न्यू नोएडा अपडेट : 80 गांवों की जमीन खरीदेगा प्राधिकरण, जल्द शुरू होगी प्रक्रिया

नोएडा–ग्रेटर नोएडा कॉरिडोर से सटे दादरी और बुलंदशहर क्षेत्र के करीब 80 गांवों में इस नए शहर की आधारशिला रखने के लिए प्राधिकरण सीधी खरीद (Direct Purchase) मॉडल अपनाने की तैयारी में है।

न्यू नोएडा
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locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar03 Feb 2026 09:56 AM
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Noida News : दिल्ली-NCR के विस्तार की नई धुरी बनने जा रही न्यू नोएडा (New Noida City) योजना अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। नोएडा–ग्रेटर नोएडा कॉरिडोर से सटे दादरी और बुलंदशहर क्षेत्र के करीब 80 गांवों में इस नए शहर की आधारशिला रखने के लिए प्राधिकरण सीधी खरीद (Direct Purchase) मॉडल अपनाने की तैयारी में है। किसानों से जमीन खरीद के लिए 5600 रुपये प्रति वर्ग मीटर की प्रस्तावित दर का खाका बनाकर सरकार को मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। हरी झंडी मिलते ही जमीन खरीद की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होगी और नोएडा के विस्तार के तौर पर न्यू नोएडा को आकार देने की कवायद तेज़ हो जाएगी।

क्यों जरूरी हो रहा नया नोएडा?

नोएडा-ग्रेटर नोएडा बेल्ट में लगातार बढ़ते कमर्शियल डेवलपमेंट, आने वाले समय में फिल्म सिटी जैसी योजनाएं और जेवर (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) के प्रभाव से इस पूरे इलाके में आबादी व आर्थिक गतिविधियों का दबाव तेजी से बढ़ने की संभावना है। इसी बढ़ते दबाव को संभालने और संगठित शहरी विकास के लिए दादरी-नोएडा-गाजियाबाद विशेष निवेश क्षेत्र के रूप में नया नोएडा को विकसित करने की रूपरेखा तैयार की गई है।

जमीन की खरीद-बिक्री पर लग सकती है लगाम

मास्टर प्लान को कैबिनेट से हरी झंडी मिलते ही संबंधित गांवों में जमीन के सौदों का तापमान अचानक बढ़ गया है। कहीं रेट रोज़ बदल रहे हैं, तो कहीं अफवाहों के सहारे सट्टा खरीद का खेल तेज़ हो गया है। इसी हलचल को थामने के लिए प्राधिकरण अब ऐसी नई व्यवस्था लाने की तैयारी में है, जिससे अनियंत्रित रजिस्ट्री और बिचौलिया-सक्रियता पर लगाम लग सके। सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित फ्रेमवर्क को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा से तथ्यों के साथ विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, ताकि फैसला पारदर्शी और जमीन हकीकत पर आधारित रहे। किसानों के लिए प्राधिकरण पहले आवेदन, फिर समयबद्ध निर्णय वाला मॉडल तैयार कर रहा है। सरकार से दरों पर अंतिम मंजूरी मिलते ही सार्वजनिक सूचना जारी होगी और जो किसान अपनी जमीन बेचना चाहें, वे सीधे प्राधिकरण में आवेदन कर सकेंगे। लक्ष्य यह है कि दो महीने या उससे कम समय में आवेदन का निस्तारण कर निर्धारित दर पर खरीद पूरी कर दी जाए। अगर तय समय में प्राधिकरण जमीन नहीं ले पाता, तो किसान को अन्य खरीदार को बेचने की छूट मिल सकती है। वहीं, यदि प्राधिकरण जमीन लेने से मना करता है, तो संबंधित अधिकारी को कारण लिखित रूप में स्पष्ट करना होगा। पूरी खरीद प्रक्रिया चरणबद्ध समझौतों के जरिए आगे बढ़ाई जाएगी, ताकि किसानों के हित सुरक्षित रहें और विकास कार्य बिना देरी के शुरू हो सके।

