अखिलेश यादव ने दोनों डिप्टी सीएम को दिया मुख्यमंत्री बनने का आफर

अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक को एक बार फिर मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि यदि इनमें से कोई भी 100 विधायकों को अपने साथ लेकर आता है, तो वह सीएम पद हासिल कर सकता है।

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अखिलेश यादव, उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar22 Feb 2026 03:48 PM
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UP News : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक को एक बार फिर मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि यदि इनमें से कोई भी 100 विधायकों को अपने साथ लेकर आता है, तो वह सीएम पद हासिल कर सकता है। अखिलेश ने पहले भी कई मौकों पर केशव प्रसाद मौर्य को मुख्यमंत्री बनने का आॅफर दिया था। इस बार ब्रजेश पाठक को भी इसमें शामिल किया गया है, जिससे राजनीतिक दिलचस्पी और बढ़ गई है।

शंकराचार्य प्रकरण पर केंद्रित हमला

अखिलेश यादव ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि शंकराचार्य के साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ, वह स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता इस पर प्रतिक्रिया जरूर देगी। उन्होंने 20 साल पुरानी घटना का हवाला देते हुए रामभद्राचार्य से जुड़ा विवाद उठाया और बताया कि पुराने मुकदमों के निपटारे में कुछ गलतियां हुई थीं।

योगी सरकार पर निशाना

अखिलेश ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सरकार जनता की नाराजगी के चलते टिक नहीं पाएगी। उन्होंने विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और धार्मिक नेताओं के अपमान के मामले उठाए। उन्होंने बताया कि पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक गठबंधन अब मजबूत हो रहा है, और आने वाले चुनावों में इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिलेगा। अखिलेश ने पार्टी में नए सदस्यों का स्वागत किया और एआई समिट से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। इससे पार्टी की संगठनात्मक मजबूती और आगामी राजनीतिक रणनीति की तैयारी का संकेत मिलता है। अब यह देखने वाली बात है कि केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक इस आॅफर पर क्या प्रतिक्रिया देंगे। उनकी प्रतिक्रिया से उत्तर प्रदेश की सत्ता समीकरण और आगामी चुनावी रणनीतियों पर बड़ा असर पड़ सकता है। UP News


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उत्तर प्रदेश का कोना-कोना जुड़ेगा इस एक्सप्रेसवे से, मंजूरी मिली

यह परियोजना केवल एक नया राजमार्ग निर्माण नहीं है, बल्कि प्रदेश के विभिन्न आर्थिक और भौगोलिक क्षेत्रों को एक साझा परिवहन ढांचे में जोड़ने की व्यापक योजना का हिस्सा है। करीब 547 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित कॉरिडोर पर लगभग 7000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

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बरेली-आगरा-झांसी-ललितपुर कॉरिडोर
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar22 Feb 2026 03:21 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में सड़क अवसंरचना को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक और महत्वाकांक्षी कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने बरेली-आगरा-झांसी-ललितपुर कॉरिडोर को औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह परियोजना केवल एक नया राजमार्ग निर्माण नहीं है, बल्कि प्रदेश के विभिन्न आर्थिक और भौगोलिक क्षेत्रों को एक साझा परिवहन ढांचे में जोड़ने की व्यापक योजना का हिस्सा है। 

करीब 547 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित कॉरिडोर पर लगभग 7000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसका मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्से को दक्षिणी क्षेत्र से सीधे जोड़ना है, ताकि राज्य में आवागमन की दिशा केवल पूर्व-पश्चिम तक सीमित न रहकर उत्तर-दक्षिण में भी मजबूत हो सके।

परियोजना की पृष्ठभूमि और आवश्यकता

उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक आबादी वाला राज्य है, जहां आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। पूर्वांचल, बुंदेलखंड, रुहेलखंड और एनसीआर क्षेत्र अपने-अपने स्तर पर विकास की ओर अग्रसर हैं, लेकिन इनके बीच सीधी और सुगम सड़क कनेक्टिविटी लंबे समय से एक चुनौती रही है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है, जो प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय/राज्य मार्गों को एक-दूसरे से जोड़ेगा। इससे राज्य का परिवहन नेटवर्क ग्रिड मॉडल में विकसित होगा, जिसमें एक मार्ग से दूसरे मार्ग तक पहुंचना आसान और तेज होगा।

किन एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा कॉरिडोर?

