बड़ी खबर : उत्तर प्रदेश में SIR की अंतिम तिथि बढ़ी, 6 मार्च तक मौका

इस बीच फॉर्म-7 को लेकर उठ रहे सवालों पर यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि नाम कटवाने की प्रक्रिया सिर्फ फॉर्म-7 के जरिए होती है और इसे केवल रजिस्टर्ड मतदाता ही भर सकता है।

यूपी में दावा-आपत्ति की समय-सीमा बढ़ी
यूपी में दावा-आपत्ति की समय-सीमा बढ़ी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar06 Feb 2026 03:05 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर बड़ी राहत वाली खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश में अब दावे-आपत्ति 6 मार्च तक दर्ज की जा सकेगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल को प्रकाशित की जाएगी। इस बीच फॉर्म-7 को लेकर उठ रहे सवालों पर यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि नाम कटवाने की प्रक्रिया सिर्फ फॉर्म-7 के जरिए होती है और इसे केवल रजिस्टर्ड मतदाता ही भर सकता है। फॉर्म-7 में पूरी जानकारी के साथ नाम हटाने का ठोस कारण बताना अनिवार्य होगा। साथ ही उन्होंने साफ किया कि एक साथ कई फॉर्म-7 स्वीकार नहीं किए जाएंगे और एक व्यक्ति एक दिन में अधिकतम 10 फॉर्म-7 ही जमा कर सकेगा

उत्तर प्रदेश में क्यों अहम है यह विस्तार?

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और विविध आबादी वाले राज्य में SIR की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में आवेदन आते हैं। कई जिलों में लोगों ने यह शिकायत की थी कि फॉर्म भरने, प्रमाण-पत्र जुटाने और सत्यापन में समय कम पड़ रहा है। इसी को देखते हुए समय-सीमा बढ़ाने का फैसला किया गया, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति प्रक्रिया से बाहर न रह जाए और रिकॉर्ड अधिक सटीक तरीके से अपडेट हो सके।

दावा-आपत्ति में किन बातों को सुधारा जा सकता है?

दावा-आपत्ति के जरिए आम तौर पर लोग:

  1. नाम की स्पेलिंग/उपनाम में सुधार
  2. पता, वार्ड/ग्राम, विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी गलती
  3. उम्र/जन्मतिथि में त्रुटि
  4. फोटो या अन्य विवरण अपडेट
  5. पात्र होने पर नाम जोड़ने/गलती होने पर आपत्ति दर्ज कराने
  6. जैसी चीज़ों को ठीक करा सकते हैं।

राजनीतिक दलों की सहमति के बाद बढ़ी समय-सीमा

शुक्रवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने साफ किया कि हर पात्र नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ना आयोग की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि अब हर दिन सुबह 10 बजे से 12 बजे तक संबंधित बूथ पर बीएलओ (BLO) मौजूद रहेंगे, ताकि लोग सीधे संपर्क कर नाम जुड़वाने, त्रुटि सुधारने या आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी कर सकें। SIR के तहत प्रदेशभर में 8,990 ARO दावे-आपत्तियों की सुनवाई कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर अन्य अधिकारियों की भी ड्यूटी लगाई जाएगी, जिससे निस्तारण तेज और पारदर्शी हो सके। CEO नवदीप रिणवा ने यह भी बताया कि राजनीतिक दलों की मांग और सहमति के बाद समय-सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया। 27 जनवरी की बैठक में दलों ने अतिरिक्त समय देने की बात उठाई थी, जिसके बाद 6 फरवरी से 6 मार्च तक दावे-आपत्तियों की अवधि बढ़ा दी गई। अब इस नई समय-सीमा में नागरिक नाम बढ़वाने, सही कराने और कटवाने के लिए फॉर्म भर सकेंगे, जबकि चुनाव आयोग 27 मार्च तक सभी दावे-आपत्तियों का निस्तारण करने की तैयारी में है।

