मकर संक्रांति पर इस स्टाइल में ट्राई करें खीर, बर्तन लेकर आएंगे पड़ोसी

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति 2026 पर इस बार तिल और ड्राई फ्रूट्स से बनी गरमा-गरम तिल की खीर बनाएं। यह स्वाद में लाजवाब होने के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद है। ठंडी सर्दियों में तिल की खीर शरीर को गर्माहट देती है और मन को खुश कर देती है।

Makar Sankranti Kheer
मकर संक्राति खीर रेसिपी
locationभारत
userअसमीना
calendar14 Jan 2026 03:45 PM
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मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ से बने लड्डू और बर्फी का स्वाद सबको पसंद है लेकिन क्या आपने कभी गरमा-गरम तिल की खीर ट्राई की है? अगर नहीं तो इस बार मकर संक्रांति पर इसे जरूर बनाएं। तिल, ड्राई फ्रूट्स और दूध से बनी यह खीर स्वाद में लाजवाब होने के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद है। ठंडी सर्दियों में यह शरीर को गर्माहट देती है और मन को खुश कर देती है। मकर संक्रांति पर लोग तिल के लड्डू, बर्फी या पापड़ी बनाते हैं लेकिन गरमा-गरम तिल की खीर बनाकर आप परिवार और दोस्तों को चौंका सकते हैं। इसका स्वाद इतना लाजवाब होता है कि आप लड्डू-बर्फी का स्वाद भूल जाएंगे। चलिए जानते हैं रेसिपी।

तिल की खीर बनाने की सामग्री

फुल क्रीम मिल्क – 1.5 लीटर

खजूर या गुड़ – 1/2 कप

फ्लेक्ड बादाम – 1/2 कप

कंडेंस्ड मिल्क – 1/2 कप

तिल – 1 कप

मिक्स ड्राई फ्रूट्स – 1 कप

भुने हुए काजू – 1 मुट्ठी

तिल की खीर बनाने का आसान तरीका

1. सबसे पहले एक बड़े बर्तन में दूध डालें और उसे लगातार चलाते रहें ताकि दूध जले नहीं।

2. पैन में तिल को ड्राई रोस्ट करें। जब तिल चटकने लगे तो इन्हें प्लेट में निकाल लें।

3. उसी पैन में थोड़ा घी डालकर ड्राई फ्रूट्स को हल्का सुनहरा होने तक भूनें।

4. जब दूध थोड़ा गाढ़ा होने लगे तो आंच धीमी कर दें। अब इसमें भुने तिल, कंडेंस्ड मिल्क और ड्राई फ्रूट्स डालकर 10 मिनट तक अच्छे से उबालें।

5. अगर चाहें तो गुड़ या कंडेंस्ड मिल्क की मात्रा अपने स्वाद के हिसाब से एडजस्ट कर सकते हैं।

6. आंच बंद कर दें और इसमें खजूर, गुड़ और बाकी के ड्राई फ्रूट्स डालकर अच्छी तरह मिलाएं।

7. आपकी स्वादिष्ट और पौष्टिक तिल की खीर तैयार है। इसे सर्दियों में गरमा-गरम परोसें और ठंड के मौसम का मजा दोगुना करें।

तिल की खीर क्यों है खास?

तिल शरीर को गर्माहट देता है और सर्दियों में पोषण का बेहतरीन स्रोत है। ड्राई फ्रूट्स और बादाम खीर को सेहतमंद बनाते हैं। यह मिठाई बिना ज्यादा तेल या घी के तैयार होती है और हल्की होती है। बच्चों और बुजुर्गों दोनों के लिए काफी पौष्टिक भी होती है।

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जान लीजिए खिचड़ी खाने का सही तरीका, बाद में मत कहना बताया नहीं

Makar Sankranti: मकर संक्रांति 2026 पर खिचड़ी खाने की परंपरा और उसके चार यार दही, घी, पापड़ और अचार के महत्व को जानें और जानें कि क्यों इन चारों के बिना मकर संक्राति को अधूरी मानी जाती है।

Makar Sankranti Khichdi
मकर संक्राति खिचड़ी
locationभारत
userअसमीना
calendar14 Jan 2026 03:07 PM
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हर साल मकर संक्रांति का पर्व पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। मकर संक्रांति सूरज के मकर राशि में प्रवेश करने का प्रतीक है और इस दिन दान-पुण्य और नई शुरुआत का महत्व होता है। हर साल की तरह 15 जनवरी 2026 को भी मकर संक्रांति बड़े उत्साह के साथ मनाई जाएगी। इस दिन का एक खास हिस्सा है खिचड़ी खाना। खिचड़ी सिर्फ स्वाद के लिए नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी मानी जाती है लेकिन खिचड़ी को असली मजा तभी आता है जब उसे उसके चार यारों घी, दही, पापड़ और अचार के साथ परोसा जाए। ये चार चीजें मिलकर खिचड़ी को साधारण से शानदार बना देती हैं। आइए जानते हैं इन चारों यारों के बारे में।