सीएम तक पहुंचा प्रस्ताव

किसानों से जमीन खरीद और रजिस्ट्री व्यवस्था को लेकर प्रस्ताव नोएडा अथॉरिटी ने तैयार किया है। जानकारी के मुताबिक, यह विषय अथॉरिटी के सीईओ कृष्णा करुणेश ने सीएम के संज्ञान में भी रखा है, जिसके बाद पूर्ण रिपोर्ट मांगी गई है। उल्लेखनीय है कि 18 अक्टूबर 2024 को योगी कैबिनेट ने नया नोएडा मास्टर प्लान-2041 को मंजूरी दी थी।

न्यू नोएडा के लिए फील्ड ऑफिस की तैयारी

न्यू नोएडा को तेजी से लागू करने के लिए संबंधित क्षेत्र में अस्थायी कार्यालय खोलने की योजना भी बनाई जा रही है। संकेत हैं कि यह कार्यालय सिकंदराबाद औद्योगिक क्षेत्र के पास जोखाबाद और सांवली गांव के आसपास खोला जा सकता है। दफ्तर के लिए करीब 10 हजार वर्ग मीटर जमीन लेने की तैयारी बताई जा रही है, ताकि साइट पर बैठकर प्लानिंग, सर्वे और अधिग्रहण/खरीद की प्रक्रिया तेज की जा सके।

4 फेज में बसाने का प्रस्ताव

मास्टर प्लान में नया नोएडा को चार चरणों (फेज) में बसाने की रूपरेखा तय की गई है, लेकिन प्राधिकरण संकेत दे रहा है कि जमीनी जरूरतों और निवेश की रफ्तार को देखते हुए इसमें आगे संशोधन की गुंजाइश रखी गई है। दस्तावेज़ों के मुताबिक पहले फेज़ को 2027 तक आकार देने का लक्ष्य रखा गया था, मगर अब तक यह योजना फाइलों से निकलकर साइट पर पूरी तरह शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में सबकी निगाहें अब जमीन खरीद की प्रस्तावित दरों पर टिकी हैं।

दायरा बढ़ाने की भी तैयारी

दिल्ली-NCR के संतुलित विस्तार के लिए न्यू नोएडा के दायरे को और बढ़ाने पर भी विचार चल रहा है। इसमें बागपत और खेकड़ा तहसील के कुछ गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव स्थानीय प्रशासन की ओर से सरकार को भेजे जाने की बात सामने आई है। अगर यह विस्तार मंजूर हुआ, तो न्यू नोएडा का प्रभाव क्षेत्र और बड़ा होगा और निवेश/इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग भी नए सिरे से तैयार करनी पड़ सकती है। Noida News

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नोएडा कभी नहीं बनेगा नगर निगम, सरकार की मंशा साफ

इन दिनों नोएडा प्राधिकरण के साथ-साथ नोएडा में नगर निगम बनाने की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है। इस विषय में उत्तर प्रदेश सरकार अपनी मंशा पहले ही साफ कर चुकी है।

नोएडा में नगर निगम बनाने का प्रस्ताव खारिज
नोएडा में नगर निगम बनाने का प्रस्ताव खारिज
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar02 Feb 2026 06:17 PM
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Noida News : नोएडा शहर में नगर निगम की स्थापना की मांग बहुत पुरानी है। इसी मांग के साथ नोएडा प्राधिकरण के बोर्ड में जन प्रतिनिधि शामिल करने की मांग भी उठती रहती है। इन दिनों नोएडा प्राधिकरण के साथ-साथ नोएडा में नगर निगम बनाने की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है। इस विषय में उत्तर प्रदेश सरकार अपनी मंशा पहले ही साफ कर चुकी है।

नोएडा में कभी नहीं बनेगा नगर निगम

आपको बता दें कि नोएडा की स्थापना 17 अप्रैल 1976 को हुई थी। नोएडा की स्थापना के लिए उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास अधिनियम-1976 बनाया गया था। इसी अधिनियम के तहत नोएडा की स्थापना हुई थी। यही वह औद्योगिक विकास अधिनियम है जिसके तहत नोएडा के बाद ग्रेटर नोएडा तथा उसके बाद यमुना सिटी की स्थापना हुई थी। नोएडा की स्थापना के लिए बनाए गए उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास अधिनियम 1976 में नगर पालिका अथवा नगर निगम जैसी किसी भी व्यवस्था की कोई गुंजाइश नहीं है। नोएडा के चेयरमैन तथा उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव रहे मनोज कुमार सिंह का कहना है कि खास कानून के चलते नोएडा में कभी भी नगर निगम नहीं बनाया जाएगा। हाल ही में नोएडा में नगर निगम जैसी व्यवस्था बनाने का एक प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट की बैठक में रखा गया था। उस प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिजर कर दिया गया है। 