10 अप्रैल को जारी होगी उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची

उत्तर प्रदेश में SIR के तहत चल रही कवायद के बीच फाइनल वोटर लिस्ट को लेकर भी तस्वीर साफ हो गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के मुताबिक 10 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। उन्होंने बताया कि सूची को त्रुटि-रहित बनाने के लिए प्रदेश में बड़े पैमाने पर डेटा सत्यापन चल रहा है। इस दौरान करीब 1 करोड़ 4 लाख “अनमैप” मतदाता चिन्हित किए गए हैं। वहीं तार्किक विसंगतियों (रिकॉर्ड में असंगति) के मामलों में 2 करोड़ 22 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजने की प्रक्रिया जारी है। कुल मिलाकर 2 करोड़ 37 लाख नोटिस जनरेट किए जा चुके हैं, जिनमें से 86 लाख से अधिक नोटिस मतदाताओं तक पहुंचाए भी जा चुके हैं। अब तक 30 लाख से ज्यादा नोटिस मामलों पर सुनवाई पूरी हो चुकी है, ताकि अंतिम सूची जारी होने से पहले रिकॉर्ड पूरी तरह दुरुस्त किया जा सके।


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कौन हैं इंस्पेक्टर विक्रम सिंह? जिन्होंने घूसखोर पंडत पर दर्ज कराया केस

खास बात यह है कि शिकायत किसी संगठन या व्यक्ति ने नहीं, बल्कि कोतवाली में तैनात इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने स्वयं वादी बनकर दर्ज कराई। पुलिस के अनुसार, प्रचार में इस्तेमाल शब्दों और शीर्षक पर बढ़ते आक्रोश को देखते हुए इसे सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक शांति के लिए संभावित चुनौती माना गया।

इंस्पेक्टर विक्रम सिंह
इंस्पेक्टर विक्रम सिंह
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar06 Feb 2026 02:06 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर विवाद अब सोशल मीडिया से निकलकर सीधे थाने की FIR तक पहुंच गया है। हजरतगंज कोतवाली में इस सीरीज के शीर्षक और प्रचार सामग्री को लेकर मुकदमा दर्ज किया गया है। खास बात यह है कि शिकायत किसी संगठन या व्यक्ति ने नहीं, बल्कि कोतवाली में तैनात इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने स्वयं वादी बनकर दर्ज कराई। पुलिस के अनुसार, प्रचार में इस्तेमाल शब्दों और शीर्षक पर बढ़ते आक्रोश को देखते हुए इसे सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक शांति के लिए संभावित चुनौती माना गया। एफआईआर के बाद विवाद और तेज होने के संकेत हैं, क्योंकि पुलिस की दृष्टि में यह मुद्दा केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं, बल्कि धार्मिक-जातिगत संवेदनशीलता और कानून-व्यवस्था से सीधे जुड़ा है इसी वजह से हजरतगंज जैसे हाई-सिक्योरिटी इलाके में इसे गंभीरता से लिया गया।

कौन हैं इंस्पेक्टर विक्रम सिंह?

हजरतगंज कोतवाली में तैनात करीब 46 वर्षीय इंस्पेक्टर विक्रम सिंह इससे पहले लखनऊ के कृष्णानगर थाना क्षेत्र में अपनी तैनाती के दौरान भी चर्चा में रहे हैं। उनका 10 अक्टूबर 2022 को लखनऊ में ट्रांसफर हुआ था और वे मैनपुरी से यहां आए थे, जहां वे साइबर सेल के प्रभारी इंस्पेक्टर के रूप में भी काम कर चुके हैं। इसके अलावा, वे वाराणसी और झांसी क्राइम ब्रांच में सेवा दे चुके हैं और पहले अयोध्या में एसओ के पद पर भी तैनात रहे। पुलिस विभाग में उनका अनुभव कई जिलों में काम करने का रहा है। इंस्पेक्टर विक्रम सिंह 2001 बैच के सब-इंस्पेक्टर हैं। परिवार में मां, पत्नी और दो बेटे हैं। उनकी ट्रेनिंग मुरादाबाद में हुई थी। पुलिसिंग के साथ-साथ वे अपने मानवीय और सामाजिक पहलुओं के लिए भी जाने जाते रहे हैं।

कृष्णानगर में सामने आया था मानवीय चेहरा

कृष्णानगर में तैनाती के दौरान जुलाई 2023 में एक 80 वर्षीय वृद्धा के निधन के बाद, उनके बेटे के शहर से बाहर चले जाने पर इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने थाना टीम के साथ मिलकर अंतिम संस्कार कराने का निर्णय लिया था। वह दृश्य जब इंस्पेक्टर खुद अर्थी को कंधा देते नजर आए लखनऊ में लंबे समय तक चर्चा का विषय रहा। हजरतगंज में उन्होंने बच्चों के मन से पुलिस का डर कम करने के लिए भी विशेष पहल की। बच्चों को कोतवाली बुलाकर उन्हें इंस्पेक्टर की कुर्सी पर बैठाया, मिठाई-टॉफी बांटी और सितंबर 2024 में इस कदम की सार्वजनिक रूप से सराहना हुई थी। इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को उनके काम के लिए दिसंबर 2025 में तत्कालीन डीजीपी राजीव कृष्ण द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किए जाने की बात सामने आई है। हजरतगंज जैसे संवेदनशील और हाई-सिक्योरिटी जोन में उनकी कार्यशैली को देखते हुए यह सम्मान दिया गया था।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?

