सांसद बनते ही बदली आर्थिक तस्वीर, ADR रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश सबसे आगे
हैरानी की बात यह है कि प्रतिशत के लिहाज से इन यूपी सांसदों की संपत्ति-वृद्धि ने बनारस से सांसद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लखनऊ से सांसद व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मथुरा की सांसद हेमा मालिनी जैसे बड़े और चर्चित चेहरों को भी पीछे छोड़ दिया।

UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत में अक्सर यह सवाल उठता रहा है कि चुनाव जीतकर दिल्ली पहुंचते ही जनप्रतिनिधियों की आर्थिक तस्वीर आखिर कितनी बदल जाती है? अब इस बहस को एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ताजा रिपोर्ट ने ठोस आंकड़ों के साथ और तेज कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक 2014 से 2024 के बीच देशभर के 102 दोबारा निर्वाचित सांसदों के शपथपत्रों का विश्लेषण किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश के 15 सांसद भी शामिल हैं। इसी सूची में यूपी के फर्रुखाबाद से भाजपा सांसद मुकेश राजपूत की संपत्ति-वृद्धि सबसे ज्यादा चर्चा में है। ADR के अनुसार, 2014 में उनके हलफनामे में कुल संपत्ति 7.25 लाख रुपये दर्ज थी, जो 2024 में बढ़कर 9.36 करोड़ रुपये (₹9,36,80,840) तक पहुंच गई।
UP के टॉप-5 में कौन-कौन?
ADR की रिपोर्ट ने उत्तर प्रदेश के उन सांसदों की एक दिलचस्प टॉप लिस्ट सामने रख दी है, जिनकी संपत्ति में बीते 10 वर्षों में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई। इस रेस में डुमरियागंज से जगदंबिका पाल, गोंडा से कृष्णवर्धन सिंह और अलीगढ़ से सतीश गौतम जैसे नाम टॉप-5 में बताए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रतिशत के लिहाज से इन यूपी सांसदों की संपत्ति-वृद्धि ने बनारस से सांसद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लखनऊ से सांसद व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मथुरा की सांसद हेमा मालिनी जैसे बड़े और चर्चित चेहरों को भी पीछे छोड़ दिया। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ लोकसभा सीट से लगातार तीसरी बार संसद पहुंचे सतीश गौतम की संपत्ति में भी बड़ा उछाल दर्ज हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार 2014 में उनकी कुल संपत्ति ₹5.21 करोड़ (₹5,21,80,006) थी, जो 2024 में बढ़कर ₹16.06 करोड़ (₹16,06,24,125) हो गई। यानी एक दशक में ₹10.84 करोड़ से अधिक का इजाफा, और प्रतिशत के हिसाब से 208% की छलांग। रिपोर्ट में यह भी जोड़ा गया कि औसतन गणना करें तो यह बढ़ोतरी 10 वर्षों में प्रतिदिन करीब ₹29,710 के बराबर बैठती है।
UP के अन्य चर्चित सांसदों का प्रतिशत (जैसा रिपोर्ट/आंकड़ों में दर्ज)
ADR के आंकड़ों में उत्तर प्रदेश के कई बड़े और चर्चित चेहरों के सामने संपत्ति-वृद्धि का प्रतिशत भी दर्ज है, जो प्रदेश की राजनीति में “हलफनामे बनाम हकीकत” वाली बहस को और तेज करता है। रिपोर्ट के अनुसार बनारस से सांसद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संपत्ति में 82%, जबकि लखनऊ से सांसद व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की संपत्ति में 152% की बढ़ोतरी बताई गई है। मथुरा की सांसद हेमा मालिनी और मिर्जापुर की अनुप्रिया पटेल के मामले में यह वृद्धि 57-57% दर्ज हुई। वहीं उन्नाव के स्वामी सच्चिदानंद के सामने 109%, बुलंदशहर के डॉ. भोला सिंह के नाम 186%, और गौतमबुद्ध नगर के डॉ. महेश शर्मा के खाते में 77% की बढ़ोतरी दर्ज बताई गई है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाले आंकड़े गोंडा के कृष्णवर्धन सिंह (396%) और डुमरियागंज के जगदंबिका पाल (986%) के सामने हैं, जबकि महाराजगंज के पंकज चौधरी की वृद्धि 118% और कन्नौज की डिम्पल यादव की संपत्ति-वृद्धि 50% बताई गई। कुल मिलाकर, यह सूची दिखाती है कि उत्तर प्रदेश में कई सांसदों की आर्थिक प्रोफाइल बीते एक दशक में तेज़ी से बदली है और यही वजह है कि ADR की रिपोर्ट प्रदेश की सियासी चर्चाओं में फिर से केंद्र में आ गई है।
क्यों अहम है यह रिपोर्ट?
