यूपी में जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया होगी हाईटेक, अब फजीर्वाड़े पर लगेगा ब्रेक

1 फरवरी से प्रदेश में जमीन की रजिस्ट्री केवल आधार आधारित बायोमेट्रिक वेरीफिकेशन के बाद ही संभव होगी। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद बिना आधार सत्यापन कोई भी व्यक्ति न तो जमीन बेच सकेगा और न ही खरीद सकेगा।

jameen rajistri
जमीन की रजिस्ट्री
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar28 Jan 2026 07:19 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार एक बड़ा तकनीकी बदलाव करने जा रही है। 1 फरवरी से प्रदेश में जमीन की रजिस्ट्री केवल आधार आधारित बायोमेट्रिक वेरीफिकेशन के बाद ही संभव होगी। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद बिना आधार सत्यापन कोई भी व्यक्ति न तो जमीन बेच सकेगा और न ही खरीद सकेगा।

फर्जी रजिस्ट्रियों पर लगेगी लगाम

अब तक भू-माफिया और जालसाज नकली पहचान पत्रों व फर्जी गवाहों के जरिए रजिस्ट्री कराने में कामयाब हो जाते थे। लेकिन नई प्रणाली में आधार से जुड़ा बायोमेट्रिक मिलान अनिवार्य होने के कारण इस तरह की धोखाधड़ी लगभग नामुमकिन हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे आम नागरिकों की संपत्ति सुरक्षित रहेगी और जमीन विवादों में बड़ी कमी आएगी। महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने इस संबंध में सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत उत्तर प्रदेश आॅनलाइन दस्तावेज पंजीकरण नियमावली-2024 को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार अब विक्रेता, क्रेता और गवाह तीनों की पहचान बायोमेट्रिक तरीके से सुनिश्चित की जाएगी।

आरडी मशीन से होगा सीधा आधार मिलान

नई व्यवस्था में रजिस्ट्री से पहले सभी जानकारियां आनलाइन सॉफ्टवेयर में दर्ज की जाएंगी। रजिस्ट्री के दिन आरडी मशीन के माध्यम से अंगूठे के निशान का मिलान सीधे आधार डेटाबेस से किया जाएगा। यदि बायोमेट्रिक सत्यापन असफल होता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट देगा और रजिस्ट्री प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। सत्यापन के बाद मौके पर ही फोटो लेकर पोर्टल पर अपलोड की जाएगी और केवल आधार आधारित ई-सिग्नेचर को ही वैध माना जाएगा। पहले पहचान पत्रों की वास्तविकता की ठोस जांच नहीं होती थी, जिससे फर्जी आईडी के आधार पर रजिस्ट्रियां हो जाती थीं। कई मामलों में अधिकारियों की संलिप्तता भी उजागर हुई। केवल लखनऊ में ही बीते एक वर्ष में ऐसे दर्जनों मामले सामने आए, जिन्होंने प्रशासन को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर किया।

पहले से लागू हैं अतिरिक्त सुरक्षा उपाय

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग पहले ही कई सुधार लागू कर चुका है। जुलाई 2025 से 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य की रजिस्ट्री के लिए पैन कार्ड सत्यापन और आधार आधारित पुष्टि अनिवार्य की गई थी। अब आधार बायोमेट्रिक जुड़ने से पूरी प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी व सुरक्षित हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम जमीन से जुड़े घोटालों को रोकने में मील का पत्थर साबित होगा। डिजिटल निगरानी और बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए फजीर्वाड़े की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी।

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उत्तर प्रदेश में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सिर मुंडवाकर किया विरोध प्रदर्शन

लोगों ने प्रदर्शन कर सरकार के फैसले के प्रति नाराजगी जताई। पीलीभीत शहर में सवर्ण समाज से जुड़े समाजसेवी हरिओम वाजपेई ने प्रतीकात्मक रूप से मुंडन कराकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने काला टीका लगाकर केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारे लगाए।

