इस कार्रवाई के बाद जेल महकमे में हड़कंप है और इसकी गूंज ग्रेटर नोएडा तक सुनाई दे रही है, जहां इस प्रकरण को कानून-व्यवस्था और प्रक्रिया की पारदर्शिता से जोड़कर देखा जा रहा है।

Greater Noida News : उत्तर प्रदेश के बांदा जिला जेल से रवींद्र नागर उर्फ रवि काना की रिहाई को लेकर उठे विवाद ने कारागार विभाग को कड़े कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। मामले में जिला जेल के जेलर के.पी. यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि जेल अधीक्षक के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद जेल महकमे में हड़कंप है और इसकी गूंज ग्रेटर नोएडा तक सुनाई दे रही है, जहां इस प्रकरण को कानून-व्यवस्था और प्रक्रिया की पारदर्शिता से जोड़कर देखा जा रहा है।
मामला उजागर होते ही डीजी जेल पी.सी. मीणा ने इसे हल्के में लेने के बजाय तुरंत जांच के आदेश दिए और प्रकरण की जिम्मेदारी प्रयागराज रेंज के डीआईजी जेल को सौंप दी। शुरुआती जांच में रिहाई की पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और साफ लापरवाही के संकेत मिलने के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। इन्हीं प्राथमिक निष्कर्षों के आधार पर बांदा जेल के जेलर के.पी. यादव को निलंबित कर दिया गया, जबकि बाकी जिम्मेदारियों की कड़ी जांच अब आगे बढ़ाई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, रवि काना की रिहाई को लेकर अब आरोपों की परतें गहराती जा रही हैं। विभागीय सूत्रों का दावा है कि रिहाई की पूरी प्रक्रिया तय नियमों और मानक प्रक्रियाओं (SOP) के उलट आगे बढ़ाई गई, इसलिए जांच को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। जांच एजेंसी का फोकस अब तीन अहम बिंदुओं पर है रिहाई आदेशों के अनुपालन में चूक किस स्तर पर हुई, किस अधिकारी/कर्मचारी ने किस फाइल को किस आधार पर आगे बढ़ाया, और आखिर ऐसी कौन-सी लापरवाही या भूमिका रही जिसने यह स्थिति पैदा कर दी। कारागार प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जांच पूरी होते ही दोष तय करने में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी और उत्तर प्रदेश में जो भी जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। Greater Noida News