मजरूह सुल्तानपुरी: उर्दू का कारवाँ, जिसकी गूंज आज भी ज़िंदा है

उनकी रचनाओं में दौर की धड़कन, आम आदमी की पीड़ा और उम्मीद की रोशनी एक साथ दिखाई देती है यही वजह है कि उन्हें उर्दू साहित्य की सबसे असरदार आवाज़ों में गिना जाता है।

बार-बार पढ़े जाने वाले मजरूह सुल्तानपुरी के चुनिंदा शेर

बार-बार पढ़े जाने वाले मजरूह सुल्तानपुरी के चुनिंदा शेर

locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Jan 2026 03:37 PM
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