आस्था की आड़ में दरिंदगी, कथावाचक श्रवण दास गिरफ्तार

पीड़िता ने पुलिस के सामने आरोप लगाया कि 2 मार्च 2024 को जब वह घर में अकेली थी, तब आरोपी ने उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। इसके बाद उसने शादी का वादा कर लगातार उसे डराकर और बहला-फुसलाकर शारीरिक संबंध बनाए।

Storyteller Shravan Das
कथावाचक श्रवण दास पर शिकंजा (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar22 Jan 2026 09:45 AM
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मिथिलांचल में धार्मिक कथाओं के जरिए पहचान बनाने वाले कथावाचक श्रवण दास को पुलिस ने नाबालिग से यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने पीड़िता के घर में किराये पर कमरा लेकर परिवार का भरोसा जीता और फिर शादी का झांसा देकर लंबे समय तक नाबालिग का शोषण करता रहा। मामले में पुलिस ने POCSO एक्ट समेत गंभीर धाराओं में कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक आरोपी के खिलाफ दिसंबर 2025 में प्राथमिकी दर्ज हुई थी, जिसके बाद से वह फरार चल रहा था। पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर गठित विशेष टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

मोबाइल नंबर से शुरू हुआ संपर्क, फिर परिवार का विश्वास जीता

पीड़िता की मां ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि श्रवण दास श्रीराम जानकी मंदिर के महंत का शिष्य बताया जाता है। परिवार की मुलाकात आरोपी से 3 जून 2023 को एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। उसी दौरान उसने परिवार से मोबाइल नंबर लिया और बातचीत बढ़ाते हुए धीरे-धीरे नजदीकियां बढ़ा लीं। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने फरवरी 2024 में पीड़िता के घर में ही एक कमरा किराये पर ले लिया, जिससे उसकी पहुंच सीधे लड़की तक हो गई।

घर में अकेली होने पर किया शोषण, शादी का वादा कर संबंध बनाता रहा

पीड़िता ने पुलिस के सामने आरोप लगाया कि 2 मार्च 2024 को जब वह घर में अकेली थी, तब आरोपी ने उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। इसके बाद उसने शादी का वादा कर लगातार उसे डराकर और बहला-फुसलाकर शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता का कहना है कि आरोपी ने उसे भरोसा दिलाया था कि वह बालिग होने के बाद उससे शादी करेगा। आरोप यह भी है कि कथावाचक ने उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया और जबरन अश्लील हरकतें भी कीं।

गर्भपात की दवाएं खिलाने का आरोप, पीड़िता की हालत बिगड़ी

इस मामले में पीड़िता के स्वास्थ्य को लेकर स्थिति बेहद गंभीर बताई जा रही है। पीड़िता का आरोप है कि जब वह गर्भवती हुई, तो आरोपी ने गर्भपात कराने के लिए गोलियां खिलाईं। यह घटना दो बार होने की बात कही गई है। बार-बार गर्भपात के कारण उसकी तबीयत बिगड़ गई। पुलिस ने पीड़िता की मेडिकल जांच कराई है और मेडिकल रिपोर्ट को जांच का अहम आधार बनाया जा रहा है।

SIT ने आरोपी को दबोचा, ‘मौनी बाबा’ की तलाश जारी

दरभंगा के एसएसपी जगुनाथ रेड्डी ने बताया कि एसडीपीओ राजीव कुमार के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी इलाके से आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। पुलिस इस मामले में आरोपी के सहयोगी बताए जा रहे ‘मौनी बाबा’ की भी तलाश कर रही है। महिला थाना प्रभारी मनीषा के मुताबिक फरार सहयोगी की भूमिका की जांच के लिए टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

पॉक्सो एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि पीड़िता नाबालिग होने के कारण मामला POCSO एक्ट के तहत दर्ज किया गया है और जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

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केरल में युवक की संदिग्ध मौत, न्याय प्रणाली पर उठे सवाल

सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। कई लोग ऑनलाइन ट्रोलिंग, बिना जांच के पब्लिक ट्रायल और सोशल मीडिया पर आरोप लगाने की प्रवृत्ति पर सवाल उठा रहे हैं।

Questions raised about the justice system
घटना ने सोशल मीडिया (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar21 Jan 2026 09:14 PM
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केरल के कोझिकोड जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला इन्फ्लुएंसर ने बस में कथित छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया। इसके बाद युवक यू. दीपक (42) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के अनुसार, महिला और दीपक दोनों ही एक ही निजी बस में यात्रा कर रहे थे। यात्रा के दौरान महिला ने एक वीडियो रिकॉर्ड कर कहा कि दीपक ने उसके साथ छेड़छाड़ की। इस वीडियो को महिला ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया, जो तेजी से वायरल हो गया। वीडियो को लगभग 20 लाख से अधिक व्यूज़ मिले। 

