन्होंने कई हिंदी अखबारों और पत्रिकाओं-जैसे, 'प्रताप', 'चांद', 'किरती' आदि में योगदान दिया। छद्म नामों जैसे- 'बलवंत सिंह', 'रणजीत' और 'विद्रोही' से लिखना गिरफ्तारी से बचने का तरीका संकलन नहीं हो सका, जो एक बड़ा नुकसान रहा। 

हिन्दी को हथियार बना लिया था भगत सिंह ने

1925 के आसपास भगत सिंह कानपुर गए, जहां गणेश शंकर विद्यार्थी के अखबार 'प्रताप' में काम किया। पीलखाना में प्रेस के पास रहते हुए उन्होंने हिंदी लेखन को और निखारा। 'चांद' पत्रिका ने शहीदों पर विशेषांक निकाला, जिसमें भगत सिंह ने योगदान दिया। हिंदी में उनकी सरल, लेकिन प्रभावशाली शैली से पाठकों की संख्या बढ़ती गई। 'प्रताप' में रहते हुए उन्होंने रिपोर्टिंग भी की। उनके अधिकांश लेख 'किरती', 'प्रताप' और 'चांद' में छपे, जहां वे क्रांतिकारी विचार, राजनीतिक दर्शन और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर लिखते थे। वह पारंपरिक पत्रकार नहीं थे, लेकिन हिंदी पत्रकारिता में उनका योगदान अमूल्य था, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। भगत सिंह की कलम आज भी प्रेरणा देती है-यह बताती है कि भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम् नहीं, बल्कि क्रांति का हथियार भी हो सकती है। Bhagat Singh



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गर्मी में नवरात्रि व्रत कैसे रखें सेहतमंद, पढ़ें 9 दिन का फुल गाइड

गर्मी के मौसम में व्रत रखते समय केवल पूजा पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं होता बल्कि खान-पान, पानी की मात्रा, नींद और हल्की एक्सरसाइज का भी ध्यान रखना जरूरी है। सही योजना के बिना लंबे समय तक उपवास रखना शरीर को थका सकता है और डिहाइड्रेशन, कमजोरी या चक्कर जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।

Chaitra Navratri Kab hai
चैत्र नवरात्रि कब है
locationभारत
userअसमीना
calendar19 Mar 2026 11:41 AM
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नवरात्रि हिंदू धर्म का एक पवित्र पर्व है जिसमें मां दुर्गा की आराधना के साथ नौ दिनों तक व्रत रखा जाता है। यह केवल भक्ति का समय नहीं है बल्कि आत्मशुद्धि और संयम का भी अवसर है। साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाई जाएगी। गर्मी के मौसम में व्रत रखते समय केवल पूजा पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं होता बल्कि खान-पान, पानी की मात्रा, नींद और हल्की एक्सरसाइज का भी ध्यान रखना जरूरी है। सही योजना के बिना लंबे समय तक उपवास रखना शरीर को थका सकता है और डिहाइड्रेशन, कमजोरी या चक्कर जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।

नवरात्रि का कैलेंडर

चैत्र नवरात्रि 2026 में 19 मार्च गुरुवार से शुरू होकर 27 मार्च शुक्रवार तक चलेगी। इन नौ दिनों में व्रत रखने वाले लोग हल्का और पोषक भोजन लेकर खुद को एनर्जेटिक बनाए रखते हैं। यह समय भक्ति के साथ-साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखने का भी होता है।

व्रत के दौरान क्या खाएं?

गर्मी में व्रत रखते समय ऐसे फूड्स का सेवन करें जो शरीर को ऊर्जा दें और कमजोरी से बचाएं। फल जैसे केला, सेब, पपीता और अनार शरीर में आवश्यक मिनरल्स और विटामिन्स प्रदान करते हैं। ड्राई फ्रूट्स जैसे बादाम, काजू और किशमिश भी ऊर्जा बढ़ाते हैं। इसके अलावा साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़े का आटा व्रत के दौरान पोषण का अच्छा स्रोत हैं। दही, दूध और पनीर का सेवन प्रोटीन की कमी को पूरा करता है और शरीर को ताजगी देता है।

किन चीजों से बचें?

