बताया जा रहा है कि इसके बाद मुख्यमंत्री ने राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान को भी बुलाकर मामले पर रिपोर्ट और आयोग की भूमिका को लेकर चर्चा की। सूत्रों का दावा है कि बातचीत के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने घटना से जुड़े लोगों के खिलाफ तहरीर भी दी है।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित केजीएमयू (KGMU) में शुक्रवार को हुए हंगामे को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद गंभीरता से लिया है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव को तलब कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। बताया जा रहा है कि इसके बाद मुख्यमंत्री ने राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान को भी बुलाकर मामले पर रिपोर्ट और आयोग की भूमिका को लेकर चर्चा की। सूत्रों का दावा है कि बातचीत के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने घटना से जुड़े लोगों के खिलाफ तहरीर भी दी है। केजीएमयू के ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग से जुड़े एक मामले और पैथोलॉजी विभाग में रेजिडेंट से संबंधित आरोपों को लेकर परिसर में स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई थी, जिसके बाद करीब तीन घंटे तक कुलपति कार्यालय के आसपास अफरा-तफरी का माहौल रहा।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, अपर्णा यादव के साथ आए कुछ लोग सीधे कुलपति कार्यालय की ओर बढ़े और भीतर प्रवेश की कोशिश करने लगे। सुरक्षा कर्मियों ने जब उन्हें रोकने का प्रयास किया तो बहस देखते ही देखते तनाव में बदल गई। आरोप है कि इसी दौरान धक्का-मुक्की हुई और हंगामा बढ़ने पर तोड़फोड़ की शिकायतें भी सामने आईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दरवाजे-खिड़कियों पर जोरदार धक्के दिए गए, जिससे नुकसान होने की बात कही जा रही है, वहीं कार्यालय परिसर में रखा कुछ सामान गिरने-टूटने का भी दावा किया जा रहा है। घटना के वक्त कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद फैकल्टी प्रमोशन से जुड़े इंटरव्यू पैनल में व्यस्त थीं, जिसमें उत्तर प्रदेश के बाहर से आए विशेषज्ञ भी शामिल थे। स्थिति बिगड़ती देख उन्होंने वैकल्पिक मार्ग अपनाते हुए पिछले गेट से कार्यालय परिसर छोड़ दिया।
घटनाक्रम में यह भी आरोप लगाया गया कि कुलपति कार्यालय में मौजूद प्रतिकुलपति डॉ. अपजीत कौर और विशाखा समिति की चेयरपर्सन डॉ. मोनिका कोहली को कुछ समय तक बाहर निकलने नहीं दिया गया। बाद में केजीएमयू के वरिष्ठ अधिकारियों चिकित्सा अधीक्षक, ट्रॉमा सीएमएस, चीफ प्रॉक्टर सहित अन्य के हस्तक्षेप के बाद दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। कुलपति कार्यालय परिसर में स्थित रिसर्च सेल के पास उस समय कुछ मेडिकल छात्रों की कक्षा चल रही थी। हालात बिगड़ने पर प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें गोपनीय/पिछले मार्ग से बाहर निकाला। कई छात्र डर और घबराहट के बीच किसी तरह परिसर से निकले। केजीएमयू प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम को लेकर चौक कोतवाली में तहरीर देकर हंगामा, तोड़फोड़ और अव्यवस्था फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। प्रशासनिक स्तर पर घटनास्थल, वीडियो फुटेज और गवाहों के आधार पर पहचान की प्रक्रिया तेज किए जाने की बात कही जा रही है।
उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा, डॉक्टरों-कर्मचारियों का सम्मानजनक कार्य-पर्यावरण और विश्वविद्यालय परिसरों में अनुशासन सबसे ऊपर है। ऐसे में लखनऊ का केजीएमयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान अगर हंगामे, अराजकता और तनाव की तस्वीरों से सुर्खियों में आता है, तो यह शासन-प्रशासन के लिए भी चेतावनी की घंटी माना जा रहा है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले पर तत्काल संज्ञान लेते हुए जवाब-तलब किया और स्पष्ट संकेत दे दिया कि उत्तर प्रदेश में चिकित्सा संस्थानों की गरिमा और परिसर की शांति से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा। UP News