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मुंडन कराकर अपना विरोध दर्ज कराया
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar28 Jan 2026 06:44 PM
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UP News : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में बुधवार को विरोध देखने को मिला। अलग-अलग स्थानों पर लोगों ने प्रदर्शन कर सरकार के फैसले के प्रति नाराजगी जताई। पीलीभीत शहर में सवर्ण समाज से जुड़े समाजसेवी हरिओम वाजपेई ने प्रतीकात्मक रूप से मुंडन कराकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने काला टीका लगाकर केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारे लगाए। सुबह से ही नकटादाना चौराहे पर लोग एकत्र होने लगे और बाद में सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी टनकपुर हाईवे होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे।

यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने की मांग की गई

प्रदर्शन के दौरान यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने की मांग की गई और चेतावनी दी गई कि यदि सरकार ने फैसला नहीं बदला तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट विजय वर्धन तोमर को राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। इस विरोध में संयुक्त बार एसोसिएशन के पदाधिकारी, अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा नेता शामिल हुए, जिन्होंने एकजुट होकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ प्रदर्शन किया गया

उधर, बीसलपुर तहसील क्षेत्र में भी यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। नगर और ग्रामीण इलाकों से आए लोगों ने जुलूस निकालते हुए तहसील कार्यालय तक मार्च किया। युवा विकास मंच के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में लोगों ने नारेबाजी करते हुए सरकार से नियमों को तुरंत वापस लेने की मांग की। करीब एक घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद प्रदर्शनकारियों ने उपजिलाधिकारी नागेंद्र पांडेय को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ भी विरोध दर्ज कराया गया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्थानीय युवा और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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69000 शिक्षक भर्ती : अभ्यर्थी 2 फरवरी से धरना और विधानसभा घेराव करेंगे

69,000 शिक्षक भर्ती मामले को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी 2फरवरी से लखनऊ में धरना प्रदर्शन करने जा रहे हैं। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में उनके पक्ष में पर्याप्त पहल नहीं कर रही, जिसके कारण मामला लटकता जा रहा है।

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अभ्यर्थी 2फरवरी से लखनऊ में धरना प्रदर्शन करने जा रहे
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar28 Jan 2026 06:18 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में 69,000 शिक्षक भर्ती मामले को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी 2फरवरी से लखनऊ में धरना प्रदर्शन करने जा रहे हैं। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में उनके पक्ष में पर्याप्त पहल नहीं कर रही, जिसके कारण मामला लटकता जा रहा है। आंदोलन के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश विधान सभा का घेराव करने की भी चेतावनी दी है।

आरक्षित वर्ग अभ्यर्थियों की मुख्य मांग

आंदोलन के प्रमुख संगठकों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण प्रभावित समूहों के साथ अन्याय हुआ है और समस्या का समाधान नहीं निकला है, इसलिए इसे लेकर सरकार को एक ठोस कदम उठाना चाहिए। अभ्यर्थियों की मांग है कि न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।

सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामला

इस भर्ती मामले की पहली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में सितंबर 2024 में हुई थी, जिसके बाद लगातार नई तारीख दी जा रही है। अगली सुनवाई 4 फरवरी को तय है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार समय पर कोर्ट में पोजीशन पेश नहीं कर रही, जिससे मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

धरना-आंदोलन की तैयारी और परिजन शामिल होंगे

आंदोलन के नेतृत्व में रहे अमरेन्द्र पटेल और धनंजय गुप्ता ने कहा है कि सभी जिला और ब्लॉक स्तर के सहयोगियों से संपर्क कर आने वाले अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की सूची तैयार की जा रही है। आंदोलन की शुरुआत में ही यह निर्णायक कदम उठाने की योजना बनाई गई है।

विधानसभा घेराव से पहले कार्रवाई

आंदोलन के एक हिस्से के तौर पर 31 जनवरी को विधानसभा घेराव का आह्वान किया गया है, ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके। अभ्यर्थी इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि वे मांगों के पूरा होने तक संघर्ष जारी रखेंगे। आंदोलन के दावों के मुताबिक, आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के हित में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, मुख्यमंत्री जांच समिति की रिपोर्ट और हाईकोर्ट डबल बेंच का निर्णय उनके पक्ष में है, लेकिन फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिला। पिछले लगभग छह वर्षों से अभ्यर्थी इसी मुद्दे पर संघर्षरत हैं।

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