उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की उम्मीद तेज, सीतारमण से मिले सुरेश खन्ना
राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जुड़े इन मुद्दों को संसद सत्र से पहले तैयार होने वाले प्री-बजट प्रस्तावों में विचार के लिए रख लिया गया है।

UP News : पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए राहत और उम्मीद से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मेरठ में एम्स (AIIMS) की स्थापना और हाईकोर्ट बेंच की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर केंद्र सरकार के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखा है। प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के दौरान आग्रह किया कि इन प्रस्तावों को आगामी केंद्रीय बजट में शामिल कर प्राथमिकता से विचार किया जाए। राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जुड़े इन मुद्दों को संसद सत्र से पहले तैयार होने वाले प्री-बजट प्रस्तावों में विचार के लिए रख लिया गया है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से केंद्र को भेजे गए प्रस्ताव में साफ कहा गया है कि बेहतर इलाज के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मरीजों को अक्सर दिल्ली का रुख करना पड़ता है। ऐसे में अगर मेरठ में एम्स की स्थापना होती है, तो इसका लाभ सिर्फ मेरठ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, बागपत समेत पूरे पश्चिमी यूपी को बड़ी स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी।
इलाज के लिए दिल्ली की मजबूरी खत्म करने की दिशा में कदम
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े मेडिकल संस्थानों की कमी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकार का कहना है कि अगर मेरठ जैसे प्रमुख शहर में एम्स की स्थापना होती है, तो पश्चिमी यूपी को विशेषज्ञ डॉक्टरों, सुपर-स्पेशियलिटी इलाज और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का मजबूत केंद्र मिलेगा। इससे मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली-दौड़ से राहत मिलेगी और उनका समय व खर्च दोनों बचेगा। वहीं, हाईकोर्ट बेंच के मुद्दे पर भी यूपी सरकार ने व्यावहारिक आधार सामने रखे हैं। प्रस्ताव में तर्क दिया गया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की दूरी के चलते पश्चिमी जिलों के वादी-अपीलकर्ताओं को न्याय के लिए लंबी यात्राएं करनी पड़ती हैं, जिससे पैसे के साथ-साथ कामकाज और संसाधनों का भी बड़ा नुकसान होता है। इसी वजह से मेरठ में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने या लखनऊ खंडपीठ के माध्यम से मेरठ सहित पश्चिमी यूपी को संबद्ध करने जैसे विकल्पों पर गंभीरता से फैसला लेने की मांग उठाई गई है।
अन्य परियोजनाओं पर भी सहयोग की अपेक्षा - डॉ. वाजपेयी
डॉ. वाजपेयी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्र से केवल स्वास्थ्य और न्याय के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि मेरठ और पश्चिमी यूपी से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं के लिए भी सहयोग मांगा है। उन्होंने कहा कि इस बार मेरठ से जुड़े प्रस्तावों को लेकर राज्य सरकार ने केंद्र से बजट में विचार का औपचारिक अनुरोध किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर है। राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनभावनाओं को केंद्र तक पहुंचाया गया है। उनके अनुसार, एम्स और हाईकोर्ट बेंच इस क्षेत्र की बुनियादी जरूरतें हैं और उम्मीद है कि आगामी बजट में इन पर सकारात्मक निर्णय सामने आएगा। UP News
UP News : पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए राहत और उम्मीद से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मेरठ में एम्स (AIIMS) की स्थापना और हाईकोर्ट बेंच की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर केंद्र सरकार के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखा है। प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के दौरान आग्रह किया कि इन प्रस्तावों को आगामी केंद्रीय बजट में शामिल कर प्राथमिकता से विचार किया जाए। राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जुड़े इन मुद्दों को संसद सत्र से पहले तैयार होने वाले प्री-बजट प्रस्तावों में विचार के लिए रख लिया गया है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से केंद्र को भेजे गए प्रस्ताव में साफ कहा गया है कि बेहतर इलाज के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मरीजों को अक्सर दिल्ली का रुख करना पड़ता है। ऐसे में अगर मेरठ में एम्स की स्थापना होती है, तो इसका लाभ सिर्फ मेरठ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, बागपत समेत पूरे पश्चिमी यूपी को बड़ी स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी।
इलाज के लिए दिल्ली की मजबूरी खत्म करने की दिशा में कदम
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े मेडिकल संस्थानों की कमी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकार का कहना है कि अगर मेरठ जैसे प्रमुख शहर में एम्स की स्थापना होती है, तो पश्चिमी यूपी को विशेषज्ञ डॉक्टरों, सुपर-स्पेशियलिटी इलाज और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का मजबूत केंद्र मिलेगा। इससे मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली-दौड़ से राहत मिलेगी और उनका समय व खर्च दोनों बचेगा। वहीं, हाईकोर्ट बेंच के मुद्दे पर भी यूपी सरकार ने व्यावहारिक आधार सामने रखे हैं। प्रस्ताव में तर्क दिया गया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की दूरी के चलते पश्चिमी जिलों के वादी-अपीलकर्ताओं को न्याय के लिए लंबी यात्राएं करनी पड़ती हैं, जिससे पैसे के साथ-साथ कामकाज और संसाधनों का भी बड़ा नुकसान होता है। इसी वजह से मेरठ में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने या लखनऊ खंडपीठ के माध्यम से मेरठ सहित पश्चिमी यूपी को संबद्ध करने जैसे विकल्पों पर गंभीरता से फैसला लेने की मांग उठाई गई है।
अन्य परियोजनाओं पर भी सहयोग की अपेक्षा - डॉ. वाजपेयी
डॉ. वाजपेयी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्र से केवल स्वास्थ्य और न्याय के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि मेरठ और पश्चिमी यूपी से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं के लिए भी सहयोग मांगा है। उन्होंने कहा कि इस बार मेरठ से जुड़े प्रस्तावों को लेकर राज्य सरकार ने केंद्र से बजट में विचार का औपचारिक अनुरोध किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर है। राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनभावनाओं को केंद्र तक पहुंचाया गया है। उनके अनुसार, एम्स और हाईकोर्ट बेंच इस क्षेत्र की बुनियादी जरूरतें हैं और उम्मीद है कि आगामी बजट में इन पर सकारात्मक निर्णय सामने आएगा। UP News












