Tuesday, 21 May 2024

रफ्ता-रफ्ता खत्म होने वाला है ‘गरीबों का फ्रिज’, मन की तृप्ति कहां करेंगे तलाश?

Earthen Pot : चाहे आप मनभर के पानी पी लें लेकिन मन को असली सुकून ‘गरीबों का फ्रिज’ यानी मटके…

रफ्ता-रफ्ता खत्म होने वाला है ‘गरीबों का फ्रिज’, मन की तृप्ति कहां करेंगे तलाश?

Earthen Pot : चाहे आप मनभर के पानी पी लें लेकिन मन को असली सुकून ‘गरीबों का फ्रिज’ यानी मटके का पानी पीने के बाद ही मिलता है। गरीब घराने के कोने पर बड़े ही तहजीब से रखे गए मटके का पानी पीने के बाद ऐसा महसूस होता है मानो मन को तृप्ति मिल गई हो। भले ही आज के दौर में मटके जैसा माटी का बर्तन आपको बड़ा ही सादा लगे लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब इसके आगे फ्रिज फेल था।

Earthen Pot

पहले जमाने के लोगों ने पेट भरने के लिए घूम-घूमकर अपने लिए खाने की तलाश की। जब खाना मिला तो लोगों के दिल में ये सवाल पैदा हुआ कि अब इस भारी-भरकम शरीर को आराम पहुंचाने के लिए कोई जगह तो चाहिए। धीरे-धीरे इंसानों ने हर तरफ घूमकर बस्तियां बनाई। फिर क्या था घर के अंदर खाली बैठकर इंसान क्या करता? बस यहीं से इंसानों ने शुरू किया माटी के बर्तन बनाकर उन्हें बचेने का सिलसिला। इन माटी के बर्तनों में से एक चीज बहुत काम का बना और वो था ‘गरीबों का फ्रिज’। इस छोटे से मटके का काम इतना निराला है जो सचमुच काबिल-ए-तारीफ है।

मन को दिलाए तृप्ति

मटका, घड़ा, लाटरी, मटकी आदि नामों से पुकारे जाने वाले इस छोटे से मटके को बनाने के लिए लोग अपने आवास से बड़ी दूर निकलकर इसकी सबसे अलग मिट्टी को खोज करते हैं। इसके बाद इस मिट्टी को मटके का आकार देकर इसे ढ़ाल लिया जाता है। अब इसे पेडों के बीच से झनकर आ रही धूप में सुखाकर इसकी खूबसूरती बढ़ाने के लिए इसमें कुछ कलाकारी की जाती है। कलाकारी कर इस छोटे से फ्रिज को बाजारों में ले जाकर बेचा जाता है। ग्रामीण मटके का पानी बड़े शौक से पीते हैं क्योंकिं मटके के पानी का मीठा स्वाद गले को तृप्ति पहुंचाने का काम करता है। जिसे पीने के बाद आदमी की थकान चंद सेकेंड में गायब हो जाती है।

‘गरीबों का फ्रिज’ क्यों होने वाला है खत्म?

आज के दौर में ‘गरीबों का फ्रिज’ का पानी बेहद कम लोग पीते हैं। हालांकि गांव में लोग आज भी अपने घरों में मटका रखते हैं और मटके का ही पानी पीते हैं लेकिन शहरों में दूर-दूर तक मटका नजर नहीं आता। अपने पेट की भूख मिटाने के लिए शहर की तरफ आए ग्रामीणों की जुबान मटके का पानी पीने के लिए बेहद तरस गई है। टेक्नोलॉजी के इस दौर में गांव के हर घर के किनारे बड़े शान से लगे मटके की छाप शहरों में दूर-दूर तक दिखाई नहीं देती है। ऐसे में अमीरों का फ्रिज, गरीबों के फ्रिज पर भारी पड़ता हुआ नजर आ रहा है। जिसके चलते रफ्ता-रफ्ता ‘गरीबों का फ्रिज’ अपने आखिरी पड़ाव में आता दिख रहा है।

मटका बचाना क्यों है जरूरी? Earthen Pot

जैसा की हम सभी जानते हैं सदियों से मिट्टी के बर्तन या मटके में पानी पीने की प्रक्रिया चलती आ रही है। गर्मियों में मटके का पानी एक अलग ही दुनिया की सैर कराता है। इतना ही नहीं मटके के पानी का स्वाद लाजवाब होने के अलावा हमारे सेहत के लिए काफी फायदेमंद भी होता है। लाजवाब स्वाद और सेहत का ध्यान रखते हुए मिट्टी के इस छोटे से बर्तन को बचाना बेहद जरूरी है ताकि शहरी लोग भी घड़े के मीठे पानी का लुत्फ उठा सकें।

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