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और निर्णायक राज्य में, जहां चुनावी राजनीति का सीधा असर रोजगार, सड़कों की हालत, बिजली-पानी, शिक्षा और कानून-व्यवस्था पर पड़ता है, वहां जनप्रतिनिधियों की संपत्ति के आंकड़े महज आंकड़े नहीं रहते वे जनता के सामने पारदर्शिता और जवाबदेही का आईना बन जाते हैं। इसी वजह से ADR की यह रिपोर्ट खास मानी जा रही है। यह रिपोर्ट सांसदों के शपथपत्रों में दर्ज संपत्ति की 2014 से 2024 तक की तुलना करके बताती है कि दस वर्षों में उनकी आर्थिक स्थिति में कितना बदलाव आया है। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत में अक्सर यह सवाल उठता रहा है कि चुनाव जीतकर दिल्ली पहुंचते ही जनप्रतिनिधियों की आर्थिक तस्वीर आखिर कितनी बदल जाती है? अब इस बहस को एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ताजा रिपोर्ट ने ठोस आंकड़ों के साथ और तेज कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक 2014 से 2024 के बीच देशभर के 102 दोबारा निर्वाचित सांसदों के शपथपत्रों का विश्लेषण किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश के 15 सांसद भी शामिल हैं। इसी सूची में यूपी के फर्रुखाबाद से भाजपा सांसद मुकेश राजपूत की संपत्ति-वृद्धि सबसे ज्यादा चर्चा में है। ADR के अनुसार, 2014 में उनके हलफनामे में कुल संपत्ति 7.25 लाख रुपये दर्ज थी, जो 2024 में बढ़कर 9.36 करोड़ रुपये (₹9,36,80,840) तक पहुंच गई।
UP के टॉप-5 में कौन-कौन?
ADR की रिपोर्ट ने उत्तर प्रदेश के उन सांसदों की एक दिलचस्प टॉप लिस्ट सामने रख दी है, जिनकी संपत्ति में बीते 10 वर्षों में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई। इस रेस में डुमरियागंज से जगदंबिका पाल, गोंडा से कृष्णवर्धन सिंह और अलीगढ़ से सतीश गौतम जैसे नाम टॉप-5 में बताए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रतिशत के लिहाज से इन यूपी सांसदों की संपत्ति-वृद्धि ने बनारस से सांसद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लखनऊ से सांसद व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मथुरा की सांसद हेमा मालिनी जैसे बड़े और चर्चित चेहरों को भी पीछे छोड़ दिया। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ लोकसभा सीट से लगातार तीसरी बार संसद पहुंचे सतीश गौतम की संपत्ति में भी बड़ा उछाल दर्ज हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार 2014 में उनकी कुल संपत्ति ₹5.21 करोड़ (₹5,21,80,006) थी, जो 2024 में बढ़कर ₹16.06 करोड़ (₹16,06,24,125) हो गई। यानी एक दशक में ₹10.84 करोड़ से अधिक का इजाफा, और प्रतिशत के हिसाब से 208% की छलांग। रिपोर्ट में यह भी जोड़ा गया कि औसतन गणना करें तो यह बढ़ोतरी 10 वर्षों में प्रतिदिन करीब ₹29,710 के बराबर बैठती है।
UP के अन्य चर्चित सांसदों का प्रतिशत (जैसा रिपोर्ट/आंकड़ों में दर्ज)
ADR के आंकड़ों में उत्तर प्रदेश के कई बड़े और चर्चित चेहरों के सामने संपत्ति-वृद्धि का प्रतिशत भी दर्ज है, जो प्रदेश की राजनीति में “हलफनामे बनाम हकीकत” वाली बहस को और तेज करता है। रिपोर्ट के अनुसार बनारस से सांसद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संपत्ति में 82%, जबकि लखनऊ से सांसद व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की संपत्ति में 152% की बढ़ोतरी बताई गई है। मथुरा की सांसद हेमा मालिनी और मिर्जापुर की अनुप्रिया पटेल के मामले में यह वृद्धि 57-57% दर्ज हुई। वहीं उन्नाव के स्वामी सच्चिदानंद के सामने 109%, बुलंदशहर के डॉ. भोला सिंह के नाम 186%, और गौतमबुद्ध नगर के डॉ. महेश शर्मा के खाते में 77% की बढ़ोतरी दर्ज बताई गई है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाले आंकड़े गोंडा के कृष्णवर्धन सिंह (396%) और डुमरियागंज के जगदंबिका पाल (986%) के सामने हैं, जबकि महाराजगंज के पंकज चौधरी की वृद्धि 118% और कन्नौज की डिम्पल यादव की संपत्ति-वृद्धि 50% बताई गई। कुल मिलाकर, यह सूची दिखाती है कि उत्तर प्रदेश में कई सांसदों की आर्थिक प्रोफाइल बीते एक दशक में तेज़ी से बदली है और यही वजह है कि ADR की रिपोर्ट प्रदेश की सियासी चर्चाओं में फिर से केंद्र में आ गई है।
क्यों अहम है यह रिपोर्ट?
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और निर्णायक राज्य में, जहां चुनावी राजनीति का सीधा असर रोजगार, सड़कों की हालत, बिजली-पानी, शिक्षा और कानून-व्यवस्था पर पड़ता है, वहां जनप्रतिनिधियों की संपत्ति के आंकड़े महज आंकड़े नहीं रहते वे जनता के सामने पारदर्शिता और जवाबदेही का आईना बन जाते हैं। इसी वजह से ADR की यह रिपोर्ट खास मानी जा रही है। यह रिपोर्ट सांसदों के शपथपत्रों में दर्ज संपत्ति की 2014 से 2024 तक की तुलना करके बताती है कि दस वर्षों में उनकी आर्थिक स्थिति में कितना बदलाव आया है। UP News












