उत्तर प्रदेश बना ग्रोथ इंजन, टॉप 10 कर्जदार राज्यों की लिस्ट से बाहर
Indian Economy: भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन RBI की FY2025 रिपोर्ट बताती है कि कई बड़े राज्यों पर कर्ज का भारी बोझ है। पश्चिम बंगाल, पंजाब, बिहार, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा सिर्फ ब्याज भुगतान में खर्च हो रहा है।

भारतीय अर्थव्यवस्था 2026 में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। IMF और वर्ल्ड बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भारत की ग्रोथ को मजबूत बताया है लेकिन इसी तेज विकास के बीच कई भारतीय राज्यों पर कर्ज का भारी बोझ भी सामने आया है। खास बात यह है कि RBI की इस टॉप 10 लिस्ट में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) का नाम शामिल नहीं है जो देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक होने के बावजूद एक बड़ी राहत की खबर मानी जा रही है।
किन राज्यों पर सबसे ज्यादा कर्ज का दबाव?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के FY2025 के आंकड़ों के मुताबिक, देश के कई बड़े राज्यों को अपने टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा सिर्फ कर्ज के ब्याज भुगतान में खर्च करना पड़ रहा है। लेकिन उत्तर प्रदेश इस टॉप-10 कर्ज में डूबे राज्यों की सूची से बाहर है जबकि पश्चिम बंगाल, पंजाब, बिहार और केरल जैसे राज्य इसमें शामिल हैं।
पश्चिम बंगाल सबसे ऊपर
FY2025 में पश्चिम बंगाल पर सबसे ज्यादा ब्याज भुगतान का बोझ रहा। राज्य ने जहां 1.09 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू जुटाया वहीं 45 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा सिर्फ ब्याज चुकाने में खर्च कर दिए यानी कुल राजस्व का करीब 42%। यहां भी ध्यान देने वाली बात यह है कि उत्तर प्रदेश इस तरह के भारी ब्याज बोझ वाले राज्यों में शामिल नहीं है।
पंजाब और बिहार भी लिस्ट में लेकिन UP नहीं
दूसरे स्थान पर पंजाब रहा जिसने अपने कुल रेवेन्यू का 34% हिस्सा ब्याज भुगतान में खर्च किया। वहीं बिहार ने भी 33% राजस्व सिर्फ कर्ज चुकाने में लगा दिया। इन दोनों राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश का नाम इस हाई-डेट लिस्ट में न होना उसकी बेहतर फाइनेंशियल मैनेजमेंट को दिखाता है।
केरल और तमिलनाडु पर भी कर्ज का असर
केरल ने FY2025 में 1.03 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू जुटाया लेकिन 28% हिस्सा ब्याज में चला गया। तमिलनाडु जो टैक्स कलेक्शन में मजबूत माना जाता है वहां भी 28% रेवेन्यू ब्याज भुगतान में खर्च हुआ। इसके उलट उत्तर प्रदेश इन कर्ज-ग्रस्त राज्यों में शामिल नहीं है जो एक बड़ा पॉजिटिव संकेत है।
हरियाणा, राजस्थान और आंध्र प्रदेश की मुश्किलें
हरियाणा ने 27%, राजस्थान ने करीब 38,000 करोड़ रुपये और आंध्र प्रदेश ने 29,000 करोड़ रुपये ब्याज भुगतान में खर्च किए। ये सभी राज्य टॉप-10 कर्ज में डूबे राज्यों में आते हैं लेकिन उत्तर प्रदेश का नाम इस पूरी सूची में कहीं नहीं है जो उसे बाकी बड़े राज्यों से अलग खड़ा करता है।
मध्य प्रदेश और कर्नाटक भी टॉप-10 में
मध्य प्रदेश ने अपने कुल रेवेन्यू का 22% और कर्नाटक ने करीब 19% हिस्सा ब्याज भुगतान में खर्च किया। इसके बावजूद ये दोनों राज्य भी कर्ज के दबाव में हैं। यहां फिर साफ हो जाता है कि उत्तर प्रदेश इस टॉप-10 कर्ज संकट वाली सूची से बाहर है।
उत्तर प्रदेश क्यों नहीं है इस लिस्ट में?
