कुख्यात माफिया सरगना रवि काना को जान का खतरा?

एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा से लेकर बांदा तक रवि काना का कहीं भी कुछ पता नहीं चल पाया है। इस बीच सूत्रों के हवाले से पता चला है कि रवि काना की जान को खतरा हो सकता है।

माफिया रवि काना
माफिया रवि काना
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar06 Feb 2026 05:03 PM
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Noida News : नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा से लेकर पूरे उत्तर प्रदेश में कुख्यात माफिया सरगना रवि काना चर्चा का विषय बना हुआ है। एक सप्ताह से नोएडा कमिश्नरी की पुलिस के साथ ही उत्तर प्रदेश भर की पुलिस रवि काना को तलाश कर रही है। एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा से लेकर बांदा तक रवि काना का कहीं भी कुछ पता नहीं चल पाया है। इस बीच सूत्रों के हवाले से पता चला है कि रवि काना की जान को खतरा हो सकता है। यह बड़ा सवाल है कि क्या वास्तव में कुख्यात माफिया सरगना रवि काना की जान खतरे में है?

अनेक सफेदपोश हैं रवि काना के राजदार

आपको बता दें कि नोएडा से लेकर लखनऊ तक रवि काना के अनेक संरक्षक रहे हैं। उत्तर प्रदेश के अनेक अधिकारियों, राजनेताओं तथा पत्रकारों को रवि काना से मोटी रकम मिलती थी। रवि काना की पाप की कमाई में से पैसा लेकर सफेदपोश अफसर, नेता तथा पत्रकार रवि काना को संरक्षण प्रदान करते थे। रवि काना के ज्यादातर संरक्षकों को डर है कि यदि कभी रवि काना ने उनके नाम उजागर कर दिए तो वे मुसीबत में फंस सकते हैं। जानकार सूत्रों का दावा है कि जेल से बाहर आने पर रवि काना के राजदार रवि काना की हत्या करवा सकते हैं।

जेल के अंदर अधिक सुरक्षित था रवि काना

उत्तर प्रदेश पुलिस के एक बड़े अधिकारी ने दावा किया है कि रवि काना जेल में अधिक सुरक्षित था। चेतना मंच के साथा एक अनौपचारिक बातचीत में पुलिस अधिकारी ने बताया कि रवि काना के अनेक दुश्मन बड़े-बड़े पदों पर बैठे हुए हैं। जेल से बाहर रहने पर रवि काना की कोई भी हत्या करवा सकता है। इस बीच बांदा पुलिस ने दावा किया है कि जेल से निकलने के बाद रवि काना को एक गाड़ी में बैठकर घाटमपुर की तरफ जाते हुए देखा गया था। घाटमपुर की तरफ जाने के बाद से रवि काना की कोई लोकेशन पुलिस को अभी तक नहीं मिली है। उत्तर प्रदेश पुलिस समझ ही नहीं पा रही है कि आखिर रवि काना कहां गायब हो गया है। 

अपने किसी साथी की मदद से छिपा हुआ है रवि काना

चेतना मंच ने पहले भी खबर दी थी कि रवि काना अपने किसी पुराने गुर्गे की आड में किसी अज्ञात स्थान पर छिपा हुआ है। पिछले एक सप्ताह से नोएडा कमिश्नरी पुलिस से लेकर उत्तर प्रदेश के सभी जिलों की पुलिस माफिया सरगना रवि काना को तलाश कर रही है। बांदा जेल से रिहा होने के बाद रवि काना का नोएडा से लेकर बांदा तक कहीं भी पता नहीं चल रहा है। नोएडा पुलिस को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर रवि काना कहां पर छुपकर बैठा हुआ है। खुफिया एजेंसी ने आशंका जाहिर की है कि रवि काना अपने किसी पुराने गुर्गे की आड़ में छुपकर बैठा हो सकता है। इस खुफिया जानकारी के आधार पर नोएडा पुलिस रवि काना के सभी पुराने गुर्गों की जांच पड़ताल कर रही है।

कहां गायब हो गया रवि काना?

