बीएमसी चुनाव 2026 से पहले मुंबई में हिंसा, आधी रात पैसे बांटने को लेकर बवाल

ठाकरे गुट के पदाधिकारियों का दावा है कि शिंदे गुट के कार्यकर्ता मतदाताओं को लुभाने के लिए पैसे बांट रहे थे। जब उनके कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया तो पहले बहस हुई, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गई।

BMC Elections 2026
राजनीतिक विवाद वर्ली विधानसभा (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar13 Jan 2026 03:02 PM
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महाराष्ट्र में आगामी बीएमसी चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनाव से पहले ही मुंबई और नवी मुंबई में हिंसक घटनाएं सामने आने लगी हैं। पैसे बांटने के आरोपों को लेकर अलग–अलग राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पों ने कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात को देखते हुए पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर है।

वार्ड 124 में आधी रात हिंसा, दो कार्यकर्ता गंभीर घायल

मुंबई के वार्ड नंबर 124 में रविवार देर रात उस वक्त तनाव फैल गया, जब शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। झड़प इतनी बढ़ गई कि मामला मारपीट तक पहुंच गया। इस हिंसा में ठाकरे गुट के दो कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल राजावाड़ी अस्पताल में भर्ती कराया गया। ठाकरे गुट का आरोप है कि उनकी उम्मीदवार सकीना शेख के समर्थकों पर शिंदे गुट के उम्मीदवार हारून खान के कार्यकर्ताओं ने हमला किया। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। पार्कसाइट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कर ली गई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

पैसे बांटने के आरोपों से भड़की झड़प

ठाकरे गुट के पदाधिकारियों का दावा है कि शिंदे गुट के कार्यकर्ता मतदाताओं को लुभाने के लिए पैसे बांट रहे थे। जब उनके कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया तो पहले बहस हुई, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि शिंदे गुट के कार्यकर्ताओं ने ठाकरे गुट के लोगों पर हमला किया, जिससे वे घायल हो गए।

नवी मुंबई में भाजपा और शिंदे गुट के बीच मारपीट

चुनावी हिंसा सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं रही। नवी मुंबई के कोपरखैरने इलाके में भी सोमवार को भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के कार्यकर्ताओं के बीच जोरदार झड़प हुई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बता दें कि वीडियो में देखा जा सकता है कि भाजपा कार्यकर्ता शिंदे गुट के एक कार्यकर्ता की पिटाई कर रहे हैं। आरोप है कि वह व्यक्ति मतदाताओं को पैसे बांटते हुए पकड़ा गया था। गुस्साए भाजपा कार्यकर्ताओं ने उसका गला दबाने के साथ-साथ मोबाइल फोन भी छीन लिया।

वर्ली में आदित्य ठाकरे के क्षेत्र से भी विवाद

बता दें कि राजनीतिक विवाद वर्ली विधानसभा क्षेत्र तक भी पहुंच गया है, जो कि आदित्य ठाकरे का इलाका माना जाता है। वार्ड नंबर 193 में ठाकरे गुट की उम्मीदवार हेमांगी वार्लिकर के पति हरीश वार्लिकर पर भी पैसे बांटने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिंदे गुट और निर्दलीय उम्मीदवारों का दावा है कि महिलाओं को मीटिंग के बहाने बुलाकर उन्हें पैसे दिए गए। इस मामले को और ज्यादा तूल तब मिला जब ठाकरे गुट के पूर्व पदाधिकारी सूर्यकांत कोली ने इससे जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। कोली इस बार टिकट न मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में हैं।

चुनावी पारदर्शिता पर उठे सवाल

बता दें कि मुंबई और नवी मुंबई में सामने आई इन घटनाओं ने BMC चुनाव 2026 की पारदर्शिता और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार सामने आ रहे पैसे बांटने और हिंसा के आरोपों के बीच प्रशासन के लिए निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव का ऐलान, 19 तक नामांकन

इसी कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्रिमंडल के दिग्गज, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, शीर्ष पदाधिकारी और कई प्रदेश अध्यक्षों के कार्यक्रम में मौजूद रहने की संभावना जताई जा रही है।

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव का शेड्यूल जारी
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव का शेड्यूल जारी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Jan 2026 12:28 PM
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BJP National President Election 2026 : देश की सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। विश्व की सबसे बड़ी राजनितिक पार्टी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की आधिकारिक घोषणा हो चुकी है। पार्टी ने चुनाव कार्यक्रम जारी करते हुए साफ किया है कि 19 जनवरी तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे इसके तुरंत बाद पार्टी की अंदरूनी हलचल तेज हो गई है, क्योंकि चर्चा है कि 20 जनवरी को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में औपचारिक रूप से जिम्मेदारी संभालने की घोषणा हो सकती है। भाजपा नेतृत्व इस मौके को महज प्रक्रिया नहीं, बल्कि सत्ता और संगठन की एकजुटता का बड़ा संदेश देने वाले भव्य व गरिमामय समारोह में बदलना चाहता है। इसी कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्रिमंडल के दिग्गज, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, शीर्ष पदाधिकारी और कई प्रदेश अध्यक्षों के कार्यक्रम में मौजूद रहने की संभावना जताई जा रही है।

क्यों बड़ा इवेंट बनाना चाहती है पार्टी?