प्रस्तावित कॉरिडोर कई महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे से संपर्क स्थापित करेगा, जिनमें शामिल हैं:

* गंगा एक्सप्रेसवे लगभग 594 किमी लंबा यह मार्ग पश्चिम से पूर्व की दिशा में एक प्रमुख कड़ी है।

* पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पूर्वी उत्तर प्रदेश को राजधानी क्षेत्र से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग।

* आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे मध्य यूपी के लिए रणनीतिक संपर्क।

* बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे दक्षिणी जिलों के विकास में अहम भूमिका निभाने वाला मार्ग।

* यमुना एक्सप्रेसवे एनसीआर और पश्चिमी यूपी को जोड़ने वाला तेज रफ्तार मार्ग।

* गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे प्रस्तावित लंबा एक्सप्रेसवे, जो कई जिलों से होकर गुजरेगा।

* गाजियाबाद-कानपुर एक्सप्रेसवे औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण योजना। इन मार्गों के आपसी एकीकरण से प्रदेश का सड़क नेटवर्क अधिक संगठित और प्रभावी बन जाएगा।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

उत्तर से दक्षिण की दूरी तय करने में अब कई मार्ग बदलने की आवश्यकता नहीं होगी। सीधा संपर्क होने से यात्रा का समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। बेहतर सड़क ढांचे से माल परिवहन आसान होगा। इससे कृषि उत्पाद, औद्योगिक सामान और स्थानीय व्यापार को नया बाजार मिल सकेगा। जहां सड़क पहुंच बेहतर होती है, वहां उद्योग स्थापित करने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। यह कॉरिडोर औद्योगिक कॉरिडोर के रूप में भी विकसित हो सकता है। बुंदेलखंड और रुहेलखंड जैसे क्षेत्रों को बेहतर संपर्क मिलने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय असंतुलन कम होगा। इस परियोजना के क्रियान्वयन में विभिन्न एजेंसियां मिलकर काम करेंगी। लक्ष्य है कि अगले कुछ वर्षों में प्रदेश के सभी प्रमुख एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य मार्ग आपस में सुचारु रूप से जुड़ जाएं। भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय स्वीकृतियां और तकनीकी सर्वेक्षण जैसे चरणों को तय समयसीमा में पूरा करने की योजना बनाई जा रही है।

रणनीतिक महत्व

यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश को एक समेकित परिवहन तंत्र की दिशा में आगे ले जाएगा। अभी तक प्रदेश में पूर्व-पश्चिम दिशा में मजबूत एक्सप्रेसवे नेटवर्क विकसित हुआ है, लेकिन उत्तर-दक्षिण संपर्क अपेक्षाकृत सीमित था। यह परियोजना उस कमी को दूर करेगी और राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक होगी। बरेली-आगरा-झांसी-ललितपुर कॉरिडोर केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि प्रदेश के संतुलित और व्यापक विकास की आधारशिला साबित हो सकता है। यदि इसे निर्धारित समय और गुणवत्ता मानकों के साथ पूरा किया गया, तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश का परिवहन ढांचा देश में एक उदाहरण बन सकता है।UP News


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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल का उद्घाटन किया, अब 55 मिनट में सफर तय

यह अत्याधुनिक क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) देश के तेज और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन ढांचे की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। लगभग 82 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के पूरी तरह चालू हो जाने से रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर के पूरे हिस्से को राष्ट्र को समर्पित कर दिया
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar22 Feb 2026 01:47 PM
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Delhi-Meerut-Rapid-Rail : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर के पूरे हिस्से को राष्ट्र को समर्पित कर दिया। इस ऐतिहासिक पहल के साथ अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से मेरठ तक की दूरी महज लगभग 55 मिनट में तय की जा सकेगी। यह अत्याधुनिक क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) देश के तेज और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन ढांचे की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। लगभग 82 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के पूरी तरह चालू हो जाने से रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।

सराय काले खां स्टेशन मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया गया

इस परियोजना को नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन द्वारा विकसित किया गया है। ट्रेनें 160 किमी प्रति घंटा तक की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम हैं और इनमें स्वचालित दरवाजे, आरामदायक सीटें, डिजिटल सूचना प्रणाली, सीसीटीवी निगरानी और स्मार्ट टिकटिंग जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। दिल्ली के सराय काले खां स्टेशन को एक मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया गया है, जहां से मेट्रो, बस और रेलवे सेवाओं का सहज समन्वय संभव होगा। 

दिल्ली-मेरठ मार्ग पर यातायात दबाव कम होने की उम्मीद

इस कॉरिडोर के शुरू होने से दिल्ली-मेरठ मार्ग पर यातायात दबाव कम होने की उम्मीद है। साथ ही, एनसीआर क्षेत्र में व्यापार, रोजगार और रियल एस्टेट गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। यह परियोजना न केवल समय की बचत करेगी बल्कि सुरक्षित, तेज और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन का नया विकल्प भी प्रदान करेगी। रास्ते में गाजियाबाद, मोदीनगर और मेरठ साउथ जैसे प्रमुख स्टेशन भी शामिल हैं, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।


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