Monday, 24 June 2024

उत्तर प्रदेश की अवधी, भोजपुरी, ब्रज व बुंदेली भाषा का संरक्षण

UP News : उत्तर प्रदेश में एक शानदार पहल हुई है। उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग के राज्य शिक्षा संस्थान…

उत्तर प्रदेश की अवधी, भोजपुरी, ब्रज व बुंदेली भाषा का संरक्षण

UP News : उत्तर प्रदेश में एक शानदार पहल हुई है। उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग के राज्य शिक्षा संस्थान ने यह पहल की है। इस पहल के तहत उत्तर प्रदेश में बोली जाने वाली आंचलिक भाषा को बचाया जाएगा। उत्तर प्रदेश के अलग-अलग अंचलों में बोली जाने वाली भाषा के विलुप्त होते आ रहे शब्दों को संरक्षित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग ने सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों की संख्या में शब्दों को संरक्षित करने का फैसला किया है।

उत्तर प्रदेश की अवधी, भोजपुरी, ब्रज व बुंदेली भाषा का संरक्षण

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग का उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध शहर प्रयागराज में एक विशेष प्रभाग स्थापित है। उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग के इस विशेष प्रभाग का नाम उत्तर प्रदेश राज्य शिक्षा संस्थान है। इसी राज्य शिक्षा संस्थान ने उत्तर प्रदेश में बोली जाने वाली अवधी, भोजपुरी, ब्रज तथा बुंदेली भाषा के विलुप्त हो रहे शब्दों को संरक्षित करने का अभियान शुरू किया है। उत्तर प्रदेश की आंचलिक भाषाओं के 76 हजार शब्दों का संग्रह किया गया है। शब्दों का संग्रह करके अब उत्तर प्रदेश में बोले जाने वाले 76 हजार शब्दों का शब्दकोष तैयार कराया गया है। उत्तर प्रदेश का शिक्षा विभाग शब्दों के शब्दकोष को प्रकाशित कराकर किताबों के रूप में उत्तर प्रदेश के सभी प्राईमरी स्कूलों को भेजेगा।

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हिन्दी से भी पुरानी है उत्तर प्रदेश की आंचलिक भाषा

भाषा विज्ञान से जुड़े हुए विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में बोली जाने वाली अवधी, भोजपुरी, ब्रज तथा बुंदेली भाषाओं का इतिहास हिन्दी भाषा से भी पुराना है। विशेषज्ञों का मत है कि उत्तर प्रदेश की भाषा अवधी, भोजपुरी, ब्रज तथा बुंदेली से ही धीरे-धीरे आजकल बोली जाने वाली हिन्दी भाषा का विकास हुआ है।

ईनार, चकिया, छोकड़ा हैं उत्तर प्रदेश के आंचलिक शब्द

आपको बता दें कि ईनार, चकिया, छोकड़ा, जांगरा, झउआ, बदा, लठिया, लबार, लरिकाई, सजनी तथा हारे-खाडे जैसे शब्द उत्तर प्रदेश के अवध अंचल में बोले जाते थे। ये शब्द अब कहीं सुनाई नहीं पड़ते हैं। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में बोले जाने वाले भोजपुरी के शब्द एहर, गुजारल, चऊफेर, चक तथा दोरम अब विलुप्त हो रहे हैं। इन्हीं जैसे 76 हजार विलुप्त हो रहे शब्दों को संरक्षित करने की पहल उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग ने की है। 76 हजार शब्दों का शब्दकोष स्कूलों तथा पुस्कालयों को भी उपलब्ध कराया जाएगा। Up News 

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