मुजफ्फरनगर से उत्तर प्रदेश की सियासत तक अपनी मजबूत पहचान बनाने वाले डॉ. संजीव बालियान का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प है। दो बार सांसद और केंद्रीय मंत्री रहे बालियान की पश्चिमी यूपी में बढ़ती सक्रियता और 2027 की राजनीति में संभावित प्रभाव पर पढ़िए पूरी खास रिपोर्ट।

UP News : पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति की बात हो और मुजफ्फरनगर का नाम आए, तो डॉ. संजीव बालियान का जिक्र होना स्वाभाविक है। भारतीय जनता पार्टी के इस जाट नेता ने 2014 के बाद पश्चिमी यूपी की राजनीति में तेजी से अपनी जगह बनाई। दो बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे, नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री बने और केंद्र की राजनीति में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एक महत्वपूर्ण आवाज के तौर पर पहचान बनाई। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर सीट हारने के बाद बालियान की राजनीतिक स्थिति बदल गई। अब वह सांसद या केंद्रीय मंत्री नहीं हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पश्चिमी यूपी की सियासत में उनकी भूमिका खत्म हो गई है। सवाल यही है आखिर डॉ. संजीव बालियान आज कहां खड़े हैं और 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले उनकी राजनीति किस दिशा में जा रही है? UP News
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डॉ. संजीव कुमार बालियान का जन्म 23 जून 1972 को मुजफ्फरनगर जिले के कुटबी गांव में हुआ। उन्होंने चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार से पशु चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई की। उनके पास बीवीएससी एंड एएच, एमवीएससी और वेटरिनरी एनाटॉमी में पीएचडी की डिग्री है। राजनीति में आने से पहले उनका पेशेवर आधार पशु चिकित्सा और कृषि से जुड़ा रहा। संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड में उनका पेशा कृषक बताया गया है। राजनीतिक तौर पर उनका बड़ा उभार 2014 के लोकसभा चुनाव में हुआ। भाजपा ने उन्हें मुजफ्फरनगर से मैदान में उतारा और उन्होंने बड़ी जीत दर्ज की। इसके बाद नरेंद्र मोदी सरकार में उन्हें कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया। UP News
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2014 के बाद बालियान को लगातार केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। पहले वह कृषि और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े मंत्रालय में राज्य मंत्री रहे। इसके बाद कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में जिम्मेदारी संभाली और 2016 में उन्हें जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनर्जीवन मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया। 2019 में मुजफ्फरनगर से दोबारा लोकसभा चुनाव जीतने के बाद नरेंद्र मोदी की दूसरी सरकार में उन्हें पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन मंत्रालय का राज्य मंत्री बनाया गया। यानी एक स्थानीय राजनीतिक चेहरे से केंद्र सरकार के मंत्री तक पहुंचने में बालियान ने अपेक्षाकृत कम समय में लंबी राजनीतिक छलांग लगाई। UP News
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2014 का चुनाव बालियान के राजनीतिक जीवन का टर्निंग प्वाइंट रहा। उन्होंने मुजफ्फरनगर सीट पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की। 2019 में राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी थीं। सपा, बसपा और आरएलडी के गठबंधन के बावजूद बालियान ने आरएलडी के दिग्गज नेता चौधरी अजित सिंह को करीब छह हजार वोटों के अंतर से हराया। इस जीत ने यह साबित किया कि पश्चिमी यूपी में बालियान भाजपा के लिए सिर्फ एक सांसद नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक चेहरा बन चुके थे। UP News
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2024 का लोकसभा चुनाव बालियान के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। मुजफ्फरनगर सीट पर समाजवादी पार्टी के हरेंद्र मलिक ने उन्हें करीब 25 हजार वोटों के अंतर से हरा दिया। इसके साथ ही 10 वर्षों तक सांसद रहने और केंद्र में मंत्री रहने का उनका संसदीय अध्याय समाप्त हो गया। इस हार के बाद पश्चिमी यूपी में भाजपा के भीतर नेतृत्व और जातीय समीकरण को लेकर चर्चाएं तेज हुईं। इसी दौरान बालियान और भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम के बीच राजनीतिक मतभेद भी सार्वजनिक हुए। UP News
पश्चिमी यूपी में बालियान को जाट राजनीति का प्रमुख चेहरा माना जाता है, जबकि संगीत सोम राजपूत राजनीति में प्रभाव रखने वाले भाजपा नेता हैं। 2024 के चुनाव के बाद दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप खुलकर सामने आए। बालियान ने चुनावी हार के लिए राजपूत पंचायतों और संगीत सोम की भूमिका पर सवाल उठाए। दूसरी तरफ सोम ने भी बालियान की राजनीति पर निशाना साधा। यह टकराव केवल दो नेताओं का विवाद नहीं माना गया, बल्कि पश्चिमी यूपी में भाजपा के भीतर जाट-राजपूत राजनीतिक समीकरणों की चर्चा का विषय भी बना। UP News
