Friday, 21 June 2024

कट्टरपंथ का क्रूर चेहरा, जिसने एक देश को मार दिया भूखा

Afghanistan News : कट्टरपंथ चाहे किसी भी प्रकार हो, कट्टरपंथ हमेशा नुकसानदायक होता है। धर्म का कट्टरपंथ तो सबसे ज्यादा खतरनाक…

कट्टरपंथ का क्रूर चेहरा, जिसने एक देश को मार दिया भूखा

Afghanistan News : कट्टरपंथ चाहे किसी भी प्रकार हो, कट्टरपंथ हमेशा नुकसानदायक होता है। धर्म का कट्टरपंथ तो सबसे ज्यादा खतरनाक है। आज हम आपको बताएंगे कि कट्टरपंथ व्यवस्था ने अच्छे-खासे देश को बर्बाद करके रख दिया है। कुछ साल पहले जो देश खूब प्रगति कर रहा था। वह देश कट्टरपन के कारण भूख से त्राहि-त्राहि कर रहा है।

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भारत का पड़ोसी है देश

भारत के पड़ोस में एक देश है जिसे अफगानिस्तान कहते है। अफगानिस्तान एक समय में भारतवर्ष का ही हिस्सा था। भारत के प्रसिद्ध गुर्जर सम्राट राजा मिहिर भोज का राज्य अफगानिस्तान तक फैला हुआ था। इसी अफगानिस्तान की हालत आज इतनी बदतर हो गयी है कि वहां चारों तरफ भूख, बंजर खेत और आंखों में आंसुओं के अलावा कुछ नजर नहीं आता। अफगानिस्तान को जानने वाले विशेषज्ञों की इस देश की दुर्दशा को लेकर अलग-अलग राय है। अधिकतर विशेषज्ञों की राय है कि वहां फैले धार्मिक कट्टरवाद के कारण यह दुर्दशा हुई है। हम यहां आपको अफगानिस्तान के ताजा हालात से रू-ब-रू करा रहे हैं।

34 प्रांतों में भयंकर सूखा

जलवायु परिवर्तन के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील देशों में से एक अफगानिस्तान वर्षों से सूखे से जूझ रहा है, जिसके कारण कई गांव विस्थापित हो गए, तो कई बच्चे कुपोषण से ग्रस्त हैं। देश के 34 प्रांतों में से तीन चौथाई हिस्से में लोग भयंकर सूखे का सामना कर रहे हैं, जबकि देश के कुछ कोने इस समस्या से अब भी अछूते हैं। तालिबान से बहुत कम सहायता मिलने और अंतरराष्ट्रीय सहायता लगातार कम होने के बावजूद भी इन लोगों को भरोसा है कि एक दिन पानी जरूर आएगा। कई लोगों को यह विश्वास है कि उनकी भूमि पहले की तरह हरी-भरी हो जाएगी।

लेकिन जहां तक नजर जा सकती है, अभी रेत का एक मंजर ही दिखाई देता है। सूखे तटों पर मायूस नावें ठिठकी हैं। शुष्क धरती के नीचे से कभी-कभार जो पानी निकलता है, वह खारा होने के कारण पीने लायक तो नहीं ही होता, इससे लोगों के हाथ भी फट जाते हैं। सुबह जब लोग सोकर उठते हैं, तो देखते हैं कि उनके साथ का एक और परिवार गांव छोडक़र जा चुका है। अगले गांव के सभी लोग नौकरी, भोजन व अन्य संसाधनों की तलाश में गांव छोडक़र चले गए हैं। चखांसूर जिले में 40 में से केवल चार परिवार बचे हैं, जिसमें आठ बच्चों के पिता अली इतने गरीब हैं कि कर्ज से खरीदे गए आटे से परिवार गुजारा कर रहा है। अली कहते हैं कि मेरे पास कोई चारा नहीं है, मैं खुदा की रहमत्त की प्रतीक्षा कर रहा हूं, क्योंकि मुझे पानी आने की उम्मीद है। 30 वर्षीय खंजर कुचाई कुछ वर्षों पहले वापस स्कूल जाने की सोच रहा  था, लेकिन अब हालात इतने खराब हैं कि बह एक-एक दिन जीवित रहने की मशक्कत कर रहा है। मोंडो कहती है, मैंने सूख में अपने दोनों बच्चे खो दिए। एक बच्चे का गर्भपात करा दिया और दूसरा भूख से मर गया। मेरा नौ महीने का बच्चा हमेशा भूखा रहता है, क्योंकि हम उसे दूध नहीं दे सकते। अस्पताल के पास मोंडो समेत अन्य कमजोर माताएं भूखे बच्चों को गोद में लिए खाना मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रही थीं। अफगानिस्तान में गर्म, शुष्क सर्दी के कारण जो बदलाव हुए हैं, उससे वहां रह रहे लोग पानी की एक-एक बूंद और दाने-दाने के लिए तरस रहे हैं। 29 वर्षीय सुहराब काशानी कहते हैं, हमारी इस जगह के साथ कई यादें जुड़ी हैं, क्योंकि यह जगह कभी हरी-भरी थी। हम बस पानी के इंतजार में अपने दिन-रात यहां जैसे-तैसे काट रहे हैं।

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