सांसद बनते ही बदली आर्थिक तस्वीर, ADR रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश सबसे आगे

हैरानी की बात यह है कि प्रतिशत के लिहाज से इन यूपी सांसदों की संपत्ति-वृद्धि ने बनारस से सांसद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लखनऊ से सांसद व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मथुरा की सांसद हेमा मालिनी जैसे बड़े और चर्चित चेहरों को भी पीछे छोड़ दिया।

संसद पहुंचे तो बदली धन-दशा
संसद पहुंचे तो बदली धन-दशा
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar12 Jan 2026 10:10 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत में अक्सर यह सवाल उठता रहा है कि चुनाव जीतकर दिल्ली पहुंचते ही जनप्रतिनिधियों की आर्थिक तस्वीर आखिर कितनी बदल जाती है? अब इस बहस को एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ताजा रिपोर्ट ने ठोस आंकड़ों के साथ और तेज कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक 2014 से 2024 के बीच देशभर के 102 दोबारा निर्वाचित सांसदों के शपथपत्रों का विश्लेषण किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश के 15 सांसद भी शामिल हैं। इसी सूची में यूपी के फर्रुखाबाद से भाजपा सांसद मुकेश राजपूत की संपत्ति-वृद्धि सबसे ज्यादा चर्चा में है। ADR के अनुसार, 2014 में उनके हलफनामे में कुल संपत्ति 7.25 लाख रुपये दर्ज थी, जो 2024 में बढ़कर 9.36 करोड़ रुपये (₹9,36,80,840) तक पहुंच गई। 

UP के टॉप-5 में कौन-कौन?

ADR की रिपोर्ट ने उत्तर प्रदेश के उन सांसदों की एक दिलचस्प टॉप लिस्ट सामने रख दी है, जिनकी संपत्ति में बीते 10 वर्षों में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई। इस रेस में डुमरियागंज से जगदंबिका पाल, गोंडा से कृष्णवर्धन सिंह और अलीगढ़ से सतीश गौतम जैसे नाम टॉप-5 में बताए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रतिशत के लिहाज से इन यूपी सांसदों की संपत्ति-वृद्धि ने बनारस से सांसद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लखनऊ से सांसद व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मथुरा की सांसद हेमा मालिनी जैसे बड़े और चर्चित चेहरों को भी पीछे छोड़ दिया। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ लोकसभा सीट से लगातार तीसरी बार संसद पहुंचे सतीश गौतम की संपत्ति में भी बड़ा उछाल दर्ज हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार 2014 में उनकी कुल संपत्ति ₹5.21 करोड़ (₹5,21,80,006) थी, जो 2024 में बढ़कर ₹16.06 करोड़ (₹16,06,24,125) हो गई। यानी एक दशक में ₹10.84 करोड़ से अधिक का इजाफा, और प्रतिशत के हिसाब से 208% की छलांग। रिपोर्ट में यह भी जोड़ा गया कि औसतन गणना करें तो यह बढ़ोतरी 10 वर्षों में प्रतिदिन करीब ₹29,710 के बराबर बैठती है

UP के अन्य चर्चित सांसदों का प्रतिशत (जैसा रिपोर्ट/आंकड़ों में दर्ज)

ADR के आंकड़ों में उत्तर प्रदेश के कई बड़े और चर्चित चेहरों के सामने संपत्ति-वृद्धि का प्रतिशत भी दर्ज है, जो प्रदेश की राजनीति में “हलफनामे बनाम हकीकत” वाली बहस को और तेज करता है। रिपोर्ट के अनुसार बनारस से सांसद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संपत्ति में 82%, जबकि लखनऊ से सांसद व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की संपत्ति में 152% की बढ़ोतरी बताई गई है। मथुरा की सांसद हेमा मालिनी और मिर्जापुर की अनुप्रिया पटेल के मामले में यह वृद्धि 57-57% दर्ज हुई। वहीं उन्नाव के स्वामी सच्चिदानंद के सामने 109%, बुलंदशहर के डॉ. भोला सिंह के नाम 186%, और गौतमबुद्ध नगर के डॉ. महेश शर्मा के खाते में 77% की बढ़ोतरी दर्ज बताई गई है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाले आंकड़े गोंडा के कृष्णवर्धन सिंह (396%) और डुमरियागंज के जगदंबिका पाल (986%) के सामने हैं, जबकि महाराजगंज के पंकज चौधरी की वृद्धि 118% और कन्नौज की डिम्पल यादव की संपत्ति-वृद्धि 50% बताई गई। कुल मिलाकर, यह सूची दिखाती है कि उत्तर प्रदेश में कई सांसदों की आर्थिक प्रोफाइल बीते एक दशक में तेज़ी से बदली है और यही वजह है कि ADR की रिपोर्ट प्रदेश की सियासी चर्चाओं में फिर से केंद्र में आ गई है।