भाजपा नेतृत्व नितिन नवीन की ताजपोशी को सिर्फ औपचारिक जिम्मेदारी-हस्तांतरण नहीं, बल्कि संगठन की ताकत दिखाने वाला संदेशात्मक मंच बनाना चाहता है। शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी के जरिए पार्टी यह साफ करना चाहती है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में सर्वोच्च है यहां चेहरा बदल सकता है, लेकिन कमान हमेशा संगठन के हाथ में रहती है। साथ ही, यह आयोजन भाजपा के उस रोडमैप का भी संकेत माना जा रहा है, जिसमें पार्टी नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे लाकर भविष्य की राजनीति की बुनियाद मजबूत करना चाहती है। यही कारण है कि नितिन नवीन के साथ मंच पर मोदी-शाह की मौजूदगी को ‘सार्वजनिक समर्थन की मुहर’ के तौर पर प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि पार्टी के भीतर उनके अधिकार और बाहर उनकी स्वीकार्यता दोनों और मजबूत हो सकें।

संगठन में बड़े बदलाव की आहट

कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद से ही नितिन नवीन ने संगठन के भीतर लगातार सक्रियता बढ़ा दी है। बीते दिनों में उनकी कई वरिष्ठ नेताओं और प्रमुख पदाधिकारियों से मुलाकातें हुई हैं, जिन्हें सिर्फ शिष्टाचार नहीं, बल्कि आगामी संगठनात्मक बदलावों की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी गलियारों में चर्चा है कि ताजपोशी के तुरंत बाद नितिन नवीन अपनी कोर टीम को अंतिम रूप देंगे और संगठन में नए चेहरों की एंट्री के साथ कुछ जिम्मेदारियों में फेरबदल भी संभव है। यानी भाजपा के भीतर जल्द ही नई टीम और नई रणनीति की तस्वीर साफ होती दिख सकती है।

सरकार में भी बदलाव संभव?

सियासी गलियारों में संकेत मिल रहे हैं कि बदलाव की हवा केवल संगठन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि केंद्र सरकार में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। तर्क यह दिया जा रहा है कि कुछ नेताओं के संगठन में नई भूमिका संभालते ही मंत्रिमंडल में पुनर्संतुलन जरूरी हो जाएगा, ताकि सरकार और संगठन दोनों मोर्चों पर तालमेल बना रहे। इसी बीच यह चर्चा भी तेज है कि संघ (RSS) पृष्ठभूमि से जुड़े कुछ चेहरों को पार्टी संगठन में अहम जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। कुल मिलाकर, भाजपा में आने वाले दिनों में टीम-रीसेट और पावर-रीअलाइनमेंट की पटकथा लिखी जाती दिख रही है।

नामांकन प्रक्रिया कैसी होगी?

पार्टी सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि अध्यक्ष पद के लिए नितिन नवीन अकेले नामांकन कर सकते हैं, यानी चुनाव औपचारिकता भर रहने की संभावना है। 18 या 19 जनवरी को नामांकन दाखिल होने, फिर निर्वाचन की घोषणा और 20 जनवरी को पदभार ग्रहण/ताजपोशी जैसे कार्यक्रम की रूपरेखा सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि पार्टी मकर संक्रांति के बाद इस आयोजन को अंतिम रूप देने के मूड में है। BJP National President Election 2026

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कौन थे दुल्ला भट्टी? जिनके बगैर आज भी अधूरी मानी जाती है लोहड़ी

Dulla Bhatti: Lohri 2026 के मौके पर हम आपके लिए एक ऐसे नायक की जानकारी लेकर आए हैं जिन्हें पंजाब का रॉबिन हुड कहा जाता है। मुगल शासन के खिलाफ उनके संघर्ष, नारी सम्मान और लोककथाओं से जुड़ा इतिहास यहां विस्तार से पढ़ें।

Lohri
दुल्ला भट्टी
locationभारत
userअसमीना
calendar13 Jan 2026 12:03 PM
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जब भी लोहड़ी का पर्व आता है आग के चारों ओर घूमते हुए एक आवाज जरूर गूंजती है-“सुंदर मुंदरिए हो, तेरा कौन विचारा हो? दुल्ला भट्टी वाला हो…” लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस गीत में लिया जाने वाला दुल्ला भट्टी कौन था? आखिर क्यों उनके नाम के बगैर लोहड़ी अधूरी मानी जाती है? Lohri 2026 के मौके पर यह जानना बेहद जरूरी है कि दुल्ला भट्टी सिर्फ एक लोककथा नहीं बल्कि अन्याय के खिलाफ खड़ा हुआ एक वास्तविक वीर था जिसे आज भी पंजाब का रॉबिन हुड कहा जाता है। चलिए जानते हैं कौन थे दुल्ला भट्टी?

