प्रयागराज विवाद पर पिघला प्रशासन, शंकराचार्य से माफी को तैयार

माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रयागराज प्रशासन के बीच खड़ा हुआ धार्मिक-प्रशासनिक विवाद अब शांत होने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। प्रशासन शंकराचार्य से माफी मांगने को तैयार है। यह जानकारी शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार ने दी।

Shankaracharya Avimukteshwaranand
माघ मेले का विवाद थमने के संकेत (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar30 Jan 2026 11:29 AM
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UP News : प्रशासन को भरोसा था कि शंकराचार्य माघ पूर्णिमा (1 फरवरी) तक मेले में रहेंगे, लेकिन 28 जनवरी को उनका अचानक माघ मेला छोड़कर वाराणसी लौट जाना अधिकारियों के लिए अप्रत्याशित रहा। इसके बाद लखनऊ के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने वाराणसी पहुंचकर उनसे संपर्क किया और आग्रह किया कि माघ पूर्णिमा पर उन्हें ससम्मान प्रयागराज लाकर संगम स्नान कराया जाएगा।

दो शर्तों पर अड़े शंकराचार्य

शंकराचार्य ने प्रयाग लौटने के लिए दो स्पष्ट शर्तें रखी हैं—

  1. विवाद के लिए जिम्मेदार अधिकारी लिखित रूप से माफी मांगें।
  2. चारों शंकराचार्यों के लिए माघ मेला, कुंभ और महाकुंभ में स्थायी प्रोटोकॉल तय कर सार्वजनिक रूप से घोषित किया जाए।

आज होगी अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस

बता दें कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आज सुबह 11 बजे वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। इसमें यह स्पष्ट हो सकता है कि वे काशी में ही स्नान कर विरोध जारी रखेंगे या प्रशासन की पेशकश स्वीकार कर प्रयागराज लौटेंगे। शंकराचार्य का कहना है कि फिलहाल उनकी स्नान योजना काशी में ही है और शर्तें पूरी होने पर ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।

विवाद की जड़

बता दें कि शंकराचार्य पक्ष के अनुसार 27 जनवरी को प्रशासन से बातचीत के दौरान माफी की मांग की गई थी, लेकिन पहले इससे इनकार किया गया और बाद में लिखित खेद भी व्यक्त नहीं किया गया। इससे आहत होकर उन्होंने माघ मेला क्षेत्र छोड़ने का फैसला किया।

प्रवेश के दौरान हुआ था टकराव

बता दें कि विवाद की शुरुआत मौनी अमावस्या के दिन हुई, जब शंकराचार्य अपने रथ/पालकी के साथ संगम नोज की ओर बढ़ रहे थे। भीड़ और सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने रथ से उतरकर पैदल जाने का अनुरोध किया, लेकिन समर्थक रथ आगे ले जाने पर अड़े रहे। इस दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की हुई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रशासन ने जुलूस रोक दिया, जबकि शंकराचार्य ने पवित्र स्नान से रोके जाने और पुलिस द्वारा बदसलूकी के आरोप लगाए।

अब बदल रहा प्रशासन का रुख

शंकराचार्य के वाराणसी लौटने के बाद प्रशासन का रुख नरम पड़ा है और विवाद समाप्त करने के लिए माफी मांगने की तैयारी की जा रही है, ताकि माघ पूर्णिमा पर उनकी पारंपरिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके। अब सबकी निगाहें आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जहां से तय होगा कि यह विवाद समाप्ति की ओर जाएगा या नया मोड़ लेगा। UP News


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उत्तर प्रदेश के अनेक PCS अधिकारियों के तबादले

शासन के संकेत साफ हैं कि उत्तर प्रदेश में फील्ड स्तर पर कामकाज की रफ्तार बढ़ाने, विभागीय समन्वय मजबूत करने और निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह बदलाव किया गया है। देर रात जारी आदेश के बाद संबंधित जिलों में कार्यभार ग्रहण की प्रक्रिया भी तेज हो गई है।

उत्तर प्रदेश में अफसरों की जिम्मेदारियां बदलीं
उत्तर प्रदेश में अफसरों की जिम्मेदारियां बदलीं
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar30 Jan 2026 10:46 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरुवार देर रात प्रशासनिक महकमे में बड़ा कदम उठाते हुए छह पीसीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए। इस फेरबदल के साथ ही उत्तर प्रदेश के कानपुर, गोरखपुर, मथुरा, हमीरपुर, गोंडा और फिरोजाबाद जैसे अहम जिलों में नई जिम्मेदारियों का बंटवारा किया गया है। शासन के संकेत साफ हैं कि उत्तर प्रदेश में फील्ड स्तर पर कामकाज की रफ्तार बढ़ाने, विभागीय समन्वय मजबूत करने और निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह बदलाव किया गया है। देर रात जारी आदेश के बाद संबंधित जिलों में कार्यभार ग्रहण की प्रक्रिया भी तेज हो गई है।