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर रखा गया था प्रस्ताव

आपको बता दें कि हाल ही में उत्तर प्रदेश की कैबिनेट की बैठक में नोएडा में नगर निगम जैसी व्यवस्था बनाने का एक प्रस्ताव रखा गया था। यह प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश पर कैबिनेट की बैठक में रखा गया था। दरअसल वर्ष-2025 के मई में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से Noida अथॉरिटी (न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी) को ज़्यादा नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए उसे मेट्रोपॉलिटन कॉर्पोरेशन में बदलने पर विचार करने को कहा था। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के सामने इसे (प्रस्ताव) रखने का निर्देश दिया था। Noida के लिए किस तरह का गवर्नेंस मॉडल होना चाहिए, और सुझावों में से एक मेट्रोपॉलिटन कॉर्पोरेशन पर विचार करना था। आलोक कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश की कैबिनेट ने पाया कि Noida के मौजूदा कानूनी ढांचे को देखते हुए, यथास्थिति बनाए रखी जानी चाहिए। Noida News

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अपने किसी गुर्गे की आड़ में छुपकर बैठा है माफिया रवि काना

नोएडा पुलिस को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर रवि काना कहां पर छुपकर बैठा हुआ है। खुफिया एजेंसी ने आशंका जाहिर की है कि रवि काना अपने किसी पुराने गुर्गे की आड़ में छुपकर बैठा हो सकता है।

माफिया रवि काना
माफिया रवि काना
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar02 Feb 2026 04:16 PM
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Noida News : नोएडा कमिश्नरी पुलिस से लेकर उत्तर प्रदेश के सभी जिलों की पुलिस माफिया सरगना रवि काना को तलाश कर रही है। बांदा जेल से रिहा होने के बाद रवि काना का नोएडा से लेकर बांदा तक कहीं भी पता नहीं चल रहा है। नोएडा पुलिस को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर रवि काना कहां पर छुपकर बैठा हुआ है। खुफिया एजेंसी ने आशंका जाहिर की है कि रवि काना अपने किसी पुराने गुर्गे की आड़ में छुपकर बैठा हो सकता है। इस खुफिया जानकारी के आधार पर नोएडा पुलिस रवि काना के सभी पुराने गुर्गों की जांच पड़ताल कर रही है।

दूर-दूर तक नहीं मिल रहा है माफिया सरगना रवि काना

नोएडा पुलिस से लेकर अलग-अलग जिलों में उत्तर प्रदेश पुलिस रवि काना की तलाश में जुटी हुई है। उत्तर प्रदेश पुलिस के तमाम प्रयास करने के बावजूद रवि काना का कहीं भी पता नहीं चल रहा है। खुफिया एजेंसी के इनपुट के आधार पर नोएडा पुलिस ने रवि काना के पुराने गुर्गों की जांच पड़ताल तेज कर दी है। जेल से बाहर आने के बाद रवि काना कहां गया, इसकी किसी को भनक तक नहीं है। न्यायालय ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया हुआ है। आपको बता दें कि रवि काना एक संगठित अपराधी गिरोह का सरगना है, जिसका गैंग नंबर डी-190 है। इस गैंग में कुल 18 सदस्य हैं। रवि काना और उसके गैंग के खिलाफ गौतमबुद्ध नगर समेत एनसीआर के कई जिलों में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह अवैध तरीके से स्क्रैप और सरिया के कारोबार से जुड़ा था। गैंग के सदस्य स्क्रैप और सरिया कारोबारियों को डराने-धमकाने, चोरी और लूट जैसी वारदातों को अंजाम देते थे। इन अपराधों के जरिए अवैध रूप से भारी मात्रा में संपत्ति अर्जित की गई, जिसे रवि काना, उसके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के नाम पर बेनामी रूप से दर्ज कराया गया है।

