उत्तर प्रदेश में बनेगा महा-एक्सप्रेसवे, देश के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों को मिलेगी तेज रफ्तार

नए प्रस्ताव के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई बढ़कर लगभग 750 किलोमीटर हो जाएगी। यह परियोजना उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुल 22 जिलों को आपस में जोड़ेगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, एलाइनमेंट (मार्ग निर्धारण) का कार्य तेजी से जारी है और फरवरी 2026 तक डिजाइन को अंतिम रूप देने की योजना है।

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महा-एक्सप्रेसवे
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar18 Jan 2026 04:06 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में एक विशाल महा-एक्सप्रेसवे के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रस्तावित पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे को अब कुशीनगर तक विस्तारित करने की तैयारी चल रही है। इस विस्तार के बाद यह कॉरिडोर आगे चलकर सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा, जिससे देश के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों के बीच तेज रफ्तार सड़क संपर्क संभव हो सकेगा।

750 किलोमीटर लंबा होगा महा-एक्सप्रेसवे

नए प्रस्ताव के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई बढ़कर लगभग 750 किलोमीटर हो जाएगी। यह परियोजना उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुल 22 जिलों को आपस में जोड़ेगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, एलाइनमेंट (मार्ग निर्धारण) का कार्य तेजी से जारी है और फरवरी 2026 तक डिजाइन को अंतिम रूप देने की योजना है।

सिलीगुड़ी से पानीपत तक सीधी फोरलेन कनेक्टिविटी

एक्सप्रेसवे के सिलीगुड़ी कॉरिडोर से जुड़ने के बाद सिलीगुड़ी से पानीपत तक निर्बाध फोरलेन सड़क संपर्क उपलब्ध होगा। इससे पूर्वांचल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच यात्रा समय में भारी कमी आएगी। साथ ही, व्यापार, उद्योग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि पहले यह एक्सप्रेसवे गोरखपुर से शामली तक प्रस्तावित था, जिसे बाद में पानीपत तक बढ़ाया गया और अब कुशीनगर तक विस्तार का निर्णय लिया गया है।

ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, कम से कम पेड़ कटा

यह एक्सप्रेसवे पूरी तरह ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे पर्यावरणीय नुकसान न्यूनतम रहे। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इसमें कुशीनगर में 21 गांव, गोरखपुर में 46 गांव इस परियोजना के दायरे में आएंगे। एलाइनमेंट फाइनल होने के बाद प्रभावित गांवों की संख्या में बदलाव संभव है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।

किन-किन जिलों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे

यह महा-एक्सप्रेसवे कुशीनगर से शुरू होकर गोरखपुर, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखनऊ, सीतापुर, हरदोई, शाहजहांपुर, बदायूं, रामपुर, बरेली, संभल, अमरोहा, मेरठ, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली होते हुए पानीपत तक पहुंचेगा। जिलावार लंबाई की बात करें तो गोरखपुर में लगभग 34 किमी, संतकबीरनगर में लगभग 22.5 किमी, कुशीनगर में लगभग 3 किमी लंबा होगा।

2026 में शुरू हो सकता है निर्माण

इस परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 2026 में शुरू होने की संभावना है। एक्सप्रेसवे की चौड़ाई 60 से 70 मीटर रखी जाएगी, ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर लेन विस्तार किया जा सके। फिलहाल विशेषज्ञों की टीम द्वारा एलाइनमेंट और लेवल सर्वे किया जा रहा है और कई क्षेत्रों में सर्वे से जुड़े प्रारंभिक कार्य पूरे हो चुके हैं। यह एक्सप्रेसवे न केवल यातायात को आसान बनाएगा, बल्कि पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा के आर्थिक विकास को भी नई गति देगा। बेहतर कनेक्टिविटी से रोजगार, निवेश और व्यापारिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।

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उत्तर प्रदेश में ट्रांसपोर्ट नगर के भूखंड होंगे फ्री-होल्ड, मिलेगा आवंटियों को मालिकाना हक

एलडीए अधिकारियों के अनुसार, ट्रांसपोर्ट नगर योजना की शुरुआत वर्ष 1980 में की गई थी। इस योजना के तहत 50 से 1000 वर्गमीटर क्षेत्रफल वाले लगभग 1900 भूखंड शामिल हैं, जिन्हें उस समय लीज पर आवंटित किया गया था।

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ट्रांसपोर्ट नगर के भूखंड
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar18 Jan 2026 01:42 PM
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UP News : लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने ट्रांसपोर्ट नगर योजना के अंतर्गत लीज पर दिए गए भूखंडों को फ्री-होल्ड करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस फैसले से वर्षों से मालिकाना हक का इंतजार कर रहे सैकड़ों व्यापारियों और भूखंड धारकों को सीधी राहत मिलने जा रही है। प्राधिकरण ने इस प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष कैंप आयोजित करने का निर्णय लिया है, ताकि आवंटियों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