लखनऊ पुलिस ने घूसखोर पंडत वेब सीरीज के निर्देशक और इससे जुड़े लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता व आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की नींव रख दी है। एफआईआर में आरोप है कि कंटेंट/शीर्षक के जरिए जाति-धर्म के आधार पर वैमनस्य फैलाने (धारा 196), धार्मिक व जातिगत भावनाओं को जानबूझकर आहत करने (धारा 299) और अपमानजनक कृत्यों के जरिए सार्वजनिक शांति भंग करने की कोशिश (धारा 352/353) की गई। वहीं, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार और दुरुपयोग को लेकर आईटी एक्ट की धारा 66 भी जोड़ी गई है।

शिकायत में क्या कहा गया?

इंस्पेक्टर विक्रम सिंह की शिकायत के मुताबिक, फिल्म/सीरीज का शीर्षक एक विशिष्ट समुदाय को अपमानित करने के उद्देश्य से रखा गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि ऐसे शीर्षक और प्रचार सामग्री जातिगत विद्वेष बढ़ा सकते हैं, समाज के एक बड़े वर्ग की छवि धूमिल कर सकते हैं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ऐसी सामग्री परोसना अनुचित है, जो आस्था और सामाजिक पहचान पर चोट करे। UP News

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घूसखोर पंडित पर भड़के सीएम योगी, लखनऊ में FIR दर्ज

पुलिस के मुताबिक, आपत्तिकर्ताओं की शिकायत है कि सीरीज का नाम और प्रस्तुति एक विशेष समाज खासतौर पर ब्राह्मण समुदाय को गलत संदर्भ में दिखाने का संकेत देता है। इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।

सीएम योगी
सीएम योगी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar06 Feb 2026 12:40 PM
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UP News : ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज से पहले ही वेब सीरीज घूसखोर पंडित उत्तर प्रदेश में विवादों के केंद्र में आ गई है। टाइटल और कथित कंटेंट को लेकर आपत्ति जताते हुए लखनऊ के हजरतगंज थाने में डायरेक्टर व टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद दर्ज शिकायत के आधार पर हुई। पुलिस के मुताबिक, आपत्तिकर्ताओं की शिकायत है कि सीरीज का नाम और प्रस्तुति एक विशेष समाज खासतौर पर ब्राह्मण समुदाय को गलत संदर्भ में दिखाने का संकेत देता है। इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है। इसी आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू की गई है।

धार्मिक संगठनों ने खोला मोर्चा

विवाद बढ़ने के साथ ही उत्तर प्रदेश के धार्मिक-सामाजिक संगठनों ने भी विरोध तेज कर दिया है। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सीरीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि टाइटल में इस्तेमाल शब्द समाज की छवि को ठेस पहुंचाते हैं और ‘घूसखोर’ जैसे शब्दों का प्रयोग आपत्तिजनक है। वहीं प्रयागराज से भी संत समाज की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज ने इसे सनातन परंपरा के खिलाफ बताते हुए बैन की मांग की है।

रिलीज से पहले मेकर्स ने उठाया बड़ा कदमइस पूरे विवाद के बीच मेकर्स की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। डायरेक्टर नीरज पांडेय ने बयान जारी कर कहा कि कुछ दर्शकों की भावनाएं आहत होने की बात सामने आई, इसे देखते हुए फिलहाल सभी प्रमोशनल मटेरियल हटाए गए हैं। सीरीज में मनोज बाजपेयी, नुसरत भरूचा और श्रद्धा दास के मुख्य भूमिकाओं में होने की जानकारी दी जा रही है। इसका टीजर हाल में रिलीज हुआ था और इसे इसी साल नेटफ्लिक्स पर आने की चर्चा है। UP News

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