बड़ी खबर : उत्तर प्रदेश में SIR की अंतिम तिथि बढ़ी, 6 मार्च तक मौका
इस बीच फॉर्म-7 को लेकर उठ रहे सवालों पर यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि नाम कटवाने की प्रक्रिया सिर्फ फॉर्म-7 के जरिए होती है और इसे केवल रजिस्टर्ड मतदाता ही भर सकता है।

UP News : उत्तर प्रदेश में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर बड़ी राहत वाली खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश में अब दावे-आपत्ति 6 मार्च तक दर्ज की जा सकेगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल को प्रकाशित की जाएगी। इस बीच फॉर्म-7 को लेकर उठ रहे सवालों पर यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि नाम कटवाने की प्रक्रिया सिर्फ फॉर्म-7 के जरिए होती है और इसे केवल रजिस्टर्ड मतदाता ही भर सकता है। फॉर्म-7 में पूरी जानकारी के साथ नाम हटाने का ठोस कारण बताना अनिवार्य होगा। साथ ही उन्होंने साफ किया कि एक साथ कई फॉर्म-7 स्वीकार नहीं किए जाएंगे और एक व्यक्ति एक दिन में अधिकतम 10 फॉर्म-7 ही जमा कर सकेगा
उत्तर प्रदेश में क्यों अहम है यह विस्तार?
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और विविध आबादी वाले राज्य में SIR की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में आवेदन आते हैं। कई जिलों में लोगों ने यह शिकायत की थी कि फॉर्म भरने, प्रमाण-पत्र जुटाने और सत्यापन में समय कम पड़ रहा है। इसी को देखते हुए समय-सीमा बढ़ाने का फैसला किया गया, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति प्रक्रिया से बाहर न रह जाए और रिकॉर्ड अधिक सटीक तरीके से अपडेट हो सके।
दावा-आपत्ति में किन बातों को सुधारा जा सकता है?
दावा-आपत्ति के जरिए आम तौर पर लोग:
- नाम की स्पेलिंग/उपनाम में सुधार
- पता, वार्ड/ग्राम, विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी गलती
- उम्र/जन्मतिथि में त्रुटि
- फोटो या अन्य विवरण अपडेट
- पात्र होने पर नाम जोड़ने/गलती होने पर आपत्ति दर्ज कराने
- जैसी चीज़ों को ठीक करा सकते हैं।
राजनीतिक दलों की सहमति के बाद बढ़ी समय-सीमा
शुक्रवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने साफ किया कि हर पात्र नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ना आयोग की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि अब हर दिन सुबह 10 बजे से 12 बजे तक संबंधित बूथ पर बीएलओ (BLO) मौजूद रहेंगे, ताकि लोग सीधे संपर्क कर नाम जुड़वाने, त्रुटि सुधारने या आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी कर सकें। SIR के तहत प्रदेशभर में 8,990 ARO दावे-आपत्तियों की सुनवाई कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर अन्य अधिकारियों की भी ड्यूटी लगाई जाएगी, जिससे निस्तारण तेज और पारदर्शी हो सके। CEO नवदीप रिणवा ने यह भी बताया कि राजनीतिक दलों की मांग और सहमति के बाद समय-सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया। 27 जनवरी की बैठक में दलों ने अतिरिक्त समय देने की बात उठाई थी, जिसके बाद 6 फरवरी से 6 मार्च तक दावे-आपत्तियों की अवधि बढ़ा दी गई। अब इस नई समय-सीमा में नागरिक नाम बढ़वाने, सही कराने और कटवाने के लिए फॉर्म भर सकेंगे, जबकि चुनाव आयोग 27 मार्च तक सभी दावे-आपत्तियों का निस्तारण करने की तैयारी में है।
10 अप्रैल को जारी होगी उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची
उत्तर प्रदेश में SIR के तहत चल रही कवायद के बीच फाइनल वोटर लिस्ट को लेकर भी तस्वीर साफ हो गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के मुताबिक 10 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। उन्होंने बताया कि सूची को त्रुटि-रहित बनाने के लिए प्रदेश में बड़े पैमाने पर डेटा सत्यापन चल रहा है। इस दौरान करीब 1 करोड़ 4 लाख “अनमैप” मतदाता चिन्हित किए गए हैं। वहीं तार्किक विसंगतियों (रिकॉर्ड में असंगति) के मामलों में 2 करोड़ 22 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजने की प्रक्रिया जारी है। कुल मिलाकर 2 करोड़ 37 लाख नोटिस जनरेट किए जा चुके हैं, जिनमें से 86 लाख से अधिक नोटिस मतदाताओं तक पहुंचाए भी जा चुके हैं। अब तक 30 लाख से ज्यादा नोटिस मामलों पर सुनवाई पूरी हो चुकी है, ताकि अंतिम सूची जारी होने से पहले रिकॉर्ड पूरी तरह दुरुस्त किया जा सके।
UP News : उत्तर प्रदेश में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर बड़ी राहत वाली खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश में अब दावे-आपत्ति 6 मार्च तक दर्ज की जा सकेगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल को प्रकाशित की जाएगी। इस बीच फॉर्म-7 को लेकर उठ रहे सवालों पर यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि नाम कटवाने की प्रक्रिया सिर्फ फॉर्म-7 के जरिए होती है और इसे केवल रजिस्टर्ड मतदाता ही भर सकता है। फॉर्म-7 में पूरी जानकारी के साथ नाम हटाने का ठोस कारण बताना अनिवार्य होगा। साथ ही उन्होंने साफ किया कि एक साथ कई फॉर्म-7 स्वीकार नहीं किए जाएंगे और एक व्यक्ति एक दिन में अधिकतम 10 फॉर्म-7 ही जमा कर सकेगा
उत्तर प्रदेश में क्यों अहम है यह विस्तार?
