अलीगढ़ में कांग्रेस नेताओं की हाउस अरेस्ट, जिले में सुरक्षा कड़ी

कांग्रेस नेताओं द्वारा विधानसभा घेराव और विरोध प्रदर्शन की योजना बनाने के मद्देनजर पुलिस ने अग्रिम सुरक्षा कदम उठाते हुए कई वरिष्ठ नेताओं को उनके घरों में नजरबंद कर दिया। इस कार्रवाई ने स्थानीय राजनीतिक माहौल में हलचल पैदा कर दी।

neta (2)
वरिष्ठ नेताओं को उनके घरों में नजरबंद कर दिया
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar17 Feb 2026 07:21 PM
bookmark

UP News : अलीगढ़, उत्तर प्रदेश में 17 फरवरी 2026 को कांग्रेस नेताओं द्वारा विधानसभा घेराव और विरोध प्रदर्शन की योजना बनाने के मद्देनजर पुलिस ने अग्रिम सुरक्षा कदम उठाते हुए कई वरिष्ठ नेताओं को उनके घरों में नजरबंद कर दिया। इस कार्रवाई ने स्थानीय राजनीतिक माहौल में हलचल पैदा कर दी।

नजरबंद किए गए प्रमुख नेता

* ठाकुर सोमबीर सिंह कांग्रेस जिला अध्यक्ष, अपने पैतृक गांव मूसेपुर, लोधा में नजरबंद

* विवेक बंसल पूर्व विधायक

* श्योराज जीवन वरिष्ठ नेता

* नावेद खान शहर अध्यक्ष

* शेरपाल सविता वरिष्ठ नेता

पुलिस ने इनके आवासों के आसपास भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया ताकि ये नेता लखनऊ या अन्य स्थानों में होने वाले प्रदर्शन में शामिल न हो सकें।

नेताओं और प्रशासन की प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेताओं ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला बताया। उनका मानना है कि सरकार विपक्ष की आवाज से डर रही है और जनता के मुद्दों पर आवाज उठाने से रोकना लोकतंत्र की हत्या के समान है। उन्होंने चेताया कि प्रशासन की इस कार्रवाई के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा। पुलिस ने बताया कि यह कदम जिले में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया। लखनऊ में प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए जिले की सीमाओं और नेताओं के आवासों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

समान घटनाएं

उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी कांग्रेस नेताओं के हाउस अरेस्ट की घटनाएं देखने को मिलीं। बाराबंकी, रायबरेली और मिजार्पुर में भी नेताओं को प्रदर्शन से पहले रोक दिया गया। कुछ स्थानों पर कांग्रेस कार्यकतार्ओं और पुलिस के बीच झड़पें भी हुईं। इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि प्रशासन ने विपक्षी नेताओं के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय पहले से ही सख्त कर दिए हैं, जिससे राजनीतिक तनाव बढ़ गया है।


संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

अखिलेश ने योगी सरकार पर लगाया आरोप : कहा- प्रदेश में भ्रष्टाचार और अनियमितताएं बढ़ती जा रही

प्रदेश में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताएं बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार आलोचना सुनने को तैयार नहीं है और केवल अपनी बात दोहराने में लगी रहती है।

akhilesh (8)
अखिलेश यादव
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar17 Feb 2026 07:03 PM
bookmark

UP News : अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताएं बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार आलोचना सुनने को तैयार नहीं है और केवल अपनी बात दोहराने में लगी रहती है।

पानी की टंकियों को लेकर आरोप

सपा प्रमुख ने कहा कि राज्य में बनाई जा रही पानी की टंकियां घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार की वजह से टिक नहीं पा रहीं। उनके अनुसार, निर्माण कार्यों में पारदर्शिता की कमी के कारण सार्वजनिक धन का दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। आरोप लगाया कि फॉर्म-7 के माध्यम से अल्पसंख्यक, पिछड़े, दलित और गरीब वर्गों के मतदाताओं को नोटिस भेजकर उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है।

राजनीतिक आरोप

अखिलेश यादव ने वंदे मातरम के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा और कहा कि जो लोग आज राष्ट्रवाद की बातें करते हैं, उनका इतिहास इस भावना के अनुरूप नहीं रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति ने जेपीएनआईसी का निर्माण कराया, वह अब भाजपा से जुड़ा हुआ है। सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता की बात करती है तो उसे ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

लोकतंत्र और बजट पर चिंता

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि नई योजनाओं का बजट घटाया जा रहा है और गरीबों व पिछड़े वर्गों के साथ अन्याय हो रहा है। उनके अनुसार, प्रदेश में विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आंच आ रही है। इन बयानों के साथ सपा और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं, जिससे प्रदेश की राजनीति में गर्माहट बढ़ गई है।


संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

उत्तर प्रदेश में आधार नियम हुए सख्त, नहीं चलेगा नया प्रमाणपत्र

अगर कोई आवेदक नई रजिस्ट्रेशन संख्या वाला प्रमाणपत्र प्रस्तुत करता है, तो आधार अपडेट का आवेदन सीधे निरस्त कर दिया जाएगा। इस कदम से उत्तर प्रदेश में लंबे समय से सामने आ रहे उम्र में हेरफेर के मामलों पर रोक लगाने की कोशिश मानी जा रही है।