व्रत के दौरान तला-भुना या ज्यादा मसालेदार खाना, अत्यधिक मीठा और अधिक नमक से परहेज करें। चाय और कॉफी का अत्यधिक सेवन भी शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है और डिहाइड्रेशन का कारण बन सकता है। इन चीजों से बचकर आप व्रत के दौरान भी सेहतमंद और एनर्जेटिक रह सकते हैं।

पानी और हाइड्रेशन का महत्व

गर्मी के मौसम में व्रत रखते समय पानी का पर्याप्त सेवन बेहद जरूरी है। दिनभर में छोटे-छोटे अंतराल पर पानी पीते रहें और नारियल पानी या फ्रूट जूस जैसी नेचुरल ड्रिंक्स का सेवन करें। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी और थकान कम महसूस होगी।

हल्की एक्सरसाइज और नींद

नौ दिन का उपवास रखते समय हल्की एक्सरसाइज जैसे वॉक या योग करें। यह शरीर को सक्रिय रखती है और मानसिक संतुलन भी बनाए रखती है। साथ ही पर्याप्त नींद लेना जरूरी है जिससे शरीर खुद को रिकवर कर सके और दिनभर एनर्जेटिक महसूस हो।

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Eid 2026: भारत में कब है ईद-उल-फितर? आ गई तारीख!

Eid Kab hai: ईद-उल-फितर 2026 का इंतजार भारत में हर मुस्लिम परिवार में खास उत्साह के साथ किया जा रहा है। यह त्योहार रमजान के पाक महीने के समापन का प्रतीक है जब पूरे महीने मुसलमान रोजा रखते हैं और इबादत करते हैं।

Eid-Ul-Fitr
भारत में ईद-उल-फितर कब मनाई जाएगी
locationभारत
userअसमीना
calendar18 Mar 2026 12:33 PM
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ईद-उल-फितर 2026 का इंतजार भारत में हर मुस्लिम परिवार में खास उत्साह के साथ किया जा रहा है। यह त्योहार रमजान के पाक महीने के समापन का प्रतीक है जब पूरे महीने मुसलमान रोजा रखते हैं और इबादत करते हैं। इस साल लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईद 20 मार्च को होगी या 21 मार्च को। इसका जवाब सीधे तौर पर चांद के दिखने पर निर्भर करता है।

ईद-उल-फितर कब मनाई जाएगी?

ईद-उल-फितर की तारीख इस्लामिक कैलेंडर और चांद के दीदार पर निर्भर करती है। यदि 19 मार्च की शाम को चांद दिखाई देता है तो भारत में ईद 20 मार्च को मनाई जाएगी। वहीं अगर चांद 20 मार्च की रात को दिखे तो ईद 21 मार्च को होगी। ईद के दिन रमजान का महीना समाप्त होता है और इबादत का नया महीना शव्वाल शुरू होता है।

ईद-उल-फितर का महत्व

ईद सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि भाईचारे और खुशियों का प्रतीक है। इस दिन मुसलमान अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं, मस्जिदों में नमाज अदा करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और गरीबों की मदद के लिए फितरा देते हैं। यह दिन पूरे परिवार और समुदाय को एक साथ लाने का अवसर भी है।

हर साल ईद की तारीख में बदलाव क्यों होता है?

ईद की तारीख हर साल बदलती रहती है और यह सवाल आम है कि ऐसा क्यों होता है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं चंद्र कैलेंडर और चांद के दीदार की स्थिति।

चंद्र कैलेंडर और ईद

दुनिया में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाला ग्रेगोरियन कैलेंडर सूर्य पर आधारित होता है जबकि इस्लामिक कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होता है। चंद्र कैलेंडर सूर्य कैलेंडर से लगभग 10-11 दिन छोटा होता है। यही कारण है कि हर साल ईद पिछले साल की तुलना में 10-11 दिन पहले आती है।

चांद दिखने पर तय होती है तारीख?

ईद की अंतिम तारीख स्थानीय धार्मिक कमेटी या रुअत-ए-हिलाल कमेटी द्वारा चांद दिखाई देने के बाद ही तय की जाती है। चांद का दीदार मौसम और भौगोलिक स्थिति पर भी निर्भर करता है। इसी वजह से दिल्ली, मुंबई और केरल जैसे शहरों में कभी-कभी ईद का दिन एक-दूसरे से अलग हो सकता है।

क्यों है यह जानकारी जरूरी?

ईद के दिन और उसकी तैयारी हर परिवार के लिए खास होती है। सही तारीख का पता होना जरूरी है ताकि नमाज, दान और उत्सव की तैयारी सही समय पर हो सके। चांद के दीदार की यह प्रक्रिया न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि पूरे समुदाय को एक साथ जोड़ने का भी काम करती है।