इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार ने यह फैसला किया है कि होटल तथा रेस्टोरेंट आदि के कर्मचारियों की नियमित रूप से टीबी की जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी। इस फैसले को लागू करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला किया है। उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला यह है कि उत्तर प्रदेश को जल्दी ही टीबी यानि कि Tuberculosis की बीमारी से मुक्त प्रदेश बना दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश को टीबी मुक्त प्रदेश बनाने के लिए एक के बाद एक महत्वपूर्ण फैसले लिए जा रहे हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार ने यह फैसला किया है कि होटल तथा रेस्टोरेंट आदि के कर्मचारियों की नियमित रूप से टीबी की जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी। इस फैसले को लागू करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
उत्तर प्रदेश को टीबी मुक्त प्रदेश बनाने का फैसला सरकार की एक महत्वपूर्ण बैठक में लिया गया। यह बैठक उत्तर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में बड़ा फैसला लिया गया कि उत्तर प्रदेश के सभी शहरी क्षेत्रों में होटल एवं हास्पिटैलिटी सेक्टर के कर्मचारियों की नियमित टीबी जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी। साथ ही सरकारी एवं निजी मेडिकल कालेजों के विद्यार्थियों और जिला अस्पतालों व मेडिकल कालेजों में कार्यरत रसोई कर्मचारियों की भी अनिवार्य जांच कराने पर भी सहमति बनी। इससे संक्रमण के किसी भी जोखिम को प्रारंभिक स्तर पर नियंत्रित किया जा सकेगा। इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने राज्य एवं जिला टीबी फोरम की प्रत्येक माह बैठकें करने और जिला टीबी फोरम की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से पोर्टल पर अपलोड करने के भी निर्देश दिए। सचिवालय में आयोजित बैठक में अपर मुख्य सचिव ने कहा कि टीबी उन्मूलन का लक्ष्य तभी प्राप्त होगा, जब सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य करेंगे। यह केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। निर्देश दिए कि संभावित टीबी रोगियों की समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए और चिह्नित रोगियों को गुणवत्तापूर्ण उपचार बिना विलंब के उपलब्ध कराया जाए।
इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से हेल्थटेक कॉन्क्लेव भी आयोजित किया गया है। रविवार को उत्तर प्रदेश के पहले हेल्थटेक कॉन्क्लेव का उद्घाटन करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री येागी आदित्यनाथ ने प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि पिछले पौने नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य क्षेत्र में वह परिवर्तन किया है, जिसकी कल्पना पहले संभव नहीं थी. साल 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर कुल 40 मेडिकल कॉलेज थे. आज प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज पूरी तरह क्रियाशील हैं। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त दो एम्स, 100 से अधिक जिला अस्पताल, सैकड़ों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स की एक मजबूत श्रृंखला खड़ी की गई है, जिससे दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं। सरकार का उद्देश्य केवल भवन खड़े करना नहीं था, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था तैयार करना था, जिसमें अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति को भी सम्मानजनक व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सुधारों के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। संस्थागत प्रसव अब राष्ट्रीय औसत के समकक्ष पहुंच चुका है। कई जनपद ऐसे हैं, जहां ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश वेक्टर जनित रोगों की चपेट में रहता था। मानसून आते ही इंसेफेलाइटिस, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया व कालाजार जैसी बीमारियां विकराल रूप ले लेती थीं। इंसेफेलाइटिस के कारण पिछले 40 वर्षों में उत्तर प्रदेश में लगभग 50 हजार मासूम बच्चों की मृत्यु हुई थी.साल 2017 में सरकार ने इसके खिलाफ निर्णायक अभियान शुरू किया। समय पर पहचान, स्थानीय स्तर पर इलाज और जवाबदेही तय करने की व्यवस्था लागू की गई। मात्र दो वर्षों के भीतर इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया और आज उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से ज़ीरो डेथ दर्ज की जा रही है. डेंगू, मलेरिया, कालाजार और चिकनगुनिया पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है। UP News