डॉ. संजीव बालियान की राजनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए अलग राज्य की मांग भी रही है। इस मुद्दे पर उन्होंने कई बार अपनी राय रखी। 2024 में पश्चिमी यूपी को अलग राज्य बनाने के सवाल पर उनका और संगीत सोम का मतभेद फिर सामने आया था। यह मुद्दा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है और बालियान इसे क्षेत्रीय विकास से जोड़कर देखते रहे हैं। UP News
लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी बालियान की सार्वजनिक और राजनीतिक सक्रियता कम नहीं हुई है। मार्च 2026 में एक जाट पंचायत के दौरान उनका बयान चर्चा में आया। उन्होंने पंचायत और अपने सम्मान से जुड़े मुद्दे पर तीखी भाषा का इस्तेमाल किया और कहा कि अपमान का जवाब दिया जाएगा। जुलाई 2026 में उन्होंने मेरठ से हरिद्वार तक एनएच-58 को छह लेन करने की मांग उठाई। उनका तर्क था कि इस मार्ग के चौड़ीकरण से जाम की समस्या कम होगी और यातायात व्यवस्था बेहतर होगी। इससे संकेत मिलता है कि सांसद नहीं होने के बावजूद बालियान स्थानीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपनी सक्रियता बनाए हुए हैं। UP News
अगस्त 2026 में मुजफ्फरनगर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान नंगला मंदौड़ पंचायत से जुड़े मामले में डॉ. संजीव बालियान समेत कई आरोपियों के खिलाफ मुकदमा वापस लेने के आदेश दिए। रिपोर्टों के अनुसार शासन के आदेश के बाद अभियोजन की ओर से मामला वापस लेने की कार्रवाई हुई। यह घटनाक्रम बालियान के राजनीतिक अतीत से जुड़े एक महत्वपूर्ण कानूनी अध्याय के तौर पर सामने आया है। UP News
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुजफ्फरनगर की राजनीति में परिवारों की भूमिका पर भी चर्चा बढ़ रही है। फरवरी 2026 की एक राजनीतिक रिपोर्ट में डॉ. संजीव बालियान के परिवार के सदस्यों की स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों का उल्लेख किया गया है। इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या आने वाले समय में बालियान अपने परिवार के माध्यम से क्षेत्र की राजनीति में अपनी राजनीतिक जमीन को और मजबूत करने की कोशिश करेंगे? हालांकि, किसी विशेष सीट या टिकट को लेकर अभी निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। UP News
यही इस समय सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल है। डॉ. संजीव बालियान के सामने 2027 से पहले तीन बड़ी चुनौतियां दिखाई देती हैं।
पहली—2024 की लोकसभा हार के बाद अपनी राजनीतिक पकड़ को दोबारा मजबूत करना।
दूसरी—पश्चिमी यूपी में भाजपा के भीतर अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक समूहों के बीच संतुलन बनाना।
तीसरी—मुजफ्फरनगर में अपनी पुरानी राजनीतिक जमीन और समर्थक नेटवर्क को सक्रिय बनाए रखना।
बालियान की सबसे बड़ी ताकत उनका पश्चिमी यूपी में बनाया गया राजनीतिक नेटवर्क है। 2014 से 2024 तक संसद और केंद्र सरकार में रहने के कारण उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में भी पहचान बनाई है। लेकिन 2024 की हार यह भी बताती है कि पश्चिमी यूपी की राजनीति अब पहले जैसी सरल नहीं रही। किसान राजनीति, जाट-मुस्लिम समीकरण, आरएलडी की बदलती स्थिति, भाजपा का संगठन और स्थानीय स्तर पर जातीय समीकरण ये सभी आने वाले चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। UP News
सीधे शब्दों में कहें तो डॉ. संजीव बालियान फिलहाल सांसद या केंद्रीय मंत्री नहीं हैं, लेकिन सक्रिय राजनीति से बाहर भी नहीं हैं। उनकी गतिविधियां मुख्य रूप से मुजफ्फरनगर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुद्दों के इर्द-गिर्द दिखाई देती हैं। स्थानीय कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी, क्षेत्रीय विकास के मुद्दों पर बयान और सामाजिक-राजनीतिक आयोजनों में सक्रियता इस बात का संकेत देती है कि वह अपनी राजनीतिक सक्रियता बनाए हुए हैं। जून 2026 में उन्होंने अपना 54वां जन्मदिन भी मुजफ्फरनगर में हवन-यज्ञ और गोसेवा के साथ मनाया। इस मौके पर रक्तदान शिविर भी आयोजित किया गया था। UP News
डॉ. संजीव बालियान का अगला बड़ा राजनीतिक अध्याय अभी खुलना बाकी है। वह विधानसभा चुनाव लड़ेंगे या नहीं, भाजपा उन्हें संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी देगी या नहीं, 2027 के चुनाव में पार्टी उनके प्रभाव का किस तरह इस्तेमाल करेगी इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में सामने आएंगे। लेकिन एक बात स्पष्ट है। मुजफ्फरनगर की राजनीति में संजीव बालियान का नाम अभी खत्म नहीं हुआ है। 2014 में जिस नेता ने पश्चिमी यूपी की राजनीति में भाजपा के लिए एक नया अध्याय लिखा था, 2024 की हार के बाद अब वही नेता अपनी अगली राजनीतिक पारी की जमीन तैयार करते दिखाई दे रहे हैं। 2027 का विधानसभा चुनाव बताएगा कि डॉ. संजीव बालियान पश्चिमी यूपी की राजनीति में फिर निर्णायक भूमिका में लौटते हैं या उनकी राजनीति एक नए रूप में आगे बढ़ती है। UP News , :
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