
Prithviraj Chauhan: पृथ्वीराज रासो एक बड़ी कविता है जिसे आदिकाल यानी साल 1000-1400 के दौर की रचना माना जाता है. हिंदी साहित्य को चार भागों में बांटा गया है- आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिककाल. साहित्य के इतिहास के इसी विकासक्रम में शुरुआती दौर को आदिकाल कहा जाता है.
पृथ्वीराज रासो की कहानी कुछ यूं है, ''पृथ्वीराज अजमेर के राजा सोमेश्वर के बेटे थे. सोमेश्वर की शादी दिल्ली के राजा अनंगपाल की बेटी कमला से हुई. दूसरी बेटी की शादी कन्नौज के राजा विजयपाल से हुई जिनसे जयचंद पैदा हुए. अनंगपाल ने नाती पृथ्वीराज को गोद लिया. जयचंद को बुरा लगा. बाद में जयचंद ने यज्ञ का आयोजन किया और बेटी संयोगिता का स्वयंवर रखा. पृथ्वीराज यज्ञ में नहीं आए. गुस्साए जयचंद ने पृथ्वीराज की मूर्ति दरवाज़े पर रखवाई. संयोगिता को पहले से पृथ्वीराज पसंद थे. संयोगिता ने मूर्ति पर माला डालकर अपने प्रेम का इज़हार किया. बाद में पृथ्वीराज आए, लड़ाई करके संयोगिता को दिल्ली ले आए.''