नोएडा पुलिस से लेकर अलग-अलग जिलों में उत्तर प्रदेश पुलिस रवि काना की तलाश में जुटी हुई है। उत्तर प्रदेश पुलिस के तमाम प्रयास करने के बावजूद रवि काना का कहीं भी पता नहीं चल रहा है। खुफिया एजेंसी के इनपुट के आधार पर नोएडा पुलिस ने रवि काना के पुराने गुर्गों की जांच पड़ताल तेज कर दी है। जेल से बाहर आने के बाद रवि काना कहां गया, इसकी किसी को भनक तक नहीं है। न्यायालय ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया हुआ है। आपको बता दें कि रवि काना एक संगठित अपराधी गिरोह का सरगना है, जिसका गैंग नंबर डी-190 है। इस गैंग में कुल 18 सदस्य हैं। रवि काना और उसके गैंग के खिलाफ गौतमबुद्ध नगर समेत एनसीआर के कई जिलों में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह अवैध तरीके से स्क्रैप और सरिया के कारोबार से जुड़ा था। गैंग के सदस्य स्क्रैप और सरिया कारोबारियों को डराने-धमकाने, चोरी और लूट जैसी वारदातों को अंजाम देते थे। इन अपराधों के जरिए अवैध रूप से भारी मात्रा में संपत्ति अर्जित की गई, जिसे रवि काना, उसके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के नाम पर बेनामी रूप से दर्ज कराया गया है।

बड़ी-बड़ी कंपनियों का मालिक है माफिया सरगना रवि काना

रवि काना और उसके परिजनों के नाम पर नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा में अनेक कंपनियां रजिस्टर्ड हैं। रवि काना की कंपनियों में मैसर्स प्राइम प्रेसिंग टूल्स प्राइवेट लिमिटेड, न्यू कृष्णा स्टील, एस्कोन एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड, हनुमत मैटल प्राइवेट लिमिटेड, अकीरा स्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड और जेएसआर रोड लाइन्स जैसी कंपनियां शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार रवि काना ने एक मामले में अग्रिम जमानत लेते समय न्यायालय की शर्तों का उल्लंघन किया। पासपोर्ट जमा न कराते हुए वह एक जनवरी 2024 को विदेश फरार हो गया। इसके बाद उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया और 24 अप्रैल 2024 को भारत लाकर उसे दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा में अवैध साम्राज्य खड़ा कर रखा था रवि काना ने

नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा से लेकर पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रवि काना का नाम सब जानते हैं। रवि काना कुख्यात माफिया है। रवि काना ने एक बड़ा गिरोह बनाकर स्क्रैप के कारोबार को बड़ा धंधा बना रखा था। नोएडा कमिश्ररी पुलिस ने दो दर्जन से ज्यादा मामलों में रवि काना के विरूद्ध कठोर कार्यवाही की थी। रवि काना तथा उसके साथियों को नोएडा पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत भी वांछित कर रखा था। बांदा जेल के एक जेलर की गलती से रिहा होने के बाद रवि काना फरार हो गया है। रवि काना के फरार होने के बाद से चारों तरफ उसकी तलाश जारी है।

