कैफ़ी आज़मी टॉप-5 शायरी: वो पंक्तियाँ जो हमेशा के लिए अमर हो गईं

पढ़ाई के मोर्चे पर उन्होंने फ़ारसी और उर्दू की औपचारिक शिक्षा बीच में छोड़ दी, लेकिन साहित्य और विचार की यात्रा कभी नहीं रुकी। आगे चलकर 1943 में उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता ली और यही वैचारिक धारा उनकी शायरी में भी बार-बार झलकती रही।

कैफ़ी आज़मी
कैफ़ी आज़मी की शायरी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar07 Jan 2026 12:04 PM
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Kaifi Azmi : सैयद अख्तर हुसैन रिज़वी यानी अदबी दुनिया के कैफ़ी आज़मी (14 जनवरी 1919–10 मई 2002) उर्दू शायरी का वो चमकता नाम हैं, जिसने 20वीं सदी की कविता को सिर्फ़ मोहब्बत और एहसास तक सीमित नहीं रहने दिया। कैफ़ी ने अपने कलाम में समाज की असल धड़कन उतारी जहां एक तरफ़ प्रेम की नरमी है, तो दूसरी तरफ़ इंसाफ़ की पुकार, बराबरी का सवाल और आम आदमी के दर्द की बेबाक सच्चाई भी। यही वजह है कि उन्हें उन चुनिंदा शायरों में गिना जाता है, जिनकी नज़्में आज भी पढ़ी नहीं जातीं बल्कि महसूस भी की जाती हैं।

कम उम्र में चमकी प्रतिभा

कहानी का दिलचस्प मोड़ यह है कि कैफ़ी की प्रतिभा बहुत कम उम्र में सामने आ गई थी। 11 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पहली ग़ज़ल ‘इतना तो ज़िंदगी में किसी की खलल पड़े’ लिखी और जब इसे मशहूर गायिका बेगम अख्तर ने अपनी आवाज दी, तो यह ग़ज़ल लोगों की ज़ुबान पर चढ़कर अमर हो गई। पढ़ाई के मोर्चे पर उन्होंने फ़ारसी और उर्दू की औपचारिक शिक्षा बीच में छोड़ दी, लेकिन साहित्य और विचार की यात्रा कभी नहीं रुकी। आगे चलकर 1943 में उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता ली और यही वैचारिक धारा उनकी शायरी में भी बार-बार झलकती रही।

कैफ़ी आज़मी टॉप 5 शायरी 

1- रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई

तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई

2 - झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं

दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं

3 - बस्ती में अपनी हिन्दू मुसलमाँ जो बस गए

इंसाँ की शक्ल देखने को हम तरस गए

4 - तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो

क्या ग़म है जिस को छुपा रहे हो

5 - रोज़ बढ़ता हूँ जहाँ से आगे

फिर वहीं लौट के आ जाता हूँ



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उत्तर प्रदेश के टॉप-10 जिले जहां कटे सबसे कम नाम, देखें पूरी लिस्ट

अब बहस का केंद्र यही है कि किन 10 जिलों में कटौती सबसे कम रही जहां नाम बचा रहने की दर बेहतर दिखी और किन जिलों में सबसे ज्यादा नाम घटे, जिससे प्रशासन और राजनीतिक दलों की निगाहें सीधे उन इलाकों पर टिक गई हैं।

उत्तर प्रदेश में SIR ड्राफ्ट रोल ने बढ़ाई हलचल
उत्तर प्रदेश में SIR ड्राफ्ट रोल ने बढ़ाई हलचल
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar07 Jan 2026 11:36 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद 6 जनवरी 2026 को जारी हुई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने पूरे प्रदेश में सियासी से लेकर आम जनजीवन तक नई हलचल पैदा कर दी। सुबह से ही लोग वेबसाइट/कैंपों पर नाम तलाशते दिखे किसी के चेहरे पर राहत थी कि सूची में एंट्री कायम है, तो कई जगहों पर सवाल गूंजे कि नाम आखिर गायब क्यों हो गया। आयोग की इस कवायद के बाद जो आंकड़े सामने आए, उन्होंने चर्चा और तेज कर दी ड्राफ्ट सूची में प्रदेशभर में करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं की संख्या कम दिखाई दे रही है। अब बहस का केंद्र यही है कि किन 10 जिलों में कटौती सबसे कम रही जहां नाम बचा रहने की दर बेहतर दिखी और किन जिलों में सबसे ज्यादा नाम घटे, जिससे प्रशासन और राजनीतिक दलों की निगाहें सीधे उन इलाकों पर टिक गई हैं।