क्यों अहम है यह रिपोर्ट?

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और निर्णायक राज्य में, जहां चुनावी राजनीति का सीधा असर रोजगार, सड़कों की हालत, बिजली-पानी, शिक्षा और कानून-व्यवस्था पर पड़ता है, वहां जनप्रतिनिधियों की संपत्ति के आंकड़े महज आंकड़े नहीं रहते वे जनता के सामने पारदर्शिता और जवाबदेही का आईना बन जाते हैं। इसी वजह से ADR की यह रिपोर्ट खास मानी जा रही है। यह रिपोर्ट सांसदों के शपथपत्रों में दर्ज संपत्ति की 2014 से 2024 तक की तुलना करके बताती है कि दस वर्षों में उनकी आर्थिक स्थिति में कितना बदलाव आया है। UP News

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उत्तर प्रदेश बना किन्नर समाज का बड़ा केंद्र, देशभर से पहुंचे हजारों लोग

इस आयोजन की सबसे अलग बात यह है कि यहां सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि किन्नर समाज की पारंपरिक रिश्तेदारी परंपरा भी पूरी विधि-विधान से निभाई जाती है। किसी को मां तो किसी को बेटी, किसी को भाई तो किसी को बहन रिश्ते उसी तरह तय होते हैं जैसे किसी परिवार में रस्मों के साथ होते हैं।

अखिल भारतीय मंगल मूर्ति किन्नर कार्यक्रम
अखिल भारतीय मंगल मूर्ति किन्नर कार्यक्रम
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar12 Jan 2026 09:40 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश के कानपुर में इन दिनों माहौल बिल्कुल बदला-बदला सा है उत्तर परेश का औद्योगिक शहर कानपुर उत्सव और परंपरा के अनोखे रंग में नजर आ रहा है। कानपुर दक्षिण के अर्रा इलाके में चल रहे अखिल भारतीय मंगल मूर्ति किन्नर कार्यक्रम ने न सिर्फ शहर, बल्कि दूर-दराज तक लोगों का ध्यान खींच लिया है। इस आयोजन में कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक से हजारों की संख्या में किन्नर समाज के लोग पहुंचे हैं, जिससे पूरा क्षेत्र किसी बड़े धार्मिक मेले जैसा जीवंत हो उठा है। रंग-बिरंगे परिधान, पारंपरिक श्रृंगार और भजन-कीर्तन की गूंज के बीच आयोजन स्थल का दृश्य मानो शादी-ब्याह के भव्य समारोह की तरह दिखाई दे रहा है।

15 दिनों का है आयोजन

उत्तर प्रदेश के कानपुर में चल रहे इस आयोजन को लेकर काजल किन्नर बताती हैं कि कार्यक्रम करीब 15 दिनों तक जारी रहेगा, जिसमें 14 दिनों तक भव्य गंगा यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा शहर के अलग-अलग इलाकों से होकर गुजरेगी और इसमें 6 से 7 हजार लोगों की भागीदारी की संभावना जताई जा रही है। भजन-कीर्तन, पूजा-पाठ और मंगल प्रार्थनाओं के साथ निकलने वाली इस यात्रा का स्वागत भी खास अंदाज में हो रहा है कहीं फूलों की बारिश, तो कहीं हाथ जोड़कर सम्मान और आशीर्वाद लेने की कतारें दिख रही हैं। इस आयोजन की सबसे अलग बात यह है कि यहां सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि किन्नर समाज की पारंपरिक रिश्तेदारी परंपरा भी पूरी विधि-विधान से निभाई जाती है। किसी को मां तो किसी को बेटी, किसी को भाई तो किसी को बहन रिश्ते उसी तरह तय होते हैं जैसे किसी परिवार में रस्मों के साथ होते हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में हो रहा यह आयोजन किन्नर समाज के लिए सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक पहचान का भी बड़ा मंच बन गया है।

