उत्तर प्रदेश में युवक ने शादी की, सुहागरात मनाई और हुआ फुर्र

निशा परवीन का कहना है कि उनका निकाह 20 दिसंबर 2025 को हुआ था। शादी के तीसरे दिन ही तस्लीम महिला को किराए के मकान पर छोड़कर फरार हो गए। बाद में पता चला कि तस्लीम पहले से ही तीन शादीशुदा थे और यह उनका चौथा विवाह था, जिसे उन्होंने छुपाया।

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सुहागसेज पर दुल्हन
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar19 Jan 2026 05:24 PM
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UP News : मुरादाबाद के मझोला थाना क्षेत्र में एक महिला ने शादी के सिर्फ तीन दिन बाद ही अपने पति से तीन तलाक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करने का दावा किया है। निशा परवीन ने आरोप लगाया कि उसके पति मोहम्मद तस्लीम उससे शादी करने के बाद अचानक गायब हो गए और उनका आर्थिक या भावनात्मक समर्थन नहीं किया।

घटना का विवरण

निशा परवीन का कहना है कि उनका निकाह 20 दिसंबर 2025 को हुआ था। शादी के तीसरे दिन ही तस्लीम महिला को किराए के मकान पर छोड़कर फरार हो गए। बाद में पता चला कि तस्लीम पहले से ही तीन शादीशुदा थे और यह उनका चौथा विवाह था, जिसे उन्होंने छुपाया। उसके अनुसार, तस्लीम की अन्य दो पत्नियां, हिना और चांदनी भी उसके साथ गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियाँ देती थीं। पति ने महिला का फोन नंबर ब्लॉक कर दिया और इंस्टाग्राम कॉल पर भी गालियाँ और धमकियाँ दी। वहीं, फोन पर तीन बार तलाक कहकर उन्होंने रिश्ता खत्म कर दिया।

शिकायत और प्रशासनिक कार्रवाई

पीड़िता ने मझोला चौकी, थाने और मुख्यमंत्री पोर्टल तक कई बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अंतत: एसएसपी के निर्देश पर मझोला थाना ने तस्लीम और उनकी दो पत्नियों के खिलाफ प्रताड़ना, धमकी और तीन तलाक के आरोपों में रिपोर्ट दर्ज की। मामले की जांच अब पुलिस कर रही है।

कानूनी और सामाजिक पहलू

यह मामला महिलाओं के खिलाफ धोखाधड़ी और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर उदाहरण के रूप में सामने आया है। शादी के तुरंत बाद तलाक और उत्पीड़न से पीड़िता का जीवन प्रभावित हुआ है। एसएसपी के हस्तक्षेप से रिपोर्ट दर्ज कराना संभव हुआ, जो प्रशासनिक जवाबदेही का संकेत है। महिलाओं को ऐसे मामलों में कानूनी सलाह लेने और पुलिस के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने का अधिकार है।

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उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला, बनेगा टीबी मुक्त प्रदेश

इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार ने यह फैसला किया है कि होटल तथा रेस्टोरेंट आदि के कर्मचारियों की नियमित रूप से टीबी की जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी। इस फैसले को लागू करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री येागी आदित्यनाथ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री येागी आदित्यनाथ
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar19 Jan 2026 05:04 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला किया है। उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला यह है कि उत्तर प्रदेश को जल्दी ही टीबी यानि कि Tuberculosis की बीमारी से मुक्त प्रदेश बना दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश को टीबी मुक्त प्रदेश बनाने के लिए एक के बाद एक महत्वपूर्ण फैसले लिए जा रहे हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार ने यह फैसला किया है कि होटल तथा रेस्टोरेंट आदि के कर्मचारियों की नियमित रूप से टीबी की जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी। इस फैसले को लागू करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार की बैठक में लिया गया बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश को टीबी मुक्त प्रदेश बनाने का फैसला सरकार की एक महत्वपूर्ण बैठक में लिया गया। यह बैठक उत्तर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में बड़ा फैसला लिया गया कि उत्तर प्रदेश के सभी शहरी क्षेत्रों में होटल एवं हास्पिटैलिटी सेक्टर के कर्मचारियों की नियमित टीबी जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी। साथ ही सरकारी एवं निजी मेडिकल कालेजों के विद्यार्थियों और जिला अस्पतालों व मेडिकल कालेजों में कार्यरत रसोई कर्मचारियों की भी अनिवार्य जांच कराने पर भी सहमति बनी। इससे संक्रमण के किसी भी जोखिम को प्रारंभिक स्तर पर नियंत्रित किया जा सकेगा। इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने राज्य एवं जिला टीबी फोरम की प्रत्येक माह बैठकें करने और जिला टीबी फोरम की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से पोर्टल पर अपलोड करने के भी निर्देश दिए। सचिवालय में आयोजित बैठक में अपर मुख्य सचिव ने कहा कि टीबी उन्मूलन का लक्ष्य तभी प्राप्त होगा, जब सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य करेंगे। यह केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। निर्देश दिए कि संभावित टीबी रोगियों की समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए और चिह्नित रोगियों को गुणवत्तापूर्ण उपचार बिना विलंब के उपलब्ध कराया जाए।