कौन थे दुल्ला भट्टी? (Who was Dulla Bhatti?)

दुल्ला भट्टी का वास्तविक नाम राय अब्दुल्ला भट्टी था। उनका जन्म 1547 ईस्वी में पंजाब के सांडल बार क्षेत्र में हुआ जो आज पाकिस्तान के फैसलाबाद इलाके में आता है। वे भट्टी राजपूत वंश से संबंध रखते थे, जो वीरता और स्वाभिमान के लिए प्रसिद्ध था। दुल्ला भट्टी का परिवार पहले से ही मुगल सत्ता के निशाने पर था क्योंकि उनके पिता और दादा ने किसानों पर लगाए जा रहे भारी करों और जमीनी शोषण का विरोध किया था। इसी अन्याय ने दुल्ला भट्टी को विद्रोह की राह पर खड़ा कर दिया।

मुगल शासन के खिलाफ खुला विद्रोह

मुगल काल में पंजाब के किसानों पर अत्यधिक कर लगाए जाते थे और जमींदारों के जरिये गरीबों का शोषण किया जाता था। दुल्ला भट्टी ने इस व्यवस्था को स्वीकार करने से इंकार कर दिया। वे जंगलों और ग्रामीण इलाकों से मुगल अधिकारियों पर हमले करते, कर वसूली रोकते और जो धन लूटा जाता था उसे गरीबों में बांट देते थे। यही कारण है कि आम जनता उन्हें मसीहा मानती थी जबकि मुगल दरबार उन्हें अपराधी और विद्रोही कहता था। यही दो अलग-अलग नजरिए दुल्ला भट्टी को एक ऐतिहासिक नायक बनाते हैं।

नारी सम्मान के रक्षक दुल्ला भट्टी

दुल्ला भट्टी का सबसे मानवीय पक्ष स्त्रियों की रक्षा से जुड़ा है। लोककथाओं के अनुसार, उस समय कुछ मुगल अधिकारी गरीब परिवारों की लड़कियों को जबरन उठा लिया करते थे। दुल्ला भट्टी ने ऐसी कई लड़कियों को मुक्त कराया और उनका सम्मानपूर्वक विवाह करवाया। सबसे प्रसिद्ध कथा सुंदरी और मुंदरी की है दो अनाथ बहनें जिनकी शादी दुल्ला भट्टी ने स्वयं पिता बनकर करवाई। उन्होंने जंगल में अलाव जलाकर विवाह संपन्न कराया और गुड़ व तिल देकर पिता का फर्ज निभाया। यही घटना लोहड़ी के गीतों का आधार बनी।

लोहड़ी और दुल्ला भट्टी का अटूट रिश्ता

लोहड़ी मूल रूप से फसल और सूर्य से जुड़ा त्योहार है लेकिन दुल्ला भट्टी की गाथा ने इसे सामाजिक न्याय और वीरता से जोड़ दिया। जब बच्चे और बड़े गाते हैं-“सुंदर मुंदरिए… दुल्ला भट्टी वाला हो” तो वे अनजाने में एक ऐसे नायक को याद कर रहे होते हैं जिसने अन्याय के सामने सिर नहीं झुकाया। लोकगीतों ने दुल्ला भट्टी को पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रखा है।

26 मार्च 1599 को दी गई थी फांसी

मुगल सत्ता लंबे समय तक दुल्ला भट्टी की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं कर सकी। अंततः उन्हें पकड़ लिया गया और 26 मार्च 1599 को सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई। मुगलों ने सोचा कि इससे विद्रोह खत्म हो जाएगा लेकिन हुआ इसका उल्टा दुल्ला भट्टी मरकर भी अमर हो गए। उनकी शहादत ने उन्हें इतिहास से उठाकर लोकदेवता बना दिया।

इतिहास से ज्यादा ताकतवर लोककथा

इतिहास की किताबों में दुल्ला भट्टी का उल्लेख सीमित है लेकिन लोक-संस्कृति में उनका स्थान बहुत ऊंचा है। यही लोक परंपरा की ताकत है जो आम जनता के नायकों को अमर बना देती है। दुल्ला भट्टी न किसी धर्म विशेष के थे और न किसी सत्ता के। वे सिर्फ अन्याय के खिलाफ खड़े एक साहसी इंसान थे।


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