लंबे समय से आवंटी कर रहे थे भूखंडों को फ्री-होल्ड कराने की मांग

एलडीए अधिकारियों के अनुसार, ट्रांसपोर्ट नगर योजना की शुरुआत वर्ष 1980 में की गई थी। इस योजना के तहत 50 से 1000 वर्गमीटर क्षेत्रफल वाले लगभग 1900 भूखंड शामिल हैं, जिन्हें उस समय लीज पर आवंटित किया गया था। इन भूखंडों पर वर्तमान में गोदाम, ट्रांसपोर्ट एजेंसियां और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। लंबे समय से आवंटी इन भूखंडों को फ्री-होल्ड कराने की मांग कर रहे थे, जिस पर प्राधिकरण बोर्ड ने पिछले वर्ष सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी।

कमेटी हॉल में एक विशेष कैंप लगाया जाएगा

इसी क्रम में एलडीए ने 29 जनवरी 2026 को गोमती नगर स्थित प्राधिकरण भवन के कमेटी हॉल में एक विशेष कैंप लगाने का फैसला किया है। यह कैंप सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगा। कैंप के दौरान इच्छुक आवंटी अपने भूखंडों को फ्री-होल्ड कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें अपने सभी आवश्यक दस्तावेजों की सत्यापित प्रतियां साथ लानी होंगी। प्राधिकरण द्वारा दस्तावेजों की जांच के बाद निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार भूखंडों को लीज से फ्री-होल्ड किया जाएगा। एलडीए का मानना है कि इस पहल से न केवल आवंटियों को स्थायी मालिकाना अधिकार मिलेगा, बल्कि क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी। फ्री-होल्ड होने के बाद भूखंड स्वामी अपने प्लॉट का स्वतंत्र रूप से उपयोग, बिक्री या वित्तीय लेनदेन कर सकेंगे। एलडीए की यह पहल ट्रांसपोर्ट नगर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

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उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को लेकर राज्य सरकार ने लिया अहम फैसला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को देश के अग्रणी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए लगातार ठोस निर्णय ले रही है।

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योगी आदित्यनाथ नक्शे को समझते हुए
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar17 Jan 2026 07:08 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को लेकर राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लिया है, जिससे प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिलने वाली है। निवेश प्रस्तावों को तेजी से अमल में लाने के उद्देश्य से सरकार ने लगभग 1000 एकड़ अतिरिक्त भूमि आवंटित करने की योजना बनाई है। इस कदम से न केवल रक्षा उत्पादन क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि चार प्रमुख जिलों की आर्थिक तस्वीर भी बदलने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को देश के अग्रणी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए लगातार ठोस निर्णय ले रही है। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में पहले से मौजूद निवेश प्रस्तावों के अनुसार, अलग-अलग नोड्स पर भूमि आवंटन के माध्यम से करीब 3,500 करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित किया जा सकता है। इससे प्रदेश में औद्योगिक ढांचे को मजबूती मिलने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

विदेशी निवेशक भी उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर में रुचि दिखा रहे

सरकार की स्पष्ट और निवेशकों के अनुकूल डिफेंस इंडस्ट्रियल नीति, तेज प्रशासनिक प्रक्रियाएं और मजबूत बुनियादी ढांचा निवेश को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यही वजह है कि अब देशी कंपनियों के साथ-साथ विदेशी निवेशक भी उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर में रुचि दिखा रहे हैं। यह पहल भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य को और सशक्त करेगी। 

डिफेंस कॉरिडोर के विभिन्न नोड्स में झांसी सबसे तेजी से उभरता हुआ केंद्र बनकर सामने आया है। यहां बड़ी कंपनियां बड़े पैमाने पर निवेश की योजना बना रही हैं। झांसी में प्रस्तावित निवेश से बुंदेलखंड क्षेत्र को एक मजबूत डिफेंस इंडस्ट्रियल क्लस्टर के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे लंबे समय से पिछड़े इस क्षेत्र को औद्योगिक पहचान मिलेगी।

स्थानीय युवाओं को तकनीकी कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा

अलीगढ़ और चित्रकूट नोड्स भी तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं। अलीगढ़ में केमिकल, आॅफशोर और डिफेंस सपोर्ट से जुड़े उद्योगों के लिए निवेश प्रस्तावित हैं, जबकि चित्रकूट में डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी से संबंधित इकाइयों के स्थापित होने की संभावना है। इससे इन क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक का प्रसार होगा और स्थानीय युवाओं को तकनीकी कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा। राजधानी लखनऊ के डिफेंस नोड में सीमित भूमि पर उच्च तकनीक आधारित यूनिट्स लगाए जाने की योजना है। ये यूनिट्स डिफेंस सप्लाई चेन, अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी, जिससे प्रदेश की रणनीतिक क्षमता और बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी के अनुसार, भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिफेंस कॉरिडोर में पर्याप्त भूमि उपलब्ध है और सभी निवेश प्रस्तावों पर तय मानकों के अनुसार तेजी से कार्य किया जा रहा है।

परियोजनाओं के जरिए हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा

इस पूरी योजना का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय स्तर पर देखने को मिलेगा। भूमि आवंटन से किसानों को उचित मुआवजा मिलेगा, जबकि प्रस्तावित परियोजनाओं के जरिए हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इसके साथ ही स्थानीय एमएसएमई और स्टार्टअप्स को भी डिफेंस सेक्टर की सप्लाई चेन से जुड़ने का अवसर मिलेगा। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का यह विस्तार राज्य को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे राष्ट्रीय अभियानों को भी मजबूत आधार प्रदान करेगी।

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