Jyanti Special : बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने दिया था देश को राष्ट्रीय गीत 'वन्दे मातरम्'!
भारत
चेतना मंच
27 Jun 2022 04:01 PM
विनय संकोचीराष्ट्रीय गीत 'वन्दे मातरम्' (National song 'Vande Mataram') को गाने-गुनगुनाने वाले असंख्य भारतीयों में बड़ी संख्या उन लोगों की भी है, जो इस अमर गीत के रचयिता के नाम से अनभिज्ञ हैं। बांग्ला भाषा के प्रख्यात उपन्यासकार, गद्यकार और कवि बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने भारत के राष्ट्रीय गीत की रचना की थी, जिनकी आज जयंती है।
बंकिम चन्द्र द्वारा रचित 'वन्दे मातरम्' वह रचना है, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारियों की प्रेरणा स्रोत बनी, आंदोलन को ऊर्जा दी। एक सच यह भी है कि बांग्ला साहित्य में जनमानस तक पैठ बनाने वालों में बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय संभवतः पहले साहित्यकार थे।
बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का जन्म 27 जून 1838 में चौबीस परगना की कंठलपारा में एक परंपरागत संपन्न बंगाली परिवार में हुआ था। 'बंकिम चंद्र' शब्द का अर्थ है - उज्जवल पखवाड़े के दूसरे दिन का चंद्रमा। बंकिम की प्रारंभिक शिक्षा में मिदनापुर में हुई। पाठ्य पुस्तकों के अतिरिक्त अन्य किताबें पढ़ना बंकिम को पसंद था। बड़ी बात यह थी कि संस्कृत के अध्ययन में उनकी विशेष रूचि थी। आगे चलकर उन्होंने 'वन्दे मातरम्' गीत संस्कृत में ही रचा। मिदनापुर के बाद छः वर्ष हुगली में शिक्षा प्राप्त करने के बाद बंकिम ने कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में प्रवेश लिया। 1857 में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन के विरुद्ध एक जबरदस्त विद्रोह हुआ, लेकिन बंकिम ने अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए 1859 में बीए की परीक्षा पास की। बंकिम प्रेसीडेंसी कॉलेज से बीए पास करने वाले पहले भारतीय थे। कोलकाता के लेफ्टिनेंट गवर्नर ने उसी साल उन्हें डिप्टी कलेक्टर नियुक्त किया। बंकिम 32 साल सरकारी सेवा में रहकर 1891 में सेवानिवृत्त हुए। सरकारी सेवा अपनी जगह थी और देश के प्रति भावना अपनी जगह। बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने सरकारी सेवा में रहते हुए साहित्य सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया था। बंकिम की प्रथम प्रकाशित रचना 'राजमोहन्स वाइफ' थी, जो अंग्रेजी में लिखी गई थी। उनकी पहली प्रकाशित बांग्ला कृति 'दुर्गेश नंदिनी' थी। बंकिम चंद्र ने बंद दर्शन नाम से पत्रिका भी निकाली थी।
उत्तरी बंगाल में 1773 के सन्यासी विद्रोह पर बंकिम चन्द्र ने 1882 में 'आनंद मठ' की रचना की, जो एक राजनीतिक उपन्यास था। इस क्रांतिकारी उपन्यास में उन्होंने कई वर्ष पूर्व कविता के रूप में लिखे 'वन्दे मातरम्' गीत को भी सम्मिलित किया। उपन्यास 'आनंद मठ' तो चर्चा में रहा ही लेकिन देखते ही देखते 'वन्दे मातरम्' गीत राष्ट्रवाद का प्रतीक बन गया। गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ने बंकिम के 'वन्दे मातरम्' को संगीतबद्ध किया था। बंकिम चन्द्र के निधन के 12 वर्ष बाद महान क्रांतिकारी बिपिन चंद्र पाल ने 'वन्दे मातरम्' नाम से एक राजनीतिक पत्रिका भी निकाली थी।
सन् 1937 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 'वन्दे मातरम्' गीत के दो छंदों को 'राष्ट्रीय गीत' के रूप में स्वीकार किया था। देश आजाद होने के बाद 24 जनवरी 1950 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 'वन्दे मातरम्' को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिए जाने की घोषणा की थी। तभी से बंकिम चन्द्र द्वारा रचित यह गीत राष्ट्रीयता का पाठ पढ़ाता चला आ रहा है।
बंकिम चन्द्र का विवाह तब हुआ जब वह केवल 11 वर्ष के थे और उनकी पत्नी की आयु मात्र 5 वर्ष थी। जब बंकिम 22 वर्ष के थे, तब उनकी पत्नी का स्वर्गवास हो गया। कुछ समय बाद उन्होंने फिर से विवाह किया।
बंकिम चन्द्र के प्रसिद्ध उपन्यासों में दुर्गेश नंदिनी, कपाल कुंडला, मृणालिनी, बिष वृक्ष, इंदिरा, चंद्रशेखर, राधारानी, रजनी, कृष्णकांतेर उइल, राजसिंह, आनंद मठ, देबी चौधुरानी, सीताराम और राजमोहन की पत्नी आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त बंकिम चन्द्र के प्रबंध ग्रंथ हैं - कमलाकांतेर दप्तर, लोक रहस्य, कृष्ण चरित्र, बिज्ञान रहस्य, बिबिध समालोचना, साम्य आदि। उनकी अन्य रचनाएं ललिता, धर्म तत्व, सहज रचना शिक्षा, श्रीमद्भगवदगीता, कबिता पुस्तक, विचित्र प्रबंधन आदि शामिल हैं। बंकिम के उपन्यासों का भारत की लगभग सभी प्रमुख भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है। देश को राष्ट्रीय गीत देने वाले बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को शत-शत नमन।