Sunday, 16 June 2024

कोने का मकान कलेश की खान !

Noida News : सिर्फ 10 वर्षों में ही यानी 2013 से 2023 तक ही सेंचुरी अपार्टमेंट (Century Apartment) के निवासियों…

कोने का मकान कलेश की खान !

Noida News : सिर्फ 10 वर्षों में ही यानी 2013 से 2023 तक ही सेंचुरी अपार्टमेंट (Century Apartment) के निवासियों ने सहयोग से खाली कबाड़ मैदान को पूरा ऑक्सीजन फैक्ट्री बना दिया। यानी कंक्रीट के शहर में एक खूबसूरत जंगल। 18,807 मीटर में जो कि कबाड़ से भरा था स्वयंसेवा से उसे शानदार जंगल और खेल का मैदान बना दिया। मैं अभिभूत थी पवन यादव जी के इस लक्ष्य पर जिन्होंने अपने साथ सबको एक कर लिया था।

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इतना खूबसूरत एफर्ट इसी अपार्टमेंट के लोगों ने कर दिखाया। लेकिन साथ-साथ ही मेरा फोन भी बज रहा था। दिल तो प्रफुल्लित था ही। बड़े प्यार से फोन उठाया तो दूसरी ओर से एक महिला ने बहुत ही तड़प भरी आवाज में जब अपना कष्ट बयां किया तो उनकी बात सुनते-सुनते ही मेरा दिल बहुत दु:खी हो गया कि एक ऐसा शहर जहां इतने पढ़े-लिखे लोग, ज्ञानी व बुद्धिमान रहते हैं वहां पर इस मानसिकता के लोग भी रहते हैं जो कि पर्यावरण की उपयुक्तता को कुछ समझते ही नहीं? बड़ी गाडिय़ां फिर उससे भी बड़ी गाडिय़ां पहले एक फिर दो आखिर … कितनी सारी गाडिय़ां?

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क्या होगा इस शहर का? मल्टी स्टोरी के साथ-साथ यहां प्लॉट्स हैं। एक्सपेंडेबल फ्लैट्स भी हैं जहाँ नीचे मकान मालिक रहते हैं ऊपर तीन मंजिल और बना लेता हैं। लगभग दो गाडिय़ां तो मकान मालिक की अपने लिए रहती ही हैं, ऊपर जो किराएदार आते हैं उन्हें भी यदि एरिया गेटेड है सेफ है तो सब गाड़ी वाले ही आ जाते हैं। कहीं कहीं तो एक मकान है तो 4 गाडिय़ां हैं।

आखिर कहां समाएगी ये गाडिय़ांं ?

एक तरफ झूठी शान तो दूसरी तरफ ताजी साँसों के लिए हरियाली का सम्मान। उस महिला के अनुसार कोने का घर हो हमारा, यही हमारा सपना था। हम उसमें कुछ फलों के पेड़ तथा फूलों की क्यारियां अपने हाथों से लगायें। हमारी खुशियों का ठिकाना नहीं था जब हमारी पसंद को ईश्वर ने सुन भी लिया कोई कहता बाहर टाइल्स लगा लो। पेंट का खर्च बच जाएगा। अपना रैंप चौड़ा लगाना ताकि गाड़ी अंदर से आराम से बाहर आ जा सके बल्कि आपका टू साइड ओपन घर है नीचे बढिय़ा सा पक्का कर लो और देखो पेड़ मत लगाना नहीं तो पत्ते ही पत्ते यानी पूरा घर ही कूड़ादान हो जाएगा? मुझे सुनकर बड़ा कष्ट होता कैसा पैसे वालों का सेक्टर है ये। पर्यावरण को लेकर कोई सोच ही नहीं? मेरा तो सपना ही पेड़-पौधे और गमले लगाने का था। किसी से क्या बहस करते हम पति-पत्नी ने मिलकर बहुत अच्छे से पेड़ लगाए। हमारे पडोसी दौड़े आए अरे ये क्या कर रहे हैं आप? आखिर गाडिय़ां कहाँ पार्क होंगी। हमें नहीं पता था कि हमारे लिए कितना कष्ट आगे तैयार है? आसपास जो घर थे उनकी ओर देखा आदमी कम और गाडिय़ां ज्यादा सभी के लगभग चार मंजिल मकान एक गाड़ी को रखने की जगह लेकिन ऊपर जो तीन किराएदार उनके पास भी गाडिय़ांं और वह गाडिय़ां शाम के वक्त जब रेंगती सी अपने लिए कहीं भी जगह ढूंढती फिरती हैं कि कहां पार्क हों? सबसे ज्यादा कोफ्त कि हमारे घर को घूरते! जाहिल, मेरा तो दिल ही टूट गया जब मेरे पेड़ों के ऊपर दो लोग गाड़ी खड़ी करके चले गए। मैं रात को चार बार देखने आई कि किसी का फोन नंबर हो या मुझे कैसे पता चले की गाड़ी किसकी है?

 

आरडब्ल्यूए के लोगों को फोन किया लेकिन वहां से कोई भी जवाब नहीं मिला। मुझे बहुत ही कष्ट हुआ। रात को जैसे तैसे सो गई, सुबह उठी तो मेरा दिल और भी धक रह गया जब उन गाडिय़ोंं के बीच में आसपास से कोई कूड़े की थैलियां भी टिका गया था। मैं तो आसमान से जमीन पर गिरी। अब मेरे तीन साल के खजूर के पेड़ को कोई तीन चार बार गाड़ी से कुचल गया है। मैंने अपने आम के पेड़ पर जाला लगा दिया था। उस जाले को बकायदा हटाकर उस पर भी कोई गाड़ी खड़ी कर गया है। मैंने उनको समझाने के लिए कहा। गीता का यह श्लोक बताया-जिस जीवन में संघर्ष नहीं होगा उस जीवन में सुख-समृद्धि एवं शांति रुपी मधुर फलों की प्राप्ति भी नहीं हो सकती। क्योंकि जीवन एक समर क्षेत्र है। अत: हर पल मानव को संग्राम करना ही पड़ता है जैसे कि वे पार्किंग के लिए आप करें पर्यावरण के लिए। साथ ही मैंने 10 साल में तैयार हुए इस जंगल की फोटो उन्हें भेज दी। उनका भी जवाब आया कि अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हम भी तब तक साधनारत एवं प्रयासरत रहेंगे जब तक कि मैं अपने इस कोने के घर को एक पर्यावरण प्रेमी के घर में ना बदल दूँ। Noida News

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