परिवार का दावा

दीपक के परिजनों का दावा है कि वह निर्दोष थे। वायरल होने के बाद से उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और ट्रायल का सामना करना पड़ा। परिजनों का कहना है कि इस मानसिक दबाव के कारण दीपक ने आत्महत्या कर ली। उनके अनुसार, वह वीडियो देखकर टूट गए थे और दो दिन से कुछ भी नहीं खाया।

पुलिस की कार्रवाई

प्रारंभ में, पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला माना था। लेकिन परिजनों की शिकायत के आधार पर, पुलिस ने आईपीसी की धारा 108 के तहत मामला दर्ज किया। ताजा जानकारी के अनुसार, पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। 

सोशल मीडिया पर बहस

यह घटना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। कई लोग ऑनलाइन ट्रोलिंग, बिना जांच के पब्लिक ट्रायल और सोशल मीडिया पर आरोप लगाने की प्रवृत्ति पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, कुछ का मानना है कि इस तरह के मामलों में कानूनी प्रक्रिया के बिना ही आरोप लगाना और वायरल करना खतरनाक है, जो किसी की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। 

यह मामला ऐसे समय में आया है जब दिल्ली और अन्य शहरों में भी झूठे आरोप और फर्जी मामलों की रिपोर्टें सामने है जो कि विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी से काम लेना चाहिए और किसी भी आरोप को पूरी जांच के बाद ही प्रचारित करना चाहिए। 

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महाराष्ट्र में ओला स्कूटर हादसा, पिता-बच्चे की बाल-बाल बची जान

इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने केओला इलेक्ट्रिक स्कूटर में अचानक आग लगने की घटना सामने आई हैजो कि ओवरहीटिंग, शॉर्ट सर्किट और पर्यावरणीय कारक शामिल बता रहे हैं। फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

Ola scooter accident
महाराष्ट्र में ओला स्कूटर हादसा (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar21 Jan 2026 07:25 PM
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महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में एक ओला इलेक्ट्रिक स्कूटर में अचानक आग लगने की घटना सामने आई है। इस हादसे में एक पिता और उसका मासूम बच्चा बाल-बाल बच गए। पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सड़क किनारे खड़े ओला इलेक्ट्रिक स्कूटर पर एक व्यक्ति बैठा हुआ था और अपने छोटे बच्चे का इंतजार कर रहा था। जैसे ही बच्चा स्कूटर के फुटबोर्ड पर चढ़ा, उसी दौरान स्कूटर की सीट के नीचे से अचानक सफेद धुआं निकलने लगा। खतरे को भांपते हुए पिता ने तुरंत बच्चे को गोद में उठाया और स्कूटर से दूर हट गए। कुछ ही सेकंड बाद स्कूटर में भीषण आग लग गई।

सीसीटीवी में कैद हुई पूरी घटना

सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि धुआं निकलने के तुरंत बाद स्कूटर के निचले हिस्से और टायर के पास आग की तेज लपटें उठने लगती हैं। यदि कुछ पल की भी देरी होती, तो बड़ा हादसा हो सकता था। गनीमत रही कि पिता की सतर्कता और त्वरित प्रतिक्रिया से किसी को शारीरिक नुकसान नहीं हुआ।

स्थानीय लोगों की मदद से आग पर काबू

आग लगते ही आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंचे और पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की। स्थानीय लोगों की तत्परता से आग को फैलने से रोक लिया गया और एक बड़ी दुर्घटना टल गई।

ईवी सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

इस घटना के बाद एक बार फिर इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। इससे पहले भी पुणे और बेंगलुरु समेत कई शहरों में ओला इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। फिलहाल सोलापुर की इस घटना के सटीक कारणों की जांच की जा रही है।

कंपनी की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान

ओला इलेक्ट्रिक की ओर से अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, कंपनी पहले यह दावा करती रही है कि उसके बैटरी पैक कई सुरक्षा परतों से लैस हैं और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं।

क्या हो सकते हैं ईवी में आग लगने के कारण

तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने के प्रमुख कारणों में लिथियम-आयन बैटरी में तकनीकी खराबी, ओवरहीटिंग, शॉर्ट सर्किट और पर्यावरणीय कारक शामिल हो सकते हैं। फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग कंपनी से ईवी सुरक्षा को लेकर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

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