दर्जनों सहयोगी हैं रवि काना के गिरोह में 

नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा क्षेेत्र में स्क्रैप का बड़ा अवैध धंधा चलता रहा है। इस पूरे धंधे का संचालन रवि काना का गिरोह करता रहा है। रवि काना के गिरोह में दो दर्जन से अधिक अपराधी शामिल हैं। नोएडा कमिश्ररी पुलिस ने रवि काना के गिरोह का जो गैंग चार्ट बनाया है उस गिरोह का मुखिया रवि नागर उर्फ रवि काना है। रवि काना के पिता का नाम यतेन्द्र है। वह मूल रूप से ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के दनकौर थाने के अंतर्गत आने वाले दादूपुर गाँव का रहने वाला है। नोएडा कमिश्ररी पुलिस ने गैंग चार्ट में रवि काना को कुख्यात माफिया के तौर पर दर्ज किया गया है। यह गिरोह अवैध रूप से स्क्रैप का धंधा करता है। व्यापारियों तथा उद्योगपतियों को डरा-धमकाकर अवैध रूप से वसूली करना रवि काना के गिरोह का पुराना धंधा है। नोएडा तथा ग्रेेटर नोएडा क्षेत्र में सक्रिय रवि काना के गिरोह में 25 से अधिक सदस्य शामिल हैं। इस गिरोह में चर्चित पत्रकार पंकज पाराशर का नाम भी शामिल है। पंकज पाराशर मूल रूप से बागपत जिले का रहने वाला है उसके पिता का नाम राजकरन शर्मा है। रवि काना के गिरोह के अन्य सदस्यों में बुलंदशहर जिले में औरंगाबाद क्षेत्र के गाँव मिकनपुर का सूरज, ग्रेटर नोएडा के बीटा-2 में रहने वाले भागमल का पुत्र राजेन्द्र सिंह, एक और पत्रकार महकारा सिंह भाटी, फिरोज खान, अवधेष सिसौदिया, देव शर्मा, हरवीर सिंह, विवेक कुमार, हरवीर सिंह की पत्नी बबीता, विकास नागर, अनिल उर्फ मिंटू नागर, शमशीर हसन, राजेन्द्र सिंह नागर की पत्नी पूनम, अमर सिंह उर्फ अवध उर्फ बिहारी, राजकुमार नागर, आजाद नगर, तरूण छौंकर, काजल झा, रवि काना की पत्नी मधु नागर, महकी, तथा विकास कुमार आदि के नाम शामिल हैं। आशंका जताई जा रही है कि रवि काना के गिरोह के इन सदस्यों के अलावा भी उसके कुछ और गुर्गे जरूर होंगे। यह भी बताया जाता है कि ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में रवि काना के कुछ गुर्गे उसके पैसों को ब्याज पर चलाने का काम भी करते हैं। रवि काना किस गुर्गे की आड़ में छुपकर बैठा है यह बहुत बड़ा सवाल है। Noida News

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नोएडा की सड़कों पर दौड़ेंगी डबल डेकर बस, जेवर तक सफर होगा आसान

यूपी रोडवेज की 7 डबल डेकर बसें नोएडा पहुंच चुकी हैं और इनका संचालन नोएडा डिपो से प्रस्तावित है। इससे नोएडा, ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट के उन रूट्स पर खास असर पड़ेगा, जहां रोजाना पीक-आवर में यात्रियों को बसों में जगह तक नहीं मिलती।

नोएडा पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपग्रेड
नोएडा पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपग्रेड
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar06 Feb 2026 12:08 PM
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Noida News : नोएडा-ग्रेटर नोएडा की सड़कों पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का नजारा अब जल्द बदलने वाला है।  मुंबई की तर्ज पर अब गौतमबुद्ध नगर की सड़कों पर लग्जरी डबल डेकर बसें दौड़ती नजर आएंगी। यूपी रोडवेज की 7 डबल डेकर बसें नोएडा पहुंच चुकी हैं और इनका संचालन नोएडा डिपो से प्रस्तावित है। इससे नोएडा, ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट के उन रूट्स पर खास असर पड़ेगा, जहां रोजाना पीक-आवर में यात्रियों को बसों में जगह तक नहीं मिलती। ज्यादा सीट क्षमता और बेहतर सफर अनुभव के साथ ये बसें पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने के साथ-साथ रोज़मर्रा की आवाजाही को भी ज्यादा आरामदायक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही हैं।

नोएडा में क्यों खास हैं ये डबल डेकर बसें?

अधिकारियों के मुताबिक, इन बसों का मकसद केवल नई बसें जोड़ना नहीं है, बल्कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा बेल्ट में बढ़ते ट्रैफिक दबाव के बीच अधिक यात्रियों को कम वाहनों में सफर का विकल्प देना है। डबल डेकर बसों से एक ही ट्रिप में ज्यादा लोगों की आवाजाही संभव होगी, जिससे कुछ रूट्स पर निजी वाहनों की निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। यूपी रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज कुमार सिंह के अनुसार, एक डबल डेकर बस में 60 से ज्यादा यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी। यानी नोएडा के व्यस्त कॉरिडोर पर जहां पीक आवर्स में बसों में जगह नहीं मिलती, वहां यात्रियों को ज्यादा क्षमता का सीधा लाभ मिलेगा।

नोएडा से जेवर तक किन रूट्स पर दिखेंगी ये बसें?