उत्तर प्रदेश आधार अपडेट
उत्तर प्रदेश आधार अपडेट
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Feb 2026 03:26 PM
bookmark

UP News :  उत्तर प्रदेश से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश में आधार कार्ड की जन्मतिथि (DoB) सुधार प्रक्रिया अब पहले से ज्यादा सख्त होने जा रही है। UIDAI ने नई गाइडलाइन के तहत साफ कर दिया है कि आधार में जन्मतिथि बदलवाने के लिए अलग जन्म पंजीकरण संख्या (Birth Registration Number) वाला नया जन्म प्रमाणपत्र अब स्वीकार नहीं किया जाएगा। यानी, जिसने पहले आधार अपडेट के लिए जो जन्म प्रमाणपत्र लगाया था, उसी में अधिकृत संशोधन कराकर आगे प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अगर कोई आवेदक नई रजिस्ट्रेशन संख्या वाला प्रमाणपत्र प्रस्तुत करता है, तो आधार अपडेट का आवेदन सीधे निरस्त कर दिया जाएगा। इस कदम से उत्तर प्रदेश में लंबे समय से सामने आ रहे उम्र में हेरफेर के मामलों पर रोक लगाने की कोशिश मानी जा रही है।

उत्तर प्रदेश में क्यों बढ़ी सख्ती?

उत्तर प्रदेश में आधार की जन्मतिथि बदलवाने को लेकर लंबे समय से उम्र में हेरफेर की शिकायतें उठती रही हैं। आरोप है कि कुछ लोग आयु-सीमा का फायदा लेने के लिए पहले जारी जन्म प्रमाणपत्र को निरस्त कराकर नई जन्म पंजीकरण संख्या वाला ताज़ा प्रमाणपत्र बनवा लेते थे और फिर उसी दस्तावेज के सहारे आधार रिकॉर्ड में जन्मतिथि बदलने की कोशिश करते थे। यह तरीका कथित तौर पर सरकारी-निजी भर्तियों में उम्र की बाधा पार करने, खेल प्रतियोगिताओं में कम उम्र दिखाकर चयन का रास्ता आसान करने, और स्कूल-कॉलेज की परीक्षाओं में पात्रता बदलकर दोबारा मौका बनाने जैसी जरूरतों में इस्तेमाल होता रहा है। अब UP में UIDAI की नई व्यवस्था के बाद जन्म पंजीकरण संख्या से जुड़ा सत्यापन सख्त होने जा रहा है, जिससे ऐसे शॉर्टकट पर लगाम लगने और फर्जीवाड़े की गुंजाइश काफी कम होने की उम्मीद है।

नया नियम क्या कहता है?

उत्तर प्रदेश में आधार अपडेट कराने वालों के लिए अब सबसे बड़ा ट्रेंड नहीं, बल्कि सबसे बड़ा ट्रैप जन्मतिथि (DoB) सुधार बनता जा रहा है। आधार सेवा केंद्रों के आंकड़ों के मुताबिक रोज होने वाले अपडेट में सबसे बड़ा हिस्सा DoB करेक्शन से जुड़ा रहता है। नियम पहले भी था कि जन्मतिथि बार-बार बदलना आसान नहीं है और इसके लिए अनुमति/प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। लेकिन यूपी में कई लोग उम्र से जुड़ी पात्रता का फायदा लेने के लिए पुराना जन्म प्रमाणपत्र रद्द कराकर नया बनवाते और अलग रजिस्ट्रेशन नंबर के सहारे सिस्टम को चकमा देने की कोशिश करते थे। अब UIDAI ने इस रास्ते पर साफ तौर पर ब्रेक लगा दिया है। नया निर्देश कहता है कि जन्म प्रमाणपत्र की Birth Registration Number (BRN) वही रहेगी जो पहले दस्तावेज में थी। इससे दस्तावेजों का डिजिटल वेरिफिकेशन और मजबूत होगा और फर्जीवाड़े की गुंजाइश घटेगी। इस बदलाव का असर उत्तर प्रदेश में सीधे उन लोगों पर पड़ेगा जो भर्ती, परीक्षा, खेल या पढ़ाई में उम्र की पात्रता बदलने के लिए DoB संशोधन का सहारा लेते थे खासकर युवा अभ्यर्थी, एज-ग्रुप खिलाड़ी और छात्र। अधिकारियों के मुताबिक अगर जांच में गलत या संदिग्ध दस्तावेज सामने आए, तो आवेदन रद्द होने के साथ कानूनी कार्रवाई की संभावना भी बढ़ सकती है।

अफसर ने क्या कहा?

UIDAI लखनऊ के उप महानिदेशक प्रशांत कुमार सिंह के अनुसार, जन्मतिथि संशोधन के नियमों में बदलाव लागू कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आवेदक को पहले जमा किए गए जन्म प्रमाणपत्र में ही अधिकृत संशोधन कराना होगा। यदि अलग जन्म पंजीकरण संख्या वाला प्रमाणपत्र दिया गया, तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनके मुताबिक यह कदम आधार डेटाबेस की शुद्धता बनाए रखने और फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। नए निर्देश जिला प्रशासन और आधार सेवा केंद्रों को भेजे जा चुके हैं और पालन सख्ती से कराने को कहा गया है। UP News

संबंधित खबरें