उत्तर प्रदेश में बन चुके हैं 81 मेडिकल कॉलिज

इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार  की तरफ से हेल्थटेक कॉन्क्लेव भी आयोजित किया गया है। रविवार को उत्तर प्रदेश के पहले हेल्थटेक कॉन्क्लेव का उद्घाटन करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री येागी आदित्यनाथ ने प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि पिछले पौने नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य क्षेत्र में वह परिवर्तन किया है, जिसकी कल्पना पहले संभव नहीं थी. साल 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर कुल 40 मेडिकल कॉलेज थे. आज प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज पूरी तरह क्रियाशील हैं। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त दो एम्स, 100 से अधिक जिला अस्पताल, सैकड़ों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स की एक मजबूत श्रृंखला खड़ी की गई है, जिससे दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं। सरकार का उद्देश्य केवल भवन खड़े करना नहीं था, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था तैयार करना था, जिसमें अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति को भी सम्मानजनक व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।

टीबी को हराने में उत्तर प्रदेश सबसे आगे

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सुधारों के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। संस्थागत प्रसव अब राष्ट्रीय औसत के समकक्ष पहुंच चुका है। कई जनपद ऐसे हैं, जहां ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया है।  उन्होंने कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश वेक्टर जनित रोगों की चपेट में रहता था। मानसून आते ही इंसेफेलाइटिस, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया व कालाजार जैसी बीमारियां विकराल रूप ले लेती थीं। इंसेफेलाइटिस के कारण पिछले 40 वर्षों में उत्तर प्रदेश में लगभग 50 हजार मासूम बच्चों की मृत्यु हुई थी.साल 2017 में सरकार ने इसके खिलाफ निर्णायक अभियान शुरू किया। समय पर पहचान, स्थानीय स्तर पर इलाज और जवाबदेही तय करने की व्यवस्था लागू की गई। मात्र दो वर्षों के भीतर इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया और आज उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से ज़ीरो डेथ दर्ज की जा रही है. डेंगू, मलेरिया, कालाजार और चिकनगुनिया पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है। UP News

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कुलदीप सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, 10 साल की सजा सस्पेंड करने से इनकार

सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली हाईकोर्ट के पिछले आॅर्डर पर रोक लगाने के कुछ ही हफ्ते बाद यह निर्णय आया था। उस आदेश में 2017 के रेप केस में सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को अस्थायी तौर पर सस्पेंड किया गया था।

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कुलदीप सेंगर
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar19 Jan 2026 04:19 PM
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UP News : दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की कस्टडी में मौत से जुड़े मामले में भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने सेंगर की सजा सस्पेंड करने और जमानत देने की याचिका खारिज कर दी। जस्टिस रविंदर डुडेजा की अदालत ने कहा कि कुलदीप सेंगर ने कुल 10 साल की सजा में लगभग 7.5 साल कस्टडी में बिताए हैं। साथ ही, मामले में सजा के खिलाफ अपील में हुई देरी का एक हिस्सा सेंगर की अपनी अर्जी दाखिल करने की वजह से हुआ। इसलिए, अदालत ने सेंगर की बेल और सजा सस्पेंड करने की याचिका को खारिज कर दिया।

पीड़िता के पिता की कस्टडी में मौत के बाद ही सेंगर को हुई थी सजा

सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली हाईकोर्ट के पिछले आॅर्डर पर रोक लगाने के कुछ ही हफ्ते बाद यह निर्णय आया था। उस आदेश में 2017 के रेप केस में सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को अस्थायी तौर पर सस्पेंड किया गया था। 9 अप्रैल 2018 को, उन्नाव रेप पीड़िता के पिता कस्टडी में मृत पाए गए थे, जिन्हें सेंगर के कथित कहने पर गिरफ्तार किया गया था। मार्च 2020 में, दिल्ली की अदालत ने सेंगर और अन्य आरोपियों को उनके पिता की मौत के लिए दोषी ठहराते हुए 10 साल की जेल की सजा सुनाई। सेंगर 13 अप्रैल 2018 से जेल में हैं और सजा काट रहे हैं।

कोर्ट का दृष्टिकोण

अदालत ने कहा कि सजा के बाद कोई ऐसा नया तथ्य सामने नहीं आया है, जो अपीलकर्ता के पक्ष में अंतरिम राहत देने के लिए पर्याप्त हो। सेंगर के क्रिमिनल रिकॉर्ड और जुर्म की गंभीरता को देखते हुए, कोर्ट ने फैसला किया कि वर्तमान स्थिति में सजा सस्पेंड करना उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अपील को मेरिट पर जल्द सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। जस्टिस डुडेजा ने जोर देकर कहा कि सजा सस्पेंड करने की बजाय अंतिम अपील पर फैसला करना ही सही तरीका है। जून 2024 में भी दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर की इसी तरह की याचिका खारिज कर दी थी। उस समय अदालत ने कहा था कि अपराध की गंभीरता, दोषी का रिकॉर्ड और न्याय प्रणाली पर असर को ध्यान में रखते हुए, सेंगर की सजा सस्पेंड करने का हकदार नहीं हैं।

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