रोडवेज की योजना के मुताबिक, इन बसों को नोएडा, ग्रेटर नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के प्रमुख रूट्स के साथ-साथ नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) की दिशा वाले कॉरिडोर पर चलाने की तैयारी है। उद्देश्य यह है कि जिन इलाकों में लंबे समय से सीधी और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन की कमी महसूस हो रही थी, वहां कनेक्टिविटी मजबूत की जा सके। फिलहाल किराया तय नहीं किया गया है। रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि नियमित संचालन शुरू करने से पहले दैनिक यात्रियों की जरूरत और रूट की डिमांड के हिसाब से किराए का निर्धारण किया जाएगा, ताकि कम खर्च में बेहतर सुविधा दी जा सके।

कब से शुरू होगा संचालन?

उत्तर प्रदेश रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज कुमार सिंह के मुताबिक, नोएडा में डबल-डेकर बसों की नियमित शुरुआत से पहले ट्रायल रन कराया जाएगा। इस ट्रायल के जरिए नोएडा-ग्रेटर नोएडा कॉरिडोर समेत प्रमुख रूट्स पर स्टॉपेज, ठहराव प्वाइंट और टाइमिंग को फाइनल किया जाएगा, ताकि यात्रियों को इंतजार कम और कनेक्टिविटी ज्यादा मिले। साथ ही यात्रियों की प्रतिक्रिया के आधार पर सुविधाओं और संचालन व्यवस्था में जरूरी सुधार किए जाएंगे। ट्रायल के दौरान ही बसों की तकनीकी फिटनेस और सभी प्रशासनिक औपचारिकताएं भी पूरी कर ली जाएंगी। रोडवेज का दावा है कि तैयारी पूरी होते ही बसों को नियमित सेवा में उतार दिया जाएगा। Noida News

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सुपरटेक प्रोजेक्ट के फ्लैट बायर्स के लिए बड़ी राहत, 16 प्रोजेक्ट पूरा करेगी NBCC

दिल्ली-एनसीआर में सुपरटेक के 16 अधूरे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को एनबीसीसी (नेशनल बिल्डिंग कंसट्रक्शन कंपनी) को हस्तांतरित करने का आदेश दिया है। यह फैसला उन होम बायर्स के लिए राहत लेकर आया है जिन्होंने 2010 से 2012 के बीच फ्लैट बुक किए थे और लंबे समय से कब्जे का इंतजार कर रहे थे।

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सुपरटेक के 16 अधूरे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar05 Feb 2026 05:24 PM
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Noida News : सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में सुपरटेक के 16 अधूरे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को एनबीसीसी (नेशनल बिल्डिंग कंसट्रक्शन कंपनी) को हस्तांतरित करने का आदेश दिया है। यह फैसला उन होम बायर्स के लिए राहत लेकर आया है जिन्होंने 2010 से 2012 के बीच फ्लैट बुक किए थे और लंबे समय से कब्जे का इंतजार कर रहे थे। अनुमानित तौर पर यह कदम 51,000 से अधिक होम बायर्स के लिए फायदेमंद साबित होगा।

मुख्य बातें:

1. परियोजनाओं की जिम्मेदारी एनबीसीसी को:

  सुप्रीम कोर्ट ने एनबीसीसी को आदेश दिया है कि वह इन प्रोजेक्ट्स को दो साल के भीतर पूरा करे।

2. सुपरटेक की विफलता:

  अदालत ने पाया कि सुपरटेक समय पर प्रोजेक्ट्स पूरा करने में असफल रही और कंपनी पर धन गबन के आरोप हैं।

3. एनसीएलएटी का आदेश बरकरार:

  सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलएटी के उस निर्णय को भी बनाए रखा, जिसमें कहा गया था कि प्रोजेक्ट्स के समय पर पूरा होने और होम बायर्स के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एनबीसीसी को प्रोजेक्ट्स सौंपे जाएं।

4. अंतिम और बाध्यकारी आदेश:

  सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इसका आदेश अंतिम और बाध्यकारी है। किसी भी अदालत या फोरम को प्रोजेक्ट्स के कार्यान्वयन में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं है।

फेज-1 प्रोजेक्ट्स (एनबीसीसी को हस्तांतरित):

1. इको विलेज 2 सेक्टर 168, ग्रेटर नोएडा

2. रोमानो सेक्टर 118, नोएडा

3. केपटाउन सेक्टर 74, नोएडा

4. जार सुइट्स ग्रेटर नोएडा

5. इको विलेज 3 सेक्टर 16बी, ग्रेटर नोएडा

6. स्पोर्ट्स विलेज सेक्टर 10, ग्रेटर नोएडा

7. इको सिटी सेक्टर 137, नोएडा

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