1. देसी घी-खिचड़ी का असली स्वाद

खिचड़ी का सबसे खास यार है शुद्ध देसी घी। गरम-गरम खिचड़ी के ऊपर घी डालते ही उसका स्वाद दोगुना हो जाता है। घी न केवल स्वाद बढ़ाता है बल्कि सर्दियों में शरीर को अंदरूनी गर्माहट और ऊर्जा भी देता है। इसलिए खिचड़ी में घी डालना न भूलें यह इसे परफेक्ट बनाता है।

2. दही या रायता-स्वाद और पाचन का संतुलन

खिचड़ी की तासीर गर्म होती है और इसे ठंडी दही या रायते के साथ खाने से स्वाद में संतुलन आता है। खासकर काली दाल की खिचड़ी के साथ गाढ़ी दही बहुत अच्छी लगती है। दही पाचन में मदद करता है और थाली को पौष्टिक भी बनाता है। इसलिए खिचड़ी के साथ दही का होना जरूरी है।

3. पापड़-खिचड़ी का क्रंची साथी

गरमा-गरम खिचड़ी के साथ पापड़ खाने का मजा ही कुछ और है। यह खिचड़ी के स्वाद को और भी लाजवाब बना देता है। मकर संक्रांति पर उड़द दाल का पापड़ खास तौर पर पसंद किया जाता है लेकिन आप अपनी पसंद का कोई भी पापड़ खा सकते हैं।

4. अचार-खिचड़ी का मसालेदार ट्विस्ट

खिचड़ी का स्वाद थोड़ा सादा होता है इसलिए इसे अचार या हरी चटनी के साथ परोसना बेहतरीन विकल्प है। आम या मिर्च का अचार खिचड़ी के स्वाद को शानदार बना देता है। अगर घर में बच्चे या बड़े खिचड़ी खाने में उचकते हैं तो अचार उन्हें जरूर पसंद आएगा।


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Makar Sankranti 2026: 23 साल बाद बन रहा दुर्लभ योग! खिचड़ी खाने का सही दिन कौन सा है?

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति 2026 इस बार 15 जनवरी को मनाई जाएगी और इसके पीछे धार्मिक और ज्योतिषीय दो बड़े कारण हैं। जानिए क्यों 15 जनवरी को स्नान, दान और पारंपरिक खिचड़ी का महत्व सबसे अधिक माना जा रहा है और इस अवसर पर क्या विशेष चीजें की जाती हैं।

Makar Sankranti
मकर संक्रांति
locationभारत
userअसमीना
calendar13 Jan 2026 03:54 PM
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Makar Sankranti भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है जिसे सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के अवसर पर मनाया जाता है। हर साल इस पर्व की तिथि को लेकर लोगों में थोड़ा भ्रम रहता है। खासकर जब संक्रांति और एकादशी जैसी तिथियां एक ही समय पर पड़ती हैं। साल 2026 में भी यही स्थिति बनी है। चलिए जानते हैं कि क्यों ज्योतिषाचार्य और विद्वान 15 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति मनाने की सलाह दे रहे हैं।

सूर्य का गोचर और पुण्यकाल

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति तब मनाई जाती है जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। साल 2026 में सूर्य 14 जनवरी की दोपहर 3:13 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे लेकिन शास्त्रों का नियम है कि यदि संक्रांति दोपहर के बाद होती है तो उसका पूर्ण पुण्यकाल अगले दिन सूर्योदय से शुरू माना जाता है। यही कारण है कि 15 जनवरी को संक्रांति मनाना शास्त्र सम्मत और शुभ माना जा रहा है।

उदया तिथि का महत्व

हिंदू धर्म में उदया तिथि का विशेष महत्व है। यह वह तिथि होती है जो सूर्योदय के समय मौजूद हो। साल 2026 में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दोपहर में होने के कारण, 15 जनवरी की सुबह सूर्योदय पर संक्रांति की तिथि प्रभावी रहेगी। इसलिए अधिकांश लोग और धार्मिक विद्वान 15 जनवरी को ही पवित्र स्नान, सूर्य अर्घ्य और दान का आयोजन करने की सलाह दे रहे हैं।

23 साल बाद बना दुर्लभ संयोग

इस साल एक और खास बात यह है कि 14 जनवरी को षटतिला एकादशी भी पड़ रही है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, ऐसा संयोग लगभग 23 साल बाद आया है। एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है। मकर संक्रांति पर पारंपरिक रूप से खिचड़ी बनाई जाती है। इसलिए जो लोग एकादशी का उपवास रखते हैं उनके लिए 14 जनवरी को संक्रांति मनाना कठिन होगा। इस वजह से विद्वानों का सुझाव है कि 14 जनवरी को तिल, गुड़ और फलाहार का सेवन करें और 15 जनवरी को खिचड़ी और दान करें।

आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व

मकर संक्रांति के दिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश और भगवान विष्णु की प्रिय एकादशी का संगम होता है। इसे सूर्य-तत्व और विष्णु-भक्ति का अद्भुत मिलन माना जाता है। इस दिन किया गया दान, पूजा और स्नान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होता है। इसलिए आध्यात्मिक दृष्टि से भी 15 जनवरी को संक्रांति मनाना श्रेष्ठ और शुभ माना गया है।