मुंबई में दर्दनाक हादसा, स्पीकर गिरने से 3 साल की मासूम बच्ची की मौत

मुंबई के विक्रोली स्थित अंबेडकर नगर में गणतंत्र दिवस पर दर्दनाक हादसा पूरी दर्दनाक घटना पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुआ है। जिसमें स्पीकर गिरने से 3 साल की मासूम बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई।

Tragic accident in Mumbai
CCTV में कैद मौत का मंजर फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar27 Jan 2026 06:27 PM
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Mumbai News : गणतंत्र दिवस के मौके पर मुंबई के विक्रोली इलाके से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। अंबेडकर नगर क्षेत्र में गली में लगाए गए स्पीकर गिरने से 3 साल की मासूम बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई। पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिसका वीडियो अब सामने आया है।

जाने कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के मुताबिक, 26 जनवरी के अवसर पर अंबेडकर नगर की एक गली में दो बड़े स्पीकर लगाए गए थे, जिन पर देशभक्ति गीत बज रहे थे। गली में बच्चे खेल रहे थे और आम लोगों की आवाजाही भी जारी थी। तभी कूड़ा बीनने वाला एक व्यक्ति सिर पर कपड़ों के टुकड़ों से भरी बोरी लेकर वहां से गुजरा। जैसे ही वह स्पीकर के पास पहुंचा, उसकी बोरी स्पीकर के तार में उलझ गई। इससे संतुलन बिगड़ा और दोनों स्पीकर अचानक नीचे गिर पड़े।

स्पीकर के नीचे दब गई मासूम

इसी दौरान पीछे से आ रही 3 साल की बच्ची स्पीकर की चपेट में आ गई और उसके नीचे दब गई। हादसा होते ही गली में अफरा-तफरी मच गई। पास खड़े एक युवक ने तुरंत बच्ची को उठाया और घर की ओर दौड़ा। इसके बाद परिजन उसे फौरन अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

CCTV में कैद पूरी घटना

यह पूरी दर्दनाक घटना पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि कैसे बोरी स्पीकर के तार में फंसती है और चंद सेकंड में हादसा हो जाता है। वहीं, हादसे के बाद कूड़ा बीनने वाला व्यक्ति मौके से चुपचाप निकलता हुआ भी दिखाई देता है।

पुलिस ने दर्ज की FIR, जांच जारी

घटना के बाद बच्ची के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। विक्रोली पुलिस स्टेशन में मामले को लेकर FIR दर्ज कर ली गई है और जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर लापरवाही के पहलुओं की जांच कर रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि गली में स्पीकर किसकी अनुमति से लगाए गए थे और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। जांच पूरी होने के बाद स्पीकर लगाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।Mumbai News

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जहानाबाद पंचायत में जलेबी विवाद, ईंट-पत्थर और लाठी-डंडे से मचा हड़कंप

बिहार में जलेबी को लेकर पंचायत भवन में जबरदस्त बवाल हुआ और इस दौरान गांववालों के बीच लाठी-डंडे और ईंट-पत्थर चले, चार गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए और पंचायत के मुखिया को अपनी जान बचाकर मौके से भागना पड़ा।

Jalebi became the root of the dispute
गांव में जलेबी बनी ‘विवाद की जड़’ (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar27 Jan 2026 04:56 PM
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Bihar News : गणतंत्र दिवस के मौके पर बिहार के जहानाबाद जिले से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां पंचायत भवन में आयोजित समारोह के बाद जलेबी वितरण को लेकर ऐसा विवाद हुआ कि मामला देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। लाठी-डंडे और ईंट-पत्थर चले, चार गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए और पंचायत के मुखिया को अपनी जान बचाकर मौके से भागना पड़ा।

यह घटना पसरबिगहा थाना क्षेत्र के गोनवां पंचायत भवन की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार पंचायत के मुखिया अमरनाथ सिंह ने गणतंत्र दिवस पर पंचायत भवन में झंडा फहराया था। समारोह के बाद ग्रामीणों में वितरण के लिए लगभग एक क्विंटल जलेबी मंगवाई गई थी।

जलेबी लेकर भागने से शुरू हुआ विवाद

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, झंडा फहराने के तुरंत बाद कुछ शरारती तत्व जलेबी लेकर भागने लगे। जब मुखिया के समर्थकों ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो विवाद बढ़ गया और देखते ही देखते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। इसके बाद पंचायत भवन परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया।

