उत्तराखंड में UCC का इम्पैक्ट: 1 साल में जमकर हुए विवाह पंजीकरण
UCC लागू होने के बाद प्रतिदिन औसतन करीब 1400 विवाह पंजीकरण हो रहे हैं। वहीं पुराने कानून के दौर में यह औसत करीब 67 प्रतिदिन था। यानी पंजीकरण की रफ्तार में कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

Uttarakhand News : उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण की व्यवस्था ने जैसे नई रफ्तार पकड़ ली है। पहले पंजीकरण अधिनियम-2010 के तहत दंपती को उत्तराखंड के सब-रजिस्ट्रार कार्यालय तक दो गवाहों के साथ तय तारीख पर पहुंचना पड़ता था कागजात, कतार और औपचारिकताओं के बीच प्रक्रिया समयखाऊ बन जाती थी। अब तस्वीर बदल गई है। उत्तराखंड सरकार के डिजिटल सिस्टम के चलते पंजीकरण का लगभग पूरा काम ऑनलाइन हो रहा है।
27 जनवरी को UCC के एक साल पूरे
आगामी 27 जनवरी को उत्तराखंड में UCC लागू हुए एक साल पूरा होने जा रहा है। सरकार का दावा है कि महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकारों की सुरक्षा और नागरिक अधिकारों में समानता के साथ-साथ UCC ने प्रक्रियाओं को सरल बनाकर बड़ा बदलाव किया है। इसी का परिणाम है कि UCC लागू होने के एक साल से भी कम समय में 4,74,447 विवाहों का पंजीकरण हो चुका है।
अब घर बैठे हो रहा पंजीकरण
UCC के तहत विवाह पंजीकरण का लगभग शत-प्रतिशत काम ऑनलाइन माध्यम से हो रहा है। दंपत्ति और गवाह कहीं से भी दस्तावेज़ अपलोड कर सकते हैं और आवश्यक रिकॉर्ड/वीडियो बयान दर्ज कराकर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सोमवार, 19 जनवरी 2026 की दोपहर तक कुल 4,74,447 विवाह पंजीकरण पूरे हो चुके हैं। सबसे बड़ा फर्क रोज के औसत में दिखता है। UCC लागू होने के बाद प्रतिदिन औसतन करीब 1400 विवाह पंजीकरण हो रहे हैं। वहीं पुराने कानून के दौर में यह औसत करीब 67 प्रतिदिन था। यानी पंजीकरण की रफ्तार में कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
विवाह विच्छेद और लिव-इन से जुड़े प्रमाणपत्र भी ऑनलाइन
UCC लागू होने के बाद सिर्फ शादी का पंजीकरण ही नहीं, बल्कि इससे जुड़ी दूसरी सेवाओं में भी ऑनलाइन सिस्टम का असर साफ दिखा है। रिपोर्ट बताती है कि इसी अवधि में 316 लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से विवाह विच्छेद की प्रक्रिया से जुड़े प्रमाणपत्र हासिल किए, 68 लोगों ने लिव-इन रिलेशनशिप का प्रमाणपत्र लिया, जबकि 2 मामलों में लिव-इन समाप्ति का प्रमाणपत्र भी जारी हुआ। सबसे अहम बदलाव यह है कि जहां UCC के तहत प्रमाणपत्र जारी करने की अधिकतम सीमा 15 दिन तय की गई है, वहीं जमीनी स्तर पर औसतन 5 दिन के भीतर दस्तावेज़ हाथ में आ रहे हैं। इसके मुकाबले पुराने अधिनियम में न तो कोई तय समय-सीमा थी और न ही दफ्तर गए बिना काम आगे बढ़ता था,अब प्रक्रिया काउंटर से निकलकर क्लिक पर आ गई है।
दूसरे राज्यों के लिए मॉडल - धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि उत्तराखंड ने UCC लागू कर अन्य राज्यों को दिशा दिखाई है। उनके मुताबिक बीते एक साल में प्रावधानों को “पारदर्शी और सरल” ढंग से लागू करने से लोगों का भरोसा बढ़ा है और इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग पंजीकरण करा रहे हैं। सरकार का दावा है कि उत्तराखंड का UCC हर तरह से मॉडल कानून के रूप में उभर रहा है। Uttarakhand News
