सेवा तीर्थ बना सत्ता का नया पावर सेंटर, जानिए PMO के नए दफ्तर की खास बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (शुक्रवार) शाम नए प्रधानमंत्री कार्यालय की इमारत सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन का उद्घाटन करेंगे। बता दें कि इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय का प्रमुख कामकाज धीरे-धीरे साउथ ब्लॉक से हटकर इसी नए परिसर से संचालित होगा।

Seva Teerth : देश की सत्ता और प्रशासन का सबसे अहम केंद्र अब नए पते पर शिफ्ट होने जा रहा है। शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 से प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का संचालन ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक के बजाय दिल्ली के दारा शिकोह रोड पर बने नए परिसर सेवा तीर्थ से होगा। करीब 2.26 लाख वर्ग फुट में फैला यह परिसर नीति-निर्णय की गति, सुरक्षा समन्वय और प्रशासनिक कामकाज को एक छत के नीचे लाने के मकसद से तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (शुक्रवार) शाम नए प्रधानमंत्री कार्यालय की इमारत सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन का उद्घाटन करेंगे। बता दें कि इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय का प्रमुख कामकाज धीरे-धीरे साउथ ब्लॉक से हटकर इसी नए परिसर से संचालित होगा। सेवा तीर्थ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ-साथ कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) को भी जगह दी गई है। पहले ये प्रमुख संस्थान अलग-अलग स्थानों पर थे, जिससे उच्चस्तरीय बैठकों और समन्वय में समय लगता था। अब इसी परिसर में कैबिनेट मीटिंग आयोजित करना भी ज्यादा सहज हो जाएगा।
कितना खर्च आया और क्या है ढांचा?
प्रधानमंत्री कार्यालय को ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट करने के पीछे मकसद सिर्फ पता बदलना नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की रफ्तार और व्यवस्था को नया ढांचा देना बताया जा रहा है। इससे प्रधानमंत्री के आवागमन को ज्यादा सुव्यवस्थित रखने के साथ-साथ विजय चौक और आसपास के इलाकों में बार-बार होने वाली ट्रैफिक असुविधा में भी कमी आने की उम्मीद है। विजय चौक के नजदीक तैयार इस आधुनिक परिसर पर करीब 1,189 करोड़ रुपये की लागत आई है। यहां कामकाज को बेहतर समन्वय के साथ चलाने के लिए तीन प्रमुख भवन बनाए गए हैं। सेवा तीर्थ-1 में प्रधानमंत्री कार्यालय, सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ-3 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) व राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के दफ्तर संचालित होंगे।
‘सेवा तीर्थ’ की हाईटेक खूबियां
नए परिसर को भविष्य की सरकारी कार्यसंस्कृति को ध्यान में रखकर पूरी तरह टेक्नोलॉजी-फ्रेंडली रूप में विकसित किया गया है। यहां हाई-स्पीड इंटरनेट के साथ पेपरलेस वर्किंग को बढ़ावा देने वाले डिजिटल आर्काइव्स तैयार किए गए हैं, ताकि दस्तावेजों का प्रबंधन तेज और सुरक्षित हो सके। बैठकों के लिए अत्याधुनिक तकनीक से लैस कॉन्फ्रेंस रूम बनाए गए हैं, वहीं सुरक्षा और निगरानी के लिहाज से स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम और मजबूत मॉनिटरिंग नेटवर्क तैनात है। इसके अलावा एडवांस्ड एनर्जी रिस्पॉन्स/इन्फ्रास्ट्रक्चर के जरिए पूरे परिसर को ऊर्जा-कुशल और ऑपरेशनल रूप से स्मार्ट बनाया गया है।
साउथ ब्लॉक में आज आखिरी कैबिनेट बैठक
इसी बीच, साउथ ब्लॉक स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में आज कैबिनेट की आखिरी और ऐतिहासिक बैठक होने जा रही है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। यह भवन करीब 80 वर्षों से देश के शासन का प्रतीक रहा है। इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि साउथ ब्लॉक के इसी कार्यालय में 15 अगस्त 1947 को पहली कैबिनेट बैठक हुई थी, जिसकी अध्यक्षता भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी। अब 13 फरवरी 2026 की बैठक के साथ यह अध्याय समापन की ओर बढ़ेगा और सत्ता का औपचारिक संचालन ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्रित हो जाएगा। Seva Teerth