विशेषज्ञों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश का इस लिस्ट में शामिल न होना बेहतर रेवेन्यू मैनेजमेंट, नियंत्रित कर्ज नीति और केंद्र सरकार की योजनाओं के सही इस्तेमाल का नतीजा हो सकता है। जहां कई राज्य अपने विकास बजट का बड़ा हिस्सा ब्याज में गंवा रहे हैं वहीं उत्तर प्रदेश अपेक्षाकृत संतुलित वित्तीय स्थिति में नजर आता है। RBI के FY2025 के आंकड़े साफ दिखाते हैं कि भारत की तेज ग्रोथ के बावजूद कई राज्य कर्ज के बोझ से दबे हुए हैं। पश्चिम बंगाल, पंजाब, बिहार, केरल, तमिलनाडु, हरियाणा, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और कर्नाटक इस लिस्ट में शामिल हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश का इस सूची में शामिल न होना उसके लिए एक बड़ी आर्थिक उपलब्धि मानी जा सकती है।
भारतीय अर्थव्यवस्था 2026 में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। IMF और वर्ल्ड बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भारत की ग्रोथ को मजबूत बताया है लेकिन इसी तेज विकास के बीच कई भारतीय राज्यों पर कर्ज का भारी बोझ भी सामने आया है। खास बात यह है कि RBI की इस टॉप 10 लिस्ट में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) का नाम शामिल नहीं है जो देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक होने के बावजूद एक बड़ी राहत की खबर मानी जा रही है।
किन राज्यों पर सबसे ज्यादा कर्ज का दबाव?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के FY2025 के आंकड़ों के मुताबिक, देश के कई बड़े राज्यों को अपने टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा सिर्फ कर्ज के ब्याज भुगतान में खर्च करना पड़ रहा है। लेकिन उत्तर प्रदेश इस टॉप-10 कर्ज में डूबे राज्यों की सूची से बाहर है जबकि पश्चिम बंगाल, पंजाब, बिहार और केरल जैसे राज्य इसमें शामिल हैं।
पश्चिम बंगाल सबसे ऊपर
FY2025 में पश्चिम बंगाल पर सबसे ज्यादा ब्याज भुगतान का बोझ रहा। राज्य ने जहां 1.09 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू जुटाया वहीं 45 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा सिर्फ ब्याज चुकाने में खर्च कर दिए यानी कुल राजस्व का करीब 42%। यहां भी ध्यान देने वाली बात यह है कि उत्तर प्रदेश इस तरह के भारी ब्याज बोझ वाले राज्यों में शामिल नहीं है।
पंजाब और बिहार भी लिस्ट में लेकिन UP नहीं
दूसरे स्थान पर पंजाब रहा जिसने अपने कुल रेवेन्यू का 34% हिस्सा ब्याज भुगतान में खर्च किया। वहीं बिहार ने भी 33% राजस्व सिर्फ कर्ज चुकाने में लगा दिया। इन दोनों राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश का नाम इस हाई-डेट लिस्ट में न होना उसकी बेहतर फाइनेंशियल मैनेजमेंट को दिखाता है।
केरल और तमिलनाडु पर भी कर्ज का असर
केरल ने FY2025 में 1.03 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू जुटाया लेकिन 28% हिस्सा ब्याज में चला गया। तमिलनाडु जो टैक्स कलेक्शन में मजबूत माना जाता है वहां भी 28% रेवेन्यू ब्याज भुगतान में खर्च हुआ। इसके उलट उत्तर प्रदेश इन कर्ज-ग्रस्त राज्यों में शामिल नहीं है जो एक बड़ा पॉजिटिव संकेत है।
हरियाणा, राजस्थान और आंध्र प्रदेश की मुश्किलें
हरियाणा ने 27%, राजस्थान ने करीब 38,000 करोड़ रुपये और आंध्र प्रदेश ने 29,000 करोड़ रुपये ब्याज भुगतान में खर्च किए। ये सभी राज्य टॉप-10 कर्ज में डूबे राज्यों में आते हैं लेकिन उत्तर प्रदेश का नाम इस पूरी सूची में कहीं नहीं है जो उसे बाकी बड़े राज्यों से अलग खड़ा करता है।
मध्य प्रदेश और कर्नाटक भी टॉप-10 में
मध्य प्रदेश ने अपने कुल रेवेन्यू का 22% और कर्नाटक ने करीब 19% हिस्सा ब्याज भुगतान में खर्च किया। इसके बावजूद ये दोनों राज्य भी कर्ज के दबाव में हैं। यहां फिर साफ हो जाता है कि उत्तर प्रदेश इस टॉप-10 कर्ज संकट वाली सूची से बाहर है।
उत्तर प्रदेश क्यों नहीं है इस लिस्ट में?
विशेषज्ञों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश का इस लिस्ट में शामिल न होना बेहतर रेवेन्यू मैनेजमेंट, नियंत्रित कर्ज नीति और केंद्र सरकार की योजनाओं के सही इस्तेमाल का नतीजा हो सकता है। जहां कई राज्य अपने विकास बजट का बड़ा हिस्सा ब्याज में गंवा रहे हैं वहीं उत्तर प्रदेश अपेक्षाकृत संतुलित वित्तीय स्थिति में नजर आता है। RBI के FY2025 के आंकड़े साफ दिखाते हैं कि भारत की तेज ग्रोथ के बावजूद कई राज्य कर्ज के बोझ से दबे हुए हैं। पश्चिम बंगाल, पंजाब, बिहार, केरल, तमिलनाडु, हरियाणा, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और कर्नाटक इस लिस्ट में शामिल हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश का इस सूची में शामिल न होना उसके लिए एक बड़ी आर्थिक उपलब्धि मानी जा सकती है।












