
बता दें कि रविवार को बरेली में कांवडिय़ों ने गैर पांरपरिक रास्ते से गुजरने की जिद पकड़ ली थी। जिले के पुलिस कप्तान IPS अधिकारी प्रभाकर चौधरी व अन्य पुलिसकर्मी उग्र हुए कांवडिय़ों को 6 घंटे तक समझाते रहे। बताया जाता है कि इस दौरान कांवडिय़ों के बीच में से किसी ने कटटे से हवाई फायर कर दिया। इसके बाद पुलिस को क्षेत्र में कानून व्यवस्था को संभालने के लिए कांवडिय़ों पर लाठीचार्ज करना पड़ा। महज आधे घंटे में बरेली शहर में कानून व्यवस्था बहाल कर दी गई और बरेली में एक बड़ा दंगा होने से रूक गया। अब जिले में कानून का राज स्थापित करने वाले अधिकारी को बलि का बकरा बनाकर उसका तबादला 32वीं वाहिनी पीएसी में सेनानायक के पद पर कर दिया गया है। इस फैसले के पीछे कांवडिय़ों को खुश करना माना जा रहा है। सरकार व पुलिस के तमाम बड़े अधिकारी इस बात को मानते हैं। लेकिन सरकार के सामने सबके मुंह पर ताला लगा है।
IPS अधिकारी प्रभाकर चौधरी का तबादला सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड कर रहा है। सोशल नेटवर्किंग साइड टिवटर पर यूजर्स पूछ रहे हैं कि क्या ऐसे ही आयेगा रामराज्य ? प्रभाकर चौधरी के टिवटर अकाउंट पर भी उनके सपोर्ट में यूजर्स कमेंटस कर रहे हैं। एक यूजर लिखता है कि मिलिये यूपी के अशोक खेमका से, वह उन पुलिस अधिकारियों में से एक थे जो एनकाउंटर के चलन से पीछे नहीं हटते थे। एक यूजर लिखता है कि "हम सभी भारतीय प्रभाकर चौधरी के साथ हैं।"
एक यूजर्स कहता है कि पिटठू बैग टांगकर नौकरी पर पहुंचने वाले अफसर का आठ साल में 18 बार तबादला। प्रभाकर के सपोर्ट में एक यूजर लिखता है कि प्रभाकर चौधरी एक ऐसे आईपीएस अधिकारी हैं जो असहिष्णुता में विश्वास नहीं करते हमें उनके जैसे अधिकारियों की शायद जरूरत है। एक सपोर्टर लिखता है कि प्रभाकर जैसे अफसरों की तैनाती होनी चाहिए जो गुंडागर्दी ठीक कर देता है। एक अन्य यूजर ने लिखा है कि अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदार होना अपराध है आज के युग में। इस तरह के कई कमेंटस प्रभाकर चौधरी के सपोर्ट में ट्रेंड कर रहे हैं।
प्रभाकर चौधरी 2010 बैच के आईपीएस अफसर हैं। मूलत अंबेडकरनगर के रहने वाले हैं. बेसिक ट्रेनिंग खत्म करने के बाद प्रभाकर ने बतौर अंडरट्रेनिंग एएसपी नोएडा में ज्वॉइन किया था। उसके बाद उन्हें एएसपी के पद पर ही आगरा, जौनपुर और फिर वाराणसी भेजा गया। कानपुर नगर के एसपी सिटी तक रहे।
जिले में कमान संभालने की बारी आई तो प्रभाकर चौधरी की पहली पोस्टिंग यूपी के आखिरी छोर पर बसे जिले ललितपुर से हुई। जनवरी 2015 में आईपीएस अधिकारी को ललितपुर जिले का एसपी बनाया गया और दिसंबर 2015 यानी लगभग 11 महीने ललितपुर के एसपी रहे। ललितपुर से हटाने के बाद प्रभाकर चौधरी इंटेलिजेंस मुख्यालय में पोस्ट किए गए। 13 जनवरी 2016 को यूपी के सबसे चर्चित जिलों में शुमार देवरिया का कप्तान बनाया गया। जहां उनकी तैनाती 18 अगस्त 2016 तक रही।
देवरिया के बाद प्रभाकर चौधरी को सीधे बलिया का कप्तान बनाया गया। जहां पर वह 15 अक्टूबर 2016 यानी 2 महीने ही बलिया के कप्तान रहे। बलिया के बाद इस आईपीएस अफसर को कानपुर देहात का कप्तान बनाया गया। सत्ता परिवर्तन हुआ. भाजपा सत्ता में आई तो 28 अप्रैल 2017 को प्रभाकर चौधरी का कानपुर देहात से महज 5 महीने में तबादला कर दिया गया और एटीएस भेज दिया गया। 23 सितंबर 2017 तक प्रभाकर चौधरी यूपी एटीएस में तैनात रहे 24 सितंबर 2017 को प्रभाकर चौधरी को बिजनौर जिले का कप्तान बनाया गया। बिजनौर में भी 6 महीने पूरे नहीं कर पाए और वह 19 मार्च 2017 को उन्हें बिजनौर से हटा दिया गया।
प्रभाकर चौधरी के 8 साल की कप्तानी के करियर में उनके 18 तबादले हुए। जिसमें 15 जिलों के वह कप्तान रहे, लेकिन मेरठ एक अकेला जिला है जहां पर प्रभाकर चौधरी 1 साल तक एसएसपी रहे। 25 जून 2022 तक मेरठ के एसपी रहे प्रभाकर चौधरी को आगरा जैसे बड़े शहर के कमान दी गई। लेकिन आगरा में भी वह 5 महीने तक ही टिक पाए और 28 नवंबर 2022 को हटा दिए गए। आगरा से हटकर पीएसी सीतापुर भेजा गया और 12 मार्च 2023 को प्रभाकर चौधरी को बरेली का नया एसएसपी बनाया गया, लेकिन बरेली में भी प्रभाकर चौधरी 4 महीने तक ही रह पाए और 30 जुलाई 2023 को बरेली एसएसपी से भी हटाकर 32वीं वाहिनी लखनऊ का सेनानायक बना दिया गया।
प्रभाकर चौधरी के तबादले को लेकर सोशल मीडिया पर यूजर यही पूछ रहे हैं कि क्या कानून का राज्य ऐसे ही स्थापित होगा। कानून को अपने हाथ में लेने वालों पर अगर सख्ती नहीं की गयी और उन्हें अपनी मनमानी करने दी गई तो रामराज्य तो आने से रहा। लेकिन ऐसे अधिकारियों का मनोबल जरूर गिर जाएगा। IPS Prabhakar Chaudhary