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और विविध आबादी वाले राज्य में SIR की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में आवेदन आते हैं। कई जिलों में लोगों ने यह शिकायत की थी कि फॉर्म भरने, प्रमाण-पत्र जुटाने और सत्यापन में समय कम पड़ रहा है। इसी को देखते हुए समय-सीमा बढ़ाने का फैसला किया गया, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति प्रक्रिया से बाहर न रह जाए और रिकॉर्ड अधिक सटीक तरीके से अपडेट हो सके।
दावा-आपत्ति में किन बातों को सुधारा जा सकता है?
दावा-आपत्ति के जरिए आम तौर पर लोग:
- नाम की स्पेलिंग/उपनाम में सुधार
- पता, वार्ड/ग्राम, विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी गलती
- उम्र/जन्मतिथि में त्रुटि
- फोटो या अन्य विवरण अपडेट
- पात्र होने पर नाम जोड़ने/गलती होने पर आपत्ति दर्ज कराने
- जैसी चीज़ों को ठीक करा सकते हैं।
राजनीतिक दलों की सहमति के बाद बढ़ी समय-सीमा
शुक्रवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने साफ किया कि हर पात्र नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ना आयोग की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि अब हर दिन सुबह 10 बजे से 12 बजे तक संबंधित बूथ पर बीएलओ (BLO) मौजूद रहेंगे, ताकि लोग सीधे संपर्क कर नाम जुड़वाने, त्रुटि सुधारने या आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी कर सकें। SIR के तहत प्रदेशभर में 8,990 ARO दावे-आपत्तियों की सुनवाई कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर अन्य अधिकारियों की भी ड्यूटी लगाई जाएगी, जिससे निस्तारण तेज और पारदर्शी हो सके। CEO नवदीप रिणवा ने यह भी बताया कि राजनीतिक दलों की मांग और सहमति के बाद समय-सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया। 27 जनवरी की बैठक में दलों ने अतिरिक्त समय देने की बात उठाई थी, जिसके बाद 6 फरवरी से 6 मार्च तक दावे-आपत्तियों की अवधि बढ़ा दी गई। अब इस नई समय-सीमा में नागरिक नाम बढ़वाने, सही कराने और कटवाने के लिए फॉर्म भर सकेंगे, जबकि चुनाव आयोग 27 मार्च तक सभी दावे-आपत्तियों का निस्तारण करने की तैयारी में है।
10 अप्रैल को जारी होगी उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची
उत्तर प्रदेश में SIR के तहत चल रही कवायद के बीच फाइनल वोटर लिस्ट को लेकर भी तस्वीर साफ हो गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के मुताबिक 10 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। उन्होंने बताया कि सूची को त्रुटि-रहित बनाने के लिए प्रदेश में बड़े पैमाने पर डेटा सत्यापन चल रहा है। इस दौरान करीब 1 करोड़ 4 लाख “अनमैप” मतदाता चिन्हित किए गए हैं। वहीं तार्किक विसंगतियों (रिकॉर्ड में असंगति) के मामलों में 2 करोड़ 22 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजने की प्रक्रिया जारी है। कुल मिलाकर 2 करोड़ 37 लाख नोटिस जनरेट किए जा चुके हैं, जिनमें से 86 लाख से अधिक नोटिस मतदाताओं तक पहुंचाए भी जा चुके हैं। अब तक 30 लाख से ज्यादा नोटिस मामलों पर सुनवाई पूरी हो चुकी है, ताकि अंतिम सूची जारी होने से पहले रिकॉर्ड पूरी तरह दुरुस्त किया जा सके।