उत्तर प्रदेश के टॉप-10 जिले, जहां नाम कटे सबसे कम

उत्तर प्रदेश की SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के आंकड़े एक दिलचस्प तस्वीर सामने रखते हैं। पहले मतदाता बनाम अब मतदाता के मुकाबले में जिन 10 जिलों में कटौती प्रतिशत सबसे कम रहा, उनमें ललितपुर (9.96%) और हमीरपुर (10.78%) सबसे नीचे रहे, जबकि महोबा (12.42%), बांदा (13.00%) और चित्रकूट (13.67%) भी इसी लो-कट श्रेणी में दिखे। सूची में अमरोहा (13.22%), पीलीभीत (13.61%), अंबेडकरनगर (13.82%), गाजीपुर (13.85%) और झांसी (13.92%) जैसे जिले भी शामिल हैं जहां कटौती 14% से कम रही।

SIR ड्राफ्ट सूची में उत्तर प्रदेश के मतदाता अपना नाम कैसे देखें?

  1. चुनाव आयोग की वेबसाइट voters.eci.gov.in पर जाएं
  2. Download Electoral Roll पर क्लिक करें
  3. State में Uttar Pradesh चुनें
  4. Year of Revision में 2026 चुनें
  5. Roll Type में SIR DraftROLL-2026 चुनें
  6. District में अपना जिला भरें
  7. Assembly Constituency चुनें/भरें
  8. Language में भाषा चुनें
  9. Captcha भरें
  10. नीचे Polling Station की सूची आएगी अपने बूथ के सामने टिक करें
  11. Download Selected PDF पर क्लिक करके सूची डाउनलोड कर लें

उत्तर प्रदेश के वे 10 जिले, जहां कटे सबसे ज्यादा नाम

उत्तर प्रदेश की SIR Draft Roll-2026 के आंकड़ों में सबसे बड़ी कटौती राजधानी लखनऊ में दर्ज हुई है। यहां मतदाता संख्या 30.04% घटकर 39,94,535 से 27,94,397 पर आ गई यानी हर तीन में से लगभग एक नाम ड्राफ्ट रोल में कम दिखाई दे रहा है। ड्राफ्ट डेटा के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजहें चार श्रेणियों में सामने आती हैं: 1,28,242 नाम मृत्यु के आधार पर हटाए गए, 4,27,705 मतदाता Untraceable/Absent (यानी सत्यापन में नहीं मिले/अनुपस्थित) दर्ज हुए, 5,35,855 लोगों के अन्य स्थान पर शिफ्ट होने की एंट्री हुई, जबकि 49,046 नाम डुप्लीकेट पाए गए। लखनऊ के बाद जिन जिलों में कटौती की दर ज्यादा रही, उनमें उत्तर प्रदेश के कई बड़े और हाई-मूवमेंट इलाके शामिल हैं गाजियाबाद (28.83%), बलरामपुर (25.98%), कानपुर नगर (25.50%), मेरठ (24.65%), प्रयागराज (24.64%), गौतमबुद्ध नगर (23.98%), आगरा (23.25%), हापुड़ (22.30%) और शाहजहांपुर (21.76%)। कुल मिलाकर, ये आंकड़े संकेत देते हैं कि जहां तेज शहरीकरण, लगातार माइग्रेशन, पते बदलने की रफ्तार और डुप्लीकेट एंट्री ज्यादा रहती है, वहां SIR के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कटौती का प्रतिशत भी ऊंचा नजर आता है।

अगर उत्तर प्रदेश में आपका नाम ड्राफ्ट लिस्ट से गायब है तो क्या करें?

ड्राफ्ट सूची में नाम न दिखना अंतिम फैसला नहीं है यही तो दावा-आपत्ति का अहम चरण है, जहां आपकी बात सुनी जाती है और गलती सुधारी जा सकती है। उत्तर प्रदेश के मतदाताओं के पास 6 फरवरी 2026 तक का समय है कि वे ऑनलाइन या अपने क्षेत्र के BLO (बूथ लेवल अधिकारी) के जरिए आवेदन देकर नाम जुड़वाएं, गलतियां ठीक कराएं या पता/उम्र जैसी जानकारी अपडेट करा लें। याद रखें, ड्राफ्ट लिस्ट सिर्फ पहला संकेत है; असली काम इसके बाद शुरू होता है। इसलिए सबसे पहले सूची में अपना नाम जांचें, और अगर कहीं कमी दिखे तो समय रहते फॉर्म भरकर प्रक्रिया पूरी करें ताकि आपका वोटिंग अधिकार किसी तकनीकी वजह से छूट न जाए।

कौन सा फॉर्म कब भरें?