दर्जनों कंपनियों का मालिक है माफिया सरगना रवि काना

रवि काना और उसके परिजनों के नाम पर नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा में अनेक कंपनियां रजिस्टर्ड हैं। रवि काना की कंपनियों में मैसर्स प्राइम प्रेसिंग टूल्स प्राइवेट लिमिटेड, न्यू कृष्णा स्टील, एस्कोन एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड, हनुमत मैटल प्राइवेट लिमिटेड, अकीरा स्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड और जेएसआर रोड लाइन्स जैसी कंपनियां शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार रवि काना ने एक मामले में अग्रिम जमानत लेते समय न्यायालय की शर्तों का उल्लंघन किया। पासपोर्ट जमा न कराते हुए वह एक जनवरी 2024 को विदेश फरार हो गया। इसके बाद उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया और 24 अप्रैल 2024 को भारत लाकर उसे दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। 

नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा में सब जानते हैं रवि काना को

नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा से लेकर पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रवि काना का नाम सब जानते हैं। रवि काना कुख्यात माफिया है। रवि काना ने एक बड़ा गिरोह बनाकर स्क्रैप के कारोबार को बड़ा धंधा बना रखा था। नोएडा कमिश्ररी पुलिस ने दो दर्जन से ज्यादा मामलों में रवि काना के विरूद्ध कठोर कार्यवाही की थी। रवि काना तथा उसके साथियों को नोएडा पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत भी वांछित कर रखा था। बांदा जेल के एक जेलर की गलती से रिहा होने के बाद रवि काना फरार हो गया है। रवि काना के फरार होने के बाद से चारों तरफ उसकी तलाश जारी है। 

अनेक अपराधी शामिल हैं रवि काना के गिरोह में 

नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा क्षेेत्र में स्क्रैप का बड़ा अवैध धंधा चलता रहा है। इस पूरे धंधे का संचालन रवि काना का गिरोह करता रहा है। रवि काना के गिरोह में दो दर्जन से अधिक अपराधी शामिल हैं। नोएडा कमिश्ररी पुलिस ने रवि काना के गिरोह का जो गैंग चार्ट बनाया है उस गिरोह का मुखिया रवि नागर उर्फ रवि काना है। रवि काना के पिता का नाम यतेन्द्र है। वह मूल रूप से ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के दनकौर थाने के अंतर्गत आने वाले दादूपुर गाँव का रहने वाला है। नोएडा कमिश्ररी पुलिस ने गैंग चार्ट में रवि काना को कुख्यात माफिया के तौर पर दर्ज किया गया है। यह गिरोह अवैध रूप से स्क्रैप का धंधा करता है। व्यापारियों तथा उद्योगपतियों को डरा-धमकाकर अवैध रूप से वसूली करना रवि काना के गिरोह का पुराना धंधा है। नोएडा तथा ग्रेेटर नोएडा क्षेत्र में सक्रिय रवि काना के गिरोह में 25 से अधिक सदस्य शामिल हैं। इस गिरोह में चर्चित पत्रकार पंकज पाराशर का नाम भी शामिल है। पंकज पाराशर मूल रूप से बागपत जिले का रहने वाला है उसके पिता का नाम राजकरन शर्मा है। रवि काना के गिरोह के अन्य सदस्यों में बुलंदशहर जिले में औरंगाबाद क्षेत्र के गाँव मिकनपुर का सूरज, ग्रेटर नोएडा के बीटा-2 में रहने वाले भागमल का पुत्र राजेन्द्र सिंह, एक और पत्रकार महकारा सिंह भाटी, फिरोज खान, अवधेष सिसौदिया, देव शर्मा, हरवीर सिंह, विवेक कुमार, हरवीर सिंह की पत्नी बबीता, विकास नागर, अनिल उर्फ मिंटू नागर, शमशीर हसन, राजेन्द्र सिंह नागर की पत्नी पूनम, अमर सिंह उर्फ अवध उर्फ बिहारी, राजकुमार नागर, आजाद नगर, तरूण छौंकर, काजल झा, रवि काना की पत्नी मधु नागर, महकी, तथा विकास कुमार आदि के नाम शामिल हैं। आशंका जताई जा रही है कि रवि काना के गिरोह के इन सदस्यों के अलावा भी उसके कुछ और गुर्गे जरूर होंगे। यह भी बताया जाता है कि ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में रवि काना के कुछ गुर्गे उसके पैसों को ब्याज पर चलाने का काम भी करते हैं। रवि काना किस गुर्गे की आड़ में छुपकर बैठा है यह बहुत बड़ा सवाल है। Noida News

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