उत्तर प्रदेश से देश-विदेश की शांति के लिए दुआ

उत्तर प्रदेश के कानपुर में चल रहे इस आयोजन की खास बात यह है कि यहां आस्था की परंपराएं सिर्फ समाज तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि देश की सुख-शांति और अमन-चैन के लिए भी सामूहिक प्रार्थनाएं की जा रही हैं। आयोजकों का कहना है कि हालिया घटनाओं को देखते हुए पीड़ितों की आत्मिक शांति के लिए विशेष पूजा-अर्चना और मंगल कामनाओं का क्रम तय किया गया है। किन्नर समाज का मानना है कि एकजुट होकर की गई प्रार्थना समाज में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संदेश देती है।

हर साल बदलता है शहर

जानकारी के मुताबिक यह आयोजन हर वर्ष होता है, लेकिन आयोजन स्थल हर बार बदलता है। पिछली बार कार्यक्रम राजस्थान में हुआ था और इस बार उत्तर प्रदेश के कानपुर को इसकी मेजबानी मिली है। आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम में सहभागिता के लिए समाज के भीतर तय मानकों का पालन किया जा रहा है। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस-प्रशासन भी सक्रिय है और आयोजन स्थल के आसपास निगरानी बढ़ाई गई है। आयोजन स्थल पर हर तरफ रंग-बिरंगे परिधान, पारंपरिक श्रृंगार और भारी आभूषणों की चमक दिखाई दे रही है। पूरा दृश्य किसी शाही उत्सव जैसा लग रहा है। आयोजकों के अनुसार यह कार्यक्रम उनकी कुलदेवी को समर्पित है, जिसमें देवी-देवताओं की पूजा के जरिए भारतवर्ष की मंगल कामना की जाती है। UP News

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किसानों के अधिकारों के लिए टिकैत ने उठाया बड़ा कदम

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत गाजियाबाद पहुंचे और किसानों की महापंचायत में शामिल हुए। इस पंचायत का आयोजन वेव सिटी बिल्डर के खिलाफ किया गया था।

Indian Farmers Union Rakesh Tikait
भारतीय किसान यूनियन राकेश टिकैत (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar11 Jan 2026 10:09 PM
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UP News : पंचायत में टिकैत ने वेव सिटी के बिल्डर को भूमि अधिग्रहण से जुड़े मसलों को सुलझाने के लिए एक महीने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि अगर बिल्डर समय पर किसानों की मांगों को नहीं मानता है, तो किसान खुद ट्रैक्टर चला कर अपनी ताकत दिखाएंगे। टिकैत ने यह भी दावा किया कि वह खुद ट्रैक्टर चलाकर इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

पंचायत में किसानों को दिया भरोसा

राकेश टिकैत ने कहा कि किसान अपनी जमीन के अधिकार के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार हैं। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी आवाज़ दबने नहीं दी जाएगी और वे अपनी मांगों के लिए दृढ़ खड़े हैं।

अमेरिका की दादागिरी पर टिकैत का बयान

महापंचायत के दौरान, राकेश टिकैत ने अमेरिका के रवैये पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “हमारे देश में चाहे अंदरूनी विवाद कितने भी हों, लेकिन अगर कोई हमारे प्रधानमंत्री या भारत के खिलाफ कुछ कहेगा तो हम देश और प्रधानमंत्री के साथ मजबूती से खड़े हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अपने करीबी देशों जैसे चीन और नेपाल के साथ मजबूत संबंध बनाए रखने चाहिए।

राकेश टिकैत ने साफ कर दिया कि देश का किसान कमजोर नहीं है और ना ही नौजवान। उन्होंने कहा कि किसी भी बाहरी ताकत की दादागिरी को भारतीय किसान और युवा कभी सहन नहीं करेंगे। UP News

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