मथुरा–हमीरपुर में बदलीं जिम्मेदारियां

उत्तर प्रदेश के मथुरा में प्रशासनिक जिम्मेदारियों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब तक नगर मजिस्ट्रेट और मंदिर परिसर के प्रभारी मजिस्ट्रेट रहे राकेश कुमार को शासन ने एडीएम (वित्त एवं राजस्व), हमीरपुर के पद पर भेजा है। वहीं गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण में विशेष कार्य अधिकारी के रूप में कार्यरत अनूप कुमार मिश्रा को नगर मजिस्ट्रेट, मथुरा के साथ-साथ मंदिर परिसर का प्रभारी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है। शासन के इस फैसले को उत्तर प्रदेश में मथुरा जैसे संवेदनशील और भीड़-भाड़ वाले जिले में व्यवस्था व समन्वय को अधिक मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

कई जिलों में बदले अहम पदाधिकारी

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक हब कानपुर नगर में भी शासन ने जिम्मेदारियों की नई बुनियाद रखते हुए अहम प्रशासनिक बदलाव किए हैं। अब तक एडीएम न्यायिक के पद पर तैनात राजेश कुमार को एडीएम नागरिक आपूर्ति, कानपुर नगर बनाया गया है, जबकि महेश प्रकाश को एडीएम न्यायिक, कानपुर नगर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन के संकेत स्पष्ट हैं कि उत्तर प्रदेश में नागरिक आपूर्ति व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरुस्त करने और विभागीय समन्वय को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है। इसी तबादला सूची में गोंडा को नया मुख्य राजस्व अधिकारी (सीआरओ) भी मिला है, यहां रिंकी जायसवाल की तैनाती की गई है। वहीं कानपुर विकास प्राधिकरण में एसडीएम रहे अजय कुमार को अपर नगर आयुक्त, नगर निगम फिरोजाबाद बनाया गया है। UP News

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कमजोरों के केस अटके, UGC पर स्टे…चंद्रशेखर भड़के, आज बनाएंगे रणनीति

चंद्रशेखर ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि 69,000 शिक्षक भर्ती से जुड़े विवाद और कथित अनियमितताओं पर लंबे समय से निर्णय लंबित रहने की चर्चा होती रही है।

चंद्रशेखर आजाद
चंद्रशेखर आजाद
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar30 Jan 2026 09:28 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने UGC की नई नियमावली पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। चंद्रशेखर का कहना है कि कमजोर वर्गों से जुड़े कई अहम मामले अदालतों में लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन UGC से जुड़े मामले में तेजी से सुनवाई और आदेश ने सवाल खड़े कर दिए हैं। चंद्रशेखर ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि 69,000 शिक्षक भर्ती से जुड़े विवाद और कथित अनियमितताओं पर लंबे समय से निर्णय लंबित रहने की चर्चा होती रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछड़ा वर्ग आरक्षण जैसे मुद्दों पर अन्य राज्यों के मामलों में भी सुनवाई की रफ्तार धीमी दिखती है, जबकि UGC के मामले में तुरंत कदम उठ गया।

हम चुप नहीं बैठेंगे - चंद्रशेखर

टीवी चैनलों से बातचीत में चंद्रशेखर ने कहा कि UGC के मुद्दे पर वह शुरुआत से अपनी बात खुलकर रखते आए हैं। अब उन्होंने संकेत दिया है कि आज उत्तर प्रदेश में पार्टी स्तर पर बैठक बुलाकर आगे की राजनीतिक-सामाजिक रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया “हम चुप नहीं बैठेंगे। आगे आंदोलन की दिशा तय होगी। चंद्रशेखर का तर्क है कि UGC की नई व्यवस्था को लेकर अभी कोई कमेटी/प्रक्रिया पूरी तरह आकार नहीं ले पाई, और न ही किसी मामले में किसी के खिलाफ कार्रवाई जैसी स्थिति सामने आई थी।

फैक्ट्स रखते तो फैसला अलग होता - चंद्रशेखर

चंद्रशेखर ने कहा कि वह एक अधिवक्ता हैं और सर्वोच्च न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन उनके अनुसार यह आदेश सरकार की कमजोर पैरवी का नतीजा भी हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि अगर सरकार तथ्यों और सामाजिक हकीकत को मजबूती से रखती - जैसे SC-ST-OBC छात्रों के साथ भेदभाव से जुड़ी रिपोर्टें/आंकड़े तो स्थिति अलग हो सकती थी। चंद्रशेखर ने यह भी कहा कि इस तरह के आदेश से समाज में गलत संदेश जाता है और आशंका पैदा होती है कि जातीय भेदभाव को मान्यता मिलने जैसी धारणा बन सकती है। उन्होंने रोहित वेमुला, पायल तड़वी और अन्य चर्चित मामलों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि कमजोर वर्गों के छात्रों की सुरक्षा पर देश कब निर्णायक कदम उठाएगा। UP News

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