Tuesday, 28 May 2024

नोएडा प्राधिकरण में तैनात रहे अधिकारियों की सुप्रीम कोर्ट ने मांगी सूची

Noida News : नोएडा शहर के गेझा तिलपताबाद के किसानों को बीते सोमवार को दिए गए अतिरिक्त मुआवजे मामले में सुनवाई…

नोएडा प्राधिकरण में तैनात रहे अधिकारियों की सुप्रीम कोर्ट ने मांगी सूची

Noida News : नोएडा शहर के गेझा तिलपताबाद के किसानों को बीते सोमवार को दिए गए अतिरिक्त मुआवजे मामले में सुनवाई के दौरान 1 जनवरी 2013 के बाद नोएडा प्राधिकरण में तैनात रहे अफसरों की सूची सुप्रीम कोर्ट ने मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और नोएडा प्राधिकरण को कई निर्देश दिए है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 मई को होगी।

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जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार और नोएडा प्राधिकरण से ऐसे दो या तीन मामलों का मूल रिकॉर्ड पेश करने की बात कही है। जिसमें अधिक मुआवजा देने के आरोप हैं। इसके अलावा कोर्ट ने 20 अन्य किसानों के मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। ।

कई अधिकारी हो चुके है निलंबित

दरअसल गेझा तिलपताबाद मामले में नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी वीरेंद्र नागर को निलंबित कर दिया गया था। मामले में कई अन्य अधिकारी भी निलंबित हुए हैं। वहीं नोएडा प्राधिकरण ने इन अधिकारियों और कुछ किसानों के खिलाफ एफआईआर कराई है। आरोप है कि इन्होंने मिलीभगत कर तय मुआवजा से अधिक राशि किसानों को वितरित कर दी। वीरेंद्र नागर के मामले में 7.26 करोड़ अधिक मुआवजा वितरण का आरोप है। हालांकि प्राधिकरण के इसके बाद की जांच में करीब 80 करोड़ रुपये अधिक वितरण की आशंका जताई जा रही है।

प्राधिकरण को मिला दो हफ्ते का समय

कोर्ट ने ज्यादा मुआवजा मिलने के आरोपी किसानों को अंतरिम राहत देते हुए अगली सुनवाई तक किसी तरह का एक्शन नहीं लेने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अगले आदेश तक उनके खिलाफ जांच पर भी रोक लगा दी है। जिन मामलों में कोर्ट ने पहले से राहत दी है उस पर राहत जारी रहेगी। कोर्ट ने अपने आदेश में उत्तर प्रदेश सरकार और नोएडा प्राधिकरण को दो सप्ताह का समय दिया है। इस अवधि में मांगी गई जानकारी कोर्ट को उपलब्ध करानी होगी।

प्राधिकरण के पूरे सेटअप की धरपकड़ जरुरी

इस मामले में सुप्रमी कोर्ट ने साफ कहा कि नोएडा प्राधिकरण में पूरा सेटअप है जो कि इस तरह के काम करता है। जिसकी धरपकड़ करनी जरूरी है। यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं हो सकता है। अब तक की जांच में किसी अन्य अधिकारी का नाम सीधे तौर पर नहीं आया है। लेकिन बताया जा रहा है कि 2013 के बाद के अधिकारी कोर्ट के रडार पर हैं। मुआवजा वितरण मामले में इन पर गाज गिर सकती है। इसमें सीईओ, एसीईओ स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं।

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