लाठी-डंडे चले, गाड़ियों में की गई तोड़फोड़

हिंसक झड़प के दौरान ग्रामीणों ने लाठी-डंडों और ईंट-पत्थरों का इस्तेमाल किया। इस दौरान पंचायत भवन परिसर में खड़ी चार गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए। हालात इतने बिगड़ गए कि मुखिया अमरनाथ सिंह को किसी तरह मौके से भागकर अपनी जान बचानी पड़ी।

वीडियो वायरल, पुलिस जांच में जुटी

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ग्रामीणों के बीच हो रही मारपीट साफ देखी जा सकती है। मुखिया अमरनाथ सिंह ने आरोप लगाया है कि जलेबी विवाद के दौरान उन पर जानलेवा हमला किया गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस वायरल वीडियो की भी जांच कर रही है और दोषियों की पहचान की जा रही है। Bihar News


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यूजीसी के नए नियमों पर सियासी घमासान, बीजेपी में इस्तीफों की लहर

उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता डॉ. रविंद्र शुक्ला ने यूजीसी के नए प्रावधानों का विरोध करते हुए पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी है। उनका कहना है कि यह नियम शिक्षा व्यवस्था में समानता के बजाय नए प्रकार का भेदभाव पैदा कर सकता है।

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भाजपा
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar27 Jan 2026 03:47 PM
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UGC Controversy : यूजीसी द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए नियमों को लेकर उत्तर प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इन नियमों के विरोध में भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं और पदाधिकारियों ने खुलकर असहमति जताते हुए पार्टी से दूरी बना ली है। अभी तो यह सिलसिला शुरू हुआ है, जल्दी ही भाजपा सहित अन्य पार्टियों के भी पदाधिकारी आगे आ सकते हैं।

पूर्व शिक्षा मंत्री का बड़ा कदम

उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता डॉ. रविंद्र शुक्ला ने यूजीसी के नए प्रावधानों का विरोध करते हुए पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी है। उनका कहना है कि यह नियम शिक्षा व्यवस्था में समानता के बजाय नए प्रकार का भेदभाव पैदा कर सकता है। डॉ. शुक्ला हिंदी साहित्य अंतरराष्ट्रीय संस्था से भी जुड़े रहे हैं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर मुखर आवाज माने जाते हैं।

लखनऊ में 11 पदाधिकारियों का इस्तीफा

राजधानी लखनऊ से भी बीजेपी के भीतर असंतोष की तस्वीर सामने आई है। बख्शी तालाब क्षेत्र के कुम्हारवां मंडल महामंत्री आलोक तिवारी सहित पार्टी के कुल 11 पदाधिकारियों ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इन इस्तीफों से जुड़ा एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि यूजीसी का नया नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।

नोएडा और श्रावस्ती में भी विरोध

नोएडा बीजेपी महानगर के उपाध्यक्ष राजू पंडित ने भी इन नियमों को काला कानून करार देते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि यह नियम समाज को जोड़ने के बजाय विभाजन की ओर ले जा रहा है। वहीं श्रावस्ती जिले में बीजेपी शिक्षक प्रकोष्ठ के जिला संयोजक समेत दो पदाधिकारियों ने भी पार्टी नेतृत्व को अपना इस्तीफा भेज दिया है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था शिक्षकों और छात्रों दोनों में असुरक्षा की भावना पैदा कर रही है।

यूजीसी का नया नियम क्या कहता है?

यूजीसी ने 13 जनवरी को एक नया नियम लागू किया है, जिसके तहत शैक्षणिक संस्थानों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए 24़7 हेल्पलाइन, एंटी-डिस्क्रिमिनेशन सेल, शिकायत निवारण समितियों का गठन अनिवार्य किया गया है।

विरोध का कारण

नियमों का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि इसमें झूठी शिकायतों से निपटने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। उनका आरोप है कि इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और व्यक्तिगत अधिकारों पर असर पड़ सकता है। साथ ही यह आशंका भी जताई जा रही है कि बिना ठोस सबूत के लगाए गए आरोप छात्रों के शैक्षणिक और पेशेवर भविष्य को नुकसान पहुँचा सकते हैं। यूजीसी के नए नियमों ने जहां एक ओर सामाजिक न्याय की बहस को आगे बढ़ाया है, वहीं दूसरी ओर यह मुद्दा राजनीतिक टकराव और आंतरिक असंतोष का कारण बनता जा रहा है। आने वाले समय में इस पर सरकार और संबंधित पक्ष क्या रुख अपनाते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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