Uttarakhand News : उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण की व्यवस्था ने जैसे नई रफ्तार पकड़ ली है। पहले पंजीकरण अधिनियम-2010 के तहत दंपती को उत्तराखंड के सब-रजिस्ट्रार कार्यालय तक दो गवाहों के साथ तय तारीख पर पहुंचना पड़ता था कागजात, कतार और औपचारिकताओं के बीच प्रक्रिया समयखाऊ बन जाती थी। अब तस्वीर बदल गई है। उत्तराखंड सरकार के डिजिटल सिस्टम के चलते पंजीकरण का लगभग पूरा काम ऑनलाइन हो रहा है।
27 जनवरी को UCC के एक साल पूरे
आगामी 27 जनवरी को उत्तराखंड में UCC लागू हुए एक साल पूरा होने जा रहा है। सरकार का दावा है कि महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकारों की सुरक्षा और नागरिक अधिकारों में समानता के साथ-साथ UCC ने प्रक्रियाओं को सरल बनाकर बड़ा बदलाव किया है। इसी का परिणाम है कि UCC लागू होने के एक साल से भी कम समय में 4,74,447 विवाहों का पंजीकरण हो चुका है।
अब घर बैठे हो रहा पंजीकरण
UCC के तहत विवाह पंजीकरण का लगभग शत-प्रतिशत काम ऑनलाइन माध्यम से हो रहा है। दंपत्ति और गवाह कहीं से भी दस्तावेज़ अपलोड कर सकते हैं और आवश्यक रिकॉर्ड/वीडियो बयान दर्ज कराकर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सोमवार, 19 जनवरी 2026 की दोपहर तक कुल 4,74,447 विवाह पंजीकरण पूरे हो चुके हैं। सबसे बड़ा फर्क रोज के औसत में दिखता है। UCC लागू होने के बाद प्रतिदिन औसतन करीब 1400 विवाह पंजीकरण हो रहे हैं। वहीं पुराने कानून के दौर में यह औसत करीब 67 प्रतिदिन था। यानी पंजीकरण की रफ्तार में कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
विवाह विच्छेद और लिव-इन से जुड़े प्रमाणपत्र भी ऑनलाइन
UCC लागू होने के बाद सिर्फ शादी का पंजीकरण ही नहीं, बल्कि इससे जुड़ी दूसरी सेवाओं में भी ऑनलाइन सिस्टम का असर साफ दिखा है। रिपोर्ट बताती है कि इसी अवधि में 316 लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से विवाह विच्छेद की प्रक्रिया से जुड़े प्रमाणपत्र हासिल किए, 68 लोगों ने लिव-इन रिलेशनशिप का प्रमाणपत्र लिया, जबकि 2 मामलों में लिव-इन समाप्ति का प्रमाणपत्र भी जारी हुआ। सबसे अहम बदलाव यह है कि जहां UCC के तहत प्रमाणपत्र जारी करने की अधिकतम सीमा 15 दिन तय की गई है, वहीं जमीनी स्तर पर औसतन 5 दिन के भीतर दस्तावेज़ हाथ में आ रहे हैं। इसके मुकाबले पुराने अधिनियम में न तो कोई तय समय-सीमा थी और न ही दफ्तर गए बिना काम आगे बढ़ता था,अब प्रक्रिया काउंटर से निकलकर क्लिक पर आ गई है।
दूसरे राज्यों के लिए मॉडल - धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि उत्तराखंड ने UCC लागू कर अन्य राज्यों को दिशा दिखाई है। उनके मुताबिक बीते एक साल में प्रावधानों को “पारदर्शी और सरल” ढंग से लागू करने से लोगों का भरोसा बढ़ा है और इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग पंजीकरण करा रहे हैं। सरकार का दावा है कि उत्तराखंड का UCC हर तरह से मॉडल कानून के रूप में उभर रहा है। Uttarakhand News












