संसद से पटना तक SIR की गूंज, क्या बिहार चुनाव बायकॉट करेगा विपक्ष?
Bihar Samachar
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 01:15 AM
Bihar Samachar: बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सियासी बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। विपक्षी दलों ने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बताते हुए सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले ही चुनाव बहिष्कार तक की चेतावनी दे डाली है। गुरुवार को इस मुद्दे पर संसद से लेकर बिहार विधानसभा तक जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और विपक्ष के कई दिग्गज नेता दिल्ली में संसद भवन के बाहर सड़क पर उतरे, वहीं पटना में तेजस्वी यादव ने सीधा चुनाव आयोग पर हमला बोलते हुए पारदर्शिता नहीं होने पर विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने की बात कह दी।
सड़क पर विपक्ष का प्रदर्शन
गुरुवार को संसद के मानसून सत्र का चौथा दिन भी बिहार के SIR विवाद की भेंट चढ़ गया। जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने वेल में आकर "लोकतंत्र पर हमला" और "SIR नहीं, साजिश है ये!" जैसे नारे लगाते हुए पोस्टर लहराने शुरू कर दिए। हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही महज 12 मिनट चली, जबकि राज्यसभा तो सिर्फ 1 मिनट 45 सेकंड में स्थगित करनी पड़ी। संसद के बाहर मकर द्वार पर विपक्षी सांसदों ने तीसरे दिन प्रदर्शन किया। इसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कांग्रेस के कई नेता शामिल हुए। राहुल गांधी ने कहा, "अगर चुनाव आयोग ये सोचता है कि वो इससे बच निकलेगा, तो ये उसकी गलतफहमी है। हम इसे लोकतंत्र के साथ धोखा नहीं होने देंगे।"
तेजस्वी यादव का तीखा हमला
पटना में बिहार विधानसभा भी गुरुवार को SIR के मुद्दे पर गरमा गई। आरजेडी और बीजेपी विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, बहस अपशब्दों तक पहुंच गई। इसके बाद तेजस्वी यादव ने प्रेस को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि, "अगर चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं दिखाई तो महागठबंधन विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने पर गंभीरता से विचार करेगा।" तेजस्वी ने दावा किया कि उनके परिवार के खिलाफ सदन में अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया गया और अब लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
चुनाव आयोग का पलटवार
विपक्ष के आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने एक लंबा बयान जारी कर खुद का बचाव किया। आयोग ने कहा, "भारतीय लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हैं और पारदर्शी मतदाता सूची ही निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद है। क्या कुछ लोगों के दबाव में आकर फर्जी वोटिंग की छूट दी जाए? क्या दो जगहों पर नाम रखने वालों को वोट डालने दिया जाए?" आयोग ने यह भी कहा कि लोकतंत्र की रक्षा सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और किसी भी प्रक्रिया में संदेह फैलाना गलत परंपरा है।
आखिर क्यों हो रहा इतना विरोध?
दरअसल, SIR के तहत बिहार में मतदाता सूची की गहन जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रक्रिया में 52 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। इनमें वे नाम शामिल हैं जो दो जगह दर्ज हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या फिर जो दस्तावेज नहीं दे पाए। बिहार में 2020 के चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के बीच केवल 12,000 वोटों का अंतर था। कांग्रेस को अकेले 40 लाख वोट मिले थे। ऐसे में अगर 52 लाख वोट कटते हैं, तो यह विपक्ष के लिए सीधा झटका हो सकता है। यही कारण है कि अब चुनाव बहिष्कार की धमकी को एक रणनीतिक दबाव के रूप में भी देखा जा रहा है।
अब आगे क्या?
अब सबकी निगाहें 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें SIR की वैधता पर बहस होगी। उससे पहले विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाकर राजनीतिक संदेश देने की पूरी कोशिश में है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह चुनाव से पहले का शक्ति प्रदर्शन है या फिर वास्तव में विपक्ष चुनाव में हिस्सा नहीं लेगा? फिलहाल बिहार की सियासत SIR के तूफान में फंसी दिख रही है, जहां हर पार्टी अपने तर्क के साथ लोकतंत्र की रक्षा का दावा कर रही है।