दावा-आपत्ति के दौर में चुनाव आयोग ने तीन की फॉर्म के जरिए प्रक्रिया को बिल्कुल साफ और आसान रखा है। अगर ड्राफ्ट सूची में आपका नाम गायब है और नया नाम जोड़ना है, तो Form-6 भरकर आवेदन करें। यदि सूची में किसी व्यक्ति का नाम मृत्यु के बाद भी दर्ज है या फिर गलत तरीके से जुड़ गया है, तो उसे हटाने के लिए Form-7 के जरिए डिलीशन रिक्वेस्ट दी जा सकती है। वहीं अगर आपका नाम मौजूद है लेकिन नाम की स्पेलिंग, उम्र, पता या फोटो जैसी जानकारी में गलती है, तो Form-8 के माध्यम से करेक्शन/अपडेट कराया जा सकता है।

फॉर्म कहां जमा करें?

  1. ऑनलाइन: voters.eci.gov.in
  2. ऐप: CINET App (जहां सुविधा उपलब्ध हो)
  3. ऑफलाइन: अपने क्षेत्र के BLO के पास फॉर्म देकर UP News

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“ढीले पड़े तो सियासी कीमत चुकानी होगी” SIR ड्राफ्ट लिस्ट पर योगी सख्त

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि उत्तर प्रदेश के जिन बूथों और इलाकों में पात्र मतदाताओं के नाम छूटे हैं, उन्हें बिना देर किए दावा-आपत्ति के जरिए जोड़वाया जाए, जबकि अपात्र नामों को नियमों के मुताबिक हटाने की कार्रवाई भी तेज की जाए।

SIR ड्राफ्ट लिस्ट पर CM योगी सख्त
SIR ड्राफ्ट लिस्ट पर CM योगी सख्त
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar07 Jan 2026 10:40 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश में SIR (Special Intensive Revision) की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रियों और विधायकों को सख्त लहजे में साफ संकेत दे दिया कि इस प्रक्रिया में जरा-सी ढिलाई भी सीधे उनकी राजनीतिक पकड़ पर भारी पड़ सकती है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि उत्तर प्रदेश के जिन बूथों और इलाकों में पात्र मतदाताओं के नाम छूटे हैं, उन्हें बिना देर किए दावा-आपत्ति के जरिए जोड़वाया जाए, जबकि अपात्र नामों को नियमों के मुताबिक हटाने की कार्रवाई भी तेज की जाए।

“अब ढिलाई नहीं चलेगी” योगी का साफ संदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रियों को साफ शब्दों में कहा कि यह वक्त फाइलों की औपचारिकता में उलझने का नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की जमीन पर उतरकर हर कदम की निगरानी करने का है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी मंत्री अपने-अपने प्रभार वाले जिलों में कैंप करें, स्थानीय प्रशासन और चुनावी अमले के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी कीमत पर पात्र मतदाता का नाम सूची से न कटे।

उत्तर प्रदेश में 2.89 करोड़ नाम कटने की चर्चा

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर उत्तर प्रदेश में यह चर्चा तेज है कि लगभग 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम कटे/हटे दिख रहे हैं। सबसे ज्यादा असर जिन जिलों में बताया जा रहा है, उनमें लखनऊ, गाजियाबाद, प्रयागराज, कानपुर, आगरा, बरेली, गोरखपुर, मेरठ, सीतापुर और जौनपुर जैसे प्रमुख जिले शामिल हैं। राजनीतिक गलियारों में यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि इन कटे नामों में कई परंपरागत वोट-बेस से जुड़े मतदाता भी हो सकते हैं, इसलिए सरकार और संगठन दोनों स्तर पर अलर्ट मोड में हैं।

पहले भी दे चुके हैं संकेत

यह पहली बार नहीं है जब SIR को लेकर मुख्यमंत्री ने सख्ती दिखाई हो। इससे पहले भी वह सार्वजनिक तौर पर यह बात कह चुके हैं कि कटे नामों में बड़ी संख्या उन मतदाताओं की हो सकती है जो परंपरागत रूप से पार्टी के समर्थन में माने जाते हैं। इसी वजह से अब निर्देश दिए गए हैं कि विधायक, मंत्री और संगठन के पदाधिकारी सब मिलकर SIR अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएं।

नाम नहीं दिखा तो क्या करें?

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा के अनुसार, SIR के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में जिन लोगों का नाम नहीं दिख रहा है या जो पहली बार मतदाता बनना चाहते हैं उनके लिए तय समय-सीमा के भीतर आवेदन का विकल्प खुला है। उन्होंने बताया कि नाम जोड़ने के लिए मतदाता जरूरी दस्तावेजों के साथ फॉर्म-6 भर सकते हैं, जबकि नाम, उम्र या पते में गलती होने पर सुधार प्रक्रिया के तहत आवेदन देकर विवरण ठीक कराया जा सकता है। इसके अलावा, मतदाता अपने क्षेत्र के चुनाव कार्यालय में या उपलब्ध ऑनलाइन माध्यम से दावा-आपत्ति भी दर्ज करा सकते हैं। UP News

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