गजब संयोग! जिस दिन बदली थी पार्टी, उसी दिन बिगड़ी घर की कहानी
खास संयोग यह है कि 19 जनवरी वही तारीख है, जिस दिन अपर्णा यादव ने उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी नई दिशा तय की थी और अब चार साल बाद उसी दिन उनके वैवाहिक रिश्तों में उठे तूफान की खबर सामने आकर प्रदेशभर में चर्चाओं का विषय बन गई है।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे असरदार नामों में शामिल यादव परिवार से जुड़ी एक निजी खबर ने लखनऊ के सियासी गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी। उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे असरदार नामों में से एक मुलायम सिंह यादव परिवार से संबंध रखने वाली अपर्णा यादव एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। लेकिन इस बार वजह कोई राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि उनके निजी जीवन से जुड़ा बड़ा घटनाक्रम है। खास संयोग यह है कि 19 जनवरी वही तारीख है, जिस दिन अपर्णा यादव ने उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी नई दिशा तय की थी और अब चार साल बाद उसी दिन उनके वैवाहिक रिश्तों में उठे तूफान की खबर सामने आकर प्रदेशभर में चर्चाओं का विषय बन गई है।
चुनाव से ठीक पहले बदला था राजनीतिक रास्ता
19 जनवरी 2022 को, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अपर्णा यादव ने समाजवादी पार्टी से नाता तोड़ते हुए भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में हुआ यह कदम उस वक्त उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े सियासी संदेश के तौर पर देखा गया, क्योंकि अपर्णा का रिश्ता सीधे सैफई परिवार से जुड़ा रहा है। सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की मौजूदगी ने इस घटनाक्रम की अहमियत और बढ़ा दी थी। यही वजह रही कि सैफई परिवार की छोटी बहू का पाला बदलना सिर्फ उत्तर प्रदेश नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी लंबे समय तक सुर्खियों में रहा।
पति प्रतीक यादव के पोस्ट से मची हलचल
19 जनवरी 2026 को एक बार फिर उत्तर प्रदेश के सियासी माहौल में हलचल तब तेज हो गई, जब अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव के नाम से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई। पोस्ट में उन्होंने अपर्णा यादव पर निजी स्तर के गंभीर आरोप लगाते हुए जल्द तलाक लेने की बात कही। साथ ही अपर्णा के लिए “स्वार्थी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिसके बाद लखनऊ से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। नोट: यह पूरा मामला फिलहाल सोशल मीडिया पोस्ट/दावों पर आधारित है। परिवार या संबंधित पक्ष की तरफ से आधिकारिक बयान/कानूनी प्रक्रिया की पुष्टि सामने आने पर ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।
उत्तर प्रदेश में संयोग पर बहस
यूपी के राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर लोग इस घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग अंदाज में चर्चा कर रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जिस तारीख को अपर्णा यादव ने अपने राजनीतिक करियर की नई दिशा तय की थी, उसी तारीख पर उनके वैवाहिक रिश्ते को लेकर इतना बड़ा सार्वजनिक विवाद सामने आना क्या महज़ संयोग है या इसके पीछे कोई सोची-समझी टाइमिंग? अपर्णा यादव फिलहाल उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष के तौर पर सक्रिय हैं। ऐसे में यह विवाद केवल निजी दायरे तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यूपी की सियासत में भी इसकी गूंज सुनाई देने लगी है।
सैफई परिवार में पसरा है सन्नाटा
एक ओर उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा के भीतर अपर्णा यादव की बढ़ती सक्रियता, और दूसरी ओर पति प्रतीक यादव की तीखी पोस्ट इन दोनों ने मिलकर इस घटनाक्रम को लखनऊ से दिल्ली तक सियासी चर्चा का बड़ा मुद्दा बना दिया है। फिलहाल यादव परिवार या अपर्णा यादव की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे अटकलों का बाजार और गर्म हो गया है। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे असरदार नामों में शामिल यादव परिवार से जुड़ी एक निजी खबर ने लखनऊ के सियासी गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी। उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे असरदार नामों में से एक मुलायम सिंह यादव परिवार से संबंध रखने वाली अपर्णा यादव एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। लेकिन इस बार वजह कोई राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि उनके निजी जीवन से जुड़ा बड़ा घटनाक्रम है। खास संयोग यह है कि 19 जनवरी वही तारीख है, जिस दिन अपर्णा यादव ने उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी नई दिशा तय की थी और अब चार साल बाद उसी दिन उनके वैवाहिक रिश्तों में उठे तूफान की खबर सामने आकर प्रदेशभर में चर्चाओं का विषय बन गई है।
चुनाव से ठीक पहले बदला था राजनीतिक रास्ता
19 जनवरी 2022 को, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अपर्णा यादव ने समाजवादी पार्टी से नाता तोड़ते हुए भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में हुआ यह कदम उस वक्त उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े सियासी संदेश के तौर पर देखा गया, क्योंकि अपर्णा का रिश्ता सीधे सैफई परिवार से जुड़ा रहा है। सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की मौजूदगी ने इस घटनाक्रम की अहमियत और बढ़ा दी थी। यही वजह रही कि सैफई परिवार की छोटी बहू का पाला बदलना सिर्फ उत्तर प्रदेश नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी लंबे समय तक सुर्खियों में रहा।
पति प्रतीक यादव के पोस्ट से मची हलचल
19 जनवरी 2026 को एक बार फिर उत्तर प्रदेश के सियासी माहौल में हलचल तब तेज हो गई, जब अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव के नाम से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई। पोस्ट में उन्होंने अपर्णा यादव पर निजी स्तर के गंभीर आरोप लगाते हुए जल्द तलाक लेने की बात कही। साथ ही अपर्णा के लिए “स्वार्थी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिसके बाद लखनऊ से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। नोट: यह पूरा मामला फिलहाल सोशल मीडिया पोस्ट/दावों पर आधारित है। परिवार या संबंधित पक्ष की तरफ से आधिकारिक बयान/कानूनी प्रक्रिया की पुष्टि सामने आने पर ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।
उत्तर प्रदेश में संयोग पर बहस
यूपी के राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर लोग इस घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग अंदाज में चर्चा कर रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जिस तारीख को अपर्णा यादव ने अपने राजनीतिक करियर की नई दिशा तय की थी, उसी तारीख पर उनके वैवाहिक रिश्ते को लेकर इतना बड़ा सार्वजनिक विवाद सामने आना क्या महज़ संयोग है या इसके पीछे कोई सोची-समझी टाइमिंग? अपर्णा यादव फिलहाल उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष के तौर पर सक्रिय हैं। ऐसे में यह विवाद केवल निजी दायरे तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यूपी की सियासत में भी इसकी गूंज सुनाई देने लगी है।
सैफई परिवार में पसरा है सन्नाटा
एक ओर उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा के भीतर अपर्णा यादव की बढ़ती सक्रियता, और दूसरी ओर पति प्रतीक यादव की तीखी पोस्ट इन दोनों ने मिलकर इस घटनाक्रम को लखनऊ से दिल्ली तक सियासी चर्चा का बड़ा मुद्दा बना दिया है। फिलहाल यादव परिवार या अपर्णा यादव की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे अटकलों का बाजार और गर्म हो गया है। UP News