Seva Teerth : देश की सत्ता और प्रशासन का सबसे अहम केंद्र अब नए पते पर शिफ्ट होने जा रहा है। शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 से प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का संचालन ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक के बजाय दिल्ली के दारा शिकोह रोड पर बने नए परिसर सेवा तीर्थ से होगा। करीब 2.26 लाख वर्ग फुट में फैला यह परिसर नीति-निर्णय की गति, सुरक्षा समन्वय और प्रशासनिक कामकाज को एक छत के नीचे लाने के मकसद से तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (शुक्रवार) शाम नए प्रधानमंत्री कार्यालय की इमारत सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन का उद्घाटन करेंगे। बता दें कि इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय का प्रमुख कामकाज धीरे-धीरे साउथ ब्लॉक से हटकर इसी नए परिसर से संचालित होगा। सेवा तीर्थ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ-साथ कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) को भी जगह दी गई है। पहले ये प्रमुख संस्थान अलग-अलग स्थानों पर थे, जिससे उच्चस्तरीय बैठकों और समन्वय में समय लगता था। अब इसी परिसर में कैबिनेट मीटिंग आयोजित करना भी ज्यादा सहज हो जाएगा।
कितना खर्च आया और क्या है ढांचा?
प्रधानमंत्री कार्यालय को ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट करने के पीछे मकसद सिर्फ पता बदलना नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की रफ्तार और व्यवस्था को नया ढांचा देना बताया जा रहा है। इससे प्रधानमंत्री के आवागमन को ज्यादा सुव्यवस्थित रखने के साथ-साथ विजय चौक और आसपास के इलाकों में बार-बार होने वाली ट्रैफिक असुविधा में भी कमी आने की उम्मीद है। विजय चौक के नजदीक तैयार इस आधुनिक परिसर पर करीब 1,189 करोड़ रुपये की लागत आई है। यहां कामकाज को बेहतर समन्वय के साथ चलाने के लिए तीन प्रमुख भवन बनाए गए हैं। सेवा तीर्थ-1 में प्रधानमंत्री कार्यालय, सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ-3 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) व राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के दफ्तर संचालित होंगे।
‘सेवा तीर्थ’ की हाईटेक खूबियां
नए परिसर को भविष्य की सरकारी कार्यसंस्कृति को ध्यान में रखकर पूरी तरह टेक्नोलॉजी-फ्रेंडली रूप में विकसित किया गया है। यहां हाई-स्पीड इंटरनेट के साथ पेपरलेस वर्किंग को बढ़ावा देने वाले डिजिटल आर्काइव्स तैयार किए गए हैं, ताकि दस्तावेजों का प्रबंधन तेज और सुरक्षित हो सके। बैठकों के लिए अत्याधुनिक तकनीक से लैस कॉन्फ्रेंस रूम बनाए गए हैं, वहीं सुरक्षा और निगरानी के लिहाज से स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम और मजबूत मॉनिटरिंग नेटवर्क तैनात है। इसके अलावा एडवांस्ड एनर्जी रिस्पॉन्स/इन्फ्रास्ट्रक्चर के जरिए पूरे परिसर को ऊर्जा-कुशल और ऑपरेशनल रूप से स्मार्ट बनाया गया है।
साउथ ब्लॉक में आज आखिरी कैबिनेट बैठक
इसी बीच, साउथ ब्लॉक स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में आज कैबिनेट की आखिरी और ऐतिहासिक बैठक होने जा रही है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। यह भवन करीब 80 वर्षों से देश के शासन का प्रतीक रहा है। इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि साउथ ब्लॉक के इसी कार्यालय में 15 अगस्त 1947 को पहली कैबिनेट बैठक हुई थी, जिसकी अध्यक्षता भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी। अब 13 फरवरी 2026 की बैठक के साथ यह अध्याय समापन की ओर बढ़ेगा और सत्ता का औपचारिक संचालन ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्रित हो जाएगा। Seva Teerth












