
mahabaharat[/caption]
युद्ध के पश्चात सभी के समाप्त हो जाने पर केवल पांच पांडवों के साथ अभिमन्यु पुत्र परीक्षित ही बचे थे ,गांधारी के शाप से सभी यदुवंशियों की आपसमें युद्ध कर मृत्यु होने पर श्रीकृष्ण भी व्याध्र के तीर के अपने पैर में बने पद में लगने से आहत होकर स्वर्ग सिधार गये । जिससे दुखी होकर पांचों पांडव द्रौपदी के साथ सन्यास लेकर हिमालय चले गये । युधिष्ठिर ने सभी भाईयों के साथ सन्यास लेकर जाने से पहले परीक्षित को राजा बनाकर हस्तिनापुर का राज्य सौंप कर अंतिम यात्रा पर गये । राजा परीक्षित ने बहुत समय तक न्यायपूर्वक राज्य किया। बाद में तक्षक नाग के डसने पर उनकी मृत्यु हुई । सुभद्रा अपने भाईयों की एकमात्र प्रिय बहिन थी जो बाद में जगन्नाथ पुरी में भी मंदिर मे उन दोनों के मध्य स्थित हैं जीव ब्रह्म के मध्य माया की तरह । सुभद्रा का इसीलिये महाभारत में महत्वपूर्ण स्थान है ।
उषा सक्सेना